रैक में रखे 20 हजार और अगले ही पल मच गया हड़कंप! हरदोई में कानूनगो को रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने दबोचा
हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लखनऊ की एंटी करप्शन टीम ने सदर तहसील में तैनात एक कानूनगो को कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी कानूनगो की पहचान कमल किशोर सिंह के रूप में बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वह वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होने वाला था।
आरोप है कि कानूनगो ने एक व्यक्ति से नक्शा सही करने के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और निर्धारित योजना के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया।
नक्शा सही करने के बदले मांगी गई रकम
मामला हरदोई सदर तहसील से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता को अपने जमीन संबंधी नक्शे में सुधार कराना था। आरोप है कि इस काम को करने के बदले कानूनगो कमल किशोर सिंह ने कथित तौर पर 20 हजार रुपये की मांग की।
शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी एंटी करप्शन टीम को दी। शिकायत के आधार पर टीम ने मामले की जांच की और इसके बाद आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ने की योजना बनाई।
रिश्वत की रकम देने के लिए शिकायतकर्ता को तैयार किया गया। टीम ने पूरी कार्रवाई को अपनी निगरानी में रखा, ताकि आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा जा सके।
रिश्वत लेने के लिए लगाया था दलाल?
मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आरोप है कि कानूनगो ने रिश्वत की रकम लेने के लिए कथित तौर पर एक दलाल को माध्यम बनाया हुआ था।
यानी रिश्वत की रकम सीधे कानूनगो के हाथ में देने के बजाय एक अन्य व्यक्ति के जरिए लेने की व्यवस्था बताई जा रही थी। हालांकि, जिस समय कार्रवाई हुई, उस समय शिकायतकर्ता ने रकम सीधे कानूनगो की रैक में रख दी।
इसके बाद एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी कानूनगो को पकड़ लिया।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम और कथित दलाल की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
UP: हरदोई सदर तहसील से 2027 में रिटायर होने वाले कानूनगो कमल किशोर सिंह को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए लखनऊ एंटी करप्शन टीम ने पकड़ लिया है।
— Madan Mohan Soni (@madanmohansoni) August 15, 2026
कानूनगो साहब ने नक्शा सही करने के एवज में यह रिश्वत ली थी। रिश्वत लेने के लिए एक दलाल लगाया हुआ था लेकिन रिश्वत देने वाले ने पैसा सीधे… pic.twitter.com/ehTALQJCMK
एंटी करप्शन टीम ने ऐसे बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने कथित रिश्वतखोरी की पुष्टि के लिए कार्रवाई की तैयारी की। शिकायतकर्ता के जरिए आरोपी तक रिश्वत की रकम पहुंचाई गई।
टीम के अधिकारी आसपास मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए रखी।
जैसे ही रिश्वत की रकम कानूनगो के बताए स्थान पर रखी गई, टीम ने कार्रवाई कर दी। आरोपी को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में भी हड़कंप मच गया। कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
2027 में होना था रिटायरमेंट
आरोपी कानूनगो कमल किशोर सिंह को लेकर बताया जा रहा है कि वह वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होने वाला था।
ऐसे में रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके सरकारी कर्मचारी पर रिश्वत लेने के आरोप में हुई कार्रवाई ने मामले को और चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही होगी। केवल गिरफ्तारी को दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता।
जमीन के नक्शे से जुड़ा था मामला
बताया जा रहा है कि पूरा विवाद जमीन के नक्शे में सुधार से संबंधित था। राजस्व विभाग में जमीन से जुड़े नक्शे, सीमांकन और अभिलेखों से संबंधित काम आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
ऐसे मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता या रिश्वत की मांग सीधे आम नागरिकों को प्रभावित कर सकती है।
आरोप है कि इसी प्रक्रिया का लाभ उठाते हुए शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये की रकम मांगी गई।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के तहत गंभीर मामला बन सकता है।
तहसील में कार्रवाई से मचा हड़कंप
कानूनगो के खिलाफ एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई की खबर फैलते ही तहसील परिसर में हड़कंप की स्थिति बन गई।
सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ समय-समय पर एंटी करप्शन एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की जाती है। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी काम के बदले अवैध रकम मांगने वाले कर्मचारियों पर शिकंजा कसना होता है।
हरदोई सदर तहसील में हुई इस कार्रवाई के बाद अब यह भी चर्चा है कि जांच के दौरान कथित रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है या नहीं।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
कानूनगो की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। जांच एजेंसी आरोपी से पूछताछ करने के साथ-साथ रिश्वत की रकम, शिकायत और पूरे घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि रिश्वत की मांग किस परिस्थिति में की गई थी और कथित दलाल की इसमें क्या भूमिका थी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण?
सरकारी विभागों में आम नागरिक अपने जरूरी काम के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों पर निर्भर रहते हैं। जमीन, राजस्व, प्रमाणपत्र, नक्शा, सीमांकन और अन्य प्रशासनिक मामलों में लोगों को समय पर सरकारी सेवाएं मिलना बेहद जरूरी है।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी पर काम करने के बदले अवैध रकम मांगने का आरोप लगता है, तो इससे लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
एंटी करप्शन एजेंसियों की कार्रवाई ऐसे मामलों में शिकायतों की जांच और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई का माध्यम बनती है।
शिकायत मिलने पर कार्रवाई का दावा
इस मामले में भी बताया जा रहा है कि शिकायत के बाद लखनऊ एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई की। यह घटना इस बात की ओर भी ध्यान दिलाती है कि रिश्वत मांगने के मामलों में नागरिक संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों के सामने शिकायत कर सकते हैं।
हालांकि, किसी भी शिकायत पर कार्रवाई तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही की जाती है।
हरदोई सदर तहसील में कानूनगो कमल किशोर सिंह को कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि नक्शा सही कराने के बदले यह रकम मांगी गई थी।
मामले में कथित तौर पर एक दलाल की भूमिका की बात भी सामने आई है, लेकिन रिश्वत की रकम शिकायतकर्ता ने सीधे कानूनगो की रैक में रख दी, जिसके बाद लखनऊ एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई कर दी।
अब मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह स्पष्ट होगा कि पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन लोग शामिल थे और आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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