रक्षाबंधन पर होने वाला है ऐसा नजारा, जिसे देखकर रह जाएंगे हैरान! क्या ग्रहण बिगाड़ देगा त्योहार?
नई दिल्ली: इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व कई मायनों में बेहद खास रहने वाला है। एक ओर भाई-बहन के अटूट प्रेम का यह पावन त्योहार पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर इसी दिन आकाश में एक दुर्लभ खगोलीय घटना भी देखने को मिलेगी। 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण लगेगा और दुनिया के कई हिस्सों में लोग 'ब्लड मून' का अद्भुत नजारा देख सकेंगे। चंद्रमा इस दौरान गहरे लाल या तांबे जैसे रंग में दिखाई देगा, जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है।
हालांकि भारत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चंद्र ग्रहण का असर रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त पर पड़ेगा? क्या ग्रहण के कारण राखी बांधने का समय बदल जाएगा? क्या सूतक काल मान्य होगा? इन सभी सवालों के जवाब जानना हर श्रद्धालु के लिए जरूरी है।
क्या है ब्लड मून और क्यों दिखता है लाल चंद्रमा?
खगोल विज्ञान के अनुसार जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसी स्थिति को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। यदि चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया यानी अम्ब्रा (Umbra) से होकर गुजरता है, तो सूर्य का सीधा प्रकाश उस तक नहीं पहुंच पाता। पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिसके कारण चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देने लगता है। इसी दृश्य को आम भाषा में ब्लड मून कहा जाता है।
इस बार चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की केंद्रीय गहरी छाया से होकर गुजरेगा। इसी वजह से चंद्रमा का रंग गहरे कॉपर रेड जैसा दिखाई देगा और उसके किनारे हल्की चांदी जैसी चमक भी नजर आ सकती है।
लगभग साढ़े पांच घंटे तक रहेगा ग्रहण
इस बार चंद्र ग्रहण की कुल अवधि करीब 5 घंटे 39 मिनट बताई जा रही है। ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त की सुबह 6:32 बजे होगी और इसका समापन दोपहर लगभग 12:32 बजे के आसपास होगा।
हालांकि ग्रहण की यह अवधि लंबी जरूर है, लेकिन भारत में इसका प्रत्यक्ष दृश्य दिखाई नहीं देगा क्योंकि उस समय यहां दिन रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। इसी कारण धार्मिक दृष्टि से इसका प्रभाव भारत में मान्य नहीं माना जा रहा है।
क्या भारत में लगेगा सूतक काल?
हिंदू धर्म में ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व माना जाता है। सामान्यतः चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, मंदिरों में नियमित अनुष्ठान और कई शुभ कार्यों को टालने की परंपरा है।
लेकिन इस बार स्थिति अलग है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता, उसका सूतक काल भी वहां प्रभावी नहीं माना जाता। चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा।
इसका अर्थ यह है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।
क्या रक्षाबंधन पर राखी बांधने का समय बदलेगा?
रक्षाबंधन मनाने वाले करोड़ों लोगों के लिए सबसे राहत देने वाली बात यही है कि इस चंद्र ग्रहण का राखी बांधने के शुभ मुहूर्त पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 8:31 बजे से प्रारंभ होगी और 28 अगस्त की सुबह 9:18 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को उदया तिथि में पूर्णिमा रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्षाबंधन वाले दिन भद्रा भी नहीं रहेगी। भद्रा का समय एक दिन पहले समाप्त हो जाएगा। ऐसे में पूरे दिन श्रद्धालु बिना किसी बाधा के शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगे।
इसलिए ग्रहण को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांति या भ्रम में आने की आवश्यकता नहीं है।
किन देशों में दिखाई देगा यह दुर्लभ नजारा?
भारत में भले ही यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन दुनिया के कई देशों में लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना का आनंद ले सकेंगे।
इस चंद्र ग्रहण का दृश्य मुख्य रूप से—
पूरे यूरोप में,
अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में,
उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कई क्षेत्रों में,
पश्चिमी एशिया के कुछ भागों में
स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका के कई इलाकों में यह दृश्य सबसे अधिक आकर्षक होगा। वहां चंद्रमा के उदय होते ही पृथ्वी की छाया उस पर पड़ने लगेगी और कुछ समय बाद पूरा चंद्रमा गहरे लाल रंग में बदलता हुआ दिखाई देगा। इसे देखने के लिए खगोल प्रेमियों में अभी से काफी उत्साह है।
धार्मिक दृष्टि से क्या करें श्रद्धालु?
हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा और सूतक काल भी प्रभावी नहीं माना जाएगा, लेकिन कई श्रद्धालु ग्रहण के दिन विशेष स्नान, दान और भगवान का स्मरण करना शुभ मानते हैं।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण प्रत्यक्ष दिखाई न देने पर भी श्रद्धा और आस्था के अनुसार लोग दान-पुण्य कर सकते हैं। गरीबों को अन्न, वस्त्र या जरूरत की सामग्री का दान करना पुण्यदायक माना जाता है।
हालांकि किसी भी प्रकार के शुभ कार्य, पूजा-पाठ या रक्षाबंधन के आयोजन को रोकने की आवश्यकता नहीं है।
वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण में अंतर
वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक पूरी तरह प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कारण यह दृश्य बनता है।
वहीं धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। इसलिए लोग मंत्र जाप, स्नान, दान और ध्यान जैसे कार्य करते हैं। लेकिन जहां ग्रहण दिखाई ही नहीं देता, वहां अधिकांश धार्मिक परंपराओं में सूतक काल लागू नहीं माना जाता।
इसी कारण इस वर्ष रक्षाबंधन के पर्व पर किसी प्रकार का धार्मिक व्यवधान नहीं माना जा रहा है।
रक्षाबंधन का उत्साह रहेगा बरकरार
इस बार रक्षाबंधन पर ब्लड मून की चर्चा जरूर होगी, लेकिन भारत में रहने वाले लोगों के लिए त्योहार पूरी तरह सामान्य रहेगा। न तो राखी बांधने के समय में बदलाव होगा और न ही ग्रहण की वजह से किसी प्रकार की धार्मिक बाधा उत्पन्न होगी।
भाई-बहन पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रक्षाबंधन मना सकेंगे। साथ ही दुनिया के कई देशों में लोग लाल रंग के चंद्रमा यानी ब्लड मून का दुर्लभ दृश्य भी देखेंगे, जो खगोल विज्ञान के लिहाज से बेहद खास माना जाता है।
कुल मिलाकर, इस वर्ष रक्षाबंधन प्रेम, आस्था और विज्ञान—तीनों का अनोखा संगम लेकर आने वाला है। जहां एक ओर भाई-बहन का स्नेह पर्व पूरे देश में उल्लास के साथ मनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर दुनिया के कई हिस्सों में आसमान में लाल चंद्रमा का अद्भुत नजारा लोगों को प्रकृति की अद्वितीय खगोलीय सुंदरता का साक्षी बनाएगा। भारत में रहने वाले श्रद्धालुओं को ग्रहण को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि न तो सूतक काल प्रभावी रहेगा और न ही रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त पर इसका कोई नकारात्मक असर पड़ेगा।

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