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“गर्मी तो सबको लगती है… फिर 60+ उम्र वालों के लिए क्यों बन सकती है जानलेवा? रिसर्च ने किया खुलासा



नई दिल्ली। देश-दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ता तापमान अब केवल असहज मौसम की समस्या नहीं रह गया है। लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। खासकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए अत्यधिक गर्मी पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकती है। एक नई रिसर्च ने संकेत दिया है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की गर्मी से निपटने की क्षमता कमजोर पड़ती जाती है और बुजुर्गों में हीट स्ट्रेस का जोखिम काफी बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि युवा व्यक्ति का शरीर तापमान बढ़ने पर कई प्राकृतिक तरीकों से खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है। शरीर में रक्त का प्रवाह त्वचा की ओर बढ़ता है और पसीने के जरिए गर्मी बाहर निकलती है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इन प्रक्रियाओं की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि जो तापमान किसी युवा व्यक्ति के लिए केवल परेशानी पैदा करता है, वही बुजुर्ग व्यक्ति के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

गर्मी से लड़ने में शरीर क्यों पड़ जाता है कमजोर?

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई प्राकृतिक बदलाव होते हैं। त्वचा तक रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं की प्रतिक्रिया पहले जैसी प्रभावी नहीं रह सकती। इसी तरह पसीना आने की क्षमता भी कम हो सकती है। नतीजा यह होता है कि शरीर अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में कठिनाई महसूस करता है।

जब शरीर का तापमान लगातार बढ़ता रहता है तो हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। हृदय को त्वचा तक ज्यादा रक्त पहुंचाना पड़ता है ताकि शरीर कुछ गर्मी बाहर निकाल सके। यदि किसी बुजुर्ग व्यक्ति को पहले से हृदय, रक्तचाप या अन्य उम्र संबंधी समस्याएं हैं तो अत्यधिक गर्मी उनके लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती है।

यही वह स्थिति है जहां सामान्य गर्मी धीरे-धीरे हीट स्ट्रेस में बदल सकती है।

60 साल के बाद खतरा क्यों बढ़ जाता है?

नई रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को अत्यधिक गर्मी के दौरान विशेष सावधानी की जरूरत है। शोधकर्ताओं के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम उतनी तेजी से प्रतिक्रिया नहीं कर पाता, जितनी कम उम्र में करता है।

इसके अलावा बुजुर्गों में प्यास महसूस होने की क्षमता भी कम हो सकती है। इसका अर्थ यह है कि शरीर में पानी की कमी शुरू होने के बावजूद व्यक्ति को उतनी तेज प्यास महसूस नहीं होती। यदि वह पर्याप्त पानी नहीं पीता तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

डिहाइड्रेशन के कारण कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द और भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर इसका असर पड़ सकता है।

हीटवेव में हृदय पर बढ़ता है दबाव

अत्यधिक गर्मी के दौरान शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए रक्त संचार में बदलाव करता है। इससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के दौरान शरीर में पानी और नमक की मात्रा में बदलाव भी रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों में रक्तचाप बहुत कम हो सकता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्थिति अलग हो सकती है।

इसीलिए बुजुर्गों को गर्म मौसम में अपनी नियमित दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए। केवल गर्मी से बचने के लिए किसी दवा की मात्रा खुद से बदलना उचित नहीं है।

लू लगने के संकेतों को पहचानना जरूरी

हीट स्ट्रेस की शुरुआत में शरीर कई संकेत देता है। अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, बेचैनी और बहुत ज्यादा प्यास इसके संभावित संकेत हो सकते हैं।

अगर व्यक्ति गर्मी से बाहर आने के बाद भी लगातार कमजोर महसूस कर रहा है या उसकी स्थिति बिगड़ रही है तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गंभीर हीट स्ट्रोक की स्थिति में शरीर का तापमान बहुत बढ़ सकता है और व्यक्ति भ्रमित हो सकता है, बेहोश हो सकता है या सामान्य व्यवहार नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है और तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

दोपहर की गर्मी से बचना सबसे जरूरी

बुजुर्गों के लिए गर्मी से बचाव का सबसे आसान तरीका है कि दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचें। विशेष रूप से दोपहर के समय अनावश्यक यात्रा या शारीरिक मेहनत कम करना बेहतर होता है।

यदि बाहर जाना जरूरी हो तो हल्के और ढीले कपड़े पहनना, सिर को ढकना और पर्याप्त पानी साथ रखना उपयोगी हो सकता है। लंबे समय तक सीधे धूप में रहने से बचना चाहिए।

घर के अंदर भी पर्याप्त वेंटिलेशन और ठंडक बनाए रखना जरूरी है। केवल पंखे पर निर्भर रहने के बजाय अत्यधिक गर्म मौसम में उपलब्ध ठंडक के अन्य साधनों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें

गर्मी के मौसम में बुजुर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि वे केवल प्यास लगने पर पानी पीने पर निर्भर न रहें। उम्र बढ़ने के साथ प्यास का एहसास कमजोर हो सकता है।

हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग होती है। जिन लोगों को किडनी, हृदय या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें पानी और तरल पदार्थों की मात्रा को लेकर अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।

फलों और सब्जियों जैसे पानी वाले खाद्य पदार्थ भी सामान्य आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इन्हें पर्याप्त चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

अकेले रहने वाले बुजुर्गों पर ज्यादा ध्यान जरूरी

हीटवेव के दौरान अकेले रहने वाले बुजुर्ग विशेष जोखिम में हो सकते हैं। अगर गर्मी बहुत ज्यादा है तो परिवार के सदस्यों या पड़ोसियों को समय-समय पर उनका हालचाल लेते रहना चाहिए।

कई बार बुजुर्ग व्यक्ति कमजोरी या चक्कर को सामान्य उम्र संबंधी समस्या समझकर मदद नहीं मांगते। ऐसे में आसपास के लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

यदि कोई बुजुर्ग व्यक्ति अचानक भ्रमित नजर आए, अत्यधिक कमजोर हो, बेहोशी की स्थिति में हो या गर्मी के दौरान उसकी हालत तेजी से बिगड़ रही हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

गर्मी अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते औसत तापमान के बीच हीटवेव की घटनाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। गर्मी का असर सभी लोगों पर पड़ता है, लेकिन बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बाहर काम करने वाले लोग और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।

नई रिसर्च ने खास तौर पर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को लेकर यह संदेश मजबूत किया है कि अत्यधिक गर्मी को सामान्य असुविधा समझना सही नहीं है।

सबसे बड़ा सवाल—गर्मी कितनी खतरनाक हो सकती है?

अत्यधिक गर्मी की गंभीरता केवल तापमान पर निर्भर नहीं करती। हवा में नमी, रात का तापमान, व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, पानी की उपलब्धता और वह कितनी देर तक गर्मी के संपर्क में रहा है—ये सभी चीजें महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए किसी शहर में तापमान अपेक्षाकृत कम दिखाई देने के बावजूद अधिक नमी के कारण शरीर पर गर्मी का प्रभाव ज्यादा हो सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह का सार यही है कि बुजुर्गों को हीटवेव के दौरान पहले से तैयारी रखनी चाहिए और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नई रिसर्च ने बुजुर्गों और उनके परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी सामने रखी है। 60 वर्ष की उम्र के बाद शरीर की गर्मी से निपटने की क्षमता कमजोर हो सकती है और अत्यधिक गर्मी हृदय तथा पूरे शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

इसलिए गर्मी के मौसम में बुजुर्गों को पर्याप्त आराम, उचित तरल पदार्थ, धूप से बचाव और ठंडे वातावरण की जरूरत होती है। अगर गर्मी के दौरान चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम, बेहोशी या हालत तेजी से बिगड़ने जैसे संकेत दिखाई दें तो इसे सामान्य गर्मी समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए।

गर्मी से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण बात है—खतरा बढ़ने का इंतजार न करें, पहले से सावधानी बरतें।

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