सोशल मीडिया के ‘चमत्कारी’ पेप्टाइड्स का सच आया सामने! इंजेक्शन लेने से पहले जान लें ये खतरनाक राज, वरना पड़ सकता है भारी
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों पेप्टाइड्स को लेकर काफी चर्चा है। वजन घटाने, मसल्स बनाने, त्वचा को बेहतर करने, जल्दी रिकवरी, नींद और यहां तक कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने जैसे दावों के साथ कई तरह के पेप्टाइड्स को ऑनलाइन प्रमोट किया जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जिस तेजी से इनका प्रचार हो रहा है, विज्ञान अभी उतनी तेजी से इनके फायदे और सुरक्षा की पुष्टि नहीं कर पाया है।
पेप्टाइड्स मूल रूप से अमीनो एसिड की छोटी श्रृंखलाएं होती हैं और शरीर में कई जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती हैं। कुछ पेप्टाइड आधारित दवाएं चिकित्सा क्षेत्र में अच्छी तरह स्थापित हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर लोकप्रिय कई ‘वेलनेस पेप्टाइड्स’ अभी इंसानों में पर्याप्त बड़े और नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल से नहीं गुजरे हैं।
यही वजह है कि डॉक्टर और शोधकर्ता लोगों को इंटरनेट से बिना जांचे-परखे पेप्टाइड खरीदकर खुद इस्तेमाल करने से सावधान कर रहे हैं।
आखिर पेप्टाइड्स हैं क्या?
पेप्टाइड्स अमीनो एसिड से बने छोटे अणु होते हैं। शरीर में मौजूद कई पेप्टाइड हार्मोन, मेटाबॉलिज्म, सूजन, ऊतक मरम्मत और दूसरी जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं।
समस्या तब शुरू होती है जब इन्हीं अणुओं को सोशल मीडिया पर लगभग हर स्वास्थ्य समस्या का समाधान बताकर बेचा जाने लगता है।
आज ऑनलाइन कुछ पेप्टाइड्स को वजन घटाने, मसल्स बढ़ाने, एंटी-एजिंग, चोट से रिकवरी और त्वचा सुधार जैसी चीजों के लिए प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन हर उत्पाद के लिए वैज्ञानिक प्रमाण समान नहीं हैं।
‘वेलनेस पेप्टाइड’ का बढ़ रहा क्रेज
सोशल मीडिया पर कई इंफ्लुएंसर पेप्टाइड्स को अपनी फिटनेस और लाइफस्टाइल का हिस्सा बताते हैं। कुछ लोग इन्हें ब्यूटी, रिकवरी या एंटी-एजिंग रूटीन के रूप में प्रचारित करते हैं।
कुछ ऑनलाइन समुदाय अलग-अलग पेप्टाइड्स को मिलाकर इस्तेमाल करने की रणनीतियां भी साझा करते हैं। इसे कई जगह ‘peptide stacking’ कहा जाता है।
लेकिन विशेषज्ञों की चिंता यह है कि किसी व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर अच्छा अनुभव बताए जाने का मतलब यह नहीं है कि वही उत्पाद सभी लोगों के लिए सुरक्षित या प्रभावी है।
सबसे बड़ा खतरा- ऑनलाइन खरीदा गया इंजेक्शन
विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता उन पेप्टाइड्स को लेकर है जिन्हें लोग अनियमित ऑनलाइन स्रोतों से खरीदकर खुद इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
ऐसे उत्पादों में वास्तविक सामग्री, उसकी मात्रा और शुद्धता की पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है। कुछ उत्पादों में दूषित पदार्थ होने की संभावना भी चिंता का विषय है।
खासकर ऐसे उत्पाद जिन पर स्पष्ट निर्माता, सामग्री, मात्रा और गुणवत्ता संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं होती, उनका इस्तेमाल जोखिम बढ़ा सकता है।
क्या हर पेप्टाइड खतरनाक है?
नहीं। यह समझना जरूरी है कि सभी पेप्टाइड्स को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं होगा।
कुछ पेप्टाइड आधारित दवाओं का चिकित्सा उपयोग स्थापित है और उनके फायदे तथा जोखिमों पर वैज्ञानिक अध्ययन मौजूद हैं। उदाहरण के लिए कुछ GLP-1 आधारित दवाओं का उपयोग मोटापे और डायबिटीज जैसी स्थितियों के इलाज में किया जाता है।
समस्या उन पेप्टाइड्स से जुड़ी है जिन्हें पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण के बिना वेलनेस या एंटी-एजिंग उत्पाद के रूप में बेचा जा रहा है।
वजन घटाने के नाम पर भी बढ़ी मांग
GLP-1 दवाओं की लोकप्रियता ने वजन घटाने के क्षेत्र में पेप्टाइड आधारित उपचारों की चर्चा को काफी बढ़ाया है।
इसके बाद कई लोग दूसरे पेप्टाइड्स को भी वजन घटाने या शरीर को तेजी से बदलने के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन किसी पेप्टाइड का शरीर के किसी हिस्से पर जैविक प्रभाव होना और उसका सुरक्षित वजन घटाने वाला उपचार साबित होना दो अलग बातें हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक लोगों को सोशल मीडिया के दावों के बजाय वैज्ञानिक प्रमाण और डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करना चाहिए।
एंटी-एजिंग का दावा कितना सच?
पेप्टाइड्स का एक बड़ा बाजार एंटी-एजिंग और longevity के नाम पर भी तैयार हो रहा है।
कई उत्पादों को झुर्रियां कम करने, त्वचा को बेहतर बनाने, ऊर्जा बढ़ाने और शरीर को लंबे समय तक युवा रखने का दावा करते हुए प्रचारित किया जा रहा है।
लेकिन इन दावों में से कई के लिए मजबूत मानव क्लिनिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। कुछ पेप्टाइड्स पर शुरुआती शोध जरूर हुआ है, लेकिन लैब या पशु अध्ययन में मिले परिणामों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया सबसे बड़ा कारण क्यों बन रहा है?
पेप्टाइड ट्रेंड को बढ़ाने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। लोग पहले किसी इंफ्लुएंसर का वीडियो देखते हैं, फिर उसी उत्पाद का नाम इंटरनेट पर खोजते हैं और कई बार बिना डॉक्टर से सलाह लिए उसे खरीद लेते हैं।
समस्या यह है कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत अनुभव और वैज्ञानिक प्रमाण के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
किसी व्यक्ति को किसी उत्पाद से फायदा महसूस हुआ, इसका अर्थ यह नहीं कि वह उत्पाद सुरक्षित, प्रभावी और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए उपयुक्त है।
कुछ उत्पादों को लेकर गंभीर स्वास्थ्य चिंता
पेप्टाइड्स को लेकर स्वास्थ्य नियामक संस्थाएं भी लोगों को सावधान करती रही हैं। खासकर ऐसे उत्पाद जिनकी गुणवत्ता, शुद्धता और वास्तविक सामग्री की पुष्टि नहीं होती, उनमें स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
गलत तरीके से लगाए गए इंजेक्शन से संक्रमण का खतरा भी पैदा हो सकता है। इसके अलावा किसी सक्रिय पदार्थ की गलत मात्रा शरीर पर अप्रत्याशित असर डाल सकती है।
यही कारण है कि केवल इंटरनेट पर मौजूद समीक्षाओं या सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर किसी पेप्टाइड को सुरक्षित मानना सही नहीं है।
भारत में भी बढ़ रही चर्चा
भारत में भी पेप्टाइड आधारित वेलनेस ट्रेंड चर्चा में आ चुका है। पेप्टाइड्स को लेकर होने वाले कार्यक्रमों और सोशल मीडिया प्रचार ने इनके नियमन और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लोग इन उत्पादों के संभावित नुकसान को समझे बिना सिर्फ सोशल मीडिया के दावों से प्रभावित होकर इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
डॉक्टर से सलाह लेना क्यों जरूरी?
अगर कोई व्यक्ति वजन घटाने, मसल्स बढ़ाने, एंटी-एजिंग या किसी अन्य उद्देश्य से पेप्टाइड उपचार लेने के बारे में सोच रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य स्थिति, दूसरी दवाओं और संभावित जोखिमों को देखकर बता सकते हैं कि किसी उपचार की जरूरत है या नहीं।
खासकर इंजेक्शन के रूप में किसी भी पदार्थ का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
क्या पेप्टाइड्स स्वस्थ जीवनशैली की जगह ले सकते हैं?
बिल्कुल नहीं।
पेप्टाइड्स को स्वस्थ भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और वजन प्रबंधन का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
अगर किसी पेप्टाइड का चिकित्सकीय उपयोग है भी, तो उसका इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी और उचित चिकित्सा उद्देश्य के तहत होना चाहिए।
सिर्फ इंजेक्शन लगवाकर खराब खान-पान, नींद की कमी और शारीरिक निष्क्रियता की भरपाई करने की कोशिश सही रणनीति नहीं है।
सबसे ज्यादा सावधानी किसे बरतनी चाहिए?
जो लोग सोशल मीडिया से सीधे पेप्टाइड खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
बिना लेबल वाला इंजेक्शन, केवल कोड या संक्षिप्त नाम वाली शीशी, “research use only” लिखी बोतल या बिना स्पष्ट निर्माता जानकारी वाला उत्पाद इस्तेमाल करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
ऐसे उत्पादों की वास्तविक सामग्री और गुणवत्ता की पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है।
पेप्टाइड्स को लेकर उत्साह तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वायरल होना और वैज्ञानिक रूप से साबित होना दो अलग बातें हैं।
कुछ पेप्टाइड आधारित उपचार चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि कई लोकप्रिय वेलनेस पेप्टाइड्स के फायदे और लंबे समय की सुरक्षा अभी स्पष्ट नहीं हैं।
इसलिए वजन घटाने, मसल्स बनाने या एंटी-एजिंग के नाम पर कोई भी पेप्टाइड इंजेक्शन खुद से शुरू करने के बजाय पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित रास्ता है।
सोशल मीडिया पर दिखने वाला ‘चमत्कारी इलाज’ हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं। सेहत से जुड़ा फैसला वायरल वीडियो देखकर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जानकारी और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लेना चाहिए।

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