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लाल किले से भाषण के बीच अचानक क्यों रुके PM मोदी? पेपर नोट्स देखते ही विपक्ष ने पकड़ लिया ये मुद्दा!



नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का एक हिस्सा शनिवार को राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया। लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी जब वर्ष 2014 के बाद भारत की बायोइकोनॉमी में हुई प्रगति का जिक्र कर रहे थे, तभी वह कुछ क्षणों के लिए रुकते हुए नजर आए।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने अपने सामने रखे पेपर नोट्स की ओर देखा और फिर आगे अपनी बात जारी रखी। भाषण के इसी हिस्से का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया।

हालांकि, प्रधानमंत्री का भाषण लंबा था और इस दौरान किसी वक्त वक्ता का अपने नोट्स की ओर देखना असामान्य नहीं है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस छोटे से पल को लेकर बहस जरूर तेज हो गई।

बायोइकोनॉमी पर बोलते समय आया यह पल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने अर्थव्यवस्था, तकनीक, युवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और भारत की भविष्य की विकास योजनाओं सहित कई मुद्दों पर बात की।

इसी क्रम में जब वह भारत की बायोइकोनॉमी की प्रगति का उल्लेख कर रहे थे, तो कुछ क्षण के लिए उनकी डिलीवरी में रुकावट दिखाई दी।

इसके बाद उन्होंने सामने रखे पेपर नोट्स की तरफ देखा और अपनी बात को आगे बढ़ाया।

यही कुछ सेकंड का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जाने लगा।

वीडियो सामने आते ही शुरू हुई राजनीतिक बहस

प्रधानमंत्री के भाषण का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने इसे अपने-अपने अंदाज में शेयर किया।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने वीडियो क्लिप साझा करते हुए प्रधानमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने पोस्ट के साथ लिखा—“सुपरह्यूमन बिना टेलीप्रॉम्प्टर के।”

उनका यह बयान प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान पेपर नोट्स देखने के संदर्भ में था।

पवन खेड़ा की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

टेलीप्रॉम्प्टर को लेकर फिर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों के दौरान टेलीप्रॉम्प्टर का मुद्दा इससे पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

विपक्षी नेता कई बार प्रधानमंत्री के भाषणों को टेलीप्रॉम्प्टर से जोड़कर टिप्पणी करते रहे हैं। ऐसे में जब स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान प्रधानमंत्री कुछ क्षण के लिए रुके और पेपर नोट्स की ओर देखा, तो इस पुराने राजनीतिक मुद्दे को फिर से हवा मिल गई।

हालांकि, किसी सार्वजनिक भाषण के दौरान वक्ता द्वारा नोट्स देखना अपने आप में असामान्य नहीं है। लंबे भाषणों में आंकड़ों, नामों और महत्वपूर्ण बिंदुओं को सही तरीके से रखने के लिए वक्ता अक्सर लिखित सामग्री का सहारा लेते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने भी शेयर किया वीडियो

आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री के भाषण के इसी हिस्से का वीडियो शेयर किया।

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री की भाषण शैली को लेकर टिप्पणी करते हुए उन्हें “अंडर-कॉन्फिडेंट, नर्वस और शकी प्रधानमंत्री” बताया।

उनकी टिप्पणी के बाद भी सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

एक तरफ विपक्षी नेता इस वीडियो को प्रधानमंत्री की भाषण शैली पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के समर्थक इसे सामान्य भाषण प्रक्रिया बता रहे हैं।

क्या वास्तव में भाषण में बड़ी गलती हुई?

वीडियो में प्रधानमंत्री कुछ क्षण के लिए रुकते और फिर अपने पेपर नोट्स देखते नजर आते हैं।

लेकिन इस छोटे से पल को भाषण की बड़ी गलती के तौर पर देखना जरूरी नहीं है। प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन काफी लंबा होता है और इसमें कई आंकड़े, योजनाएं, घोषणाएं तथा नीतिगत विषय शामिल होते हैं।

ऐसे में लिखित नोट्स का इस्तेमाल करना किसी भी वक्ता के लिए सामान्य प्रक्रिया हो सकती है।

इस घटना में भी प्रधानमंत्री ने कुछ क्षण रुकने के बाद अपनी बात आगे जारी रखी और भाषण पूरा किया।

स्वतंत्रता दिवस भाषण में कई बड़े मुद्दे

इस पूरे विवाद के बीच प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण में उठाए गए अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी चर्चा में रहे।

उन्होंने भारत के युवाओं को नई तकनीक के लिए तैयार करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग, सेमीकंडक्टर निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर जोर दिया।

उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और आने वाले वर्षों के विकास लक्ष्य को लेकर भी अपनी बात रखी।

प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भारत की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया।

ऐसे में भाषण का अधिकांश हिस्सा नीतिगत और विकास संबंधी मुद्दों पर केंद्रित रहा।

सोशल मीडिया ने छोटे पल को बना दिया बड़ा मुद्दा

आज के दौर में किसी बड़े नेता के भाषण का कुछ सेकंड का वीडियो भी तेजी से वायरल हो सकता है।

यही इस मामले में देखने को मिला।

प्रधानमंत्री के लंबे भाषण में कुछ सेकंड का हिस्सा काटकर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। इसके बाद उस छोटे से वीडियो पर हजारों प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

कुछ लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया बताया तो कुछ ने इसे उनकी भाषण शैली से जोड़ दिया।

राजनीतिक दलों के बीच सोशल मीडिया के जरिए आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया।

समर्थकों ने भी दिया जवाब

विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों के बाद प्रधानमंत्री के समर्थकों ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दीं।

समर्थकों का कहना था कि लंबे भाषण के दौरान कुछ सेकंड के लिए नोट्स देखना कोई बड़ी बात नहीं है। उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री ने अपना संबोधन जारी रखा और मुख्य मुद्दों पर विस्तार से बात की।

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भाषण की पूरी सामग्री और उसमें की गई घोषणाओं पर चर्चा करने के बजाय केवल कुछ सेकंड के वीडियो को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।

टेलीप्रॉम्प्टर से लेकर पेपर नोट्स तक बहस

प्रधानमंत्री के भाषणों को लेकर टेलीप्रॉम्प्टर की चर्चा नई नहीं है। कई मौकों पर विपक्षी नेता उनके भाषणों में टेलीप्रॉम्प्टर के इस्तेमाल पर सवाल उठाते रहे हैं।

इस बार स्थिति थोड़ी अलग थी। प्रधानमंत्री ने खुद सामने रखे पेपर नोट्स की ओर देखा, जिसके बाद विपक्ष ने इसी दृश्य को लेकर तंज कस दिया।

यही वजह है कि कुछ ही सेकंड का यह दृश्य स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया।

असली भाषण से ज्यादा चर्चा इस पल की

प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल थे, लेकिन सोशल मीडिया पर एक छोटे से पल ने अलग ही चर्चा पैदा कर दी।

एक तरफ प्रधानमंत्री का भाषण देश की अर्थव्यवस्था, तकनीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं ने भाषण के दौरान आई छोटी सी रुकावट को राजनीतिक हमला करने का मुद्दा बना दिया।

अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावों और प्रतिक्रियाओं के साथ शेयर किया जा रहा है।

हालांकि, पूरे घटनाक्रम को देखने पर इतना साफ है कि प्रधानमंत्री कुछ क्षण के लिए रुके, अपने पेपर नोट्स देखे और फिर भाषण जारी रखा।

कुछ सेकंड की इस रुकावट ने देखते ही देखते राजनीतिक बहस का रूप ले लिया। प्रधानमंत्री के भाषण की बड़ी घोषणाओं के बीच अब सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है कि आखिर उस पल ऐसा क्या हुआ था, जिसने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया।

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