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Video : पास में दवा थी, फिर भी नहीं बचा पाई मां! 5 साल के बच्चे को पड़ रहे थे मिर्गी के दौरे, आखिर किसने रोक दिया रास्ता?



जिस उम्र में किसी बच्चे के हाथों में खिलौने होने चाहिए, जिस उम्र में उसे मां की गोद में खेलते हुए अपनी छोटी-सी दुनिया में मग्न होना चाहिए, उसी उम्र में अगर कोई बच्चा बार-बार बीमारी के दर्द से गुजर रहा हो तो यह दृश्य किसी भी इंसान को अंदर तक झकझोर सकता है। ऐसी ही एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है, जहां महज 5 साल का एक बच्चा मिर्गी के दौरों से जूझ रहा है।

बच्चे की हालत को लेकर उसकी मां बेहद परेशान है। परिवार के मुताबिक डॉक्टरों ने बच्चे के लिए जरूरी दवाएं बताई हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि पास में फार्मेसी होने के बावजूद दवा बच्चे तक नहीं पहुंच पा रही है। आने-जाने की अनुमति न मिलने के कारण परिवार के लोग दवा लेने के लिए बाहर नहीं जा पा रहे हैं।

एक मां के लिए इससे ज्यादा मुश्किल स्थिति की कल्पना करना भी कठिन है। वह अपनी आंखों के सामने अपने बच्चे को तकलीफ में देख रही है, लेकिन चाहकर भी उसके लिए जरूरी दवा नहीं ला पा रही।

खिलौनों की उम्र में बीमारी से लड़ रहा बच्चा

5 साल की उम्र किसी भी बच्चे के जीवन का बेहद मासूम दौर होता है। इस उम्र में बच्चे स्कूल जाने, दोस्तों के साथ खेलने, कार्टून देखने और खिलौनों से खेलने में अपना समय बिताते हैं। उनके लिए छोटी-छोटी चीजें भी खुशी का कारण बन जाती हैं।

लेकिन इस बच्चे की जिंदगी फिलहाल बीमारी और चिंता के बीच फंस गई है।

परिवार के अनुसार बच्चे को बार-बार मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं। ऐसे दौरे बच्चे और उसके परिवार दोनों के लिए बेहद डरावने हो सकते हैं। खासकर जब बच्चा बहुत छोटा हो और खुद अपनी तकलीफ ठीक से बता भी न सके।

बच्चे की मां के सामने सबसे बड़ी चिंता यही है कि दौरा पड़ने के दौरान उसे तत्काल जरूरी देखभाल और निर्धारित दवा मिल पाए। लेकिन जब सामान्य परिस्थितियों में मिलने वाली दवा भी पहुंच से बाहर हो जाए, तो परिवार की चिंता और बढ़ जाती है।

मां की आंखों के सामने तड़पता रहा बच्चा

किसी मां के लिए अपने बच्चे को बीमार देखना बेहद पीड़ादायक होता है। लेकिन अगर बच्चे की हालत बिगड़ रही हो और मां के पास उसकी मदद करने के साधन भी सीमित हों, तो यह बेबसी और ज्यादा दर्दनाक बन जाती है।

परिवार के मुताबिक बच्चे को डॉक्टरों ने जरूरी दवाएं बताई हैं। मां जानती है कि उसके बच्चे को दवा की जरूरत है। वह यह भी जानती है कि दवा किसी बहुत दूर की जगह पर नहीं, बल्कि पास की फार्मेसी में उपलब्ध हो सकती है।

इसके बावजूद समस्या यह है कि परिवार के पास वहां तक जाने की अनुमति नहीं है।

यानी बीमारी के इलाज का रास्ता मौजूद होने के बावजूद उस रास्ते तक पहुंचना ही मुश्किल हो गया है।

पास में फार्मेसी, फिर भी दवा पहुंच से बाहर

इस मामले का सबसे परेशान करने वाला पहलू यही है कि परिवार के अनुसार दवा किसी बहुत दूर स्थित अस्पताल या मेडिकल स्टोर में नहीं है। फार्मेसी पास में है, लेकिन आने-जाने पर लगी पाबंदियों के कारण परिवार के लोग वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

बीमारी के समय कुछ घंटे भी बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। खासकर बच्चों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामलों में दवा की उपलब्धता और समय पर चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी होती है।

लेकिन जब किसी परिवार के पास दवा खरीदने की इच्छा और जरूरत दोनों हों, फिर भी वह सिर्फ आवाजाही की बाधा के कारण दवा हासिल न कर सके, तो स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

मिर्गी के दौरों ने बढ़ाई चिंता

मिर्गी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ सकते हैं। बच्चों में ऐसे दौरों को लेकर परिवारों में स्वाभाविक रूप से डर और चिंता रहती है।

हर मरीज की स्थिति अलग हो सकती है और उपचार भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार निर्धारित किया जाता है। इसलिए मिर्गी की दवा को लेकर किसी भी तरह का बदलाव या उसे बंद करना डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं किया जाना चाहिए।

इस बच्चे के मामले में परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने जरूरी दवाएं बताई हैं। समस्या इलाज की जरूरत समझने की नहीं, बल्कि दवा बच्चे तक पहुंचाने की है।

यही वजह है कि परिवार की परेशानी सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं रह गई है। अब उन्हें उस व्यवस्था और परिस्थितियों से भी जूझना पड़ रहा है, जिसके कारण दवा तक पहुंच मुश्किल हो रही है।

बच्चे की हालत ने खड़े किए कई सवाल

यह घटना सिर्फ एक बच्चे की बीमारी की कहानी नहीं है। यह सवाल भी उठाती है कि कठिन परिस्थितियों में बच्चों और बीमार लोगों तक जरूरी चिकित्सा सुविधाएं कैसे पहुंचाई जाएंगी।

जब कोई बच्चा गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो तो उसके इलाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज अपने बच्चे की जिंदगी और स्वास्थ्य होती है।

ऐसे मामलों में दवा, डॉक्टर और अस्पताल तक सुरक्षित पहुंच किसी भी परिवार के लिए बुनियादी जरूरत बन जाती है।

अगर किसी क्षेत्र में आवाजाही पर प्रतिबंध या अन्य परिस्थितियों के कारण लोगों को चिकित्सा सुविधा तक पहुंचने में परेशानी हो रही हो, तो सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है।

मां की बेबसी सबसे ज्यादा दर्दनाक

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाली बात बच्चे की मां की स्थिति है।

एक मां अपने बच्चे के चेहरे को देखकर उसकी तकलीफ समझ सकती है। जब बच्चा रोता है, कांपता है या अचानक बीमारी की चपेट में आता है तो मां उसे अपनी गोद में लेकर बचाने की कोशिश करती है।

लेकिन इस मामले में मां के सामने एक ऐसी स्थिति है जिसमें उसकी कोशिशें भी सीमित हो गई हैं।

वह अपने बच्चे को दवा दिलाना चाहती है। वह डॉक्टर की सलाह के मुताबिक इलाज कराना चाहती है। लेकिन परिवार के मुताबिक बाहर जाने की अनुमति नहीं होने के कारण वह जरूरी दवा तक नहीं पहुंच पा रही।

यह बेबसी किसी भी मां के लिए बेहद कठिन अनुभव हो सकती है।

स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी इलाज का हिस्सा

किसी मरीज के लिए केवल अस्पताल या दवा का मौजूद होना पर्याप्त नहीं होता। उन सुविधाओं तक सुरक्षित और समय पर पहुंच भी उतनी ही जरूरी होती है।

अगर दवा फार्मेसी में उपलब्ध है लेकिन मरीज के परिवार तक नहीं पहुंच पा रही, तो कागज पर मौजूद स्वास्थ्य सुविधा व्यवहार में मरीज के लिए उपलब्ध नहीं मानी जा सकती।

यही वजह है कि संकट की परिस्थितियों में चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ दवाओं की आपूर्ति और मरीजों की आवाजाही को लेकर भी विशेष व्यवस्था की जरूरत होती है।

विशेष रूप से छोटे बच्चों के मामले में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि वे अपनी बीमारी और जरूरतों को खुद व्यक्त नहीं कर सकते।

हर बच्चे को इलाज का अधिकार

5 साल के इस बच्चे की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि बीमारी और संकट के बीच सबसे कमजोर लोगों की मदद कैसे की जाए।

एक बच्चा न तो अपनी बीमारी चुनता है और न ही यह तय करता है कि वह किस परिस्थिति में जन्म लेगा या किस माहौल में बड़ा होगा। उसका अधिकार है कि उसे जरूरत के समय इलाज और जरूरी दवाएं मिलें।

परिवार चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, बीमार बच्चे के लिए चिकित्सा सहायता तक पहुंच सबसे अहम होनी चाहिए।

इस मामले में परिवार की ओर से बताई गई परिस्थितियां यह दिखाती हैं कि बीमारी से लड़ना केवल डॉक्टर और दवा का सवाल नहीं रह जाता। कई बार परिस्थितियां, आवाजाही, संसाधन और सुरक्षा भी इलाज के रास्ते में बड़ी बाधा बन जाते हैं।

एक मां की उम्मीद अभी बाकी है

इन तमाम मुश्किलों के बीच बच्चे की मां अपने बेटे के लिए उम्मीद लगाए बैठी है। उसकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि उसके बच्चे को समय पर जरूरी दवा मिले और वह सामान्य जिंदगी जी सके।

5 साल का बच्चा अभी जिंदगी के उस पड़ाव पर है जहां उसे भविष्य के सपनों का मतलब भी ठीक से पता नहीं। उसके लिए दुनिया अभी खेल, परिवार और छोटी-छोटी खुशियों तक सीमित है।

लेकिन बार-बार आने वाले मिर्गी के दौरों ने उसकी जिंदगी को मुश्किल बना दिया है।

उसकी मां की आंखों में चिंता है, लेकिन साथ ही अपने बच्चे को बचाने की उम्मीद भी है। परिवार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत यही है कि डॉक्टर द्वारा बताई गई जरूरी दवाएं बच्चे तक पहुंचें और उसे उचित चिकित्सा सहायता मिल सके।

5 साल के इस बच्चे की कहानी किसी एक परिवार की परेशानी से कहीं आगे जाकर उन तमाम लोगों की मुश्किलों को सामने लाती है, जो बीमारी के साथ-साथ परिस्थितियों से भी लड़ने को मजबूर हैं।

एक तरफ बच्चा मिर्गी के बार-बार पड़ने वाले दौरों से जूझ रहा है, दूसरी तरफ परिवार के अनुसार जरूरी दवा पास में होने के बावजूद वहां तक पहुंचना मुश्किल है। मां अपने बच्चे को सामने परेशान देख रही है और उसकी सबसे बड़ी चिंता यही है कि उसे समय पर इलाज और दवा मिल पाए।

बच्चों के मामले में चिकित्सा सहायता तक समय पर पहुंच बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी संकट के बीच यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि गंभीर रूप से बीमार बच्चों और जरूरतमंद मरीजों तक आवश्यक दवाएं और चिकित्सा सेवाएं पहुंच सकें।

क्योंकि एक मां के लिए अपने बच्चे को दर्द में देखना जितना मुश्किल है, उससे भी ज्यादा मुश्किल तब हो जाता है जब उसके हाथ में बच्चे की मदद करने का कोई रास्ता न हो।

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