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7 मिनट तक धड़कना बंद रहा दिल… फिर लौट आया शख्स, होश में आते ही बताया मौत के पार दिखा था ये रहस्य



मौत के बाद क्या होता है? यह सवाल सदियों से इंसान को रहस्य और जिज्ञासा से भरता रहा है। कोई इसे आत्मा का सफर मानता है तो कोई इसे शरीर और दिमाग से जुड़ा बेहद जटिल अनुभव बताता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति खुद कार्डियक अरेस्ट के बाद जिंदगी में लौटकर उस दौरान महसूस की गई चीजों के बारे में बताता है, तो यह सवाल और भी रहस्यमय हो जाता है।

ऐसी ही एक कहानी भारतीय मूल के ब्रिटिश स्टेज एक्टर शिव ग्रेवाल की है। फरवरी 2013 में उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया और उनका दिल करीब सात मिनट तक धड़कना बंद रहा। मेडिकल टीम ने उन्हें दोबारा रिवाइव किया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मुख्य धमनी में स्टेंट डाला गया और ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्हें करीब एक महीने तक मेडिकल रूप से प्रेरित कोमा में रखा गया।

हालांकि, होश में आने के बाद शिव ने जो अनुभव बताया, उसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी।

पत्नी के साथ खाना खा रहे थे, अचानक बिगड़ी तबीयत

9 फरवरी 2013 को दक्षिण-पूर्व लंदन में शिव अपनी पत्नी एलिसन के साथ भोजन कर रहे थे। सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उनकी पत्नी ने मदद के लिए आपातकालीन सेवा को फोन किया।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मेडिकल टीम के पहुंचने से पहले ही शिव का दिल धड़कना बंद कर चुका था। पैरामेडिक्स ने मौके पर पहुंचकर सीपीआर समेत जरूरी चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। कई मिनट की कोशिश के बाद उनके दिल की धड़कन वापस लाई जा सकी।

इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जांच में उनकी एक प्रमुख धमनी में गंभीर रुकावट मिली, जिसके लिए सर्जरी कर स्टेंट लगाया गया।

सात मिनट के दौरान उन्हें क्या महसूस हुआ?

शिव ग्रेवाल ने बाद में अपने अनुभव को एक नियर-डेथ एक्सपीरियंस (NDE) के रूप में बताया। उनके अनुसार, उस दौरान उन्हें किसी तरह यह एहसास था कि वह मर चुके हैं।

उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे उनका शरीर उनके अनुभव से पूरी तरह अलग हो गया हो। उन्होंने उस स्थिति को एक तरह के शून्य जैसा बताया, जहां शरीर का एहसास नहीं था, लेकिन भावनाएं और संवेदनाएं मौजूद थीं।

शिव के अनुसार, उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह पानी में तैर रहे हों और उनका शरीर भारहीन हो गया हो। भौतिक दुनिया से अलग होने जैसा एहसास उनके लिए बेहद वास्तविक था।

फिर दिखाई दिया चांद और पूरा ब्रह्मांड

शिव के अनुभव का सबसे रहस्यमय हिस्सा वह था जब उन्होंने अंतरिक्ष जैसी चीजों को देखने की बात कही।

उनके मुताबिक, एक समय ऐसा लगा जैसे वह चांद के ऊपर से गुजर रहे हों। उन्हें उल्कापिंड और पूरा अंतरिक्ष दिखाई देने जैसा अनुभव हुआ। उनके लिए यह अनुभव इतना वास्तविक था कि वर्षों बाद भी उन्होंने इसे अपनी स्मृति में बेहद स्पष्ट बताया।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये शिव का व्यक्तिगत अनुभव है। वैज्ञानिक रूप से इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मृत्यु के बाद हर व्यक्ति को वास्तव में यही चीजें दिखाई देती हैं।

क्या उन्हें पुनर्जन्म के रास्ते दिखाई दिए?

शिव ने अपने अनुभव का एक और बेहद दिलचस्प हिस्सा बताया। उनके अनुसार, उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके सामने अलग-अलग संभावनाएं रखी जा रही हों।

उन्होंने इन संभावनाओं को अलग-अलग जीवन और पुनर्जन्म से जोड़कर महसूस किया। लेकिन उनका कहना था कि वह उन विकल्पों को स्वीकार नहीं करना चाहते थे।

इसके बजाय उनकी इच्छा थी कि वह अपने शरीर में वापस लौटें, अपनी पत्नी के पास जाएं और अपनी जिंदगी जारी रखें।

यही वह हिस्सा है जिसने उनके अनुभव को और ज्यादा रहस्यमय बना दिया। हालांकि, इसे पुनर्जन्म या मृत्यु के बाद के जीवन का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

मेडिकल टीम ने वापस लौटाई जिंदगी

उधर वास्तविक दुनिया में मेडिकल टीम शिव को बचाने की कोशिश कर रही थी। पैरामेडिक्स ने सीपीआर और अन्य आपातकालीन उपचार के जरिए उनके दिल को दोबारा चलाने में सफलता हासिल की।

अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी सर्जरी हुई और मुख्य धमनी में स्टेंट लगाया गया। इसके बाद मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी के कारण डॉक्टरों ने उन्हें करीब एक महीने तक प्रेरित कोमा में रखा।

जब करीब एक महीने बाद वह कोमा से बाहर आए, तब उनके सामने सिर्फ शारीरिक रिकवरी की चुनौती नहीं थी। उन्हें उस अनुभव के बाद अपनी जिंदगी को नए तरीके से समझना था।

मौत के अनुभव ने बदल दी जिंदगी

शिव के मुताबिक, इस घटना ने मौत को देखने का उनका नजरिया बदल दिया। पहले जहां मृत्यु उनके लिए डर का विषय थी, वहीं इस अनुभव के बाद उन्होंने जिंदगी की अहमियत को ज्यादा गहराई से महसूस करना शुरू किया।

उन्होंने अपने अनुभव को सिर्फ शब्दों में बताने के बजाय उसे कला के जरिए व्यक्त करने का फैसला किया। उन्होंने उन दृश्यों और भावनाओं को कैनवास पर उतारना शुरू किया, जिन्हें वह कार्डियक अरेस्ट के दौरान महसूस करने का दावा करते हैं।

उनके इसी काम से ‘Reboot’ नाम का कला संग्रह सामने आया। इसमें अंतरिक्ष, शून्य, जीवन और मृत्यु के बीच की भावनाओं तथा उनके अनुभवों को चित्रों के माध्यम से दिखाने की कोशिश की गई।

‘Reboot’ प्रदर्शनी में दिखाया अपना अनुभव

2023 में शिव ने लंदन के Karma Sanctum Soho Hotel में ‘Reboot’ नाम से अपनी कला प्रदर्शनी लगाई थी। प्रदर्शनी में उन्होंने उस अनुभव को कलात्मक रूप देने की कोशिश की, जिसे वह अपने जीवन का सबसे असाधारण अनुभव मानते हैं।

उनके लिए कला इस दर्दनाक अनुभव से निपटने का एक माध्यम भी बनी। उन्होंने अपने अनुभव की यादों को रंगों और आकृतियों में बदल दिया।

विज्ञान के लिए भी NDE बना है शोध का विषय

नियर-डेथ एक्सपीरियंस यानी NDE लंबे समय से चिकित्सा और मनोविज्ञान के शोध का विषय रहा है। कार्डियक अरेस्ट से बचने वाले कुछ लोग शरीर से अलग होने, रोशनी देखने, शांति महसूस करने या अलग-अलग दृश्य देखने जैसी बातें बताते हैं।

हालांकि, इन अनुभवों की व्याख्या को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में अभी भी बहस जारी है। कुछ शोधकर्ता इन्हें मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी, न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों और शरीर की गंभीर स्थिति से जोड़ते हैं, जबकि कुछ अन्य पहलुओं पर अभी शोध जारी है। इसलिए किसी एक व्यक्ति के अनुभव को मृत्यु के बाद जीवन का निर्णायक प्रमाण मानना उचित नहीं है।

सात मिनट ने बदल दी जिंदगी की कीमत

शिव ग्रेवाल की कहानी का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने मौत के करीब पहुंचने के बाद जिंदगी को पहले से ज्यादा महत्व देना शुरू किया।

उनका दावा है कि सात मिनट के उस अनुभव के दौरान वह अपने शरीर और भौतिक दुनिया से अलग महसूस कर रहे थे। उन्होंने चांद, उल्कापिंड, अंतरिक्ष और अलग-अलग जीवन की संभावनाओं जैसी चीजों का अनुभव होने की बात कही। लेकिन अंततः उनकी सबसे बड़ी इच्छा अपने शरीर और पत्नी के पास लौटने की थी।

उनकी कहानी चाहे किसी के लिए आध्यात्मिक अनुभव हो या मस्तिष्क की जटिल प्रतिक्रिया, एक बात जरूर सामने आती है—जिंदगी और मौत के बीच की सीमा आज भी इंसान के लिए उतनी ही रहस्यमय है, जितनी सदियों पहले थी।

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