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हर दिन नहाने की आदत पड़ सकती है भारी! स्किन को लेकर सामने आया चौंकाने वाला सच



अभी तक ज्यादातर लोग यही मानते आए हैं कि रोज नहाना अच्छी सेहत और साफ-सफाई के लिए जरूरी है। सुबह उठते ही नहाना भारतीय जीवनशैली का एक अहम हिस्सा माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि रोज नहाने से शरीर की गंदगी दूर होती है, पसीना साफ होता है और त्वचा भी स्वस्थ रहती है। लेकिन क्या हर व्यक्ति के लिए रोजाना पूरा शरीर साबुन से साफ करना वास्तव में जरूरी है? इस सवाल का जवाब उतना सीधा नहीं है।

डर्मेटोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नहाने की कोई एक तय संख्या हर व्यक्ति पर लागू नहीं होती। यह व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि, मौसम, पसीना, काम की प्रकृति, त्वचा के प्रकार और व्यक्तिगत स्वच्छता की जरूरतों पर निर्भर करता है। Cleveland Clinic के अनुसार दिन में एक बार नहाना सामान्य मार्गदर्शन हो सकता है, लेकिन इसे कठोर नियम नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, Harvard Health के अनुसार कुछ लोगों के लिए सप्ताह में कई बार नहाना पर्याप्त हो सकता है, खासकर जब व्यक्ति बहुत पसीना नहीं बहाता या गंदगी के संपर्क में कम आता है।

यानी वायरल दावे की तरह यह कहना सही नहीं होगा कि रोज नहाना हर किसी के लिए नुकसानदायक है या दो-तीन दिन में एक बार नहाना ही सभी के लिए बेहतर है। असली बात यह है कि नहाने का तरीका और आपकी त्वचा की जरूरत, दोनों बेहद महत्वपूर्ण हैं।

रोज नहाने से स्किन को क्यों हो सकती है परेशानी?

त्वचा के ऊपर प्राकृतिक तेलों की एक परत होती है, जो त्वचा में नमी बनाए रखने और बाहरी वातावरण से सुरक्षा देने में भूमिका निभाती है। बहुत गर्म पानी, लंबे समय तक शॉवर लेना, बार-बार साबुन लगाना या त्वचा को जोर से रगड़ना इस प्राकृतिक तेल की परत को कम कर सकता है।

Harvard Health के अनुसार अत्यधिक नहाने, लंबे समय तक गर्म पानी में रहने और कठोर साबुन के इस्तेमाल से त्वचा का सुरक्षात्मक तेल कम हो सकता है, जिससे रूखापन और जलन की समस्या बढ़ सकती है।

Cleveland Clinic भी बताता है कि जरूरत से ज्यादा शॉवर लेने से त्वचा की नमी कम हो सकती है और संवेदनशीलता, खुजली या जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि रोज नहाना अपने आप में गलत है। समस्या अक्सर बहुत गर्म पानी, लंबे शॉवर और कठोर क्लीनिंग प्रोडक्ट्स से पैदा होती है।

क्या दो या तीन दिन में एक बार नहाना सही है?

यही वह सवाल है जिसने हाल के वर्षों में काफी चर्चा पैदा की है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ लोगों के लिए रोजाना पूरा शरीर साबुन से धोना जरूरी नहीं हो सकता। अगर कोई व्यक्ति घर पर रहता है, ज्यादा पसीना नहीं बहाता, धूल-मिट्टी में काम नहीं करता और उसकी त्वचा बहुत संवेदनशील या शुष्क है, तो कभी-कभी नहाने के बीच अंतर रखना त्वचा के लिए आरामदायक हो सकता है।

Harvard Health के अनुसार अधिकांश लोगों के लिए सप्ताह में कई बार नहाना पर्याप्त हो सकता है, हालांकि पसीना, गंदगी या अन्य परिस्थितियों में अधिक बार नहाने की जरूरत पड़ सकती है।

लेकिन दूसरी तरफ, Cleveland Clinic के त्वचा विशेषज्ञ के अनुसार रोजाना शॉवर लेना सामान्य स्वच्छता के लिए उचित हो सकता है और नहाने की जरूरत व्यक्ति की गतिविधि और परिस्थितियों के अनुसार बदलती है।

इसलिए दो-तीन दिन में एक बार नहाने को सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य का नियम मानना सही नहीं होगा।

पसीना ज्यादा आता है तो क्या करें?

अगर आप जिम जाते हैं, दौड़ते हैं, खेलते हैं, बाहर धूप में काम करते हैं या आपका काम ऐसा है जिसमें खूब पसीना आता है, तो शरीर को अधिक बार साफ करने की जरूरत हो सकती है।

पसीना लंबे समय तक त्वचा पर जमा रहे तो बदबू, असहजता और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में रोज नहाना या व्यायाम के बाद जल्दी शॉवर लेना उपयोगी हो सकता है।

Cleveland Clinic के अनुसार व्यायाम या ऐसी गतिविधि के बाद जिसमें काफी पसीना आता है, नहाना स्वच्छता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

गर्म पानी से नहाना पड़ सकता है भारी

सर्दियों में गर्म पानी से लंबा शॉवर लेना काफी आरामदायक लगता है। लेकिन यही आदत आपकी त्वचा को रूखा बना सकती है। बहुत गर्म पानी त्वचा के प्राकृतिक तेलों को हटाकर नमी कम कर सकता है।

Harvard Health त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए गर्म पानी के बजाय गुनगुने पानी का इस्तेमाल करने और शॉवर को सीमित समय तक रखने की सलाह देता है।

इसलिए अगर आप रोज नहाते हैं तो पानी का तापमान बहुत ज्यादा गर्म न रखें। पांच से दस मिनट का छोटा शॉवर कई लोगों के लिए पर्याप्त हो सकता है।

हर बार पूरे शरीर पर साबुन लगाना जरूरी नहीं

नहाते समय लोग अक्सर सिर से पैर तक खूब साबुन लगाकर शरीर को रगड़ते हैं। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार हर बार पूरे शरीर पर कठोर साबुन का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है।

Cleveland Clinic के अनुसार संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष रूप से उन हिस्सों की सफाई पर ध्यान देना चाहिए जहां पसीना और गंध अधिक जमा होती है, जैसे बगल और जांघों के आसपास का क्षेत्र।

अगर आपकी त्वचा बहुत शुष्क रहती है तो खुशबूदार या कठोर साबुन की जगह हल्के और संवेदनशील त्वचा के लिए बने क्लेंजर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

नहाने के बाद यह गलती न करें

कई लोग नहाने के बाद तौलिए से त्वचा को जोर-जोर से रगड़कर सुखाते हैं। इससे भी त्वचा में जलन और रूखापन बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ नहाने के बाद त्वचा को धीरे-धीरे थपथपाकर सुखाने और त्वचा हल्की नम रहते ही मॉइस्चराइजर लगाने की सलाह देते हैं। इससे त्वचा में नमी को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

खासकर जिन लोगों की त्वचा पहले से ड्राई रहती है, उनके लिए यह आदत काफी उपयोगी हो सकती है।

स्किन माइक्रोबायोम का भी रखें ध्यान

हमारी त्वचा पर कई तरह के सूक्ष्मजीव रहते हैं। इनमें ऐसे माइक्रोऑर्गेनिज्म भी शामिल होते हैं जो त्वचा के सामान्य वातावरण का हिस्सा हैं। बहुत ज्यादा सफाई और कठोर साबुन का इस्तेमाल त्वचा के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

Harvard Health के अनुसार सामान्य त्वचा पर प्राकृतिक तेल और सूक्ष्मजीवों का संतुलन त्वचा की सुरक्षा में भूमिका निभाता है। बार-बार धोने और खासकर गर्म पानी या कठोर उत्पादों के इस्तेमाल से यह संतुलन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि नहाना छोड़ देना चाहिए। व्यक्तिगत स्वच्छता भी उतनी ही जरूरी है।

किन लोगों को रोज नहाना ज्यादा जरूरी हो सकता है?

हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। जिन लोगों को रोजाना अधिक पसीना आता है, वे शारीरिक मेहनत करते हैं, खेलते हैं, जिम जाते हैं या धूल-मिट्टी और प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं, उन्हें अधिक बार नहाने की आवश्यकता हो सकती है।

किशोरों और युवाओं में भी हार्मोनल बदलाव के कारण पसीना और शरीर की गंध अधिक हो सकती है। ऐसे में रोजाना नहाना व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने में मदद कर सकता है। Cleveland Clinic के अनुसार उम्र और गतिविधि के हिसाब से भी नहाने की जरूरत बदल सकती है।

किन लोगों को नहाने के तरीके पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए?

जिन लोगों की त्वचा बहुत संवेदनशील है, जिन्हें बार-बार रूखापन, खुजली या जलन होती है, उन्हें नहाने की दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

ऐसे लोगों के लिए बहुत गर्म पानी, लंबे समय तक शॉवर, तेज साबुन और जोर से स्क्रब करना समस्या बढ़ा सकता है। अगर त्वचा लगातार लाल रहती है, बहुत ज्यादा खुजली होती है, त्वचा फटती है या घाव बनने लगते हैं तो केवल नहाने की आदत बदलने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

तो आखिर कितने दिन में नहाना चाहिए?

इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं है। अगर आप रोज नहाते हैं और आपकी त्वचा स्वस्थ है, तो सिर्फ इस वजह से नहाना बंद करने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर रोजाना नहाने के बाद त्वचा बहुत रूखी, खुजलीदार या संवेदनशील हो जाती है, तो शॉवर का समय कम करना, गुनगुना पानी इस्तेमाल करना और कठोर साबुन से बचना मददगार हो सकता है।

कुछ लोगों के लिए रोज नहाना उचित हो सकता है, जबकि कम पसीना आने और कम शारीरिक गतिविधि वाले कुछ लोगों के लिए कम बार पूरा शॉवर लेना भी पर्याप्त हो सकता है। Harvard Health और Cleveland Clinic दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि नहाने की जरूरत व्यक्ति की परिस्थितियों और त्वचा की स्थिति के अनुसार बदलती है।

रोज नहाना है तो इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप रोज नहाना पसंद करते हैं तो अपनी त्वचा को नुकसान से बचाने के लिए कुछ आसान नियम अपनाए जा सकते हैं।

  • बहुत गर्म पानी की जगह गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।

  • शॉवर को बहुत लंबा न खींचें।

  • कठोर और तेज खुशबू वाले साबुन से बचें।

  • त्वचा को जोर से स्क्रब न करें।

  • नहाने के बाद तौलिए से त्वचा को रगड़ने के बजाय धीरे से सुखाएं।

  • त्वचा हल्की नम हो तभी मॉइस्चराइजर लगाएं।

  • व्यायाम या ज्यादा पसीना आने के बाद शरीर को साफ करें।

  • अगर त्वचा में लगातार खुजली, लालिमा या दरारें हैं तो डॉक्टर से सलाह लें।

नहाना छोड़ना नहीं, सही तरीके से नहाना जरूरी

रोज नहाने को पूरी तरह नुकसानदायक बताना सही नहीं है और दो-तीन दिन में एक बार नहाना भी हर व्यक्ति के लिए जरूरी या बेहतर नियम नहीं है। असली सवाल यह है कि आपकी त्वचा कैसी है, आप दिनभर कितना सक्रिय रहते हैं, कितना पसीना आता है और आप किस तरह नहाते हैं।

अगर रोजाना शॉवर लेने के बाद आपकी त्वचा में रूखापन या खुजली होती है तो नहाने का समय कम करने, गर्म पानी से बचने और हल्के क्लेंजर का इस्तेमाल करने पर ध्यान दें। वहीं अगर आप रोजाना व्यायाम करते हैं या काफी पसीना आता है तो नियमित सफाई जरूरी हो सकती है।

इसलिए वायरल दावे के पीछे भागने के बजाय अपनी त्वचा के संकेतों को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है। नहाने की सही आदत वही है जो शरीर की स्वच्छता बनाए रखने के साथ त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा को भी बरकरार रखे।

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