रात होते ही शुरू होता था बिजली का खेल! 40 गांवों के 2 हजार घरों पर विभाग की नजर, छज्जों के पीछे छिपा था बड़ा राज
जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए बिजली विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। अब विभाग की नजर उन मकानों पर है, जिनके सड़क या रास्ते की तरफ निकले हुए छज्जे बिजली की केबल के बेहद करीब हैं। विभाग का मानना है कि कुछ जगहों पर इन्हीं छज्जों की आड़ में रात के समय बिजली चोरी की जा रही है। साथ ही इन छज्जों और बिजली केबल के बीच संपर्क होने से गंभीर हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
बिजली विभाग की ओर से किए गए सर्वे में जिले के 40 गांवों में करीब 2 हजार ऐसे मकान चिह्नित किए गए हैं, जिनके छज्जे बिजली की लाइन या केबल से टच हो रहे हैं अथवा उनके बेहद नजदीक हैं। इन सभी मकान मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में संबंधित लोगों से 15 दिन के भीतर जवाब देने और छज्जे को हटाने या तोड़ने के लिए कहा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर विभागीय स्तर से छज्जा हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।
छज्जे की आड़ में केबल डालकर चोरी का शक
बिजली विभाग को आशंका है कि कुछ ग्रामीण इलाकों में मकानों के बाहर निकले छज्जों का इस्तेमाल बिजली चोरी के लिए किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, रात के समय जब निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है, तब कुछ लोग छज्जे की आड़ का इस्तेमाल करके बिजली की केबल को लाइन से जोड़ने की कोशिश करते हैं।
ऐसी स्थिति में बिजली चोरी का पता लगाना भी आसान नहीं होता। मकान का छज्जा सड़क की तरफ निकला होने के कारण उसके पीछे या नीचे से डाली गई केबल कई बार सामान्य नजर में नहीं आती। यही वजह है कि विभाग ने ऐसे मकानों की पहचान के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे कराया।
हालांकि, जिन मकान मालिकों को नोटिस दिया गया है, उनके खिलाफ बिजली चोरी का मामला स्वतः साबित नहीं माना जा सकता। विभाग की ओर से फिलहाल छज्जे और केबल की स्थिति को लेकर आपत्ति तथा बिजली चोरी की आशंका के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। संबंधित लोगों को नोटिस का जवाब देने का मौका दिया गया है।
बिजली केबल से छज्जे टच हुए तो जानलेवा हो सकता है हादसा
मामला सिर्फ बिजली चोरी तक सीमित नहीं है। बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा की भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लाइनें और केबल कई जगह मकानों के सामने से होकर गुजरती हैं। यदि किसी मकान का छज्जा बिजली के तार या केबल से टच हो रहा है तो किसी भी समय करंट फैलने का खतरा पैदा हो सकता है।
अगर किसी कारण से बिजली का तार क्षतिग्रस्त हो जाए और उसका संपर्क छज्जे से हो जाए, तो मकान की बाहरी दीवार या छज्जे पर करंट उतर सकता है। ऐसी स्थिति में घर के लोगों के साथ-साथ सड़क से गुजरने वाले लोगों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
बारिश के मौसम में यह खतरा और बढ़ सकता है, क्योंकि नमी के कारण बिजली के करंट के फैलने की आशंका रहती है। ऐसे में विभाग का कहना है कि बिजली लाइन से निर्धारित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
शहर में लाइन लॉस करीब 14 फीसदी, गांवों में स्थिति ज्यादा खराब
बिजली चोरी और लाइन लॉस को लेकर जिले में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्थिति में काफी अंतर बताया जा रहा है। बिजली विभाग के अनुसार शहर में अभियान चलाने के बाद लाइन लॉस को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है और यह करीब 14 फीसदी के आसपास है।
इसके मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में लाइन लॉस अभी भी करीब 20 फीसदी बताया जा रहा है। कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां लाइन लॉस 40 फीसदी तक पहुंच रहा है। विभाग के लिए ऐसे गांव बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
लाइन लॉस में तकनीकी नुकसान के साथ बिजली चोरी भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। जब किसी क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति के मुकाबले मीटरों के जरिए दर्ज खपत कम होती है, तो विभाग उस क्षेत्र में लाइन लॉस की स्थिति का आकलन करता है। इसके बाद अधिक लाइन लॉस वाले इलाकों में जांच और अभियान चलाए जाते हैं।
रात होते ही बढ़ जाता है गांवों में बिजली का लोड
बिजली विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के लोड को लेकर भी एक महत्वपूर्ण पैटर्न देखा है। विभाग के आकलन के अनुसार कई इलाकों में शाम होने के बाद बिजली का लोड अचानक बढ़ने लगता है।
शहरी क्षेत्रों में शाम के समय लोड बढ़ना सामान्य माना जाता है। नौकरी और कारोबार से लोग घर लौटते हैं। घरों में पंखे, कूलर, टीवी, लाइट और दूसरे बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में भी रात के समय लोड में असामान्य बढ़ोतरी विभाग के लिए सवाल खड़ा करती है।
विभाग का मानना है कि कुछ इलाकों में रात के समय होने वाली बिजली चोरी इस बढ़ोतरी की एक वजह हो सकती है। इसी वजह से ऐसे गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, जहां रात में बिजली की खपत का पैटर्न सामान्य से अलग दिखाई देता है।
लाइन आने के बाद बने मकानों पर खास नजर
सर्वे के दौरान बिजली विभाग को करीब 2 हजार ऐसे मकान मिले हैं, जो बिजली की लाइन या केबल बिछाए जाने के बाद बनाए गए हैं। इन मकानों के निर्माण के दौरान कई लोगों ने सड़क की तरफ छज्जे निकाल दिए।
समस्या तब पैदा हुई जब ये छज्जे बिजली केबल के काफी करीब पहुंच गए या कुछ स्थानों पर केबल से संपर्क में आ गए। विभाग का कहना है कि निर्माण के समय बिजली लाइनों से सुरक्षित दूरी का ध्यान रखना जरूरी है।
अगर मकान बनने के बाद बिजली लाइन और छज्जे के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रहती तो भविष्य में किसी तरह का हादसा हो सकता है। इसके अलावा विभाग को ऐसी संरचनाओं का इस्तेमाल बिजली चोरी के लिए किए जाने की भी आशंका है।
15 दिन में जवाब नहीं दिया तो होगी कार्रवाई
बिजली विभाग की ओर से जारी नोटिस में मकान मालिकों को स्पष्ट समय दिया गया है। संबंधित लोगों से कहा गया है कि वे 15 दिन के भीतर नोटिस का जवाब दें और बिजली केबल से टच या बेहद नजदीक पहुंच रहे छज्जे को हटाएं।
विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में मकान मालिक की ओर से छज्जा नहीं हटाया गया तो विभाग खुद उसे हटाने की कार्रवाई कर सकता है। इससे मकान मालिकों में भी चिंता बढ़ गई है।
हालांकि किसी भी मकान को लेकर अंतिम कार्रवाई संबंधित नियमों और जांच के आधार पर होगी। मकान मालिकों के लिए नोटिस का जवाब देना इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि वे अपनी स्थिति विभाग के सामने स्पष्ट कर सकें।
40 फीसदी लाइन लॉस वाले गांव बने चुनौती
जिले में कुछ गांव ऐसे हैं जहां लाइन लॉस 40 फीसदी तक पहुंचने की बात सामने आई है। इतनी अधिक दर विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बिजली विभाग ऐसे गांवों को चिन्हित कर विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है।
इन इलाकों में बिजली चोरी के संभावित तरीकों की जांच की जा रही है। रात के समय बिजली के लोड में होने वाली बढ़ोतरी, अनधिकृत कनेक्शन और बिजली लाइन के आसपास बनी संरचनाओं पर भी नजर रखी जा रही है।
विभाग का उद्देश्य सिर्फ बिजली चोरी रोकना नहीं, बल्कि बिजली नेटवर्क को सुरक्षित बनाना भी है। यदि कोई केबल अवैध तरीके से लाइन से जोड़ी जाती है तो इससे बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और फॉल्ट की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
बिजली चोरी रोकने के लिए बढ़ेगी निगरानी
विभाग के सामने चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लाइनें लंबी दूरी तक फैली हुई हैं और कई गांवों में मकान बिजली के तारों के काफी करीब बने हुए हैं। ऐसे में हर लाइन और हर मकान की लगातार निगरानी करना आसान नहीं है।
इसी वजह से विभाग अब अधिक लाइन लॉस वाले गांवों को प्राथमिकता दे रहा है। जिन इलाकों में रात के समय अचानक बिजली का लोड बढ़ता है, वहां जांच अभियान चलाया जा सकता है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई के साथ लोगों को बिजली सुरक्षा को लेकर जागरूक करना भी जरूरी है। मकान बनाते समय बिजली की लाइनों से पर्याप्त दूरी रखना और किसी भी स्थिति में अनधिकृत तरीके से बिजली कनेक्शन नहीं लेना जरूरी है।
सिर्फ चोरी नहीं, सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बिजली विभाग की कार्रवाई को केवल बिजली चोरी रोकने की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। मकानों के बाहर निकले छज्जों और बिजली केबल के बीच बना संपर्क आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
अगर कोई व्यक्ति अनजाने में ऐसे छज्जे को छू ले और उसमें करंट उतर चुका हो तो बड़ा हादसा हो सकता है। सड़क से गुजरने वाले बच्चे, बुजुर्ग और अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
इसी वजह से विभाग ने ऐसे मकानों को चिन्हित करके नोटिस जारी किए हैं। अब संबंधित मकान मालिकों के पास 15 दिन का समय है कि वे विभाग को जवाब दें और जरूरी सुधार करें।
अब निगाह 15 दिन बाद होने वाली कार्रवाई पर
जिले के 40 गांवों में करीब 2 हजार मकानों को नोटिस दिए जाने के बाद बिजली चोरी और सुरक्षा को लेकर विभाग का अभियान और तेज होने की संभावना है। खासकर उन गांवों में जहां लाइन लॉस 20 से 40 फीसदी तक बताया जा रहा है, विभाग की निगरानी बढ़ सकती है।
फिलहाल बिजली विभाग का कहना है कि छज्जों की आड़ में बिजली चोरी की आशंका के साथ-साथ बिजली केबल से उनके संपर्क में आने के कारण हादसे का खतरा भी गंभीर है। नोटिस पाने वाले मकान मालिकों को निर्धारित समय के भीतर जवाब देना होगा। इसके बाद नियमों के अनुसार विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने मकान मालिक खुद छज्जे हटाते हैं और कितने मामलों में विभाग को कार्रवाई करनी पड़ती है। साथ ही बिजली चोरी के आरोपों की जांच के बाद वास्तविक स्थिति भी सामने आएगी।

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