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एशिया पर मंडरा रहा बड़ा खतरा! एक साथ 4 तूफानों ने मचाई हलचल, 92 उड़ानें रद्द… अगले 72 घंटे बेहद खतरनाक

 


एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इन दिनों मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर बना हुआ है। उत्तर-पश्चिम प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर के आसपास एक साथ कई उष्णकटिबंधीय मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इनमें टाइफून नारा और टाइफून साउदेल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इनके साथ कुछ अन्य कमजोर सिस्टम भी क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। इस मौसमी हलचल का असर चीन, जापान और आसपास के कई इलाकों में दिखाई दे रहा है।

कहीं तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हो रही है तो कहीं बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई जगहों पर समुद्री गतिविधियां रोकनी पड़ी हैं और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है। हालांकि सोशल मीडिया पर एक साथ चार बेहद शक्तिशाली तूफानों के आने की बातें कही जा रही हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति में सभी सिस्टम की ताकत एक जैसी नहीं है। फिर भी इनकी एक साथ मौजूदगी ने मौसम वैज्ञानिकों और प्रशासन की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

चीन पहुंचा टाइफून नारा

टाइफून नारा ने चीन के दक्षिणी हिस्से में मौसम को काफी प्रभावित किया है। इसका असर विशेष रूप से हैनान, गुआंग्शी और गुआंगदोंग में देखने को मिला। तूफान के साथ तेज हवाएं और भारी बारिश हुई, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हुई।

कई स्थानों पर नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। लगातार बारिश के कारण पहले से ही संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में एहतियाती कदम उठाते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई शुरू की।

कुछ इलाकों में पर्यटन गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। समुद्र तटों और वाटर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई, ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को खतरनाक समुद्री परिस्थितियों से बचाया जा सके।

हैनान में बदला मौसम का पूरा मिजाज

हैनान चीन का प्रमुख पर्यटन क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में घरेलू तथा विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन तूफान के असर से समुद्र की स्थिति खराब होने लगी और तेज हवाओं के साथ बारिश ने जनजीवन प्रभावित कर दिया।

सड़कों पर पानी भरने के साथ कई जगह पेड़ गिरने और यातायात प्रभावित होने की स्थिति सामने आई। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की अपील की।

सबसे बड़ी चिंता उन इलाकों को लेकर रही जहां भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया था। यदि बारिश लगातार जारी रहती है तो बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी रहती है।

हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

भारी बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दक्षिणी चीन के कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान चलाया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अस्थायी राहत केंद्रों में ले जाया गया।

प्रशासन की ओर से निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया। राहत दलों को भी तैयार रखा गया ताकि अचानक बाढ़ आने की स्थिति में लोगों को तेजी से सुरक्षित निकाला जा सके।

इस दौरान बिजली, सड़क और स्थानीय परिवहन जैसी सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई जगहों पर जलभराव के कारण सामान्य आवाजाही मुश्किल हो गई।

नारा के बाद साउदेल ने बढ़ाई चिंता

दक्षिणी चीन में नारा के प्रभाव के बीच टाइफून साउदेल ने भी चिंता बढ़ा दी। यह सिस्टम जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों को प्रभावित करने के बाद चीन के पूर्वी तटीय इलाकों की ओर बढ़ा।

मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार झेजियांग और फुजियान जैसे तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना बनी रही। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में तैयारियां तेज कर दीं।

समुद्र में जाने वाली नौकाओं को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए और मछुआरों को सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दी गई।

जापान में भी तूफान का असर

साउदेल के प्रभाव से जापान के ओकिनावा और आसपास के द्वीपों में भी मौसम खराब हुआ। तेज हवाओं और समुद्री लहरों के कारण हवाई और समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ।

ओकिनावा में खराब मौसम के चलते बड़ी संख्या में उड़ानों को रद्द करना पड़ा। एयरपोर्ट पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कई यात्रियों को अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी।

एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि तूफान की दिशा और हवाओं की तीव्रता के अनुसार उड़ानों का संचालन तेजी से बदल सकता है।

समुद्र में उठीं खतरनाक लहरें

तूफान के दौरान समुद्र में तेज हवाओं के साथ ऊंची लहरें उठने लगीं। इस कारण समुद्री परिवहन को लेकर भी सावधानी बढ़ा दी गई।

मछली पकड़ने वाली नौकाओं और छोटे जहाजों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई। पर्यटन से जुड़ी समुद्री गतिविधियों पर भी कई स्थानों पर रोक लगा दी गई।

समुद्र में तूफान के दौरान सिर्फ तूफान का केंद्र ही खतरनाक नहीं होता। तेज हवाएं और ऊंची लहरें काफी बड़े इलाके को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से प्रशासन पहले से ही समुद्री गतिविधियों को रोक देता है।

चार मौसम प्रणालियां एक साथ क्यों महत्वपूर्ण हैं?

एक ही समय में पश्चिमी प्रशांत और दक्षिण चीन सागर के आसपास कई उष्णकटिबंधीय सिस्टम का सक्रिय रहना मौसम विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि सभी सिस्टम समान रूप से शक्तिशाली नहीं होते। किसी की ताकत अधिक हो सकती है तो कोई कमजोर होकर जल्द खत्म हो सकता है। लेकिन जब कई सिस्टम एक ही बड़े क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं तो मौसम का पूर्वानुमान अधिक जटिल हो जाता है।

इन सिस्टम की दिशा, गति और ताकत लगातार बदल सकती है। यही वजह है कि मौसम विभाग हर कुछ घंटों में नए आंकड़ों के आधार पर चेतावनी जारी करता है।

बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं

टाइफून नारा के जमीन से गुजरने के बाद उसकी ताकत कमजोर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा तुरंत समाप्त हो जाता है। तूफान के साथ हुई भारी बारिश का पानी नदियों और निचले इलाकों में पहुंचने में समय लेता है।

पहले से संतृप्त जमीन पर दोबारा बारिश होने से अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन भी हो सकता है।

इसीलिए दक्षिणी चीन के कई इलाकों में नदियों के जलस्तर और बांधों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पूर्वी चीन में नई चुनौती

साउदेल के कारण अब चीन के पूर्वी तटीय इलाकों पर ध्यान केंद्रित हो गया है। झेजियांग और फुजियान जैसे क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं।

तटीय पर्यटन स्थलों को बंद करना, नावों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और लोगों को समुद्र से दूर रखना जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

अगर तूफान की दिशा में बदलाव होता है तो प्रभावित इलाकों का दायरा भी बदल सकता है। इसलिए प्रशासन लगातार मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रख रहा है।

ताइवान और आसपास के इलाकों में भी असर

इन समुद्री तूफानों का प्रभाव केवल चीन और जापान तक सीमित नहीं रहा। ताइवान और आसपास के समुद्री इलाकों में भी मौसम पर इसका असर देखने को मिला।

कुछ हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी रही। हालांकि हर क्षेत्र में तूफान का प्रभाव अलग-अलग रहा और कई जगहों पर सिस्टम के कमजोर होने की संभावना भी जताई गई।

आम लोगों के लिए क्या सावधानी जरूरी?

ऐसे मौसम में सबसे जरूरी है कि लोग स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। नदी, समुद्र या निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

तूफान के दौरान समुद्र में जाने से बचना चाहिए। यात्रियों को उड़ान या समुद्री यात्रा से पहले संबंधित सेवा प्रदाता से ताजा जानकारी लेनी चाहिए।

तेज हवाओं के दौरान बिजली के तारों, कमजोर पेड़ों और पुराने ढांचों से दूर रहना भी जरूरी है।

अगले कुछ दिन क्यों अहम हैं?

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इस समय सक्रिय मौसम प्रणालियों की वजह से अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण बने हुए हैं। दक्षिणी चीन में नारा के कारण हुई भारी बारिश का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, जबकि साउदेल ने पूर्वी चीन और जापान के आसपास नई चुनौती पैदा की है।

सबसे बड़ी चिंता उन इलाकों को लेकर है जहां पहले से भारी बारिश हो चुकी है। यदि वहां दोबारा तेज बारिश होती है तो बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं, समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण परिवहन तथा पर्यटन गतिविधियों पर असर जारी रह सकता है।

फिलहाल एशिया-प्रशांत में मौसम का यह दौर पूरी तरह शांत होता नजर नहीं आ रहा। एक तरफ नारा अपना असर छोड़ चुका है, तो दूसरी तरफ साउदेल की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में तूफानों की दिशा, उनकी ताकत और बारिश का पैटर्न तय करेगा कि हालात कितने गंभीर होते हैं।

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