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कुछ सेकंड में बदल गया पूरा मंजर! पानी में समा गया बेली ब्रिज, अब लापता है एक शख्स



उत्तराखंड के चमोली जिले में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। ज्योतिर्मठ-मलारी-नीती राष्ट्रीय राजमार्ग पर तमक नाले में अचानक आई बाढ़ ने कुछ ही पलों में ऐसा कहर बरपाया कि मजबूत माना जाने वाला बेली ब्रिज भी तेज बहाव के सामने टिक नहीं सका। देखते ही देखते पुल का बड़ा हिस्सा उफनते पानी में समा गया। इस दौरान एक वाहन भी तेज बहाव की चपेट में आ गया और सीमा सड़क संगठन यानी BRO के एक चालक के लापता होने की सूचना है।

घटना ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है। अचानक बढ़े पानी, मलबे और तेज बहाव के कारण आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घटना के बाद प्रशासन, SDRF और NDRF की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गई हैं। लापता चालक की तलाश लगातार की जा रही है।

अचानक उफना तमक नाला, कुछ ही पलों में बदल गया पूरा मंजर

बताया जा रहा है कि चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बारिश और बादल फटने जैसी स्थिति के बाद तमक नाले में अचानक पानी बढ़ गया। शुरुआत में पानी का स्तर बढ़ता दिखाई दिया, लेकिन कुछ ही देर में नाला बेहद तेज धारा में बदल गया।

तेज बहाव के साथ पानी में भारी मात्रा में मलबा और पत्थर भी बहकर नीचे आने लगे। देखते ही देखते पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि मलारी-नीती मार्ग पर बना बेली ब्रिज इसकी चपेट में आ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल पर पानी और मलबे का दबाव लगातार बढ़ता गया। कुछ ही क्षणों में पुल का ढांचा हिलने लगा और फिर तेज धारा उसे अपने साथ बहाकर ले गई। इस पूरी घटना ने पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ के खतरनाक रूप को एक बार फिर सामने ला दिया है।

BRO का चालक भी तेज बहाव में बहा

पुल के बहने के दौरान सीमा सड़क संगठन के एक चालक के भी लापता होने की सूचना सामने आई है। बताया जा रहा है कि लापता चालक का नाम पंकज है और वह पिथौरागढ़ जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, पंकज घटनास्थल के आसपास मौजूद थे और तमक नाले में बढ़ते पानी की स्थिति को देख रहे थे। इसी दौरान अचानक पानी का बहाव बेहद तेज हो गया और पुल का हिस्सा ढह गया। वह भी तेज धारा की चपेट में आ गए।

घटना के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। राहत और बचाव दल नदी और नाले के आसपास संभावित स्थानों पर उनकी तलाश कर रहे हैं। तेज बहाव और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं।

एक वाहन के भी बाढ़ के पानी में बह जाने की जानकारी सामने आई है। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में पानी की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। उफनता पानी लोहे के पुल और आसपास मौजूद भारी ढांचे को भी अपनी ओर खींचता दिखाई देता है।

पुल टूटते ही सीमा क्षेत्र से संपर्क हुआ प्रभावित

तमक नाले पर बना यह पुल सिर्फ स्थानीय आवाजाही के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि यह सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम मार्ग का हिस्सा था। ज्योतिर्मठ से मलारी और नीती घाटी की तरफ जाने वाले इस मार्ग से सीमा क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाती है।

पुल के बह जाने के बाद नीती और आसपास के कई गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नीती घाटी के कई गांवों के लिए यह मार्ग रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ राशन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामान की आपूर्ति का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में सड़क संपर्क बाधित होने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

सीमा क्षेत्र की ओर जाने वाले सुरक्षा और अन्य जरूरी वाहनों की आवाजाही पर भी इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि प्रशासन और BRO के सामने जल्द से जल्द वैकल्पिक रास्ता तैयार करने और संपर्क बहाल करने की बड़ी चुनौती है।

NDRF और SDRF की टीमें मौके पर रवाना

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। राहत और बचाव कार्य के लिए SDRF तथा NDRF की टीमों को घटनास्थल की ओर रवाना किया गया। स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं।

सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता BRO चालक को तलाशना है। बचाव दल नाले के आसपास के क्षेत्रों, नदी की दिशा और संभावित बहाव वाले इलाकों में खोज अभियान चला रहे हैं।

हालांकि तेज पानी और लगातार बदलते मौसम के कारण बचाव कार्य आसान नहीं है। पहाड़ी इलाकों में नदी और नालों का बहाव अचानक दिशा बदल सकता है। मलबे के नीचे व्यक्ति के दबे होने की संभावना भी रहती है, इसलिए राहत दल बेहद सावधानी के साथ अभियान चला रहे हैं।

कई रास्तों पर आवाजाही रोकने की नौबत

पुल टूटने के बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में आवाजाही को लेकर भी सावधानी बढ़ा दी है। जहां भी पानी और मलबे का खतरा है, वहां लोगों को जाने से रोका जा रहा है।

पहाड़ों में बारिश के दौरान सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि जिस रास्ते पर कुछ मिनट पहले तक सामान्य आवाजाही हो रही होती है, वही रास्ता अचानक पानी और मलबे की चपेट में आ सकता है।

इसी वजह से प्रशासन स्थानीय लोगों और यात्रियों को अनावश्यक जोखिम न लेने की सलाह दे रहा है। नदी और नालों के किनारे जाना इस समय बेहद खतरनाक हो सकता है।

अगले एक-दो दिनों में संपर्क बहाल करने की कोशिश

पुल के बह जाने के बाद प्रशासन और BRO की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने पर काम शुरू किया गया है। अधिकारियों का प्रयास है कि प्रभावित क्षेत्रों तक जल्द से जल्द सड़क संपर्क बहाल किया जा सके।

इसके लिए अस्थायी रास्ते, वैकल्पिक क्रॉसिंग और अन्य इंजीनियरिंग विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। मौसम ने साथ दिया तो अगले एक-दो दिनों में आवाजाही बहाल करने की कोशिश की जा सकती है।

हालांकि पहाड़ों में सड़क और पुल को नुकसान होने के बाद मरम्मत का काम मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होता है। भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाना, मलबा हटाना और तेज बहाव के बीच नया रास्ता तैयार करना अपने आप में बड़ी चुनौती होती है।

तमक नाला पहले भी दिखा चुका है अपना खौफनाक रूप

तमक नाला क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं नई नहीं हैं। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां अचानक पानी बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है।

बारिश के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों से पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर और मलबा नीचे की ओर आता है। इससे सड़कें टूट जाती हैं और पुलों पर भी जबरदस्त दबाव पड़ता है।

नजदीकी धौलीगंगा नदी और उसकी सहायक जलधाराओं में पानी का स्तर बढ़ने के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में मौसम खराब होने पर प्रशासन को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।

मुख्यमंत्री धामी ने लिया घटना का संज्ञान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा है।

सीमा क्षेत्र से जुड़े गांवों में जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राशन, भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से घटनाक्रम पर लगातार नजर रखने और मौसम की स्थिति के अनुसार जरूरी कदम उठाने को कहा है।

पहाड़ों में अभी भी खतरा टला नहीं

चमोली में हुई इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मानसून के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हालात कितनी तेजी से बदल सकते हैं। कुछ मिनटों की तेज बारिश किसी सामान्य नाले को खतरनाक नदी में बदल सकती है और मजबूत से मजबूत दिखाई देने वाले पुल को भी बहा सकती है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता लापता BRO चालक को लेकर है। बचाव दल उनकी तलाश में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही प्रशासन के सामने दर्जनों गांवों का संपर्क बहाल करने और सीमा क्षेत्र में जरूरी आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती भी है।

मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच आने वाले दिनों में चमोली समेत उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना है। ऐसे में नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

तमक नाले की इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ों में मानसून की ताकत का खौफनाक चेहरा दिखा दिया है। जिस पुल पर रोजाना वाहन गुजरते थे, वह कुछ ही पलों में उफनते पानी का हिस्सा बन गया। अब निगाहें राहत और बचाव अभियान पर टिकी हैं और सबसे बड़ा सवाल यही है कि तेज बहाव में लापता हुए BRO चालक पंकज का पता कब तक चल पाता है।

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