Breaking News

जिस इमारत को 10 साल पहले गिरना था... वहीं चली गईं 15 जिंदगियां! अब कोर्ट ने दिखाया सख्त रुख



नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड, जिसमें 15 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई थी, अब सुप्रीम कोर्ट की सख्त निगरानी में है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा है कि अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। अदालत की इस टिप्पणी ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिस भवन में बाद में भीषण आग लगी, उसके खिलाफ वर्षों पहले कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन समय रहते उन आदेशों का पालन नहीं किया गया।

इसी को गंभीर मानते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

SIT रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार स्वयं अदालत में उपस्थित हों।

इसके साथ ही उन्हें विशेष जांच दल (SIT) की पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करनी होगी।

हालांकि अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है।

क्या है पूरा मामला?

अलीगंज स्थित जिस इमारत में जून 2026 में भीषण आग लगी थी, वहां एक कोचिंग सेंटर संचालित किया जा रहा था।

आग इतनी भीषण थी कि कई छात्र बाहर निकलने का मौका ही नहीं पा सके।

इस दर्दनाक हादसे में 15 छात्रों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।

घटना के बाद पूरे देश में सुरक्षा मानकों और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

2016 में ही जारी हो गया था ध्वस्तीकरण का आदेश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत को बताया कि संबंधित भवन के खिलाफ पहली कार्रवाई 10 मई 2016 को हुई थी।

तब उस भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था।

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि केवल दो महीने बाद, 5 जुलाई 2016 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए अपना ही आदेश वापस ले लिया।

फिर वर्षों तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने के बाद कई वर्षों तक उस भवन के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

बताया गया कि भवन का उपयोग जारी रहा और सुरक्षा संबंधी गंभीर सवालों के बावजूद प्रशासन ने निर्णायक कदम नहीं उठाए।

इसी भवन में बाद में जून 2026 में भीषण अग्निकांड हुआ।

हादसे के बाद तोड़ दी गई इमारत

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अग्निकांड के बाद संबंधित भवन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त कर दिया गया।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई।

अदालत ने कहा कि यदि पहले से कार्रवाई के पर्याप्त आधार मौजूद थे तो दुर्घटना का इंतजार क्यों किया गया।

मास्टर प्लान के उल्लंघन पर कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंधित भवन में मास्टर प्लान और भूमि उपयोग (Land Use) संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ।

इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

अदालत ने कहा कि यह मामला केवल एक इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में शहरी नियोजन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

पूरे देश के लिए अहम मामला

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि 25 मार्च 2026 को ही इस मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया था।

इसी के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है।

अदालत का मानना है कि देश के सभी बड़े शहरों में भवन निर्माण नियमों, मास्टर प्लान और सार्वजनिक सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

जांच के लिए बनाई गई थी SIT

अग्निकांड के बाद 23 जून 2026 को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।

इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि—

  • आग लगने के पीछे क्या कारण थे,

  • सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं,

  • भवन संचालन में किन नियमों का उल्लंघन हुआ,

  • तथा प्रशासनिक स्तर पर किसकी जिम्मेदारी बनती है।

अब इसी जांच रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया है।

घटनाक्रम एक नजर में

  • 10 मई 2016: भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी।

  • 5 जुलाई 2016: LDA ने तकनीकी आधार पर अपना आदेश वापस लिया।

  • 22 जून 2026: कोचिंग सेंटर में भीषण आग, 15 छात्रों की मौत।

  • 23 जून 2026: SIT का गठन।

  • 25 जुलाई 2026: हादसे के बाद भवन ध्वस्त।

  • 6 अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट ने LDA उपाध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किया और व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया।

जवाबदेही तय करने पर जोर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख केवल एक हादसे तक सीमित नहीं है।

यदि अदालत यह पाती है कि पहले से कार्रवाई संभव होने के बावजूद अधिकारियों ने लापरवाही बरती, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

इस मामले का असर भविष्य में भवन सुरक्षा, कोचिंग संस्थानों के संचालन और शहरी नियोजन से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए LDA के उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और SIT रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना हुई है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब पूरे देश की नजरों में रहेगी, क्योंकि यह केवल एक हादसे की जांच नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बन चुका है।

कोई टिप्पणी नहीं