15 अगस्त की फाइल में छिपा है बड़ा राज! मंजूरी मिली तो बदल जाएगा पूरा खेल
नई दिल्ली: भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम जल्द उठाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी सैफरान (Safran) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) के साथ मिलकर 120 किलोन्यूटन (kN) क्षमता वाले अत्याधुनिक फाइटर जेट इंजन के संयुक्त विकास से जुड़े प्रस्ताव पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के समक्ष रखा जा सकता है। हालांकि, इस पर अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
यदि यह परियोजना स्वीकृत होती है, तो भारत पहली बार उन्नत लड़ाकू विमानों के लिए उच्च क्षमता वाले आधुनिक इंजन के विकास में एक नई छलांग लगा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है।
दशकों पुरानी चुनौती
भारत ने मिसाइल, परमाणु तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और उपग्रह प्रक्षेपण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। लेकिन लड़ाकू विमानों के लिए अत्याधुनिक जेट इंजन विकसित करना अब तक सबसे कठिन तकनीकी चुनौतियों में से एक रहा है।
इसी कारण भारतीय वायुसेना के कई लड़ाकू विमान लंबे समय तक विदेशी इंजनों पर निर्भर रहे। इंजन तकनीक को दुनिया की सबसे जटिल रक्षा तकनीकों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें अत्यधिक तापमान, उच्च दबाव और सटीक इंजीनियरिंग का संयोजन होता है।
क्या है 120 kN इंजन परियोजना?
प्रस्तावित परियोजना के तहत लगभग 120 किलोन्यूटन थ्रस्ट क्षमता वाला आधुनिक टर्बोफैन इंजन विकसित किया जाएगा।
यह इंजन भविष्य में भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान AMCA Mk-2 को शक्ति देने के लिए विकसित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षमता का इंजन सुपरक्रूज़, अधिक हथियार क्षमता और बेहतर युद्धक प्रदर्शन के लिए आवश्यक माना जाता है।
सैफरान और GTRE की साझेदारी
फ्रांस की सैफरान और DRDO की GTRE के बीच इस इंजन के संयुक्त विकास को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव में इंजन के डिजाइन, विकास, परीक्षण और उत्पादन का बड़ा हिस्सा भारत में करने की योजना शामिल है। सरकार का उद्देश्य केवल इंजन खरीदना नहीं, बल्कि देश में पूरी तकनीकी क्षमता विकसित करना है।
पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण पर जोर
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण (Full Technology Transfer) और भारत के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत चाहता है कि भविष्य में इंजन में संशोधन, उन्नयन या निर्यात जैसे निर्णय लेने के लिए किसी विदेशी अनुमति की आवश्यकता न हो। इसी कारण सरकार इस परियोजना में अधिकतम तकनीकी स्वायत्तता पर जोर दे रही है।
'हॉट सेक्शन' तकनीक क्यों अहम?
फाइटर जेट इंजन का सबसे जटिल हिस्सा उसका हॉट सेक्शन माना जाता है।
यहीं सबसे अधिक तापमान उत्पन्न होता है, जो 2,000 केल्विन से भी अधिक पहुंच सकता है। ऐसे वातावरण में काम करने के लिए विशेष धातुओं और सिंगल-क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की आवश्यकता होती है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यही तकनीक दुनिया के चुनिंदा देशों के पास उपलब्ध है और इसे हासिल करना किसी भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
निजी कंपनियों की भी होगी भूमिका
इस परियोजना में केवल सरकारी संस्थान ही नहीं, बल्कि निजी उद्योगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) तथा अन्य भारतीय औद्योगिक समूह भविष्य में इस कार्यक्रम के निर्माण और उत्पादन तंत्र का हिस्सा बन सकते हैं।
सरकार का लक्ष्य देश में संपूर्ण एयरो-इंजन इकोसिस्टम विकसित करना है, ताकि भविष्य में रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
AMCA को मिलेगा नया इंजन
भारत का महत्वाकांक्षी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम भविष्य की वायु शक्ति का आधार माना जा रहा है।
AMCA को पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान बनाने की योजना है, जिसमें कम रडार सिग्नेचर, आधुनिक सेंसर, नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता और उन्नत हथियार प्रणालियां होंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रस्तावित 120 kN इंजन का उद्देश्य AMCA Mk-2 को आवश्यक शक्ति प्रदान करना है।
कावेरी परियोजना से मिली सीख
भारत ने पहले स्वदेशी कावेरी इंजन परियोजना पर भी काम किया था, लेकिन वह निर्धारित समय पर लड़ाकू विमान के लिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं दे सकी।
हालांकि उस परियोजना से प्राप्त अनुभव ने भारतीय वैज्ञानिकों को इंजन डिजाइन, परीक्षण और सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण तकनीकी आधार प्रदान किया।
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि नई परियोजना उन्हीं अनुभवों के आधार पर आगे बढ़ रही है।
वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य ने बढ़ाई जरूरत
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आधुनिक युद्धों ने यह स्पष्ट किया है कि रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता किसी भी देश की रणनीतिक आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी संकट के दौरान विदेशी आपूर्ति बाधित हो जाए, तो स्वदेशी तकनीक ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।
इसी कारण भारत अब मिसाइलों, ड्रोन, रडार और लड़ाकू विमानों के साथ-साथ उनके इंजन भी देश में विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
अंतिम मंजूरी का इंतजार
हालांकि इस परियोजना को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अभी तक कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
120 किलोन्यूटन क्षमता वाले आधुनिक फाइटर जेट इंजन के संयुक्त विकास की प्रस्तावित परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकती है। हालांकि अभी अंतिम सरकारी मंजूरी बाकी है, लेकिन यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो भविष्य के AMCA जैसे लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी इंजन विकसित करने का मार्ग और मजबूत होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को उन्नत एयरो-इंजन तकनीक विकसित करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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