किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है ये खामोश संकेत! रात में बार-बार उठना सिर्फ आदत नहीं, कहीं बीमारी का इशारा तो नहीं?
किडनी हमारे शरीर के उन महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है, जिनके बिना शरीर का सामान्य संतुलन बनाए रखना मुश्किल है। दोनों किडनी खून को फिल्टर करने, शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और कई जरूरी हार्मोन से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। समस्या यह है कि किडनी की बीमारी शुरुआती चरणों में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है।
इसी वजह से क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD को कई बार “साइलेंट” बीमारी भी कहा जाता है। व्यक्ति को तब तक परेशानी महसूस नहीं होती, जब तक किडनी की कार्यक्षमता काफी प्रभावित न हो जाए। यही कारण है कि शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को समझना और जोखिम वाले लोगों की नियमित जांच कराना महत्वपूर्ण है।
हालांकि, नीचे बताए गए लक्षण केवल किडनी की बीमारी के कारण ही नहीं होते। कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इनका कारण बन सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
1. बार-बार पेशाब आना या पेशाब के पैटर्न में बदलाव
किडनी की समस्या होने पर पेशाब करने की आदत में बदलाव दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा बार पेशाब आ सकता है, खासकर रात के समय।
लेकिन बार-बार पेशाब आने का मतलब हमेशा किडनी की बीमारी नहीं होता। डायबिटीज, मूत्र मार्ग का संक्रमण, ज्यादा पानी पीना या कुछ अन्य समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं।
अगर पेशाब के पैटर्न में अचानक और लगातार बदलाव आया है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
2. पेशाब में झाग या असामान्य बदलाव
किडनी खून को फिल्टर करते समय शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन को सामान्य परिस्थितियों में पेशाब में ज्यादा मात्रा में जाने से रोकती है।
अगर किडनी के फिल्टर को नुकसान पहुंचता है तो पेशाब में प्रोटीन की मात्रा बढ़ सकती है। कुछ लोगों को इसके कारण पेशाब में लगातार ज्यादा झाग दिखाई दे सकता है।
हालांकि हर बार झागदार पेशाब का मतलब किडनी की बीमारी नहीं होता। पेशाब की गति, पानी की कमी और टॉयलेट की परिस्थितियां भी झाग पैदा कर सकती हैं।
लेकिन अगर यह बदलाव लगातार बना रहे तो यूरिन टेस्ट करवाना उपयोगी हो सकता है।
3. पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
किडनी शरीर में पानी और नमक का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है।
इसकी वजह से पैरों, टखनों या कभी-कभी आंखों के आसपास सूजन दिखाई दे सकती है।
अगर सुबह आंखों के आसपास सूजन और दिन के दौरान पैरों या टखनों में सूजन बार-बार हो रही है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें किडनी, हृदय और लिवर से संबंधित समस्याएं भी शामिल हैं।
इसलिए लगातार सूजन को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
4. लगातार थकान और कमजोरी
किडनी की गंभीर बीमारी में व्यक्ति को अत्यधिक थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है।
किडनी शरीर में एरिथ्रोपोइटिन नामक हार्मोन बनाने में मदद करती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण से जुड़ा होता है। किडनी की बीमारी में एनीमिया विकसित हो सकता है और इससे थकान तथा कमजोरी बढ़ सकती है।
हालांकि थकान बेहद सामान्य लक्षण है और इसके पीछे नींद की कमी, तनाव, एनीमिया, थायराइड, संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
अगर थकान लंबे समय से बनी हुई है और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो जांच करवाना जरूरी है।
5. त्वचा में खुजली और रूखापन
किडनी की कार्यक्षमता काफी कम होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं। कुछ मरीजों में इसके साथ त्वचा में खुजली, रूखापन या असहजता जैसी समस्या दिखाई दे सकती है।
खुजली का कारण केवल किडनी नहीं है। एलर्जी, त्वचा संबंधी बीमारी, लिवर की समस्या और कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
लेकिन अगर लगातार खुजली के साथ सूजन, थकान, पेशाब में बदलाव या अन्य लक्षण मौजूद हैं, तो डॉक्टर से जांच की सलाह लेना उचित है।
6. भूख कम होना, मतली या उल्टी
जब किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ बढ़ सकते हैं। इससे कुछ लोगों को भूख कम लगना, मतली या उल्टी जैसी समस्या हो सकती है।
कभी-कभी मुंह में अजीब स्वाद या भोजन के प्रति अरुचि भी महसूस हो सकती है।
लेकिन ये लक्षण पेट की बीमारी, संक्रमण, दवाओं या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं।
अगर मतली या भूख में कमी लगातार बनी हुई है और इसके साथ वजन कम होना या अत्यधिक कमजोरी भी है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
7. सांस फूलना और नींद में परेशानी
किडनी की गंभीर समस्या में शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने के कारण कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। एनीमिया भी कमजोरी और सांस फूलने में योगदान दे सकता है।
कुछ मरीजों में रात में बेचैनी, नींद खराब होना या पैरों में असहजता जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
अगर सांस अचानक बहुत ज्यादा फूल रही है, सीने में दर्द है या आराम की स्थिति में सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो इसे केवल किडनी की समस्या मानकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है।
किडनी की बीमारी के सबसे बड़े जोखिम कारक कौन से हैं?
किडनी की बीमारी का जोखिम हर व्यक्ति में समान नहीं होता। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
इसके अलावा हृदय रोग, मोटापा, धूम्रपान, परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास और उम्र बढ़ना भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
कुछ दवाओं का लंबे समय तक गलत तरीके से इस्तेमाल भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर दर्द की कुछ दवाओं का अत्यधिक या बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
इसलिए नियमित रूप से दर्द की दवा लेने वाले लोगों को डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।
डायबिटीज वाले लोगों को ज्यादा सावधान क्यों रहना चाहिए?
डायबिटीज लंबे समय तक नियंत्रित न रहे तो शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से डायबिटीज से पीड़ित लोगों में किडनी की नियमित जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना किडनी की सुरक्षा में मदद कर सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर भी कर सकता है नुकसान
ब्लड प्रेशर लंबे समय तक ज्यादा रहने पर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी ओर किडनी की बीमारी भी ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकती है।
यानी दोनों स्थितियों के बीच गहरा संबंध है।
अगर किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर है तो उसे इसे केवल सिरदर्द होने पर जांचने के बजाय नियमित रूप से मॉनिटर करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना चाहिए।
किडनी की जांच कैसे होती है?
किडनी की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच कर सकते हैं।
ब्लड टेस्ट में सीरम क्रिएटिनिन की जांच की जाती है। इससे eGFR की गणना करने में मदद मिलती है, जो किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान देता है।
इसके अलावा यूरिन टेस्ट के जरिए पेशाब में प्रोटीन या एल्ब्यूमिन की जांच की जा सकती है। कुछ मामलों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या अन्य इमेजिंग टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
किस व्यक्ति को कौन सी जांच चाहिए, यह उसकी उम्र, लक्षण और जोखिम कारकों पर निर्भर करता है।
किडनी की बीमारी में दर्द हमेशा क्यों नहीं होता?
किडनी की बीमारी को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक है कि किडनी खराब होगी तो कमर या पेट में दर्द जरूर होगा।
ऐसा जरूरी नहीं है।
क्रॉनिक किडनी डिजीज शुरुआती चरणों में अक्सर बिना दर्द के आगे बढ़ सकती है। कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है जब किसी अन्य कारण से ब्लड या यूरिन टेस्ट कराया जाता है।
इसी वजह से केवल दर्द का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।
क्या ज्यादा पानी पीने से किडनी हमेशा स्वस्थ रहती है?
पर्याप्त पानी पीना शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, किडनी उतनी ही स्वस्थ रहेगी।
पानी की जरूरत व्यक्ति की उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
कुछ गंभीर किडनी या हृदय संबंधी समस्याओं में डॉक्टर तरल पदार्थ की मात्रा सीमित करने की सलाह भी दे सकते हैं।
इसलिए किसी सोशल मीडिया सलाह के आधार पर जरूरत से ज्यादा पानी पीना उचित नहीं है।
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले उन बीमारियों को नियंत्रित करना जरूरी है जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना, संतुलित भोजन करना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और स्वस्थ वजन बनाए रखना उपयोगी हो सकता है।
धूम्रपान से बचना भी महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का लंबे समय तक सेवन नहीं करना चाहिए।
नमक का अत्यधिक सेवन कम करना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर या किडनी से जुड़ी समस्या है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर पेशाब अचानक बहुत कम हो जाए, शरीर में तेजी से सूजन आने लगे, सांस लेने में परेशानी हो, लगातार उल्टी हो, बेहोशी या भ्रम जैसी स्थिति बने, या तेज कमजोरी के साथ स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
इसी तरह पेशाब में खून दिखाई देना भी ऐसा लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सबसे बड़ी गलती है लक्षणों का इंतजार करना
किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआत में यह अक्सर चुपचाप बढ़ती रहती है। जब लक्षण स्पष्ट होते हैं, तब कुछ लोगों में बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी हो सकती है।
इसलिए केवल शरीर में दर्द या पेशाब की समस्या आने का इंतजार करना सही तरीका नहीं है।
अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मोटापा या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास है, तो डॉक्टर से नियमित किडनी जांच के बारे में बात करना बेहद महत्वपूर्ण है।
पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में लगातार बदलाव, अत्यधिक थकान, भूख कम होना, मतली, खुजली या सांस फूलना जैसे लक्षण कई अलग-अलग बीमारियों में दिखाई दे सकते हैं। इसलिए इन लक्षणों को देखकर खुद से किडनी फेलियर का निष्कर्ष निकालने के बजाय उचित जांच करवानी चाहिए।
समय पर पता चलने वाली किडनी की बीमारी को कई मामलों में नियंत्रित करने और उसकी प्रगति को धीमा करने में मदद मिल सकती है। इसलिए शरीर के छोटे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

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