video : सरकारी नौकरी का गजब खेल! ₹48 हजार सैलरी वाला खुद गायब, ₹300 में दूसरा कर रहा सफाई… आखिर किसकी चल रही थी ये व्यवस्था?
चकिया। उत्तर प्रदेश के चकिया क्षेत्र में सफाई व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था और कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक सफाईकर्मी को हर महीने करीब 48 हजार रुपये वेतन मिलता है, लेकिन वह खुद नियमित रूप से सफाई का काम करने के बजाय कथित तौर पर अपनी जगह दूसरे व्यक्ति से काम करवा रहा है।
बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति से सफाई का काम कराया जाता है, उसे कथित तौर पर करीब 300 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं। ऐसे में आरोप यह है कि कर्मचारी खुद ड्यूटी किए बिना भी सरकारी वेतन का लाभ उठा रहा है।
हालांकि, इस पूरे मामले की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है और संबंधित कर्मचारी या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों को जांच का विषय माना जाना चाहिए।
नौकरी किसी की, काम किसी और का?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आरोप सही हैं तो आखिर सरकारी रिकॉर्ड में तैनात कर्मचारी कौन है और जमीन पर सफाई का काम कौन कर रहा है?
सरकारी नौकरी या नियमित नियुक्ति में कर्मचारी को निर्धारित जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। अगर कोई कर्मचारी अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति से नियमित रूप से काम करवाता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा कर सकता है।
ऐसे में यह जांच जरूरी हो जाती है कि संबंधित कर्मचारी की उपस्थिति कैसे दर्ज होती है और उसके काम की निगरानी किस स्तर पर की जाती है।
₹300 रोज देकर कितना बच रहा पैसा?
आरोपों के मुताबिक, जिस व्यक्ति से कथित तौर पर सफाई कराई जा रही है, उसे करीब 300 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं।
अगर 30 दिनों का हिसाब लगाया जाए तो यह रकम लगभग 9,000 रुपये महीने बैठती है।
यानी आरोप के अनुसार करीब 48 हजार रुपये वेतन पाने वाला कर्मचारी अगर खुद काम नहीं करता और दूसरे व्यक्ति को करीब 9 हजार रुपये देकर काम करवाता है, तो बाकी रकम उसके पास बचने का सवाल उठता है।
हालांकि, यह सिर्फ उपलब्ध आरोपों के आधार पर किया गया गणित है। वास्तविक वेतन, उपस्थिति, भुगतान और काम की स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज
अगर मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
क्या संबंधित कर्मचारी रोजाना अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहता है?
क्या उसकी उपस्थिति रजिस्टर या डिजिटल सिस्टम में दर्ज होती है?
यूपी के चकिया में चल रहा है गजब का खेल! 😎
— सीतामढ़ी जिला 🇮🇳 (@SitamarhiJila) August 12, 2026
एक सफाईकर्मी की सैलरी करीब ₹48 हजार है, लेकिन आरोप है कि वह खुद काम करने के बजाय अपने बदले एक दूसरे व्यक्ति से रोज ₹300 में काम करवा रहा है।
यानी खुद काम किए बिना भी करीब ₹39 हजार महीने की सैलरी उठाने का खेल चल रहा है।
नौकरी किसकी,… pic.twitter.com/KmO5cKYGOI
क्या अधिकारी नियमित रूप से उसके काम का निरीक्षण करते हैं?
और सबसे अहम सवाल—अगर वह खुद काम नहीं करता तो उसकी जगह काम करने वाला व्यक्ति कौन है?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सरकारी वेतन और ड्यूटी पर उठे सवाल
सरकारी कर्मचारियों को वेतन जनता के पैसे से दिया जाता है। ऐसे में किसी कर्मचारी के खिलाफ ड्यूटी से बचने या अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति से काम करवाने का आरोप बेहद गंभीर माना जा सकता है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
दूसरी ओर, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो कर्मचारी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।
क्या अधिकारियों को नहीं थी जानकारी?
मामले का एक अहम पहलू निगरानी व्यवस्था भी है।
अगर कोई कर्मचारी लंबे समय से अपनी जगह दूसरे व्यक्ति से काम करवा रहा है, तो सवाल उठता है कि संबंधित अधिकारी और पर्यवेक्षक इसकी जानकारी कैसे नहीं कर पाए?
सफाई व्यवस्था में कर्मचारियों की मौजूदगी और उनके द्वारा किए जा रहे काम की निगरानी आम तौर पर स्थानीय स्तर पर की जाती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से दूसरे के स्थान पर काम कर रहा था तो उसकी पहचान और नियुक्ति की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
जनता के सामने भी बड़ा सवाल
सफाई व्यवस्था सीधे आम लोगों से जुड़ी होती है। शहर और गांव की सड़कों, नालियों तथा सार्वजनिक स्थानों की सफाई के लिए तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है।
अगर किसी क्षेत्र में सफाईकर्मी अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहता तो इसका सीधा असर सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है।
ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस कर्मचारी को सफाई की जिम्मेदारी दी गई है, वह खुद काम कर रहा है या नहीं।
वायरल दावे की भी होनी चाहिए जांच
इस मामले को लेकर अगर सोशल मीडिया पर वीडियो, फोटो या अन्य दावे सामने आए हैं तो उनकी भी जांच जरूरी है।
किसी वायरल वीडियो को देखकर सीधे किसी कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है और वह किसके आदेश पर काम कर रहा था—इन सभी पहलुओं की पुष्टि आवश्यक है।
इसी तरह वेतन की वास्तविक राशि और कर्मचारी की नियुक्ति की प्रकृति की भी आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि होनी चाहिए।
अगर आरोप सही निकले तो कार्रवाई जरूरी
यदि जांच में यह साबित होता है कि कर्मचारी वास्तव में अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति से नियमित रूप से सरकारी काम करवा रहा था, तो मामला केवल ड्यूटी से अनुपस्थित रहने तक सीमित नहीं रहेगा।
ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग को नियुक्ति नियमों और सेवा शर्तों के अनुसार कार्रवाई करनी पड़ सकती है। साथ ही यह भी जांचना जरूरी होगा कि इतने लंबे समय तक यह व्यवस्था कैसे चलती रही।
₹48 हजार की नौकरी और ₹300 में दूसरा कर्मचारी? आखिर चकिया में चल क्या रहा है?
चकिया के इस कथित मामले ने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर नौकरी एक व्यक्ति के नाम है, वेतन उसे मिल रहा है और काम कोई दूसरा कर रहा है, तो इस व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच के बाद ही साफ होगा कि क्या वास्तव में सफाईकर्मी अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति से काम करवा रहा था या सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा गलत है।
अब नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच करता है या नहीं और अगर जांच होती है तो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नौकरी और जमीन पर काम करने वाले व्यक्ति के बीच का यह कथित अंतर आखिर कितना सच निकलता है।

कोई टिप्पणी नहीं