Breaking News

71वें घंटे में दिल्ली पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा! आसमान में ही खत्म हो गई मिसाइल, फिर भारत ने जो किया उसने पलट दिया पूरा खेल



भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में हुए सैन्य संघर्ष को लेकर अब कई ऐसे दावे और घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, जिन पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में डिस्कवरी की दो भागों वाली डॉक्यूमेंट्री ‘Declassified: Operation Sindoor’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिए गए रणनीतिक फैसलों और सैन्य गतिविधियों के पीछे की कहानी को सामने रखने की कोशिश की है। डॉक्यूमेंट्री में भारतीय सैन्य नेतृत्व, ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों, ग्राउंड ऑपरेटर्स और रक्षा विशेषज्ञों के दृष्टिकोण शामिल किए गए हैं।

डॉक्यूमेंट्री को लेकर सामने आए विवरण में संघर्ष के 71वें घंटे के आसपास पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर एक बड़े हमले की कोशिश का जिक्र किया गया है। दावा है कि इस हमले का मकसद भारत पर रणनीतिक दबाव बढ़ाना और संघर्ष की दिशा को बदलना था। इसी दौरान भारत की वायु रक्षा प्रणाली की भूमिका भी चर्चा में आती है।

हालांकि, इस घटना से जुड़े सभी ऑपरेशनल विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो पाई है। इसलिए 71वें घंटे, मिसाइल के प्रकार और उसके इंटरसेप्शन से जुड़े दावों को डॉक्यूमेंट्री में प्रस्तुत विवरण के रूप में देखना जरूरी है।

88 घंटे चला था ऑपरेशन सिंदूर

सबसे पहले ऑपरेशन सिंदूर की पूरी पृष्ठभूमि समझना जरूरी है। डिस्कवरी के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री 88 घंटे चले सैन्य अभियान की योजना, तैयारियों और उसके दौरान लिए गए अहम फैसलों पर केंद्रित है। इसमें पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की रणनीतिक तैयारियों से लेकर 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने और उसके बाद हुए सैन्य घटनाक्रम तक को दिखाया गया है।

भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे से जुड़े नौ ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही थी। भारत के रक्षा मंत्रालय ने उस समय कार्रवाई को केंद्रित, मापी हुई और गैर-उत्तेजक प्रकृति की कार्रवाई बताया था।

इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा और पश्चिमी सीमा पर सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं। इसी व्यापक संघर्ष के दौरान हवाई हमलों, ड्रोन गतिविधियों, मिसाइलों और एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

71वें घंटे को लेकर क्यों हो रही चर्चा?

अब उस दावे पर आते हैं जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। सामने आए विवरण के मुताबिक, संघर्ष के करीब 71वें घंटे में पाकिस्तान की तरफ से कथित तौर पर एक बड़ा हमला करने की कोशिश की गई।

दावा है कि पाकिस्तान ने भारत की राजधानी नई दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश की और इसके लिए तेज गति वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। अगर यह दावा सही है, तो यह संघर्ष के सबसे गंभीर संभावित क्षणों में से एक माना जा सकता है, क्योंकि किसी राजधानी को निशाना बनाने की कोशिश सैन्य टकराव को बेहद खतरनाक स्तर तक ले जा सकती है।

हालांकि, इस दावे को लेकर सावधानी जरूरी है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में इस कथित मिसाइल की सटीक पहचान, उसका लॉन्च प्लेटफॉर्म और नई दिल्ली को निशाना बनाने की पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं मिलती। इसलिए इसे डॉक्यूमेंट्री में बताए गए घटनाक्रम के तौर पर ही प्रस्तुत करना उचित होगा।

आसमान में ही रोकने का दावा

इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़ा है। दिए गए विवरण के मुताबिक, कथित मिसाइल भारतीय सीमा की ओर बढ़ रही थी और भारतीय रक्षा प्रणाली ने इसे समय रहते ट्रैक कर लिया।

इसके बाद बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए मिसाइल को हवा में ही इंटरसेप्ट किए जाने का दावा किया गया है। बराक-8 भारत और इजरायल के सहयोग से विकसित मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

बराक-8 सिस्टम को अलग-अलग प्रकार के हवाई खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है। इसके नेटवर्क में रडार, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइल शामिल होते हैं। किसी आने वाले खतरे की पहचान के बाद सिस्टम उसकी दिशा और गति का आकलन करके इंटरसेप्शन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

यही वजह है कि यदि किसी हाई-स्पीड मिसाइल को सफलतापूर्वक हवा में रोका गया हो, तो वह एयर डिफेंस की क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाएगा।

सिरसा के पास तैनाती का दावा

दिए गए विवरण में हरियाणा के सिरसा के पास तैनात बराक-8 सिस्टम का जिक्र किया गया है। दावा है कि इसी सिस्टम ने कथित मिसाइल को ट्रैक किया और फिर उसे भारतीय क्षेत्र तक पहुंचने से पहले हवा में ही नष्ट कर दिया।

हालांकि, इस खास तैनाती और इंटरसेप्शन की स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है। इसलिए यह कहना ज्यादा उचित होगा कि डॉक्यूमेंट्री से जुड़े विवरण में इस तरह की कार्रवाई का दावा किया गया है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की एयर डिफेंस क्षमताओं की भूमिका व्यापक रूप से चर्चा में रही थी। भारतीय सैन्य पक्ष ने संघर्ष के दौरान विभिन्न हवाई खतरों को रोकने और महत्वपूर्ण सैन्य एवं नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की बात कही थी।

पाकिस्तान की रणनीति पर भी उठे सवाल

अगर डॉक्यूमेंट्री में बताए गए इस घटनाक्रम को उसके दावे के अनुसार देखा जाए, तो 71वें घंटे की कथित कार्रवाई पाकिस्तान की रणनीति में बदलाव का संकेत मानी जा सकती है।

संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर ड्रोन, मिसाइल और अन्य हथियारों के इस्तेमाल के आरोप लगाए थे। ऐसे माहौल में किसी बड़े शहर या राजधानी की दिशा में मिसाइल भेजने की कोशिश स्थिति को और गंभीर बना सकती थी।

भारत के लिए भी ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि किसी आने वाले खतरे को समय रहते पहचाना जाए और उसे लक्ष्य तक पहुंचने से पहले नष्ट किया जाए। इसके लिए केवल मिसाइल ही नहीं, बल्कि रडार, कमांड नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और विभिन्न स्तरों की एयर डिफेंस क्षमताओं के बीच समन्वय जरूरी होता है।

इसके बाद क्या हुआ?

दिए गए विवरण के अनुसार, कथित मिसाइल हमले के नाकाम होने के बाद भारत की ओर से अंतिम जवाबी कार्रवाई शुरू की गई। इसे ‘फाइनल रिटेलियटरी स्ट्राइक’ के रूप में बताया गया है।

हालांकि, यहां भी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘फाइनल रिटेलियटरी स्ट्राइक’ का इस्तेमाल किस विशिष्ट सैन्य कार्रवाई के लिए किया गया, इसकी विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से नहीं होती।

ऑपरेशन सिंदूर के बारे में डिस्कवरी की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य उन रणनीतिक फैसलों और महत्वपूर्ण क्षणों को सामने लाना है, जो आम सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा नहीं बने थे। इसमें तीनों सेनाओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और ऑपरेशन से जुड़े लोगों के अनुभव शामिल किए गए हैं।

डॉक्यूमेंट्री में पहली बार सामने आए कई पहलू

‘Declassified: Operation Sindoor’ को केवल युद्ध के दृश्यों तक सीमित डॉक्यूमेंट्री नहीं बताया गया है। इसके निर्माताओं के अनुसार, इसमें ऑपरेशन की योजना, सैन्य रणनीति, निर्णय लेने की प्रक्रिया और ग्राउंड स्तर पर काम करने वाले लोगों के अनुभवों को शामिल किया गया है।

डॉक्यूमेंट्री में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के दृष्टिकोण शामिल किए गए हैं।

यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसे समझने के लिए डॉक्यूमेंट्री को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी

71वें घंटे की कथित मिसाइल घटना से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तव में मिसाइल कौन-सी थी, उसे कहां से दागा गया था और उसका वास्तविक लक्ष्य क्या था।

इसके अलावा यह भी सवाल है कि क्या वह सीधे नई दिल्ली की ओर जा रही थी या भारतीय एयर डिफेंस ने किसी दूसरे संभावित लक्ष्य की ओर बढ़ रहे खतरे को इंटरसेप्ट किया था।

जब तक इन सवालों पर आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सामने नहीं आती, तब तक इस घटनाक्रम को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

फिर भी, इस दावे ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर डिफेंस की भूमिका को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। 88 घंटे चले इस संघर्ष में तकनीक, खुफिया जानकारी, निगरानी और तेज प्रतिक्रिया क्षमता का महत्व सामने आया था।

डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री इसी पूरे घटनाक्रम को अंदर से समझने की कोशिश करती है। इसके सामने आने के बाद अब ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई ऐसे सवालों पर बहस शुरू हो गई है, जिनके जवाब आम लोगों के सामने पहले पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे। सबसे ज्यादा उत्सुकता इसी बात को लेकर है कि संघर्ष के उन आखिरी घंटों में वास्तव में क्या हुआ था और भारत की एयर डिफेंस व्यवस्था ने किस तरह संभावित खतरों का सामना किया।

कोई टिप्पणी नहीं