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90% माता-पिता नहीं जानते ये सच! WHO ने बताया बच्चे की मजबूत सेहत का सबसे बड़ा सीक्रेट



विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बार फिर शिशुओं और छोटे बच्चों के पोषण को लेकर अपनी महत्वपूर्ण सलाह दोहराई है। संगठन का कहना है कि जन्म के बाद पहले छह महीने तक शिशु को केवल मां का दूध (Exclusive Breastfeeding) ही दिया जाना चाहिए। इसके बाद छह महीने की उम्र पूरी होने पर पौष्टिक पूरक आहार शुरू किया जाए, लेकिन साथ ही दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाए।

WHO का मानना है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में सही पोषण बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की मजबूत नींव रखता है। यदि इस अवधि में बच्चे को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो उसका प्रभाव लंबे समय तक उसके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है जीवन के पहले 1,000 दिन?

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भधारण से लेकर बच्चे के दो वर्ष की आयु तक का समय पहले 1,000 दिन कहलाता है। यही वह अवधि है, जिसमें बच्चे का मस्तिष्क सबसे तेजी से विकसित होता है।

यदि इस समय सही पोषण मिलता है तो—

  • दिमाग का विकास बेहतर होता है।

  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है।

  • सीखने की क्षमता बढ़ती है।

  • भविष्य में कई बीमारियों का खतरा कम होता है।

इसी कारण WHO शुरुआती पोषण को बेहद महत्वपूर्ण मानता है।

पहले छह महीने सिर्फ मां का दूध ही क्यों?

WHO के अनुसार, जन्म के बाद पहले छह महीने तक बच्चे को पानी, शहद, घुट्टी, गाय का दूध या कोई अन्य ठोस भोजन देने की आवश्यकता नहीं होती।

मां का दूध ही बच्चे की सभी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है।

इसमें मौजूद पोषक तत्व सही अनुपात में होते हैं, जो बच्चे के शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित किए जा सकते हैं।

मां के दूध में क्या-क्या होता है?

मां के दूध में कई ऐसे तत्व होते हैं जो किसी अन्य भोजन में प्राकृतिक रूप से उसी रूप में उपलब्ध नहीं होते।

इनमें शामिल हैं—

  • उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन

  • आवश्यक वसा

  • विटामिन

  • खनिज

  • एंटीबॉडी

  • एंजाइम

  • हार्मोन

  • रोग प्रतिरोधक तत्व

यही कारण है कि इसे बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका भी कहा जाता है।

संक्रमण से सुरक्षा

WHO का कहना है कि केवल स्तनपान कराने वाले बच्चों में कई प्रकार के संक्रमणों का खतरा कम पाया जाता है।

विशेष रूप से—

  • दस्त

  • निमोनिया

  • कान का संक्रमण

  • पेट के संक्रमण

  • कई वायरल बीमारियां

इनसे बचाव में मां का दूध महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मस्तिष्क के विकास में मदद

विशेषज्ञों के अनुसार, मां के दूध में ऐसे आवश्यक फैटी एसिड होते हैं जो बच्चे के मस्तिष्क और आंखों के विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।

कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि स्तनपान करने वाले बच्चों में सीखने और याद रखने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

हालांकि यह कई अन्य सामाजिक और स्वास्थ्य कारकों पर भी निर्भर करता है।

मां को भी होते हैं फायदे

स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि मां के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे—

  • प्रसव के बाद शरीर तेजी से सामान्य होता है।

  • अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा कम हो सकता है।

  • स्तन और डिम्बग्रंथि (Ovarian) कैंसर का जोखिम कम होने से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध है।

  • मां और बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध मजबूत होता है।

छह महीने बाद क्या करें?

WHO की सलाह है कि छह महीने पूरे होने के बाद बच्चे को पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए।

इसमें शामिल हो सकते हैं—

  • दाल

  • चावल

  • खिचड़ी

  • मसली हुई सब्जियां

  • मौसमी फल

  • दही

  • अंडा (यदि परिवार में स्वीकार्य हो)

  • अन्य पौष्टिक घरेलू भोजन

लेकिन इसके साथ-साथ स्तनपान जारी रखना चाहिए।

कुपोषण आज भी बड़ी चुनौती

भारत सहित दुनिया के कई देशों में आज भी बच्चों में कुपोषण एक गंभीर समस्या बना हुआ है।

कुपोषण के कारण—

  • शारीरिक विकास रुक सकता है।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है।

  • पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।

  • भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

WHO का मानना है कि सही स्तनपान और संतुलित पूरक आहार इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

कामकाजी माताओं के लिए क्या सलाह?

आज बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी करती हैं।

ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि संभव हो तो मां अपने दूध को सुरक्षित तरीके से निकालकर संग्रहित कर सकती हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बच्चे को वही दूध दिया जा सके।

इसके लिए स्वच्छता और सही तापमान का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है।

किन गलतियों से बचना चाहिए?

विशेषज्ञ कई सामान्य गलतियों से बचने की सलाह देते हैं—

  • जन्म के तुरंत बाद शहद देना।

  • बिना डॉक्टर की सलाह के फार्मूला दूध शुरू कर देना।

  • छह महीने से पहले ठोस आहार देना।

  • बार-बार बोतल का उपयोग करना।

  • स्तनपान जल्दी बंद कर देना।

इन आदतों से बच्चे के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मां ही नहीं बल्कि पूरे परिवार का सहयोग भी जरूरी है।

यदि परिवार स्तनपान को प्रोत्साहित करे, मां को पर्याप्त आराम और पौष्टिक भोजन मिले तथा मानसिक सहयोग दिया जाए, तो बच्चे का पोषण और बेहतर हो सकता है।

WHO की मुख्य सिफारिशें

WHO के अनुसार—

  • जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू किया जाए।

  • पहले छह महीने तक केवल मां का दूध दिया जाए।

  • छह महीने बाद पौष्टिक पूरक आहार शुरू किया जाए।

  • दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाए।

  • बच्चे के भोजन में विविधता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा सलाह एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि जीवन के शुरुआती महीनों में सही पोषण ही स्वस्थ भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। जन्म के बाद पहले छह महीने तक केवल मां का दूध, उसके बाद संतुलित पूरक आहार और दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और प्रतिरक्षा विकास को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवार और समाज मिलकर इस सलाह का पालन करें, तो कुपोषण और कई बचपन की बीमारियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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