Breaking News

दिल्ली में अचानक बढ़े हजारों H1N1 केस! आखिर क्यों तेजी से फैल रहा ये वायरस और किसे है सबसे बड़ा खतरा?



दिल्ली में मौसमी फ्लू का प्रकोप लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है और इस बार H1N1 यानी स्वाइन फ्लू सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। राजधानी में अगस्त के आखिरी सप्ताह तक H1N1 संक्रमण के हजारों मामले सामने आ चुके हैं। ताजा स्वास्थ्य विभाग के निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, 27 अगस्त तक दिल्ली में H1N1 के 2,729 मामले दर्ज किए गए, जबकि इसी अवधि में Influenza A और Influenza B को मिलाकर फ्लू के कुल मामलों की संख्या 3,736 तक पहुंच गई।

सबसे चिंता वाली बात यह है कि H1N1 दिल्ली में इस समय इन्फ्लुएंजा का सबसे प्रमुख स्ट्रेन बना हुआ है। 27 अगस्त को ही राजधानी में H1N1 के 125 नए मामले सामने आए। इससे पहले भी लगातार कई दिनों से नए मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी। हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की है और स्वास्थ्य विभाग को निगरानी, जांच, दवाओं तथा अस्पतालों में जरूरी सुविधाओं को मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। केंद्र सरकार और ICMR का कहना है कि अभी देश में किसी नए या असामान्य रूप से खतरनाक इन्फ्लुएंजा वायरस के फैलने के संकेत नहीं मिले हैं। मौजूदा H1N1 संक्रमण मौसमी फ्लू के सामान्य पैटर्न के अनुरूप है।

एक दिन में बढ़े 125 मामले, अस्पतालों ने कसी कमर

दिल्ली में बढ़ते H1N1 मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अलर्ट कर दिया है। अस्पतालों में फ्लू क्लीनिक, आइसोलेशन बेड और टेस्टिंग की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

दिल्ली सरकार ने सरकारी अस्पतालों को पर्याप्त संख्या में आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। बड़े अस्पतालों में 10 या उससे ज्यादा आइसोलेशन बेड रखने को कहा गया है, जबकि अन्य अस्पतालों को भी कम से कम पांच बेड उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की शिफ्ट व्यवस्था तथा जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर भी नजर रखी जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने अस्पतालों का निरीक्षण कर फ्लू से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। अस्पतालों में ऑक्सीजन, दवाइयों, टेस्टिंग सुविधाओं, मेडिकल स्टाफ और आइसोलेशन व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

यानी सरकार की कोशिश है कि अगर आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या और बढ़ती है, तो अस्पतालों पर अचानक दबाव न पड़े।

पिछले साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा मामले

इस साल H1N1 संक्रमण में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह इसे पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करने पर समझ आती है।

दिल्ली में पिछले साल इसी अवधि में H1N1 के करीब 229 मामले दर्ज हुए थे। इस साल अगस्त के अंत तक यह संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के दौरान संक्रमण की रफ्तार विशेष रूप से तेज हुई है।

यानी इस बार मौसमी फ्लू का असर सामान्य से काफी ज्यादा दिखाई दे रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मामलों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो गया है। ICMR ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान वायरस में कोई असामान्य जेनेटिक बदलाव या नया खतरनाक स्ट्रेन सामने नहीं आया है।

सबसे ज्यादा खतरा किसे?

H1N1 संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके गंभीर होने का जोखिम ज्यादा रहता है।

इनमें खास तौर पर छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग शामिल हैं। डॉक्टरों ने ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी है।

अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, हृदय संबंधी समस्या या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति कई बार फ्लू से बिना गंभीर जटिलता के ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच सकता है और निमोनिया या सांस से जुड़ी दूसरी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

H1N1 के लक्षण क्या हैं?

H1N1 के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य वायरल बुखार जैसे ही दिखाई देते हैं। यही वजह है कि कई लोग शुरुआत में इसे साधारण सर्दी-जुकाम या मौसम बदलने का असर समझ लेते हैं।

इसके सामान्य लक्षणों में—

  • तेज बुखार

  • खांसी

  • गले में खराश

  • नाक बहना या बंद होना

  • सिरदर्द

  • शरीर में दर्द

  • ठंड लगना

  • अत्यधिक थकान

  • कमजोरी

शामिल हो सकते हैं।

कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी या बीमारी के दूसरे गंभीर लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू इलाज पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

H1N1 और डेंगू में क्यों हो रही है परेशानी?

दिल्ली में इस समय सिर्फ फ्लू ही चिंता का विषय नहीं है। मानसून के मौसम में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमण भी सामने आते हैं। समस्या यह है कि शुरुआती दौर में कई बीमारियों के लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं।

बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण H1N1 के अलावा दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के खुद से बीमारी तय करना जोखिम भरा हो सकता है।

विशेषज्ञों ने लोगों को खास तौर पर सेल्फ-मेडिकेशन से बचने की सलाह दी है। किसी भी दवा को अपनी तरफ से शुरू करने या बंद करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

क्या यह नया खतरनाक वायरस है?

H1N1 के मामले तेजी से बढ़ने के बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं कोई नया खतरनाक वायरस तो नहीं फैल रहा।

फिलहाल उपलब्ध सरकारी जानकारी इस आशंका का समर्थन नहीं करती।

ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा है कि देश में वर्तमान इन्फ्लुएंजा की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अभी किसी नए या असामान्य वायरस स्ट्रेन के संकेत नहीं मिले हैं। मौजूदा H1N1 वायरस में होने वाले बदलाव सामान्य मौसमी बदलावों के अनुरूप हैं।

इसलिए विशेषज्ञों का संदेश साफ है—सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं।

मास्क और हाथों की सफाई फिर से क्यों जरूरी?

इन्फ्लुएंजा एक श्वसन संक्रमण है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या नजदीकी संपर्क के दौरान संक्रमण फैल सकता है।

ऐसे में भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखना उपयोगी हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को खांसी, बुखार या फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो उसे दूसरों से दूरी रखने और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

हाथों को साबुन से नियमित रूप से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा बीमार होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद कर सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

सिर्फ हल्का बुखार या सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर हर व्यक्ति को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर लक्षण लगातार बढ़ रहे हैं या गंभीर हो रहे हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

खास तौर पर सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेहोशी जैसा महसूस होना या हालत तेजी से बिगड़ना जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। विशेषज्ञों ने लगातार दो-तीन दिन तक तेज बुखार रहने या लक्षणों के बिगड़ने पर भी डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है।

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में विशेष सावधानी जरूरी है।

दिल्ली में स्थिति पर सरकार की नजर

राजधानी में बढ़ते मामलों के बीच केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों स्थिति पर नजर रख रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अगस्त में H1N1 और मौसमी इन्फ्लुएंजा की स्थिति की समीक्षा की थी। बैठक में अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता पर चर्चा की गई।

दिल्ली सरकार की ओर से भी अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

यानी फिलहाल सरकार की रणनीति बीमारी को लेकर डर पैदा करने की नहीं, बल्कि जल्दी पहचान, निगरानी और समय पर इलाज सुनिश्चित करने की है।

आम लोगों के लिए सबसे जरूरी संदेश

दिल्ली में H1N1 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और 27 अगस्त तक 2,729 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यह निश्चित तौर पर ऐसी स्थिति है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक अभी किसी नए या असामान्य रूप से खतरनाक वायरस की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए सबसे जरूरी है कि लोग लक्षणों को पहचानें और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करें।

खुद से दवा लेना, तेज बुखार को कई दिनों तक नजरअंदाज करना या सांस से जुड़ी परेशानी के बावजूद घर पर रहना नुकसानदायक हो सकता है।

फिलहाल संदेश डर का नहीं, सावधानी का है।

दिल्ली में H1N1 की रफ्तार जरूर तेज हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और अस्पतालों की बढ़ाई गई तैयारियों के बीच विशेषज्ञों की सलाह यही है कि लोग सतर्क रहें, स्वच्छता का ध्यान रखें, बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाएं और गंभीर लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सा सहायता लें।

कोई टिप्पणी नहीं