Viral Video : छुट्टी के बाद रुक जाना… मेरे साथ कुछ समय बिताओ, फीस नहीं लगेगी!” प्रिंसिपल की ये बात सुन छात्रा ने खोला ऐसा राज, स्कूल में मच गया हड़कंप
पुष्कर। राजस्थान के पुष्कर क्षेत्र के खेड़ा गांव से एक बेहद गंभीर मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसने स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा के पास रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के लिए उस समय पैसे नहीं थे। छात्रा ने कथित तौर पर स्कूल प्रबंधन से कुछ दिनों की मोहलत मांगी थी और कहा था कि पिता की सैलरी आने के बाद वह फीस जमा कर देगी।
आरोप है कि इसी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश स्कूल के प्रिंसिपल ने की। छात्रा ने कथित तौर पर अपने परिजनों को बताया कि प्रिंसिपल ने उसे छुट्टी के बाद रुकने के लिए कहा और फीस माफ करने के बदले उसके साथ अनुचित व्यवहार करने की कोशिश की।
इस मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, घटना के बाद छात्रा रोते हुए घर पहुंची और उसने परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद परिवार के लोग गुस्से में स्कूल पहुंचे। वहां प्रिंसिपल के साथ मारपीट किए जाने की बात कही जा रही है। बाद में उसे पुलिस के हवाले किए जाने का दावा है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए प्रिंसिपल पर लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही वास्तविक तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।
फीस के पैसे नहीं थे, छात्रा ने मांगी थी मोहलत
बताया जा रहा है कि 12वीं कक्षा की छात्रा के सामने रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने की समस्या थी। उसके पास तत्काल भुगतान करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। छात्रा ने कथित तौर पर स्कूल में बताया कि उसके पिता की सैलरी आने वाली है और दो दिन के भीतर फीस जमा कर दी जाएगी।
छात्रा की इसी बात के बाद कथित रूप से प्रिंसिपल ने उसे अलग से बात करने के लिए कहा। आरोप है कि छुट्टी के बाद उसे स्कूल में रुकने के लिए कहा गया।
इसके बाद जो हुआ, उसे लेकर छात्रा ने अपने परिवार के सामने गंभीर आरोप लगाए हैं। उसके अनुसार प्रिंसिपल ने फीस माफ करने की बात कहते हुए उसके साथ अनुचित व्यवहार करने की कोशिश की।
छात्रा ने घर पहुंचकर बताई पूरी बात
घटना के बाद छात्रा कथित तौर पर काफी परेशान और रोती हुई घर पहुंची। उसने अपने परिजनों को स्कूल में हुई घटना की जानकारी दी।
परिवार के लिए यह बात बेहद चौंकाने वाली थी। आरोप सामने आने के बाद परिजन स्कूल पहुंचे और प्रिंसिपल से जवाब मांगने लगे। देखते ही देखते मामला विवाद में बदल गया।
बताया जा रहा है कि गुस्साए परिजनों ने प्रिंसिपल के साथ मारपीट की। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी काफी हंगामा हुआ।
सहेली भी पहुंची, फिर हुआ ऐसा घटनाक्रम
घटना से जुड़ी जानकारी में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। बताया जा रहा है कि छात्रा की एक सहेली भी वहां पहुंची और अपने साथ काले रंग से भरा गिलास लेकर आई।
उसने कथित तौर पर प्रिंसिपल के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उसके चेहरे पर काला रंग लगाने को कहा। इसके बाद छात्रा ने रोते हुए उसके चेहरे पर काला रंग लगा दिया।
इसके बाद कथित तौर पर प्रिंसिपल को स्कूल परिसर में घुमाया गया। बाद में उसे पुलिस के हवाले किए जाने की बात कही जा रही है।
यह घटनाक्रम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में वायरल दावों और वास्तविक पुलिस रिकॉर्ड के बीच अंतर हो सकता है। इसलिए घटना से जुड़े वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं है।
पुष्कर के खेड़ा गांव के एक स्कूल में 12वीं की छात्रा के पास रजिस्ट्रेशन फीस के पैसे नहीं थे। उसने कहा कि पापा की सैलरी मिलते ही दो दिन में जमा कर दूंगी।
— Mandeep RajBhar (@MandeepRajBhar9) August 17, 2026
आरोप है कि प्रिंसिपल ने कहा – छुट्टी के बाद रुक जाओ, मेरे साथ कुछ समय बिताओ, बदले में तुम्हारी फीस नहीं लगेगी। उसने प्रिंसिपल… pic.twitter.com/fIBC9iDVke
पुलिस जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच
इस तरह के मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पुलिस जांच की होती है। यदि छात्रा की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है तो पुलिस उसके बयान, स्कूल में मौजूद लोगों के बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर सकती है।
चूंकि मामला नाबालिग छात्रा से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए उसकी पहचान सार्वजनिक करना उचित नहीं है। नाबालिग पीड़िता की निजता और गरिमा की रक्षा करना बेहद जरूरी है।
आरोपी व्यक्ति को भी जांच पूरी होने और अदालत के निर्णय से पहले दोषी घोषित नहीं किया जा सकता। कानून के अनुसार आरोप साबित होने तक आरोपी को दोषी नहीं माना जाता।
स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना अगर जांच में सही साबित होती है तो यह केवल एक छात्रा से जुड़े कथित दुर्व्यवहार का मामला नहीं होगा, बल्कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करेगा।
स्कूल किसी भी बच्चे के लिए सुरक्षित स्थान होना चाहिए। शिक्षक और प्रिंसिपल जैसे जिम्मेदार पदों पर मौजूद लोगों से विद्यार्थियों के साथ मर्यादित और सुरक्षित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
किसी छात्र की आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर उसकी मदद करना स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी हो सकती है, लेकिन आर्थिक मजबूरी का कथित रूप से फायदा उठाना बेहद गंभीर आरोप है।
राजस्थान में स्कूलों के लिए फीस से जुड़े नियम भी लागू हैं। राजस्थान स्कूल्स (रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2016 में स्कूल फीस के नियमन और निर्धारित फीस से अधिक शुल्क वसूलने पर प्रावधान दिए गए हैं।
परिजनों की नाराजगी समझ में आती है, लेकिन कानून अपने हाथ में लेना सही नहीं
बेटी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप सुनकर परिवार का आक्रोशित होना स्वाभाविक हो सकता है। लेकिन किसी भी स्थिति में आरोपी के साथ मारपीट करना या उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।
ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराना, पुलिस जांच कराना और अदालत के माध्यम से न्याय प्राप्त करना ही उचित रास्ता है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के तहत आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
छात्राओं की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी
स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को किसी भी तरह की परेशानी होने पर भरोसेमंद शिक्षक, अभिभावक या संबंधित अधिकारियों को जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
माता-पिता के लिए भी यह जरूरी है कि बच्चे स्कूल से लौटने के बाद उनके व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उनसे शांतिपूर्वक बातचीत करें। बच्चों को यह भरोसा होना चाहिए कि किसी भी अनुचित व्यवहार की जानकारी देने पर परिवार उनकी बात सुनेगा और उनका साथ देगा।
इस मामले में भी छात्रा ने कथित तौर पर घर पहुंचकर अपने परिवार को जानकारी दी, जिसके बाद मामला सामने आया।
अभी कई सवालों के जवाब बाकी
इस घटना को लेकर कई सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। क्या छात्रा की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज हुई है? प्रिंसिपल के खिलाफ कौन-कौन सी धाराओं में कार्रवाई हुई? स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए? घटना के समय स्कूल में कौन-कौन लोग मौजूद थे? इन सभी सवालों का जवाब आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि पुष्कर के खेड़ा गांव से जुड़ा यह कथित मामला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मामले की जांच के दौरान छात्रा की पहचान और निजी जानकारी को सार्वजनिक न किया जाए। साथ ही आरोपी को भी न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले दोषी घोषित करने से बचना चाहिए।

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