CRPF में 59 जवानों की मौत से मचा हड़कंप! आखिर ऐसा क्या हुआ कि फोर्स को उठाना पड़ा ये बड़ा कदम? सामने आई चौंकाने वाली वजह
देश की सबसे बड़ी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF में जवानों के बीच आत्महत्या और खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। साल 2025 में CRPF के 59 कर्मियों की आत्महत्या के आंकड़े सामने आने के बाद अब फोर्स ने रोकथाम के लिए बड़ा संस्थागत कदम उठाया है। CRPF ने वरिष्ठ अधिकारियों का 10 सदस्यीय ‘कोर ग्रुप’ गठित किया है, जो ऐसे मामलों की नियमित और विस्तृत समीक्षा करेगा। यह समूह हर महीने बैठक करेगा और घटनाओं के पीछे मौजूद कारणों, जोखिम कारकों तथा रोकथाम के उपायों पर विचार करेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी CRPF जवानों की आत्महत्याओं के मामले का स्वतः संज्ञान ले चुका है। आयोग ने जनवरी से 22 मई 2026 के बीच 19 CRPF कर्मियों की आत्महत्या से जुड़ी रिपोर्टों पर केंद्र सरकार और CRPF से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
2025 में पांच साल का सबसे बड़ा आंकड़ा
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में CRPF में 59 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। यह पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है। इससे पहले 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57 और 2024 में 46 कर्मियों ने आत्महत्या की थी। इस तरह 2021 से 2025 के बीच कुल 262 CRPF कर्मियों की आत्महत्या दर्ज की गई।
हालांकि, 2026 के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 22 मई 2026 तक 19 CRPF कर्मियों की आत्महत्या की जानकारी सामने आई थी। अलग-अलग रिपोर्टों में 2021 से मई 2026 तक कुल संख्या 281 बताई गई है। इनमें 216 मौतें, यानी करीब 77 प्रतिशत, उस समय हुईं जब कर्मी ड्यूटी पर थे, जबकि 65 मामले छुट्टी के दौरान हुए।
80 प्रतिशत से ज्यादा मामले कांस्टेबल स्तर के
इस पूरे आंकड़े में एक और पहलू खास तौर पर ध्यान खींचता है। रिपोर्टों के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच आत्महत्या करने वाले CRPF कर्मियों में 80 प्रतिशत से अधिक कांस्टेबल स्तर के कर्मचारी थे। इससे यह सवाल भी उठता है कि निचले रैंक के जवानों पर सेवा परिस्थितियों, लगातार तैनाती, पारिवारिक दूरी और काम के दबाव का कितना असर पड़ रहा है।
हालांकि किसी भी आत्महत्या के पीछे एक ही कारण मान लेना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत, पारिवारिक, आर्थिक, मानसिक और कार्यस्थल से जुड़े कई कारक एक साथ भूमिका निभा सकते हैं। CRPF का नया कोर ग्रुप इसी वजह से प्रत्येक मामले की अलग-अलग परिस्थितियों को समझने पर जोर देगा।
अब हर मामले की होगी गहन समीक्षा
CRPF द्वारा बनाए गए 10 सदस्यीय कोर ग्रुप की अध्यक्षता बल के महानिदेशक करेंगे। समूह में वरिष्ठ स्तर के अधिकारी शामिल होंगे और यह हर महीने बैठक कर पिछली अवधि में सामने आए खुद को नुकसान पहुंचाने के मामलों की विस्तृत समीक्षा करेगा।
समीक्षा के दौरान केवल घटना को दर्ज करने तक सीमित रहने के बजाय उसके पीछे मौजूद परिस्थितियों को समझने की कोशिश की जाएगी। इसमें घटना के संभावित कारण, संबंधित कर्मी की पृष्ठभूमि, यूनिट या कार्यालय में उपलब्ध कल्याणकारी और चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक सहायता के इस्तेमाल तथा घटना के बाद उठाए गए कदमों की समीक्षा शामिल होगी।
कमांडेंट और अधिकारी देंगे केस की प्रस्तुति
नई व्यवस्था के तहत संबंधित बटालियन या कार्यालय के प्रमुख और कमांडेंट वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर ग्रुप के सामने मामले की व्यवस्थित प्रस्तुति देंगे। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रस्तुति में घटना की परिस्थितियां, व्यक्ति की प्रासंगिक पृष्ठभूमि, यूनिट द्वारा उठाए गए कदम, उपलब्ध कल्याणकारी और चिकित्सा सहायता तथा शुरुआती जांच के निष्कर्ष शामिल होंगे।
इसका उद्देश्य केवल यह पता लगाना नहीं है कि घटना कैसे हुई, बल्कि यह समझना भी है कि भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए क्या बदलाव किए जा सकते हैं।
बार-बार सामने आने वाले जोखिम कारकों की होगी पहचान
कोर ग्रुप प्रत्येक मामले की निष्पक्ष समीक्षा करने के साथ-साथ अलग-अलग घटनाओं में बार-बार दिखाई देने वाले पैटर्न की पहचान करेगा। अगर कई मामलों में समान तरह की परिस्थितियां सामने आती हैं, तो उनके आधार पर संस्थागत स्तर पर बदलाव की सिफारिश की जा सकती है।
इस प्रक्रिया में कल्याण, प्रशासन, चिकित्सा और अन्य संबंधित क्षेत्रों से जुड़े उपायों पर भी विचार किया जाएगा। CRPF का उद्देश्य समय पर हस्तक्षेप, जवाबदेही और रोकथाम की व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि जोखिम में मौजूद कर्मियों तक सहायता पहले पहुंच सके।
परिवार से दूरी और लंबी तैनाती बड़ी चुनौती
CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में लगातार तैनाती, परिवार से लंबे समय तक दूरी और कार्य-जीवन संतुलन की समस्या को कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों के रूप में बताया गया है। बल के जवानों को देश के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। कई बार पोस्टिंग और ऑपरेशनल जरूरतों के कारण परिवार के साथ नियमित समय बिताना मुश्किल हो सकता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इन कारणों को प्रत्येक घटना की निश्चित वजह नहीं माना जा सकता। हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और CRPF का नया समीक्षा तंत्र इसी व्यक्तिगत स्तर की जांच पर जोर देता दिखाई देता है।
NHRC ने भी लिया गंभीरता से संज्ञान
CRPF में आत्महत्या के मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी गंभीर चिंता जताई है। 14 अगस्त 2026 को NHRC ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव और CRPF महानिदेशक को नोटिस जारी किया था। आयोग ने जनवरी से 22 मई 2026 के बीच 19 CRPF कर्मियों की आत्महत्या से संबंधित रिपोर्टों पर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा।
आयोग ने कहा कि यदि रिपोर्टों में बताए गए तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक में कर्मियों के जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब CRPF द्वारा कोर ग्रुप का गठन इस पूरे मामले में उठाए गए महत्वपूर्ण संस्थागत कदमों में से एक माना जा रहा है।
सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य नहीं, पूरी व्यवस्था पर नजर
CRPF में आत्महत्या रोकने की चुनौती को केवल मानसिक स्वास्थ्य के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। किसी जवान की मानसिक स्थिति पर पारिवारिक परिस्थितियों, ड्यूटी की प्रकृति, रहने की व्यवस्था, छुट्टी, आर्थिक दबाव, सामाजिक संबंध और कार्यस्थल का माहौल जैसे कई पहलू असर डाल सकते हैं।
यही वजह है कि नया कोर ग्रुप चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता के साथ-साथ प्रशासनिक और कल्याणकारी उपायों की भी समीक्षा करेगा। इससे संकेत मिलता है कि फोर्स अब इस समस्या को व्यापक संस्थागत दृष्टिकोण से देखने की कोशिश कर रही है।
2026 के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे
वर्ष 2025 में 59 आत्महत्याओं का आंकड़ा पांच वर्षों में सबसे ज्यादा रहा। लेकिन 2026 में भी मई तक 19 मामलों की रिपोर्ट सामने आना चिंता का विषय बना हुआ है। यही वजह है कि अब हर मामले से सीख लेकर आगे की रोकथाम रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
CRPF के सामने चुनौती यह है कि नए कोर ग्रुप की समीक्षा केवल कागजी प्रक्रिया बनकर न रह जाए, बल्कि उससे मिले निष्कर्षों को जमीन पर लागू किया जाए। यदि किसी यूनिट में बार-बार समान जोखिम सामने आते हैं तो वहां समय रहते हस्तक्षेप, सहायता और निगरानी की व्यवस्था मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
आगे क्या होगा?
नए कोर ग्रुप की मासिक बैठकें इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होंगी। प्रत्येक मामले की समीक्षा से सामने आने वाली सिफारिशों को दर्ज किया जाएगा और संबंधित यूनिट या कार्यालय द्वारा उन पर की गई कार्रवाई की निगरानी की जाएगी।
इस व्यवस्था का लक्ष्य केवल आंकड़ों को कम करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियों की पहचान करना है जिनमें किसी जवान को समय रहते मदद की जरूरत हो सकती है। CRPF जैसी बड़ी और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी वाली फोर्स में यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, इसका आकलन आने वाले महीनों में होने वाली मासिक समीक्षाओं और उनके आधार पर लागू किए गए उपायों से किया जा सकेगा।
फिलहाल 59 मौतों का आंकड़ा CRPF के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है। 10 सदस्यीय वरिष्ठ अधिकारियों का कोर ग्रुप, मासिक समीक्षा और NHRC की निगरानी—इन तीनों घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि जवानों के मानसिक और सामाजिक कल्याण का मुद्दा अब फोर्स और मानवाधिकार संस्थाओं के लिए गंभीर प्राथमिकता बन चुका है।

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