रामपुर में बारिश बनी काल! नाले में गिरते ही 7 साल का मासूम हुआ लापता, मौत की खबर सुन मां ने उठाया खौफनाक कदम
रामपुर। बारिश के मौसम में खुले और ओवरफ्लो होते नाले किस तरह जानलेवा साबित हो सकते हैं, इसका दर्दनाक उदाहरण रामपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र के अजीतपुर में सामने आया है। स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रहा सात वर्षीय मासूम बारिश के पानी से ढके नाले में जा गिरा। नाले के ऊपर रखे स्लैब बारिश के पानी में दिखाई नहीं दे रहे थे और जिस जगह बच्चे ने पैर रखा, वहां स्लैब मौजूद नहीं था।
हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चे की तलाश शुरू की। पुलिस और नगर पालिका की टीम भी मौके पर पहुंची। जेसीबी की मदद से नाले के ऊपर रखे स्लैब हटाकर तलाशी अभियान चलाया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे को घटनास्थल से लगभग 15 मीटर दूर नाले में बरामद किया गया। परिजन और स्थानीय लोग उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मासूम की मौत की खबर घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। बेटे की मौत से उसकी मां गहरे सदमे में चली गईं। इसी सदमे में उन्होंने घर में रखा तेजाब पी लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें भी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया गया और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
स्कूल से घर लौटते समय हुआ हादसा
यह दर्दनाक हादसा बुधवार दोपहर करीब एक बजे हुआ। अजीतपुर नई बस्ती में मदीना मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद जमीर खां हैदराबाद में मजदूरी करते हैं। उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। उनके दो बेटे नोमान और अमान अजीतपुर स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ते थे।
सात वर्षीय अमान यूकेजी का छात्र था। बुधवार को स्कूल की छुट्टी होने के बाद अमान अपने बड़े भाई नोमान के साथ पैदल घर लौट रहा था। उस समय इलाके में बारिश हुई थी और नाला पानी से लबालब था। बारिश का पानी इतना अधिक था कि नाले के ऊपर रखे स्लैब भी दिखाई नहीं दे रहे थे।
इसी दौरान अमान ने नाले के ऊपर पैर रखा। उसे शायद लगा कि वहां स्लैब रखा हुआ है, लेकिन उस स्थान पर स्लैब नहीं था। पैर पड़ते ही वह सीधे नाले में जा गिरा।
भाई ने शोर मचाकर लोगों को बुलाया
अमान के नाले में गिरते ही उसके बड़े भाई ने शोर मचाना शुरू कर दिया। बच्चे की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते वहां भीड़ जमा हो गई।
स्थानीय लोगों ने तत्काल बच्चे को तलाशने की कोशिश शुरू की, लेकिन तेज बहाव और पानी के कारण उसे ढूंढना आसान नहीं था। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही सिविल लाइंस पुलिस मौके पर पहुंची।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका के अधिकारी भी जेसीबी लेकर घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद नाले के ऊपर रखे स्लैब को एक-एक करके हटाया गया और पानी के भीतर बच्चे की तलाश शुरू की गई।
दो घंटे बाद घटनास्थल से 15 मीटर दूर मिला बच्चा
बच्चे की तलाश में पुलिस, नगर पालिका कर्मियों और स्थानीय लोगों को करीब दो घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। नाले में पानी अधिक होने के कारण तलाशी अभियान चुनौतीपूर्ण बना रहा।
करीब दो घंटे बाद अमान घटनास्थल से लगभग 15 मीटर दूर मिला। उसे बाहर निकालकर तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। परिवार को उम्मीद थी कि शायद मासूम की जान बच जाए, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जैसे ही डॉक्टरों ने बच्चे को मृत बताया, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
बेटे की मौत से मां सदमे में पहुंचीं अस्पताल
सात वर्षीय बेटे की मौत की खबर ने उसकी मां नगमा को गहरे सदमे में डाल दिया। परिजनों के अनुसार वह बेटे की मौत को सहन नहीं कर सकीं। इसी दौरान उन्होंने घर में रखा तेजाब पी लिया।
तेजाब पीने के बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया। समय रहते अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण उनकी हालत में सुधार बताया गया है और फिलहाल वह खतरे से बाहर हैं।
एक ही हादसे ने परिवार को दोहरी त्रासदी के बीच ला खड़ा किया। एक तरफ मासूम बेटे की मौत का गम है, वहीं दूसरी ओर मां की तबीयत बिगड़ने से परिवार के सामने नई चिंता खड़ी हो गई।
बारिश में नाला बना जानलेवा
अजीतपुर में हुए इस हादसे ने बारिश के दौरान नालों और जलभराव वाले इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के कारण नाले का पानी ऊपर तक आ गया था। पानी के बहाव और जलभराव की वजह से नाले के ऊपर मौजूद स्लैब दिखाई नहीं दे रहे थे।
ऐसी स्थिति में पैदल आने-जाने वाले लोगों, खासकर बच्चों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। यदि किसी स्थान पर स्लैब क्षतिग्रस्त हो या गायब हो तो पानी के कारण उसका पता लगाना बेहद मुश्किल हो सकता है।
अमान के मामले में भी बताया जा रहा है कि जिस जगह उसने पैर रखा, वहां स्लैब नहीं था। पानी से ढके होने के कारण उसे यह दिखाई नहीं दिया और वह नाले में गिर गया।
प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती
बारिश के मौसम में शहरों और कस्बों में जलभराव तथा नालों के ओवरफ्लो होने की समस्या आम हो जाती है। ऐसे समय में खुले नालों, टूटे स्लैब और जलभराव वाले रास्तों पर सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हो जाते हैं।
अजीतपुर की घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी इस बात को लेकर चिंता है कि बारिश के दौरान नाले के ऊपर रखे स्लैब की स्थिति की नियमित जांच क्यों नहीं हुई। पानी बढ़ने के बाद यदि किसी हिस्से में स्लैब नहीं था तो वहां बैरिकेडिंग या चेतावनी की व्यवस्था की जा सकती थी।
बच्चे अक्सर पानी से भरे रास्तों को सामान्य रास्ता समझकर आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ अभिभावकों और स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को बारिश के दौरान नालों और जलभराव वाले रास्तों से दूर रखें।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी ओमकार सिंह ने बताया कि बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
पुलिस घटना के संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर रही है। हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर भी प्रशासनिक अमले की गतिविधियां बढ़ी हैं और घटना के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है।
फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी चिंता मासूम अमान की मौत के बाद पैदा हुए दुख से उबरने की है। पिता दूसरे शहर में मजदूरी करते हैं और बेटे की मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
एक मासूम की मौत ने कई सवाल छोड़े
अजीतपुर की यह घटना सिर्फ एक परिवार के लिए दुखद हादसा नहीं है, बल्कि बारिश के मौसम में शहरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। महज कुछ मिनटों में एक बच्चे की जिंदगी खत्म हो गई। अगर नाले का वह हिस्सा सुरक्षित होता, स्लैब ठीक होता या जलभराव वाले स्थान पर समय रहते बैरिकेडिंग की गई होती तो शायद हादसा टाला जा सकता था।
बारिश के दौरान नाले और सड़क के बीच का अंतर कई बार दिखाई नहीं देता। यही स्थिति बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक खतरनाक बन जाती है। इसलिए ऐसे स्थानों की पहचान कर वहां चेतावनी संकेत, बैरिकेडिंग और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना जरूरी है।
अमान की मौत ने परिवार से उसका एक मासूम सदस्य छीन लिया। वहीं उसकी मां का सदमे में खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना इस घटना के मानसिक आघात की गंभीरता को भी सामने लाता है। ऐसे समय में परिवार और आसपास के लोगों के लिए जरूरी है कि वे सदमे में मौजूद व्यक्ति को अकेला न छोड़ें और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
अजीतपुर का यह हादसा बारिश के मौसम में सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चेतावनी है। बारिश का पानी जब नाले की हदें पार कर देता है, तो सड़क और गहरे नाले के बीच का फर्क मिट जाता है। ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही की छोटी-सी गुंजाइश भी किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकती है।

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