8 दिन तक बढ़े दाम, फिर अचानक पलटा बाजार! चीनी हुई सस्ती, लेकिन चावल-दाल के भाव ने क्यों बढ़ाई टेंशन?
नई दिल्ली: घरेलू थोक जिंस बाजार में पिछले कई दिनों से जारी चीनी की तेजी पर आखिरकार ब्रेक लग गया है। लगातार आठ कारोबारी दिनों तक कीमतों में बढ़ोतरी के बाद गुरुवार को चीनी के औसत थोक भाव में 91 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस नरमी का असर गुड़ की कीमत पर भी दिखाई दिया। वहीं, गेहूं और ज्यादातर खाद्य तेलों के दाम भी नीचे आए हैं।
हालांकि, बाजार का रुख पूरी तरह राहत वाला नहीं रहा। चावल और कई प्रमुख दालों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। यानी रोजमर्रा की जरूरत वाले खाद्य पदार्थों के बाजार में एक तरफ कुछ चीजें सस्ती हुईं, तो दूसरी ओर कुछ जरूरी वस्तुओं के भाव बढ़ गए। ऐसे में आने वाले दिनों में थोक बाजार में होने वाले इन बदलावों का असर खुदरा बाजार पर कितना पड़ता है, इस पर उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।
8 दिन की तेजी के बाद चीनी हुई सस्ती
चीनी के बाजार में पिछले आठ कारोबारी दिनों से लगातार तेजी देखी जा रही थी। लगातार बढ़ते भाव के बाद गुरुवार को आखिरकार इसमें गिरावट दर्ज की गई। थोक बाजार में चीनी की औसत कीमत 91 रुपये घटकर 5,947 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।
कीमत में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब चीनी की कीमतों में लगातार तेजी को लेकर बाजार में चर्चा बनी हुई थी। आठ दिनों तक भाव बढ़ने के बाद अचानक आई नरमी ने बाजार के रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं।
हालांकि, केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीनी के दाम अब लगातार नीचे जाएंगे। कीमतों पर मांग, आपूर्ति, स्टॉक और बाजार की गतिविधियों का असर पड़ता है। इसलिए आने वाले कारोबारी दिनों में भाव किस दिशा में जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
गुड़ के दाम में भी राहत
चीनी के साथ-साथ गुड़ की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली। थोक बाजार में गुड़ का औसत भाव 47 रुपये प्रति क्विंटल घटकर 5,960 रुपये रह गया।
गुड़ और चीनी दोनों ही घरेलू खपत से जुड़े महत्वपूर्ण उत्पाद हैं। ऐसे में इनके थोक भाव में गिरावट का असर आगे चलकर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। हालांकि, खुदरा दुकानों पर कीमतों में बदलाव तुरंत और उसी अनुपात में हो, यह जरूरी नहीं है।
परिवहन खर्च, व्यापारियों का मार्जिन, स्थानीय मांग और अन्य लागतें खुदरा कीमतों को प्रभावित करती हैं। इसलिए थोक बाजार में आई गिरावट का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।
खुदरा बाजार में भी चीनी थोड़ी सस्ती
थोक बाजार में गिरावट के साथ खुदरा बाजार में भी चीनी की औसत कीमत में मामूली कमी दर्ज की गई। खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव 73 पैसे घटकर 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया।
हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन इससे संकेत मिलता है कि थोक बाजार में आई नरमी का सीमित असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ा है। यदि आने वाले दिनों में थोक बाजार में चीनी की कीमत लगातार नीचे रहती है, तो खुदरा बाजार में भी कुछ और राहत देखने को मिल सकती है।
गेहूं और आटे के दाम भी नीचे आए
खाद्यान्न बाजार में गुरुवार को मिलाजुला रुख देखने को मिला। एक तरफ चावल महंगा हुआ, वहीं दूसरी ओर गेहूं और आटे की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
औसत गुणवत्ता वाले चावल की कीमत 62 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 4,117 रुपये हो गई। यानी चावल खरीदने वाले व्यापारियों और आगे चलकर उपभोक्ताओं के लिए कीमत में बढ़ोतरी का दबाव बना है।
इसके उलट गेहूं का औसत भाव 29 रुपये प्रति क्विंटल घटकर 2,838 रुपये रह गया। गेहूं से बने आटे की कीमत में भी 30 रुपये प्रति क्विंटल की कमी दर्ज की गई।
गेहूं और आटे की कीमतों में आई यह नरमी घरेलू बजट के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि दोनों ही रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा हैं। हालांकि, खुदरा स्तर पर कीमतों में वास्तविक बदलाव स्थानीय बाजार और दुकानदारों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।
दालों में तेजी ने बढ़ाई चिंता
दालों के बाजार में तस्वीर कुछ अलग रही। यहां ज्यादातर प्रमुख दालों की कीमतों में तेजी देखने को मिली। मसूर दाल का औसत भाव 41 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा, जबकि उड़द दाल 29 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई।
इसी तरह तुअर दाल की कीमत में 16 रुपये और चना दाल के भाव में 12 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दालें भारतीय घरों में प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत हैं और इनकी कीमत में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू रसोई के बजट पर पड़ सकता है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां दालों की नियमित खपत अधिक है, थोक बाजार में लगातार तेजी आगे चलकर खुदरा कीमतों में दबाव बढ़ा सकती है।
हालांकि सभी दालें महंगी नहीं हुईं। मूंग दाल की कीमत 20 रुपये प्रति क्विंटल घट गई। इससे स्पष्ट है कि दालों के बाजार में एकसमान रुख नहीं रहा और अलग-अलग दालों की मांग तथा आपूर्ति के आधार पर कीमतों में बदलाव हुआ।
खाद्य तेलों में भी ज्यादातर भाव नीचे
खाद्य तेल बाजार से भी उपभोक्ताओं के लिए कुछ राहत की खबर आई है। घरेलू बाजार में कई प्रमुख खाद्य तेलों की औसत कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
पाम ऑयल का औसत भाव 145 रुपये प्रति क्विंटल घटा। मूंगफली तेल की कीमत में 106 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई। इसके अलावा वनस्पति तेल 55 रुपये, सूरजमुखी तेल 48 रुपये और सरसों तेल 42 रुपये प्रति क्विंटल सस्ता हुआ।
हालांकि सोया तेल इस गिरावट की दिशा से अलग रहा। सोया तेल की औसत कीमत में 19 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस तरह खाद्य तेलों के बाजार में भी एक तरफा रुख नहीं रहा। ज्यादातर तेलों के भाव नीचे आए, लेकिन सोया तेल में तेजी देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी दिखा असर
घरेलू खाद्य तेल बाजार पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों का भी असर देखने को मिला। मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में नवंबर का पाम ऑयल वायदा एक रिंगिट बढ़कर 4,817 रिंगिट प्रति टन पहुंच गया।
दूसरी ओर, दिसंबर का अमेरिकी सोया तेल वायदा 2.08 प्रतिशत गिरकर 66.33 सेंट प्रति पौंड रह गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले ऐसे उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार में आयात लागत, उपलब्धता और व्यापारिक धारणा के जरिए दिखाई दे सकता है। इसी वजह से घरेलू बाजार में अलग-अलग तेलों की कीमतों में अलग-अलग दिशा देखने को मिलती है।
आम आदमी की रसोई पर क्या पड़ेगा असर?
गुरुवार के बाजार आंकड़ों को देखें तो उपभोक्ताओं के लिए तस्वीर मिश्रित रही। चीनी, गुड़, गेहूं, आटा और कई खाद्य तेलों में गिरावट आई है, जो राहत देने वाली खबर है। दूसरी ओर चावल और कई प्रमुख दालें महंगी हुई हैं, जिससे रसोई के दूसरे हिस्से में खर्च बढ़ सकता है।
चीनी की कीमत में 91 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट थोक बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव जरूर है, लेकिन खुदरा ग्राहक के लिए तत्काल बड़ी राहत की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। खुदरा कीमतों में बदलाव मांग और आपूर्ति के साथ-साथ स्थानीय व्यापारिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
आने वाले दिनों पर रहेगी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चीनी की आठ दिनों की तेजी के बाद शुरू हुई गिरावट आगे भी जारी रहेगी या यह सिर्फ एक दिन का उतार-चढ़ाव है। इसके साथ ही चावल और दालों की बढ़ती कीमतें भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
यदि गेहूं, आटा और खाद्य तेलों में आई नरमी आगे भी कायम रहती है, तो घरेलू उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन यदि चावल और दालों की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो इसका असर खाद्य बजट पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर घरेलू थोक जिंस बाजार में गुरुवार को मिश्रित रुख देखने को मिला। आठ दिनों से लगातार बढ़ रही चीनी की कीमत आखिरकार नीचे आई, गुड़ और कई खाद्य तेल भी सस्ते हुए, जबकि चावल और प्रमुख दालों में तेजी ने बाजार की तस्वीर को पूरी तरह राहत वाली नहीं बनने दिया। अब आने वाले कारोबारी दिनों के आंकड़े बताएंगे कि यह बदलाव अस्थायी है या बाजार किसी नई दिशा में बढ़ रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं