H1N1 ने अचानक बदला रुख! दिल्ली में 24 घंटे में 166 नए केस, यूपी में पहली मौत… अब किस खतरे की आहट?
लखनऊ/नई दिल्ली: देश में मौसमी इन्फ्लुएंजा और H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस सीजन में स्वाइन फ्लू से पहली मौत सामने आई है। इंदिरानगर निवासी 50 वर्षीय महिला ने गुरुवार को बलरामपुर अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महिला को कुछ दिनों से सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस लेने में परेशानी थी। जांच में H1N1 संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी संक्रमण की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले 24 घंटे में H1N1 के 166 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही इस साल दिल्ली में स्वाइन फ्लू के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 2,612 हो गई है। वहीं, इन्फ्लुएंजा-A के कुल मामले भी बढ़कर करीब 3,300 पहुंच गए हैं।
लगातार बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली सरकार ने अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने गुरुवार को इंदिरा गांधी अस्पताल का दौरा कर H1N1 मरीजों के इलाज और संक्रमण से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया।
लखनऊ में स्वाइन फ्लू से पहली मौत
लखनऊ में सामने आया मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह इस सीजन में राजधानी में स्वाइन फ्लू से पहली मौत बताई जा रही है। इंदिरानगर की रहने वाली 50 वर्षीय महिला को कुछ दिन पहले सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस लेने में परेशानी शुरू हुई थी।
शुरुआत में परिवार ने महिला का इलाज एक निजी अस्पताल में कराया। लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू की जांच कराने की सलाह दी। इसके बाद 24 अगस्त को निजी पैथोलॉजी की जांच में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई।
जांच रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने महिला को बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। इसके अगले दिन यानी 25 अगस्त को परिवार महिला को बलरामपुर अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन महिला की हालत गंभीर बनी रही। गुरुवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद रही। साथ ही महिला की H1N1 रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण को लेकर एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए।
मौत के बाद अस्पताल में बढ़ी सतर्कता
महिला की मौत के बाद परिवार की ओर से डॉक्टरों को उसके मोबाइल पर मौजूद स्वाइन फ्लू की जांच रिपोर्ट दिखाई गई। रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।
अस्पताल में मृतका के आसपास भर्ती मरीजों की निगरानी और जांच को लेकर कदम उठाए गए। इलाज में शामिल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के स्वास्थ्य पर भी नजर रखी जा रही है।
परिवार द्वारा उपलब्ध कराई गई जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण के संभावित संपर्कों की जांच के लिए नमूने लेने की प्रक्रिया शुरू की। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि H1N1 जैसे श्वसन संक्रमण में मरीज के संपर्क में आए लोगों की निगरानी संक्रमण की श्रृंखला को रोकने में मदद कर सकती है।
दिल्ली में एक दिन में 166 नए मरीज
उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली में भी H1N1 के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में राजधानी में 166 नए H1N1 मामले दर्ज हुए। इससे कुल संख्या 2,612 तक पहुंच गई है। एक दिन पहले यानी बुधवार को 138 नए मामले सामने आए थे और कुल संख्या 2,446 थी।
इसका मतलब है कि महज एक दिन में नए मामलों की संख्या में 28 का इजाफा हुआ। इसके साथ ही दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-A के कुल मामलों की संख्या भी बुधवार के 3,177 से बढ़कर करीब 3,300 हो गई है।
लगातार बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का कारण जरूर हैं, लेकिन अधिकारियों ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है।
स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल का किया निरीक्षण
दिल्ली में H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने गुरुवार को द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल में मौजूद विशेष H1N1 आइसोलेशन वार्ड और मरीजों के इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
मंत्री ने अस्पताल में उपलब्ध बेड, ऑक्सीजन, दवाओं, जरूरी मेडिकल फ्लूइड्स, जांच सुविधाओं और अन्य चिकित्सा संसाधनों की स्थिति की समीक्षा की। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से बातचीत कर मरीजों के इलाज और संक्रमण नियंत्रण की तैयारियों के बारे में भी जानकारी ली गई।
अस्पताल में H1N1 और मौसमी फ्लू से जुड़े मामलों की शुरुआती जांच और प्रबंधन के लिए विशेष फ्लू क्लिनिक भी संचालित किया गया है। संदिग्ध मरीजों की जांच के साथ जरूरत के अनुसार उन्हें अलग रखने की व्यवस्था की जा रही है।
अस्पतालों को आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश
दिल्ली सरकार ने बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकारी अस्पतालों को अपनी तैयारियां मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों से आइसोलेशन बेड, डॉक्टरों, जांच सुविधाओं और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, अस्पतालों को कम से कम पांच आइसोलेशन बेड तैयार रखने और बड़े अस्पतालों में इससे अधिक बेड की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी और आपातकालीन सेवाओं को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि यदि आने वाले दिनों में H1N1 के मरीजों की संख्या और बढ़ती है, तो अस्पतालों पर अचानक दबाव न पड़े और गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
H1N1 के लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
H1N1 इन्फ्लुएंजा एक श्वसन संक्रमण है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और थकान शामिल हो सकते हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
समस्या यह है कि इन लक्षणों में से कई लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण, मौसमी फ्लू और अन्य श्वसन बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में केवल लक्षण देखकर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि मरीज को H1N1 है या कोई अन्य संक्रमण।
विशेष रूप से तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या लगातार बिगड़ती हालत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों ने लोगों को खुद से दवा लेने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेने की बात कही है।
बचाव के लिए छोटी सावधानियां जरूरी
H1N1 जैसे श्वसन संक्रमण से बचने के लिए सामान्य सावधानियां काफी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। नियमित रूप से हाथ धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा बीमार व्यक्ति के बेहद करीब जाने से बचना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
यदि किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे दूसरों से दूरी बनाए रखने और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेने पर ध्यान देना चाहिए। खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखना जरूरी है।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने भी लोगों से अनावश्यक रूप से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। सरकार का कहना है कि अस्पतालों में तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है।
क्या देश में बढ़ रहा है H1N1 का दबाव?
दिल्ली में लगातार नए मामलों का सामने आना और लखनऊ में इस सीजन की पहली मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती जरूर बढ़ा दी है। दिल्ली में केवल 24 घंटे में 166 नए मामले सामने आना यह दिखाता है कि संक्रमण की निगरानी लगातार जरूरी है।
हालांकि, केवल मामलों की बढ़ती संख्या के आधार पर किसी बड़े प्रकोप या आपात स्थिति का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। मरीजों की गंभीरता, अस्पताल में भर्ती होने की दर और मृत्यु दर जैसे आंकड़े भी स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
फिलहाल स्वास्थ्य विभागों का जोर निगरानी, जांच, अस्पतालों की तैयारी और संक्रमण को नियंत्रित करने पर है। दिल्ली में अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है, जबकि लखनऊ में मौत के बाद संपर्क में आए मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी बढ़ाई गई है।
लखनऊ की मौत के बाद बढ़ी चिंता, दिल्ली के आंकड़ों ने भी चौंकाया
एक तरफ लखनऊ में 50 वर्षीय महिला की मौत ने स्वाइन फ्लू को लेकर चिंता बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ दिल्ली में 24 घंटे के भीतर 166 नए H1N1 मामले सामने आने से संक्रमण की रफ्तार पर नजर रखने की जरूरत और बढ़ गई है।
फिलहाल विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह यही है कि लोगों को घबराने की बजाय सतर्क रहना चाहिए। फ्लू जैसे लक्षणों को हल्के में न लें, गंभीर लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लें और संक्रमण से बचाव की सामान्य सावधानियों का पालन करें।
दिल्ली में H1N1 के कुल मामले 2,612 और इन्फ्लुएंजा-A के करीब 3,300 तक पहुंच चुके हैं, जबकि लखनऊ में इस सीजन की पहली स्वाइन फ्लू मौत दर्ज हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में संक्रमण के आंकड़ों और अस्पतालों की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी रहेगी।

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