दिनभर बिल्कुल ठीक, बिस्तर पर जाते ही शुरू हो जाती है खांसी! कहीं शरीर दे तो नहीं रहा ये बड़ा संकेत?
अगर दिनभर आप बिल्कुल ठीक रहते हैं, बातचीत करते हैं, काम करते हैं और सामान्य तरीके से सांस लेते हैं, लेकिन जैसे ही रात में बिस्तर पर जाते हैं अचानक खांसी शुरू हो जाती है, तो इसे हमेशा मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। खासकर तब, जब यह समस्या बार-बार हो रही हो, नींद खराब कर रही हो या कई दिनों से लगातार बनी हुई हो।
रात में खांसी बढ़ने के पीछे शरीर की स्थिति में बदलाव से लेकर नाक और गले में जमा म्यूकस, सांस की नलियों की संवेदनशीलता और पेट से एसिड ऊपर आने जैसी कई वजहें हो सकती हैं। विशेषज्ञ स्वास्थ्य संस्थानों की जानकारी के अनुसार, रात में बढ़ने वाली खांसी के आम कारणों में पोस्टनेजल ड्रिप, अस्थमा और एसिड रिफ्लक्स प्रमुख हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कुछ समस्याओं में व्यक्ति को दिन के समय कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन लेटते ही लक्षण अचानक बढ़ सकते हैं। यही कारण है कि रात में होने वाली लगातार खांसी को समझना जरूरी है।
आखिर लेटते ही क्यों बढ़ जाती है खांसी?
हमारे शरीर की स्थिति दिनभर और रात में अलग होती है। दिन में व्यक्ति ज्यादातर समय बैठा या खड़ा रहता है। इस दौरान गुरुत्वाकर्षण के कारण नाक और गले में मौजूद स्राव आसानी से नीचे की ओर जाता रहता है।
लेकिन रात में जब हम बिस्तर पर सीधे लेट जाते हैं, तो शरीर की स्थिति बदल जाती है। नाक या गले में मौजूद म्यूकस पीछे की तरफ जमा हो सकता है। इसी तरह पेट का एसिड भी ऊपर की ओर आने की संभावना बढ़ा सकता है।
इसके अलावा कुछ लोगों में रात के समय सांस की नलियां ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। इससे खांसी, सीने में जकड़न या घरघराहट जैसी समस्या महसूस हो सकती है।
इसलिए रात की खांसी हमेशा सिर्फ सर्दी-जुकाम की वजह से हो, यह जरूरी नहीं है।
पहली वजह: गले में बलगम गिरना यानी पोस्टनेजल ड्रिप
रात में खांसी की सबसे आम वजहों में से एक पोस्टनेजल ड्रिप हो सकती है। इसमें नाक या साइनस से निकलने वाला म्यूकस गले के पीछे की ओर बहने लगता है।
दिन में जब व्यक्ति सीधा रहता है तो यह म्यूकस आसानी से नीचे चला जाता है और कई बार इसका एहसास भी नहीं होता। लेकिन जब व्यक्ति रात में लेटता है, तो म्यूकस गले के पिछले हिस्से में जमा हो सकता है।
इससे गले में जलन पैदा होती है और शरीर उस जमा हुए स्राव को हटाने के लिए खांसी शुरू कर देता है।
इसके साथ कौन से संकेत दिख सकते हैं?
अगर रात की खांसी के साथ आपको गले में कुछ जमा होने जैसा महसूस होता है, बार-बार गला साफ करना पड़ता है या नाक बंद रहती है, तो पोस्टनेजल ड्रिप एक संभावित कारण हो सकता है।
कुछ लोगों में नाक बहने, छींक आने या एलर्जी के लक्षण भी इसके साथ दिखाई दे सकते हैं।
खास बात यह है कि कई बार व्यक्ति को नाक में ज्यादा परेशानी नहीं होती, लेकिन गले में बार-बार कुछ उतरने का एहसास और रात में खांसी बनी रहती है।
दूसरी वजह: अस्थमा, जिसमें खांसी ही हो सकती है मुख्य लक्षण
अस्थमा का नाम सुनते ही आमतौर पर सांस फूलना और घरघराहट याद आती है। लेकिन हर व्यक्ति में अस्थमा एक जैसा दिखाई नहीं देता।
कुछ लोगों में खांसी ही इसका प्रमुख लक्षण हो सकती है। इसे कफ-वेरिएंट अस्थमा के रूप में जाना जाता है।
रात के समय सांस की नलियों की संवेदनशीलता बढ़ने के कारण कुछ लोगों में खांसी ज्यादा परेशान कर सकती है। ठंडी हवा, धूल, धुआं, परफ्यूम, एलर्जी या अन्य उत्तेजक चीजें भी कुछ लोगों में समस्या बढ़ा सकती हैं।
अगर आपको लगातार कई रातों तक लगभग एक ही समय पर खांसी आती है, नींद खुल जाती है या खांसी के साथ सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खासकर अगर ऐसी समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
तीसरी वजह: एसिड रिफ्लक्स, जो रात की खांसी को बढ़ा सकता है
रात में खांसी की एक और महत्वपूर्ण वजह एसिड रिफ्लक्स हो सकती है।
जब पेट का एसिड ऊपर की ओर भोजन नली और गले की तरफ आने लगता है, तो इससे वहां जलन और irritation हो सकती है। कुछ लोगों में यही जलन खांसी का कारण बन जाती है।
समस्या तब ज्यादा बढ़ सकती है जब व्यक्ति खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही बिस्तर पर चला जाए।
लेटने की स्थिति में पेट का एसिड ऊपर की ओर आने की संभावना बढ़ सकती है। इसके कारण व्यक्ति को रात में अचानक सूखी खांसी शुरू हो सकती है।
एसिड रिफ्लक्स के ये संकेत भी ध्यान दें
अगर रात की खांसी के साथ सीने में जलन, मुंह में खट्टा स्वाद, गले में जलन या खाना ऊपर आने जैसा महसूस होता है, तो एसिड रिफ्लक्स भी संभावित वजह हो सकती है।
हालांकि हर व्यक्ति में एसिड रिफ्लक्स के दौरान सीने में जलन होना जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में लगातार खांसी ही प्रमुख संकेत हो सकती है।
क्या खाना खाने के तुरंत बाद सोना समस्या बढ़ा सकता है?
अगर आपकी रात की खांसी एसिड रिफ्लक्स से जुड़ी है, तो खाना खाने और सोने के बीच बहुत कम अंतर रखने से परेशानी बढ़ सकती है।
इसलिए रात में भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने से बचना उपयोगी हो सकता है। सोने से पहले बहुत भारी भोजन, ऐसे खाद्य पदार्थ या पेय जिनसे आपको व्यक्तिगत रूप से रिफ्लक्स बढ़ता है, उनसे बचने पर भी कुछ लोगों को फायदा मिल सकता है।
लेकिन अगर समस्या लगातार बनी हुई है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है।
सिर्फ ये तीन वजहें ही जिम्मेदार नहीं होतीं
रात में खांसी होने के पीछे केवल पोस्टनेजल ड्रिप, अस्थमा और एसिड रिफ्लक्स ही जिम्मेदार नहीं होते।
धूम्रपान, एलर्जी, लंबे समय तक चलने वाला संक्रमण, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और कुछ दवाएं भी लगातार खांसी का कारण बन सकती हैं।
ब्लड प्रेशर और हृदय से जुड़ी कुछ स्थितियों में इस्तेमाल होने वाली ACE inhibitor वर्ग की दवाओं से भी कुछ लोगों को सूखी खांसी हो सकती है।
कुछ मामलों में हृदय की कमजोरी से जुड़ी समस्याओं में लेटने के बाद खांसी या सांस फूलने की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए लंबे समय तक चलने वाली रात की खांसी को केवल मौसम या एलर्जी मान लेना हमेशा सही नहीं है।
घर पर किन बातों का ध्यान रखें?
अगर खांसी हल्की है और किसी गंभीर लक्षण के साथ नहीं है, तो कुछ सामान्य सावधानियां मददगार हो सकती हैं।
रात में सोने से पहले कमरे में धूल, धुआं या तेज खुशबू वाले पदार्थों से बचें। यदि हवा बहुत सूखी है, तो उचित नमी बनाए रखना कुछ लोगों के लिए आरामदायक हो सकता है।
नाक बंद रहने या एलर्जी की समस्या होने पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से उचित उपचार के बारे में सलाह ली जा सकती है।
अगर एसिड रिफ्लक्स की आशंका है, तो रात के भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना मददगार हो सकता है। कुछ लोगों को सिर और ऊपरी शरीर को थोड़ा ऊंचा रखकर सोने से भी राहत मिलती है।
हालांकि किसी भी दवा को अपनी मर्जी से लंबे समय तक लेना उचित नहीं है।
कब समझें कि डॉक्टर को दिखाने का समय आ गया है?
अगर खांसी कुछ दिनों की सामान्य समस्या के बजाय लगातार कई सप्ताह तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
अगर खांसी इतनी ज्यादा हो कि रात की नींद लगातार खराब होने लगे, काम या रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हों या बार-बार खांसी के दौरे पड़ें, तो जांच करानी चाहिए।
इसके अलावा अगर खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, तेज घरघराहट, अचानक वजन कम होना या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खून वाली खांसी विशेष रूप से चिकित्सकीय जांच की मांग करती है। अगर खून के साथ सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द भी हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी हो सकता है।
डॉक्टर कैसे पता लगाते हैं खांसी की असली वजह?
खांसी का सही कारण पता लगाने के लिए डॉक्टर सबसे पहले यह जानने की कोशिश करते हैं कि खांसी कब शुरू हुई, दिन में ज्यादा होती है या रात में, सूखी है या बलगम के साथ, और इसके साथ कौन-कौन से दूसरे लक्षण मौजूद हैं।
मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर जरूरत पड़ने पर छाती का एक्स-रे, फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच, एलर्जी टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दी जा सकती है।
कई बार एक व्यक्ति में खांसी की एक से ज्यादा वजह भी हो सकती है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को एलर्जी के कारण पोस्टनेजल ड्रिप के साथ-साथ एसिड रिफ्लक्स की समस्या भी हो सकती है।
इसलिए केवल खांसी रोकना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए। असली वजह पता लगाकर उसका इलाज करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
रात की खांसी को लेकर सबसे जरूरी बात
अगर दिनभर सब ठीक रहता है लेकिन रात में बिस्तर पर जाते ही खांसी शुरू हो जाती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको निश्चित रूप से कोई गंभीर बीमारी है। अक्सर इसके पीछे सामान्य और इलाज योग्य कारण होते हैं।
लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, कई सप्ताह तक बनी हुई है या दूसरे लक्षणों के साथ दिखाई दे रही है, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।
रात में शुरू होने वाली खांसी शरीर का एक संकेत हो सकती है। कभी यह गले में जमा बलगम की वजह से होती है, कभी अस्थमा जैसी सांस की समस्या के कारण और कभी पेट का एसिड इसकी वजह बन सकता है। इसलिए बार-बार होने वाली खांसी को सिर्फ मौसम का असर समझने के बजाय उसके पैटर्न और साथ दिखाई देने वाले लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

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