PM मोदी ने मंच से कह दी ऐसी बात, बदल जाएगी सरकार और जनता के बीच की पूरी सोच? पुराने ‘लाइसेंस राज’ से नए भारत तक खोले कई बड़े राज!
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 को संबोधित करते हुए भारत में हो रहे आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों पर विस्तार से बात की। पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के भारत में केवल नियमों को बदलने का काम नहीं हो रहा है, बल्कि नियमों के पीछे की पूरी सोच और शासन की कार्यशैली में बदलाव किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार और नागरिकों के बीच संबंध शक पर नहीं बल्कि भरोसे पर आधारित होने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जिसमें किसी काम को करने के लिए हर कदम पर सरकार से अनुमति लेने की जरूरत न पड़े। उन्होंने इसे “Prohibited unless permitted” से “Permitted unless prohibited” की ओर बढ़ता बदलाव बताया। यानी जो काम कानून के तहत स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं है, उसके लिए बार-बार अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
पीएम मोदी के अनुसार, यह बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य नागरिकों और कारोबारियों के प्रति सरकार के दृष्टिकोण को बदलना भी है।
“सरकार और नागरिकों के रिश्ते में भरोसा होना चाहिए”
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि शासन की पूरी फिलॉसफी में बदलाव जरूरी है। उनका कहना था कि पहले की व्यवस्था में कई गतिविधियों के लिए पहले सरकारी अनुमति लेना जरूरी होता था। अब सरकार उस सोच को बदलकर ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है जिसमें कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं किए गए कामों को सामान्य रूप से करने की स्वतंत्रता हो।
प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में कहा कि सरकार और नागरिकों के रिश्ते का आधार संदेह नहीं बल्कि विश्वास होना चाहिए। उन्होंने इसे भारत की रिफॉर्म यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि सरकार की नीतियां जनहितैषी, विकास समर्थक और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए। उनके मुताबिक, कई बड़े सुधार ऐसे होते हैं जो धीरे-धीरे आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन जाते हैं और यही वास्तविक Ease of Living है।
लाइसेंस राज पर पीएम मोदी ने साधा निशाना
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पुराने लाइसेंस राज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा था जब कंपनियों के उत्पादन पर भी कई तरह की सीमाएं लागू थीं और निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन करने पर कंपनियों को दंडित किया जा सकता था।
पीएम मोदी ने इसे “Production Linked Punishment” यानी PLP की संज्ञा दी। उनके मुताबिक, उस दौर की ऐसी सोच ने उद्योगों, उत्पादन और रोजगार के विस्तार को नुकसान पहुंचाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सरकार की नीति इसके बिल्कुल विपरीत है। अब ज्यादा उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है। इसी बदलाव को उन्होंने Production Linked Incentive यानी PLI के उदाहरण से समझाया।
उनके अनुसार, भारत अब कारोबार को नियंत्रित करने के बजाय उसे सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
PLI से निवेश, उत्पादन और रोजगार का दावा
पीएम मोदी ने PLI योजना के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, PLI योजना के तहत अब तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश आया है। इससे लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री हुई है। उन्होंने कहा कि योजना से करीब 15 लाख करोड़ रुपये के निर्यात और 14 लाख से ज्यादा नौकरियों का सृजन हुआ है।
सरकार का तर्क है कि उत्पादन को प्रोत्साहन देने वाली ऐसी योजनाएं देश में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी पैदा करती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस व्यवस्था में कभी उत्पादन बढ़ाने पर रोक या दंड का माहौल था, उसमें अब उत्पादन बढ़ाने और निवेश करने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
40 हजार से ज्यादा अनुपालन नियम हटाने का दावा
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में प्रशासनिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में 40 हजार से अधिक compliances यानी अनुपालन संबंधी बोझ हटाए गए हैं। इसके अलावा 1,500 से ज्यादा पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने जन विश्वास पहल का उदाहरण देते हुए कहा कि कई प्रक्रियात्मक गलतियों को आपराधिक अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। कुछ मामलों में जेल की जगह आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, इन सुधारों का उद्देश्य कारोबार और उद्योगों पर मौजूद अनावश्यक कानूनी तथा प्रशासनिक बोझ को कम करना है।
डिजिटल सेक्टर में बदलाव का भी जिक्र
पीएम मोदी ने भारत के डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में हुए बदलावों को भी अपने संबोधन का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि भारत में डेटा की कीमतें दुनिया के कई हिस्सों की तुलना में बेहद कम हैं और देश मोबाइल फोन के निर्माण में भी तेजी से आगे बढ़ा है।
प्रधानमंत्री ने जियोस्पेशियल डेटा और भारत के नक्शे से जुड़े पुराने नियमों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले देश में मैपिंग से जुड़े कई कामों के लिए अनुमति की जरूरत होती थी। अब सरकार ने ऐसे नियमों को बदलकर निजी क्षेत्र और नवाचार के लिए ज्यादा अवसर पैदा किए हैं।
उन्होंने कहा कि ड्रोन, जियोस्पेशियल डेटा, डिजिटल सेवाओं और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में नियमों को सरल बनाने से नई संभावनाएं पैदा हुई हैं।
बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया ताकत
प्रधानमंत्री ने देश के सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को देश की कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत माना जाना चाहिए।
सरकार के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास से न केवल रणनीतिक क्षमता मजबूत होती है, बल्कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसर भी बढ़ते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की गति में तेजी आई है और रेलवे, मेट्रो तथा रैपिड रेल जैसी परियोजनाएं इस बदलाव को दर्शाती हैं।
रेलवे और रैपिड रेल में सुधार का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने भारतीय रेलवे में सुरक्षा और तकनीकी सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 6,500 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों और 10,000 लेवल क्रॉसिंग पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है। करीब 9,000 मानव रहित क्रॉसिंग हटाए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, इन प्रयासों से ट्रेन दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने दिल्ली-Meerut नमो भारत रैपिड रेल और दिल्ली मेट्रो का भी उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सेवाओं में समय की पाबंदी और दक्षता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
दुनिया के लिए भारत को बताया “ग्रोथ और उम्मीद की किरण”
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय आर्थिक अनिश्चितता, संसाधनों के हथियारीकरण और देशों के बीच बढ़ते अविश्वास जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे माहौल में दुनिया भारत को ग्रोथ और उम्मीद की एक बड़ी किरण के रूप में देख रही है।
उन्होंने भारत की आर्थिक वृद्धि, नीतिगत स्थिरता और सुधारों को इसका आधार बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को एक विकसित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाना है।
“रिफॉर्म एक्सप्रेस” को और तेज करने का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सुधारों की गति को आगे भी जारी रखेगी। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए काम जारी रखने की बात कही और कहा कि “रिफॉर्म एक्सप्रेस” आगे और तेज गति से बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी के इस संबोधन में सरकार की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों के साथ-साथ नियमों को सरल बनाने, कारोबार को प्रोत्साहित करने, डिजिटल और भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने तथा शासन में भरोसे की भावना बढ़ाने पर जोर रहा।
प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि सरकार अब ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है जहां नागरिकों और उद्यमियों को हर छोटे-बड़े काम के लिए अनुमति और कागजी प्रक्रिया के जाल में न फंसना पड़े। सरकार के अनुसार, यही बदलाव भारत को तेज विकास और Ease of Living की दिशा में आगे ले जाने में मदद कर सकते हैं।

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