देवरिया में तिरंगा यात्रा के बाद 40 से ज्यादा छात्राओं की तबीयत बिगड़ी, कई हुईं बेहोश; अस्पताल में मचा हड़कंप
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित तिरंगा यात्रा के बाद उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बड़ी संख्या में छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि यात्रा में शामिल कम से कम 40 छात्राएं बीमार पड़ गईं, जबकि कई छात्राएं चलते-चलते बेहोश होकर गिर पड़ीं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और आयोजकों में हड़कंप मच गया।
तबीयत बिगड़ने के बाद छात्राओं को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने छात्राओं की जांच शुरू की और आवश्यक उपचार दिया। शुरुआती तौर पर डॉक्टरों ने छात्राओं की हालत बिगड़ने की वजह खाली पेट रहना, लंबे समय तक पैदल चलना और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन बताया है।
तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल हुई थीं छात्राएं
बताया जा रहा है कि देवरिया में आयोजित तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था। देशभक्ति के नारों और हाथों में तिरंगा लेकर छात्राएं यात्रा में आगे बढ़ रही थीं। यात्रा के दौरान काफी देर तक पैदल चलने के कारण कई छात्राओं को थकान महसूस होने लगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शुरुआत में कुछ छात्राओं ने कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत की। इसके बाद कुछ छात्राएं अचानक जमीन पर गिर पड़ीं। एक के बाद एक कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने से मौके पर मौजूद लोगों में चिंता बढ़ गई।
कई छात्राएं अचानक हुईं बेहोश
यात्रा के दौरान कुछ छात्राओं को चक्कर आने लगे और वे बेहोश हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की। स्थिति गंभीर होते देख बीमार छात्राओं को अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने छात्राओं की जांच की। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्राओं के एक साथ अस्पताल पहुंचने से वहां भी कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
डॉक्टरों ने बताई ये वजह
चिकित्सकों के अनुसार, छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे मुख्य कारण सुबह से कुछ नहीं खाना और लंबे समय तक पैदल चलना हो सकता है। इसके अलावा गर्मी और शारीरिक थकान के कारण शरीर में पानी की कमी होने से भी चक्कर, कमजोरी और बेहोशी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
डॉक्टरों ने छात्राओं को पर्याप्त पानी और भोजन लेने की सलाह दी है। जरूरत के मुताबिक उन्हें उपचार और निगरानी में रखा गया। अधिकांश छात्राओं की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
लापरवाही पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद तिरंगा यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के यात्रा में शामिल होने के दौरान उनके भोजन, पानी और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं, यह जांच का विषय है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक चलने वाले किसी भी आयोजन में बच्चों और किशोरों के लिए पर्याप्त पेयजल, भोजन, आराम और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था बेहद जरूरी होती है। खासकर खाली पेट लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि करने से कमजोरी और बेहोशी का खतरा बढ़ सकता है।
अस्पताल में कराया गया उपचार
छात्राओं के अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उनकी स्थिति पर नजर रखी। जिन छात्राओं को कमजोरी या डिहाइड्रेशन की शिकायत थी, उन्हें आवश्यक उपचार दिया गया। परिजनों और स्कूल से जुड़े लोगों को भी छात्राओं की स्थिति की जानकारी दी गई।
घटना के बाद प्रशासन और आयोजन से जुड़े लोगों की ओर से भी व्यवस्थाओं की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
एक साथ बिगड़ी 40 से ज्यादा छात्राओं की तबीयत
देवरिया की यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक साथ 40 से अधिक छात्राओं के बीमार पड़ने की बात सामने आई है। कई छात्राओं के बेहोश होने के कारण कुछ समय के लिए माहौल बेहद चिंताजनक हो गया था।
हालांकि डॉक्टरों की शुरुआती जांच में किसी गंभीर बीमारी के बजाय खाली पेट रहने, अत्यधिक पैदल चलने और डिहाइड्रेशन को संभावित वजह माना गया है। अंतिम स्थिति और घटना की पूरी तस्वीर संबंधित अधिकारियों की जांच तथा चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल अस्पताल में भर्ती छात्राओं के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है। घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि स्कूलों और सार्वजनिक आयोजनों में बच्चों को शामिल करने से पहले उनकी बुनियादी स्वास्थ्य और सुरक्षा जरूरतों का कितना ध्यान रखा जा रहा है।

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