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अब पसीना बताएगा आपकी बीमारी! वैज्ञानिकों ने बनाई ऐसी स्मार्ट रिंग, जो बिना खून निकाले बताएगी शरीर का पूरा राज



तकनीक की दुनिया में पहनने योग्य (Wearable) डिवाइस लगातार स्मार्ट होते जा रहे हैं। पहले स्मार्टवॉच ने लोगों को हार्ट रेट, ऑक्सीजन लेवल और नींद की जानकारी देना शुरू किया, फिर स्मार्ट रिंग्स ने अपनी जगह बनानी शुरू की। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई स्मार्ट रिंग विकसित की है, जो सिर्फ आपकी उंगली से निकलने वाले पसीने की मदद से शरीर के अंदर चल रही कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर नजर रख सकती है।

इस नई तकनीक को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह रिंग भविष्य में डायबिटीज, पोषण और मेटाबॉलिज्म जैसी कई स्वास्थ्य स्थितियों की निगरानी को पहले से कहीं अधिक आसान बना सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के इंजीनियरों ने तैयार किया प्रोटोटाइप

इस नई स्मार्ट रिंग का प्रोटोटाइप यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के इंजीनियरों ने विकसित किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह डिवाइस सामान्य स्मार्ट रिंग्स से काफी अलग है।

जहां मौजूदा स्मार्ट रिंग्स मुख्य रूप से हार्ट रेट, शरीर की गतिविधि, तापमान और नींद जैसी बायोफिजिकल जानकारियां रिकॉर्ड करती हैं, वहीं यह नई रिंग शरीर से निकलने वाले पसीने में मौजूद बायोकेमिकल संकेतों का विश्लेषण कर सकती है।

यानी अब केवल शरीर की बाहरी गतिविधियां ही नहीं, बल्कि शरीर के अंदर हो रहे रासायनिक बदलावों की जानकारी भी रियल टाइम में मिल सकेगी।

एक साथ कई बायोमार्कर की करेगी जांच

रिसर्च टीम के अनुसार, इस रिंग में लगाया गया इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर एक साथ कई महत्वपूर्ण बायोमार्कर की पहचान करने में सक्षम है।

यह रिंग निम्नलिखित तत्वों की निगरानी कर सकती है—

  • ग्लूकोज

  • कीटोन्स

  • विटामिन C

  • यूरिक एसिड

  • अल्कोहल

इन सभी बायोमार्कर की जानकारी किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, खान-पान और मेटाबॉलिज्म के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।

कैसे करती है काम?

इस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिक Tamoghna Saha के अनुसार, मौजूदा कमर्शियल स्मार्ट रिंग्स केवल शरीर की गतिविधियों और शारीरिक संकेतों को रिकॉर्ड करती हैं।

लेकिन नई स्मार्ट रिंग शरीर से निकलने वाले पसीने में मौजूद अणुओं (Molecules) को मापती है।

दिलचस्प बात यह है कि इस रिंग को काम करने के लिए ज्यादा पसीने की जरूरत नहीं होती।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति आराम कर रहा होता है, तब भी उसकी उंगलियों से हल्की नमी लगातार निकलती रहती है। यही नमी इस रिंग के लिए पर्याप्त होती है।

रिंग में मौजूद सेंसर इस नमी को इकट्ठा कर उसमें मौजूद रासायनिक तत्वों का विश्लेषण करता है। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स को विशेष कैलिब्रेशन सिस्टम के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के स्वास्थ्य डेटा में बदल दिया जाता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए हो सकती है बेहद उपयोगी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ डायबिटीज के मरीजों को मिल सकता है।

ग्लूकोज और कीटोन लेवल की लगातार निगरानी से मरीज यह समझ सकेंगे कि उनके शरीर में ब्लड शुगर किस तरह बदल रही है।

भविष्य में यदि यह तकनीक व्यापक रूप से उपलब्ध होती है तो डॉक्टर मरीजों की इंसुलिन जरूरत का आकलन अधिक सटीक तरीके से कर सकेंगे।

रिसर्च टीम का दावा है कि शुरुआती परीक्षणों के दौरान इस रिंग ने कमर्शियल ग्लूकोज मीटर और ब्लड कीटोन मीटर के बराबर सटीक परिणाम दिए हैं।

हालांकि, यह तकनीक अभी शोध के चरण में है और व्यापक चिकित्सा उपयोग के लिए आगे और परीक्षण तथा नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी।

छोटी रिंग में पूरा सेंसिंग सिस्टम

आकार में बेहद छोटी दिखने वाली इस स्मार्ट रिंग के अंदर पूरा सेंसिंग सिस्टम लगाया गया है।

रिंग के एक हिस्से में—

  • स्वेट कलेक्शन सिस्टम

  • माइक्रो फ्लूइड चैनल

  • इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर

दिए गए हैं।

वहीं दूसरे हिस्से में—

  • सर्किट बोर्ड

  • रिचार्जेबल बैटरी

  • वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम

फिट किया गया है।

यानी अलग से कोई पैच, तार या बाहरी रीडर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

स्मार्टफोन से जुड़ जाएगी रिंग

रिंग द्वारा एकत्र किया गया पूरा डेटा ब्लूटूथ के माध्यम से स्मार्टफोन तक पहुंचता है।

मोबाइल एप्लिकेशन पर उपयोगकर्ता अपने स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी रियल टाइम में देख सकता है।

इससे डॉक्टर और मरीज दोनों समय-समय पर शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रख सकते हैं।

12 घंटे तक चलता है बैटरी बैकअप

रिसर्चर्स के अनुसार, इस स्मार्ट रिंग में जिंक-सिल्वर ऑक्साइड आधारित फ्लेक्सिबल और रिचार्जेबल बैटरी का उपयोग किया गया है।

यह बैटरी लगभग 12 घंटे तक लगातार काम कर सकती है।

रिंग की बाहरी संरचना 3D प्रिंटेड पॉलीमर से बनाई गई है, जिससे यह हल्की और आरामदायक बनी रहती है।

स्मार्ट रिंग क्यों हो रही हैं लोकप्रिय?

पिछले कुछ वर्षों में स्मार्ट रिंग्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

कई लोग अब स्मार्टवॉच की जगह स्मार्ट रिंग पहनना पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह अधिक हल्की, सुविधाजनक और कम ध्यान आकर्षित करने वाली होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्ट रिंग्स के कई फायदे हैं।

1. बिना स्क्रीन के लगातार मॉनिटरिंग

स्मार्ट रिंग में स्क्रीन नहीं होती, लेकिन यह लगातार डेटा रिकॉर्ड करती रहती है।

जब जरूरत हो, तब उपयोगकर्ता मोबाइल ऐप पर सारी जानकारी देख सकता है।

2. लंबी बैटरी लाइफ

डिस्प्ले न होने के कारण अधिकांश स्मार्ट रिंग्स की बैटरी स्मार्टवॉच की तुलना में अधिक समय तक चलती है।

कुछ कमर्शियल मॉडल एक बार चार्ज होने पर कई दिनों तक चलते हैं।

3. पहनने में आरामदायक

स्मार्ट रिंग उंगली में आसानी से फिट हो जाती है।

इसे पहनकर सोना, काम करना या व्यायाम करना आसान होता है।

इसी कारण स्लीप ट्रैकिंग के लिए भी इसे काफी उपयोगी माना जाता है।

क्या भविष्य में खत्म हो जाएंगे बार-बार ब्लड टेस्ट?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी तकनीक भविष्य में पूरी तरह सफल होती है तो कई मामलों में बार-बार ब्लड टेस्ट कराने की आवश्यकता कम हो सकती है।

हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह तकनीक पारंपरिक जांचों की जगह पूरी तरह ले लेगी।

चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी नए मेडिकल डिवाइस को व्यापक उपयोग से पहले बड़े स्तर पर क्लीनिकल परीक्षणों और नियामकीय स्वीकृति से गुजरना पड़ता है।

हेल्थ टेक्नोलॉजी में नया कदम

दुनिया भर में स्वास्थ्य निगरानी उपकरण तेजी से विकसित हो रहे हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोसेंसर और वियरेबल टेक्नोलॉजी के मेल से ऐसे उपकरण विकसित किए जा रहे हैं जो लोगों को अस्पताल जाने से पहले ही अपने स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकें।

यह नई स्मार्ट रिंग भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के इंजीनियरों द्वारा विकसित यह नई स्मार्ट रिंग स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में सामने आई है। उंगली से निकलने वाले पसीने के माध्यम से ग्लूकोज, कीटोन्स, विटामिन C और अन्य बायोमार्कर की निगरानी करने की इसकी क्षमता भविष्य में व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रबंधन को अधिक आसान बना सकती है। हालांकि यह तकनीक अभी शोध और परीक्षण के चरण में है, लेकिन यदि आगे के क्लीनिकल ट्रायल सफल रहते हैं और आवश्यक मंजूरियां मिलती हैं, तो आने वाले वर्षों में यह डिवाइस स्वास्थ्य निगरानी के तरीके को बदलने की क्षमता रखती है।

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