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थकान को आलस समझना पड़ सकता है भारी! शरीर के इन संकेतों के पीछे छिपा हो सकता है बड़ा खतरा



आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सुबह आंख खुलने के कुछ घंटे बाद ही बहुत से लोगों को ऐसा लगने लगता है जैसे शरीर में ऊर्जा ही नहीं बची। काम शुरू करने से पहले थकान, दिनभर सुस्ती, किसी काम में मन न लगना, बार-बार जम्हाई आना और छोटी-सी गतिविधि के बाद आराम करने का मन करना अब आम शिकायत बनती जा रही है। खास बात यह है कि कई लोग पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद भी खुद को तरोताजा महसूस नहीं करते।

2026 में प्रकाशित एक भारतीय अध्ययन ने भी डिजिटल जुड़ाव, काम के घंटों, नींद और बर्नआउट के बीच संबंधों की जांच की है। अध्ययन में भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षकों के बीच डिजिटल एंगेजमेंट, स्क्रीन एक्सपोजर और नींद के पैटर्न जैसे कारकों को देखा गया। इससे यह बात सामने आती है कि आधुनिक जीवनशैली में लगातार डिजिटल जुड़ाव और काम का दबाव नींद और थकान से जुड़े अनुभवों को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, हर समय थकान महसूस होना केवल व्यस्त दिनचर्या का परिणाम नहीं होता। नींद की कमी, खराब खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव, डिहाइड्रेशन और कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं। NHS के अनुसार, अगर लंबे समय तक बिना स्पष्ट कारण थकान बनी रहती है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है, तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

1. देर रात तक मोबाइल चलाना हो सकता है बड़ी वजह

आज ज्यादातर लोगों की रात मोबाइल स्क्रीन देखने के साथ खत्म होती है। सोने से पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना, चैट करना या वेब सीरीज देखना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है।

समस्या यह है कि स्क्रीन का इस्तेमाल केवल आंखों को व्यस्त नहीं रखता, बल्कि दिमाग को भी सक्रिय बनाए रख सकता है। हालिया विशेषज्ञ सलाह के मुताबिक, सोने से करीब 30 से 60 मिनट पहले स्क्रीन टाइम कम करने से शरीर और दिमाग को आराम की स्थिति में जाने में मदद मिल सकती है।

NHS भी सोने से पहले स्मार्टफोन और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने की सलाह देता है। खराब नींद अगले दिन दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी का कारण बन सकती है।

इसलिए अगर सुबह उठने के बाद भी ऐसा लगता है कि पूरी रात सोने के बावजूद शरीर को आराम नहीं मिला, तो सबसे पहले अपनी रात की दिनचर्या पर नजर डालना जरूरी है।

2. पर्याप्त नींद के बावजूद नींद का समय तय नहीं होना

सिर्फ बिस्तर पर कई घंटे बिताना पर्याप्त नहीं है। सोने और जागने का समय लगातार बदलता रहे तो शरीर की नियमित दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

कभी रात 10 बजे सोना, कभी 1 बजे और फिर छुट्टी के दिन दोपहर तक सोते रहना शरीर के लिए आदर्श रूटीन नहीं माना जाता। नींद से जुड़ी समस्याओं में रात में बार-बार जागना, देर से नींद आना और सुबह उठने के बाद भी थका हुआ महसूस करना शामिल हो सकता है।

इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाई जाए। नींद का वातावरण भी शांत, आरामदायक और बहुत ज्यादा रोशनी या शोर से मुक्त होना चाहिए।

3. दिनभर बैठे रहना भी घटा सकता है एनर्जी

कई लोग सोचते हैं कि थकान का इलाज ज्यादा आराम करना है। लेकिन अगर आपकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि बहुत कम है, तो लगातार बैठे रहना भी सुस्ती को बढ़ा सकता है।

ऑफिस का काम, लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठना, घर पहुंचने के बाद मोबाइल चलाना और फिर बिस्तर पर चले जाना—ऐसी दिनचर्या में शरीर को पर्याप्त मूवमेंट नहीं मिलती।

NHS के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि लंबे समय में थकान कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद कर सकती है। यहां तक कि थोड़ी देर की पैदल चाल भी कुछ लोगों को ऊर्जा का अनुभव करा सकती है।

इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को तुरंत कठिन वर्कआउट शुरू करना चाहिए। शुरुआत रोजमर्रा की छोटी गतिविधियों से की जा सकती है—जैसे थोड़ी देर पैदल चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना या लंबे समय तक बैठने के बीच छोटे ब्रेक लेना।

4. पानी कम पीना भी बना सकता है सुस्ती की वजह

बहुत से लोग दिनभर काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें पानी पीने का ध्यान ही नहीं रहता। हल्का डिहाइड्रेशन भी शरीर में थकान और कमजोरी जैसा एहसास पैदा कर सकता है।

NHS के अनुसार डिहाइड्रेशन के लक्षणों में प्यास, सिरदर्द, चक्कर, मुंह सूखना, सामान्य से कम पेशाब आना और थकान शामिल हो सकते हैं।

खासकर गर्म मौसम में, व्यायाम करने के दौरान या ज्यादा पसीना आने की स्थिति में शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ की जरूरत होती है।

इसलिए दिनभर पानी पीने की आदत बनाए रखना जरूरी है। लेकिन कितना पानी चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र, मौसम, गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। किसी एक तय मात्रा को हर व्यक्ति के लिए सही मानना उचित नहीं है।

5. खाना छोड़ना और असंतुलित डाइट

सुबह नाश्ता छोड़ देना, लंबे समय तक खाली पेट रहना या दिनभर सिर्फ चाय-कॉफी के सहारे काम चलाना भी शरीर की ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है।

हमारे शरीर को रोजाना विभिन्न पोषक तत्वों की जरूरत होती है। अगर भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, फल-सब्जियां और अन्य जरूरी पोषक तत्व नहीं हैं, तो दिनभर ऊर्जा बनाए रखना मुश्किल महसूस हो सकता है।

NHS की सलाह के अनुसार नियमित भोजन और स्वस्थ स्नैक्स को उचित अंतराल पर लेना ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।

इसका मतलब यह नहीं कि हर समय कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। बल्कि भोजन को संतुलित और नियमित रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

6. लगातार तनाव भी चुरा सकता है आपकी ऊर्जा

थकान हमेशा शारीरिक नहीं होती। मानसिक तनाव भी व्यक्ति को अंदर से बेहद थका सकता है।

काम का दबाव, आर्थिक चिंता, परिवार से जुड़े तनाव, रिश्तों की परेशानी या भविष्य को लेकर लगातार चिंता दिमाग को लगातार सक्रिय रख सकती है। इसका असर नींद, मूड और एकाग्रता पर भी पड़ सकता है।

NHS के मुताबिक तनाव के दौरान सिरदर्द, चक्कर, मांसपेशियों में तनाव, ध्यान लगाने में परेशानी, निर्णय लेने में कठिनाई और नींद में बदलाव जैसे लक्षण हो सकते हैं।

अगर दिमाग लगातार किसी चिंता के बारे में सोचता रहे तो शरीर को आराम की स्थिति में पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए दिन में कुछ समय आराम, बातचीत, संगीत, पढ़ने, टहलने या ऐसी गतिविधि के लिए निकालना उपयोगी हो सकता है जो व्यक्ति को मानसिक रूप से शांत करे।

7. बहुत ज्यादा कैफीन और गलत समय पर कॉफी

थकान महसूस होने पर बहुत से लोग तुरंत चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक की तरफ जाते हैं। इससे कुछ समय के लिए जागरूकता बढ़ सकती है, लेकिन अगर कैफीन का सेवन खासकर शाम या रात में ज्यादा हो जाए तो नींद प्रभावित हो सकती है।

NHS के अनुसार कैफीन का असर कई घंटों तक रह सकता है और शाम को इसका सेवन कुछ लोगों में नींद की समस्या पैदा कर सकता है। खराब नींद के बाद अगले दिन फिर थकान महसूस हो सकती है और व्यक्ति दोबारा ज्यादा कैफीन लेने लगता है। इस तरह एक चक्र बन सकता है।

इसलिए अगर लगातार थकान रहती है तो केवल कॉफी बढ़ाने के बजाय यह देखना बेहतर है कि थकान की मूल वजह क्या है।

थकान को हमेशा सामान्य समझना ठीक नहीं

कभी-कभी थकान होना बिल्कुल सामान्य है। ज्यादा काम, कम नींद, यात्रा या तनावपूर्ण दिन के बाद शरीर को आराम की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन अगर कई सप्ताह तक लगातार थकान बनी रहे और इसका कोई स्पष्ट कारण समझ में न आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

NHS के अनुसार लंबे समय तक रहने वाली थकान के पीछे नींद की समस्या, अस्वस्थ जीवनशैली, तनाव और कुछ बीमारियां हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया, डायबिटीज, थायरॉयड की समस्या या स्लीप एपनिया जैसी स्थितियां भी थकान से जुड़ी हो सकती हैं।

अगर थकान के साथ वजन कम होना, सांस फूलना, दिल की धड़कन महसूस होना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, रात में बार-बार जागना या सोते समय जोर से खर्राटे और सांस रुकने जैसी समस्या हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे बदलाव ला सकते हैं फर्क

लगातार थकान से बचने के लिए सबसे पहले अपनी दिनचर्या को देखना जरूरी है। क्या आप रोज पर्याप्त और नियमित नींद ले रहे हैं? क्या दिनभर पर्याप्त पानी पीते हैं? क्या आपका भोजन संतुलित है? क्या आप कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालते हैं? क्या सोने से पहले घंटों मोबाइल चलाते हैं? और क्या आपका दिमाग लगातार तनाव में रहता है?

इन सवालों के जवाब कई बार समस्या की दिशा समझने में मदद कर सकते हैं।

सोने का समय नियमित करना, रात में स्क्रीन टाइम कम करना, दिनभर पर्याप्त तरल लेना, संतुलित भोजन करना, नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि और तनाव कम करने के लिए समय निकालना ऊर्जा और नींद से जुड़ी आदतों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

हर वक्त थकान महसूस होना सिर्फ आलस नहीं है। कई बार हमारी छोटी-छोटी रोजमर्रा की आदतें ही शरीर और दिमाग की ऊर्जा को प्रभावित कर रही होती हैं। देर रात मोबाइल चलाना, अनियमित नींद, दिनभर बैठे रहना, पानी कम पीना, भोजन में लापरवाही, लगातार तनाव और जरूरत से ज्यादा कैफीन—ये सभी आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकते हैं।

लेकिन अगर पर्याप्त आराम और जीवनशैली में सुधार के बावजूद थकान लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल लाइफस्टाइल की समस्या मानकर टालना सही नहीं है। लंबे समय तक रहने वाली या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली थकान के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि इसके पीछे कोई स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकता है।

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