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31 अगस्त से मौसम में बड़ा उलटफेर! क्या आपके शहर में भी बरसेंगे बादल? IMD के इस अलर्ट ने बढ़ाई चिंता



देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। अगस्त का आखिरी दिन यानी 31 अगस्त कई राज्यों के लिए बारिश और खराब मौसम लेकर आया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड समेत देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है।

ऐसे में 31 अगस्त से लेकर सितंबर के शुरुआती दिनों तक लोगों को मौसम को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों और उन इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी होगी, जहां लगातार बारिश के कारण जलभराव, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम बढ़ा रहा बारिश का असर

मौसम में आए इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना मौसम तंत्र है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिम बंगाल तथा उत्तर ओडिशा के तटीय इलाकों के पास एक Well Marked Low Pressure Area बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है।

इस मौसम प्रणाली के साथ एक ट्रफ भी सक्रिय है, जो झारखंड और बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश की ओर फैली हुई है। यही वजह है कि पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई गई है।

इस सिस्टम का प्रभाव केवल एक-दो राज्यों तक सीमित रहने वाला नहीं है। इसके कारण ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में भारी बारिश देखने को मिल सकती है। आगे चलकर इसका असर उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा सतर्कता जरूरी

31 अगस्त को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मौसम पर विशेष नजर रखनी होगी। मौसम विभाग ने ओडिशा में 30 और 31 अगस्त के दौरान कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त को कुछ इलाकों में अत्यंत भारी बारिश हो सकती है।

अत्यधिक बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में तेजी से पानी भरने की समस्या पैदा हो सकती है। छोटी नदियों और नालों में जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ अचानक बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और कच्चे रास्तों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हो सकता है।

ओडिशा के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। गरज-चमक के दौरान बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। ऐसे मौसम में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

झारखंड-बिहार में भी बिगड़ सकता है मौसम

झारखंड में 31 अगस्त को मौसम काफी सक्रिय रहने की संभावना है। राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 30 अगस्त से 2 सितंबर के बीच झारखंड में व्यापक बारिश का अनुमान लगाया है।

लगातार बारिश के कारण राज्य के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में तेज पानी के बहाव से सड़कें प्रभावित हो सकती हैं। कुछ स्थानों पर फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा भी पैदा हो सकता है।

बिहार में भी 31 अगस्त से 2 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। तेज हवा और बिजली गिरने की स्थिति को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश में भी बारिश का दौर जारी

उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए भी सितंबर की शुरुआत बारिश के साथ हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30 अगस्त से 4 सितंबर तक बारिश का असर बने रहने की संभावना है। वहीं 31 अगस्त के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है।

1 से 5 सितंबर के बीच पूर्वी यूपी के बड़े हिस्से में बारिश जारी रहने का अनुमान है। ऐसे में राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में बादल, बारिश और उमस का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है।

अगर बारिश तेज होती है तो शहरों में जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा होने से फसलों पर भी असर पड़ सकता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि बाहर निकलने से पहले स्थानीय मौसम की स्थिति जरूर जांच लें।

उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ बढ़ सकता है खतरा

उत्तराखंड में 31 अगस्त और 1 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है। राज्य में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है।

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश सामान्य मैदानी बारिश की तुलना में ज्यादा जोखिम पैदा कर सकती है। बारिश के कारण पहाड़ों से मलबा आने, सड़कें बाधित होने और भूस्खलन की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर भी अचानक बढ़ सकता है।

इसलिए पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन द्वारा किसी सड़क या मार्ग को बंद किए जाने की स्थिति में वैकल्पिक रास्ते के बजाय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?

दिल्ली-NCR में फिलहाल बहुत भारी बारिश जैसा बड़ा अलर्ट नहीं है, लेकिन मौसम पूरी तरह साफ रहने की उम्मीद भी नहीं है। राजधानी में बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है।

दिल्ली में अगस्त के अंतिम दिनों में गर्मी और उमस का असर भी देखने को मिला है। बारिश होने पर तापमान में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन उमस फिर भी परेशान कर सकती है।

दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों को खासकर सुबह और शाम के समय मौसम पर नजर रखनी चाहिए। अचानक बारिश होने की स्थिति में सड़कों पर ट्रैफिक धीमा हो सकता है और कुछ स्थानों पर जलभराव भी देखने को मिल सकता है।

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी बारिश का असर

हिमाचल प्रदेश में 31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान स्थानीय स्तर पर मौसम तेजी से बदल सकता है।

जम्मू-कश्मीर और आसपास के पहाड़ी इलाकों में भी 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ों में तेज बारिश के दौरान भूस्खलन, पत्थर गिरने और अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है।

ऐसे में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मौसम की स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से नदी, नाले और पहाड़ी ढलानों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचना जरूरी है।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश और बिजली का खतरा

पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम तथा त्रिपुरा में बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है।

अरुणाचल प्रदेश में 31 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। असम और मेघालय में 31 अगस्त से 4 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक में भी बारिश

देश के पश्चिम और दक्षिणी हिस्सों में भी बारिश का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है।

दक्षिण भारत में केरल और कर्नाटक के कई हिस्सों में भी बारिश की गतिविधि बनी रह सकती है। पश्चिमी तट के आसपास के क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियों के कारण बादल और बारिश देखने को मिल सकती है।

हालांकि हर जिले में बारिश की तीव्रता एक जैसी नहीं होगी। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होगी, जबकि स्थानीय मौसम प्रणाली के प्रभाव से कहीं-कहीं तेज बारिश भी हो सकती है।

राजस्थान में अभी राहत, लेकिन सितंबर में फिर बारिश

राजस्थान में 31 अगस्त को किसी बड़े बारिश अलर्ट की स्थिति नहीं बताई गई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे राज्य में मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा।

1 से 5 सितंबर के दौरान पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। इसके अलावा 3 से 5 सितंबर के बीच पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है।

इसलिए राजस्थान के लोगों को भी सितंबर के शुरुआती दिनों में स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए।

गरज-चमक के समय इन बातों का रखें ध्यान

बारिश के साथ बिजली गिरने की घटनाएं बेहद खतरनाक हो सकती हैं। गरज-चमक के समय खुले मैदान में खड़े होने से बचना चाहिए। पेड़, बिजली के खंभे और अन्य ऊंची संरचनाओं के नीचे खड़े होना भी सुरक्षित नहीं माना जाता।

भारी बारिश के दौरान अंडरपास, निचले इलाकों और पानी से भरी सड़कों पर जाने से बचना चाहिए। यदि पानी सड़क पर तेज बहाव के साथ चल रहा हो तो वाहन लेकर उसे पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए। नदी और नालों के किनारे जाना भी जोखिम भरा हो सकता है।

सितंबर की शुरुआत में भी जारी रहेगा मानसून का असर

कुल मिलाकर 31 अगस्त से सितंबर के शुरुआती दिनों तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने वाला है। पूर्वी, मध्य, उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड ऐसे राज्य हैं जहां कुछ इलाकों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। बिहार और उत्तर प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है।

ऐसे में लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे केवल सामान्य मौसम देखकर यात्रा की योजना न बनाएं, बल्कि अपने जिले का ताजा मौसम अपडेट भी देखें। खासकर भारी बारिश की चेतावनी वाले क्षेत्रों में प्रशासन की सलाह का पालन करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प रहेगा।

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