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सुबह के सिर्फ कुछ मिनट बदल सकते हैं डायबिटीज का खेल? रिसर्च में सामने आया बड़ा खुलासा



डायबिटीज आज दुनिया की सबसे आम मेटाबॉलिक बीमारियों में शामिल है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज में ब्लड शुगर को सामान्य सीमा में बनाए रखना केवल दवाइयां लेने तक सीमित नहीं होता। खान-पान, शारीरिक गतिविधि, वजन, नींद, तनाव और रोजमर्रा की जीवनशैली भी ब्लड ग्लूकोज मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से एक्सरसाइज और योग जैसे विकल्पों को डायबिटीज मैनेजमेंट के सहायक उपायों के तौर पर देखा जाता है।

योग को लेकर हालिया शोध भी इस दिशा में कुछ सकारात्मक संकेत देता है। एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में टाइप-2 डायबिटीज या इसके जोखिम वाले लोगों पर किए गए 14 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल और 1,629 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें मानक उपचार के साथ योग करने वाले समूह में फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, खाने के बाद का ब्लड ग्लूकोज, HbA1c और HOMA-IR जैसे इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े संकेतकों में सुधार पाया गया। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि अलग-अलग अध्ययनों में काफी अंतर था और बेहतर गुणवत्ता वाले बड़े अध्ययनों की अभी जरूरत है।

इसका मतलब यह नहीं है कि योग डायबिटीज को खत्म कर सकता है या दवाओं की जगह ले सकता है। बल्कि इसे डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार, संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ एक सपोर्टिव लाइफस्टाइल एक्टिविटी के रूप में देखा जाना चाहिए।

योग से डायबिटीज में क्या फायदा हो सकता है?

टाइप-2 डायबिटीज में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो सकती हैं। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इसके कारण ग्लूकोज को कोशिकाओं के अंदर पहुंचाने में परेशानी होती है और ब्लड शुगर बढ़ सकता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर करने में मदद कर सकती है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के 2026 के मानकों के अनुसार, डायबिटीज वाले वयस्कों को आम तौर पर सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखना चाहिए। गतिविधियों में चलना, योग, तैराकी और अन्य व्यायाम शामिल हो सकते हैं।

योग का एक दूसरा संभावित फायदा तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने से जुड़ा है। लंबे समय तक तनाव रहने पर ब्लड ग्लूकोज मैनेजमेंट प्रभावित हो सकता है। इसलिए सांस लेने की तकनीक, ध्यान और रिलैक्सेशन वाले योग अभ्यास भी कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

1. मंडूकासन

मंडूकासन को पारंपरिक योग में पेट के आसपास के हिस्से पर दबाव और शरीर की स्थिरता से जुड़ा आसन माना जाता है। इसे करने के दौरान शरीर को नियंत्रित स्थिति में रखना पड़ता है, जिससे ध्यान और बॉडी कंट्रोल पर भी काम होता है।

हालांकि मंडूकासन को सीधे ब्लड शुगर कम करने वाली चिकित्सा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। डायबिटीज में इसका फायदा मुख्य रूप से नियमित योग रूटीन और शारीरिक गतिविधि के व्यापक प्रभावों के संदर्भ में समझना बेहतर है।

जिन लोगों को घुटनों, पेट या अन्य हिस्सों में समस्या है, उन्हें इसे करने से पहले योग विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

2. अर्ध मत्स्येंद्रासन

अर्ध मत्स्येंद्रासन एक स्पाइनल ट्विस्टिंग आसन है। इसमें रीढ़ के साथ पेट और कमर के आसपास के हिस्से में खिंचाव महसूस होता है।

यह आसन शरीर की गतिशीलता और लचीलेपन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। डायबिटीज मैनेजमेंट में शारीरिक रूप से सक्रिय रहना महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह के योग अभ्यास को नियमित फिटनेस रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

हालांकि किसी भी आसन के बारे में यह दावा करना उचित नहीं होगा कि वह अकेले इंसुलिन रेजिस्टेंस को खत्म कर देता है। योग का प्रभाव नियमितता, अन्य शारीरिक गतिविधियों, भोजन और पूरे उपचार प्लान के साथ मिलकर देखा जाना चाहिए।

3. पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन में बैठकर शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की ओर झुकाया जाता है। इससे पीठ, कमर और पैरों के पिछले हिस्से में स्ट्रेच मिलता है।

यह आसन कुछ लोगों को रिलैक्सेशन देने में मदद कर सकता है। योग के संभावित फायदों में केवल ग्लूकोज मैनेजमेंट ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और सामान्य वेल-बीइंग भी शामिल हैं। हालिया मेटा-एनालिसिस में शामिल कई अध्ययनों में मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिले थे।

लेकिन अगर किसी व्यक्ति को कमर या रीढ़ से जुड़ी समस्या है, तो आगे झुकने वाले आसनों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए।

4. भुजंगासन

भुजंगासन में पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है। इससे रीढ़ और शरीर के सामने वाले हिस्से में स्ट्रेच मिलता है।

शुरुआत करने वाले लोगों को इसे बहुत ज्यादा पीछे झुककर नहीं करना चाहिए। शरीर की क्षमता के अनुसार हल्का अभ्यास करना बेहतर है।

अगर कमर में दर्द, रीढ़ की समस्या या किसी अन्य शारीरिक परेशानी का इतिहास है, तो भुजंगासन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

5. वज्रासन

वज्रासन अपेक्षाकृत सरल योग मुद्रा है। इसमें शरीर को सीधी स्थिति में रखते हुए घुटनों के बल बैठा जाता है।

इसे कई लोग भोजन के बाद थोड़े समय के लिए भी करते हैं। हालांकि इसे ब्लड शुगर कम करने का सीधा उपाय मानना सही नहीं है।

डायबिटीज के संदर्भ में इसका एक फायदा यह हो सकता है कि यह व्यक्ति को कुछ समय के लिए शांत और नियंत्रित मुद्रा में बैठने की आदत देता है। लेकिन भोजन के बाद ब्लड ग्लूकोज मैनेजमेंट के लिए केवल वज्रासन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह, भोजन की मात्रा और नियमित गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी है।

6. अनुलोम-विलोम

डायबिटीज में केवल ब्लड शुगर ही चिंता का विषय नहीं होता। तनाव, खराब नींद और मानसिक दबाव भी जीवनशैली को प्रभावित कर सकते हैं।

अनुलोम-विलोम जैसी नियंत्रित श्वास तकनीकें रिलैक्सेशन में मदद कर सकती हैं। योग और प्राणायाम को लेकर हुए अध्ययनों में मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर संभावित लाभ के संकेत भी मिले हैं।

हालांकि सांस से जुड़े अभ्यास भी व्यक्ति की क्षमता के अनुसार किए जाने चाहिए। बहुत तेज या लंबे समय तक सांस रोकने वाले अभ्यास बिना विशेषज्ञ मार्गदर्शन के नहीं करने चाहिए।

क्या योग वास्तव में इंसुलिन रेजिस्टेंस कम कर सकता है?

हालिया मेटा-एनालिसिस का सबसे दिलचस्प पहलू यही है। इसमें योग के साथ मानक उपचार लेने वाले लोगों में HOMA-IR में सुधार देखा गया। HOMA-IR एक ऐसा इंडिकेटर है जिसका इस्तेमाल इंसुलिन रेजिस्टेंस का आकलन करने के लिए किया जाता है।

इसी विश्लेषण में फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, पोस्टप्रांडियल ब्लड ग्लूकोज और HbA1c में भी सुधार पाया गया। लेकिन इन नतीजों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि शोध में शामिल योग कार्यक्रम एक जैसे नहीं थे। अलग-अलग अध्ययनों में आसन, प्राणायाम, क्रिया और ध्यान जैसी अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था।

इसके अलावा शोधकर्ताओं ने अध्ययनों के बीच अंतर और सीमित सैंपल साइज जैसी समस्याओं की ओर भी इशारा किया है। इसलिए इन परिणामों को उत्साहजनक जरूर कहा जा सकता है, लेकिन इन्हें अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

ADA भी योग को शारीरिक गतिविधि में शामिल करता है

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के 2026 के Standards of Care में डायबिटीज वाले लोगों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि को डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसमें अधिकांश वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम से तेज एरोबिक गतिविधि और अलग-अलग प्रकार की एक्सरसाइज को शामिल करने की सलाह दी गई है।

ADA के अनुसार लंबे समय तक लगातार बैठे रहने को भी कम करना चाहिए। 2026 के मानकों में ब्लड ग्लूकोज और अन्य स्वास्थ्य लाभों के लिए लंबे समय तक बैठने को कम से कम हर 30 मिनट में थोड़ी हल्की गतिविधि से तोड़ने की सलाह दी गई है।

इसलिए केवल सुबह 20-30 मिनट योग कर लेना और बाकी पूरा दिन बैठे रहना आदर्श रणनीति नहीं है। पूरे दिन की गतिविधि का स्तर बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।

डायबिटीज मरीज योग करते समय रखें ये सावधानियां

डायबिटीज के मरीजों को योग शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। खासकर जो लोग इंसुलिन या ऐसी दवाएं लेते हैं जिनसे ब्लड शुगर कम हो सकता है, उनमें एक्सरसाइज के दौरान या बाद में हाइपोग्लाइसीमिया का जोखिम हो सकता है। ADA के 2026 मानकों के अनुसार ऐसे लोगों में दवा, भोजन और व्यायाम के समय का व्यक्तिगत समायोजन जरूरी हो सकता है।

अगर योग या एक्सरसाइज के दौरान कंपकंपी, पसीना, कमजोरी, चक्कर, भ्रम या असामान्य थकान महसूस हो तो गतिविधि रोककर ब्लड ग्लूकोज की जांच और उचित चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

जिन लोगों को डायबिटिक रेटिनोपैथी, पैरों में संवेदना की समस्या, संतुलन की परेशानी, पैर में घाव, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर या अन्य डायबिटीज संबंधी जटिलताएं हैं, उन्हें एक्सरसाइज का प्रकार और तीव्रता डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए। ADA भी ऐसी स्थितियों में गतिविधि शुरू करने से पहले विशेष मूल्यांकन की जरूरत बताता है।

योग को इलाज का विकल्प न समझें

सबसे जरूरी बात यह है कि योग को डायबिटीज की दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर डॉक्टर ने दवा, इंसुलिन या नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग की सलाह दी है तो उसे अपनी तरफ से बंद या कम नहीं करना चाहिए।

योग का सबसे बेहतर इस्तेमाल एक सपोर्टिव लाइफस्टाइल टूल के रूप में किया जा सकता है। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, वजन का प्रबंधन, नियमित चलना या अन्य व्यायाम और डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार के साथ योग को शामिल करने से डायबिटीज मैनेजमेंट को व्यापक रूप दिया जा सकता है।

टाइप-2 डायबिटीज में योग को लेकर उपलब्ध शोध उत्साहजनक है। 14 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल और 1,629 प्रतिभागियों वाले हालिया विश्लेषण में योग के साथ फास्टिंग ग्लूकोज, खाने के बाद का ग्लूकोज, HbA1c और HOMA-IR में सुधार के संकेत मिले हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई एक आसन ब्लड शुगर को तुरंत सामान्य कर देगा। डायबिटीज एक लंबे समय तक चलने वाली स्थिति है और इसका मैनेजमेंट भी लंबे समय की रणनीति मांगता है।

इसलिए मंडूकासन, अर्ध मत्स्येंद्रासन, पश्चिमोत्तानासन, भुजंगासन, वज्रासन और अनुलोम-विलोम जैसे अभ्यासों को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग रूटीन में शामिल किया जा सकता है। शुरुआत धीरे करें, सही तकनीक सीखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या प्रमाणित योग विशेषज्ञ की सलाह लें। सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि योग इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली के साथ एक संभावित सहायक उपाय है।

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