क्या आपकी रसोई में रखा ये तेल बन रहा है 'साइलेंट किलर'? जानिए कैसे तैयार होता है और किन बातों का रखें ध्यान
नई दिल्ली। आज लगभग हर भारतीय रसोई में रिफाइंड तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी हल्की खुशबू, लंबे समय तक चलने की क्षमता और बाजार में आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह लोगों की पहली पसंद बन चुका है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ऐसे कई दावे वायरल हुए हैं, जिनमें कहा जाता है कि "रिफाइंड तेल जहर से भी खतरनाक है" या "यह रोजाना हजारों लोगों की जान ले रहा है।"
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दावों को बिना वैज्ञानिक प्रमाण के सच मान लेना उचित नहीं है। यह सही है कि अत्यधिक मात्रा में तेल का सेवन, बार-बार एक ही तेल को गर्म करना और असंतुलित खानपान कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं, लेकिन किसी एक रिफाइंड तेल को सीधे "जहर" कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाता।
क्या होता है रिफाइंड तेल?
रिफाइंड तेल वह खाद्य तेल होता है जिसे बीजों या फलों से निकालने के बाद कई औद्योगिक प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य तेल में मौजूद अशुद्धियां, गंध, रंग और अन्य अवांछित तत्वों को हटाना होता है ताकि तेल अधिक समय तक सुरक्षित रह सके और उसका स्वाद हल्का बना रहे।
कैसे तैयार होता है रिफाइंड तेल?
रिफाइंड तेल बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है—
1. तेल निकालना
सबसे पहले सोयाबीन, सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली, चावल की भूसी या अन्य स्रोतों से तेल निकाला जाता है। कई उद्योगों में अधिक तेल प्राप्त करने के लिए यांत्रिक प्रक्रिया के साथ सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन तकनीक का भी उपयोग किया जाता है।
2. शोधन (Refining)
इसके बाद तेल को अलग-अलग चरणों से गुजारा जाता है, जिनमें गम और अन्य अशुद्धियों को हटाना, मुक्त फैटी एसिड कम करना, रंग हल्का करना और गंध हटाना शामिल होता है।
3. पैकिंग
गुणवत्ता परीक्षण के बाद तेल को पैक कर बाजार में भेजा जाता है।
खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार और जांचा गया खाद्य तेल ही बाजार में बिक्री के लिए अनुमत होता है।
क्या रिफाइंड तेल वास्तव में खतरनाक है?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी तेल का स्वास्थ्य पर प्रभाव कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे—
कितनी मात्रा में तेल का सेवन किया जा रहा है।
भोजन का कुल संतुलन कैसा है।
तेल को कितनी बार गर्म किया गया है।
व्यक्ति की जीवनशैली और शारीरिक गतिविधि कैसी है।
यदि तेल को बार-बार तेज तापमान पर गर्म किया जाए, तो उसमें ऐसे यौगिक बन सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए एक ही तेल को बार-बार तलने के लिए उपयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है।
किन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा?
यदि लंबे समय तक अत्यधिक तला-भुना और अधिक तेल वाला भोजन नियमित रूप से खाया जाए, तो निम्न समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है—
मोटापा
उच्च रक्तचाप
हृदय रोग
टाइप-2 मधुमेह
उच्च कोलेस्ट्रॉल
हालांकि, इन बीमारियों का कारण केवल रिफाइंड तेल नहीं होता, बल्कि असंतुलित आहार, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और अन्य जीवनशैली संबंधी कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कौन-सा तेल चुनें?
पोषण विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि किसी एक ही प्रकार के तेल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय समय-समय पर विभिन्न खाद्य तेलों का संतुलित उपयोग किया जा सकता है। साथ ही तेल की मात्रा सीमित रखना और संतुलित आहार लेना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये आदतें
तला-भुना भोजन सीमित मात्रा में खाएं।
एक ही तेल को बार-बार गर्म न करें।
ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालों को आहार में शामिल करें।
नियमित व्यायाम करें।
वजन और रक्तचाप की समय-समय पर जांच कराएं।
सोशल मीडिया के दावों से रहें सावधान
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर रिफाइंड तेल को लेकर कई भ्रामक दावे वायरल हुए हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर विश्वास करने से पहले विश्वसनीय चिकित्सकीय या वैज्ञानिक स्रोतों से उसकी पुष्टि अवश्य करें।
रिफाइंड तेल को सीधे "जहर" कहना वैज्ञानिक तथ्यों के अनुरूप नहीं है। हालांकि, किसी भी प्रकार के तेल का अत्यधिक सेवन, बार-बार गर्म किया गया तेल और असंतुलित खानपान निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित भोजन और सीमित मात्रा में तेल का उपयोग ही बेहतर विकल्प माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या आहार में बदलाव करने से पहले योग्य डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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