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460 रन पर भारत का पलड़ा भारी, लेकिन तीसरे दिन खुलेगा असली राज! श्रीलंका के 20 विकेट पर टिकी जीत की उम्मीद



भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। बारिश से लगातार प्रभावित मुकाबले के दूसरे दिन भारत ने 116 ओवर में 9 विकेट खोकर 460 रन बना लिए। भारत की इस मजबूत स्थिति की सबसे बड़ी वजह देवदत्त पडिक्कल की शानदार 167 रन की पारी रही। उनके अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने भी मुश्किल परिस्थितियों में 51 रन की अहम पारी खेली। बारिश के कारण दूसरे दिन केवल 43 ओवर का खेल हो सका, लेकिन इतने कम समय में भी श्रीलंकाई स्पिनरों के दबाव के बावजूद भारत ने बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया।

स्टंप्स के समय कुलदीप यादव 12 रन बनाकर और प्रसिद्ध कृष्णा 1 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। अब तीसरे दिन भारतीय टीम की नजर बाकी एक विकेट जल्दी हासिल करके श्रीलंका को बल्लेबाजी के लिए उतारने पर होगी। दूसरी ओर, श्रीलंकाई टीम भारतीय पारी को जल्द से जल्द समाप्त करके मुकाबले में वापसी करने की कोशिश करेगी।

बारिश ने फिर बिगाड़ा खेल

गॉल टेस्ट के दूसरे दिन भी मौसम ने खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों को निराश किया। सुबह से ही बारिश के कारण मैदान पर खेल शुरू नहीं हो सका। इसके बाद जब मौसम थोड़ा साफ हुआ तो दोपहर करीब 2:35 बजे खेल शुरू किया गया।

दिनभर में सिर्फ 43 ओवर का खेल संभव हो पाया। इतने कम समय में भी श्रीलंकाई गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। खासकर स्पिन गेंदबाजों ने भारतीय मध्यक्रम को परेशान किया और भारत को लगातार विकेट गंवाने पड़े।

बारिश के कारण मैदान की परिस्थितियां भी बदलती रहीं। लंबे समय तक मैदान से बाहर रहने के बाद जब श्रीलंकाई गेंदबाज वापस आए तो उन्होंने पहले दिन की तुलना में बेहतर लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी की। इसका असर भारतीय बल्लेबाजों पर दिखाई दिया।

पडिक्कल ने संभाली भारतीय पारी

भारत की पहली पारी में देवदत्त पडिक्कल सबसे बड़े स्टार बनकर सामने आए। उन्होंने 167 रन की शानदार पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला शतक पूरा किया। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य और आक्रामकता दोनों का शानदार मिश्रण देखने को मिला।

पडिक्कल ने श्रीलंकाई स्पिनरों के खिलाफ बेहतरीन फुटवर्क दिखाया और खराब गेंदों को आसानी से बाउंड्री तक पहुंचाया। उनकी 167 रन की पारी में 15 चौके और एक छक्का शामिल रहा।

पडिक्कल की इस पारी ने भारत को उस समय मजबूती दी, जब बारिश के कारण बल्लेबाजों को लगातार रुकने और फिर दोबारा लय बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।

पडिक्कल के प्रदर्शन की खास बात यह रही कि वह लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में वापसी कर रहे हैं। ऐसे में उनकी 167 रन की पारी उनके आत्मविश्वास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

श्रीलंकाई स्पिनरों ने वापसी की कोशिश की

एक समय भारत बहुत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा था, लेकिन बारिश के बाद खेल दोबारा शुरू होने पर श्रीलंका के स्पिनरों ने मुकाबले का रुख बदलने की कोशिश की। प्रबाथ जयसूर्या और डेब्यू कर रहे केशरा नुवान्था ने भारतीय बल्लेबाजों को काफी परेशान किया।

जयसूर्या ने भारत के खिलाफ 4 विकेट हासिल किए, जबकि नुवान्था ने तीन भारतीय बल्लेबाजों को आउट किया। इसके बावजूद भारत बड़ा स्कोर बनाने में सफल रहा।

बारिश से प्रभावित मैच में स्पिनरों को पिच से मिल रही मदद ने बल्लेबाजों के लिए परिस्थितियां मुश्किल कर दी थीं। भारत ने हालांकि शुरुआती बढ़त का फायदा उठाते हुए 460 रन तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की।

जुरेल ने खेली अहम अर्धशतकीय पारी

ध्रुव जुरेल ने भी भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 68 गेंदों में 51 रन बनाए। जब भारत के कुछ प्रमुख बल्लेबाज जल्दी-जल्दी पवेलियन लौटने लगे थे, तब जुरेल ने निचले क्रम के साथ मिलकर पारी को संभाला।

जुरेल की पारी सिर्फ रन बनाने के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं थी, बल्कि उन्होंने टीम को एक बड़ा स्कोर हासिल करने में मदद की। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा।

जुरेल ने मैच के बाद कहा कि उनके ऊपर किसी तरह का व्यक्तिगत दबाव नहीं था। उनका मानना है कि भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि वह मैदान पर उतरते समय व्यक्तिगत उपलब्धियों के बारे में सोचने के बजाय टीम की जरूरत के हिसाब से खेलने पर ध्यान देते हैं।

'मैच जीतना है तो 20 विकेट लेने होंगे'

ध्रुव जुरेल ने साफ कर दिया कि सिर्फ 460 रन बना लेना भारत के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अगर टीम को टेस्ट मैच जीतना है तो गेंदबाजों को श्रीलंका के सभी 20 विकेट लेने होंगे।

जुरेल के मुताबिक, भारतीय गेंदबाजों को भी श्रीलंकाई गेंदबाजों की तरह लंबे स्पेल डालने के लिए तैयार रहना होगा। उन्हें लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करनी होगी।

उनका मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में किसी बड़ी रणनीति की जरूरत नहीं है। गेंदबाजों को अपनी बुनियादी योजना पर टिके रहकर सही जगह गेंद डालनी होगी।

भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ी चुनौती

अब तीसरे दिन भारतीय गेंदबाजों की असली परीक्षा होगी। श्रीलंका की पिच पर स्पिनरों को मदद मिलती दिखाई दे रही है और बारिश के कारण मैच में लगातार रुकावट भी आ रही है। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों को धैर्य के साथ गेंदबाजी करनी होगी।

जुरेल ने भी इसी ओर इशारा किया है कि गेंदबाजों को लंबे स्पेल के लिए तैयार रहना होगा। यदि भारत को श्रीलंका पर दबाव बनाना है तो शुरुआती विकेट बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

भारत के सामने एक और चुनौती मौसम की है। अगर बारिश के कारण फिर से खेल बाधित होता है तो टेस्ट मैच के नतीजे पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

राहुल और पंत के विकेट से लगा झटका

भारत ने दूसरे दिन बारिश के बाद खेल शुरू होने पर कुछ महत्वपूर्ण विकेट गंवाए। केएल राहुल, जो पहले दिन अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे, 82 रन बनाकर आउट हुए। वह इससे पहले 77 रन पर मांसपेशियों में खिंचाव के कारण कुछ समय के लिए मैदान से बाहर भी गए थे।

ऋषभ पंत भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और 39 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद भारतीय पारी पर दबाव बढ़ गया।

हालांकि, पडिक्कल की बड़ी पारी और जुरेल के अर्धशतक ने भारत को मुश्किल दौर से बाहर निकालने में मदद की।

भारत के पास अब बड़ा मौका

460 रन का स्कोर टेस्ट क्रिकेट में मजबूत माना जाता है, खासकर तब जब मैच बारिश से लगातार प्रभावित हो रहा हो। भारत के पास अब श्रीलंका पर दबाव बनाने का अच्छा मौका है।

हालांकि, टेस्ट मैच की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। अगर श्रीलंका के बल्लेबाज शुरुआत में अच्छी साझेदारी बनाने में सफल रहे तो भारत की बढ़त कम हो सकती है। वहीं अगर भारतीय गेंदबाज शुरुआती विकेट निकाल लेते हैं तो मैच पूरी तरह भारत के नियंत्रण में आ सकता है।

फिलहाल भारतीय टीम की सबसे बड़ी उम्मीद उसके गेंदबाजों पर टिकी है। पडिक्कल ने बल्ले से अपना काम कर दिया है और जुरेल ने भी अहम योगदान दिया है। अब बारी भारतीय गेंदबाजों की है कि वे श्रीलंका के बल्लेबाजों को कितनी जल्दी पवेलियन भेजते हैं।

तीसरे दिन मौसम भी इस मुकाबले की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत के सामने लक्ष्य साफ है—पहले श्रीलंका की पहली पारी को जल्दी समेटना और फिर अपनी बढ़त को इतना मजबूत करना कि मुकाबले में जीत की स्थिति बनाई जा सके।

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