पैरों पर दिखीं ये नीली नसें तो भूलकर भी न करें नजरअंदाज! अंदर छिपी बीमारी का संकेत हो सकती हैं, एक गलती पड़ सकती है भारी
नई दिल्ली: पैरों, टांगों, जांघों या टखने के आसपास त्वचा के ऊपर नीले या बैंगनी रंग की उभरी हुई नसें आपने भी कभी न कभी देखी होंगी। कई बार ये नसें मकड़ी के जाले जैसी दिखाई देती हैं, जबकि कुछ मामलों में नसें मोटी, टेढ़ी-मेढ़ी और त्वचा के ऊपर स्पष्ट रूप से उभरी हुई नजर आती हैं। बहुत से लोग इसे उम्र बढ़ने या सामान्य शारीरिक बदलाव का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ लोगों में ऐसी नसें वैरिकोज वेन्स या किसी अन्य शिरा संबंधी समस्या का संकेत हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हर दिखाई देने वाली नीली नस गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। छोटी लाल, नीली या बैंगनी स्पाइडर वेन्स अक्सर अलग स्थिति होती हैं और सामान्यतः गंभीर समस्या नहीं होतीं। लेकिन अगर नसों के साथ पैरों में दर्द, भारीपन, सूजन, खुजली, त्वचा का रंग बदलना या घाव जैसी समस्या हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
आखिर त्वचा के ऊपर क्यों उभर आती हैं नसें?
हमारी टांगों में सतही और गहरी दोनों तरह की नसों का नेटवर्क होता है। इन नसों का काम शरीर के निचले हिस्से से खून को वापस हृदय की ओर पहुंचाना है। पैरों की नसों में मौजूद वाल्व खून को ऊपर की ओर जाने में मदद करते हैं और उसे वापस नीचे आने से रोकने में भूमिका निभाते हैं।
जब इन वाल्वों में कमजोरी आ जाती है तो खून का कुछ हिस्सा नीचे की ओर वापस जमा होने लगता है। इससे नसों के भीतर दबाव बढ़ सकता है और वे धीरे-धीरे फैलकर त्वचा के नीचे दिखाई देने लगती हैं। इसी स्थिति को वैरिकोज वेन्स से जोड़ा जाता है।
लंबे समय तक खड़े रहने या बैठे रहने, उम्र बढ़ने, गर्भावस्था, अधिक वजन और परिवार में वैरिकोज वेन्स का इतिहास जैसी स्थितियां इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
सिर्फ नीली नस दिखना हमेशा खतरे की घंटी नहीं
यह समझना बेहद जरूरी है कि हर नीली या बैंगनी नस किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। छोटी स्पाइडर या थ्रेड वेन्स और बड़ी उभरी हुई वैरिकोज वेन्स एक जैसी नहीं होतीं।
अगर केवल छोटी नसें दिखाई दे रही हैं और दर्द, सूजन या त्वचा में कोई बदलाव नहीं है, तो स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन नसें लगातार मोटी होती जा रही हों, पैरों में भारीपन या दर्द रहता हो या त्वचा में बदलाव आने लगे हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
क्रोनिक वेनस इनसफिशिएंसी भी हो सकती है वजह
क्रोनिक वेनस इनसफिशिएंसी यानी CVI में पैरों की नसों से खून का वापस हृदय की ओर जाना प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक नसों में बढ़ा दबाव सूजन, भारीपन, त्वचा में बदलाव और वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याओं से जुड़ सकता है।
कुछ लोगों में लंबे समय तक खून के प्रवाह की समस्या रहने पर टखने और निचले पैर के आसपास त्वचा का रंग गहरा हो सकता है। गंभीर मामलों में त्वचा पर घाव या ऐसा अल्सर भी बन सकता है जिसे भरने में काफी समय लग सकता है।
इसलिए पैरों पर दिखाई देने वाली नसों के साथ अगर लगातार सूजन या त्वचा में बदलाव हो रहा है, तो इसे केवल कॉस्मेटिक समस्या मानना सही नहीं है।
डीवीटी की स्थिति में बढ़ जाती है चिंता
पैरों की नसों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति डीप वेन थ्रॉम्बोसिस यानी DVT है। इसमें शरीर की गहरी नस में खून का थक्का बन जाता है। इसके लक्षणों में एक पैर में सूजन, दर्द या संवेदनशीलता, त्वचा का गर्म या लाल होना शामिल हो सकता है।
DVT और सामान्य वैरिकोज वेन्स को एक ही समस्या समझना सही नहीं है। किसी व्यक्ति में दिखाई देने वाली नसों का कारण क्या है, यह जांच के बाद ही पता चलता है।
पुराना DVT नसों में स्थायी बदलाव और पोस्ट-थ्रोम्बोटिक सिंड्रोम का कारण बन सकता है। इससे लंबे समय तक पैर में दर्द, भारीपन, सूजन, त्वचा का रंग बदलना और कुछ मामलों में घाव जैसी समस्या हो सकती है।
अचानक पैर सूज जाए तो सावधान
अगर किसी व्यक्ति के एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, गर्माहट या लालिमा दिखाई देती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। DVT की आशंका में डॉक्टर तत्काल जांच की सलाह दे सकते हैं।
इसका सबसे गंभीर खतरा तब हो सकता है जब खून का थक्का अपनी जगह से टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए और पल्मोनरी एम्बोलिज्म पैदा करे।
अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द, खासकर गहरी सांस लेने या खांसने पर दर्द बढ़ना, खून की खांसी, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण आपात स्थिति हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
गर्भावस्था में भी दिख सकती हैं उभरी नसें
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं। बढ़ता हुआ गर्भाशय पैरों और श्रोणि क्षेत्र की नसों पर दबाव डाल सकता है और हार्मोनल बदलाव भी नसों को प्रभावित कर सकते हैं। इस दौरान वैरिकोज वेन्स दिखाई देना संभव है और कई मामलों में बच्चे के जन्म के बाद इनमें सुधार हो जाता है।
हालांकि गर्भावस्था DVT के जोखिम से भी जुड़ी स्थिति है। इसलिए गर्भवती महिला के पैर में अचानक सूजन, दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
जांच कैसे होती है?
अगर डॉक्टर को वैरिकोज वेन्स या नसों में रक्त प्रवाह की समस्या का संदेह होता है तो आमतौर पर डुप्लेक्स या डॉपलर अल्ट्रासाउंड महत्वपूर्ण जांच होती है। इससे नसों में खून के प्रवाह और वाल्व की स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
कुछ जटिल मामलों में डॉक्टर मरीज की स्थिति के आधार पर अन्य इमेजिंग जांच भी सुझा सकते हैं। कौन-सी जांच आवश्यक है, यह लक्षणों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर तय किया जाता है।
इलाज बीमारी के कारण पर निर्भर करता है
वैरिकोज वेन्स के हर मरीज को ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती। अगर समस्या हल्की है और कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव और निगरानी की सलाह दे सकते हैं। नियमित चलना-फिरना, लंबे समय तक लगातार खड़े या बैठे रहने से बचना और आराम करते समय पैर ऊपर रखना कुछ लोगों में लक्षण कम करने में मदद कर सकता है।
कुछ मरीजों में डॉक्टर कंप्रेशन स्टॉकिंग्स की सलाह दे सकते हैं। लेकिन इन्हें खुद से खरीदकर इस्तेमाल करने के बजाय डॉक्टर या विशेषज्ञ से सही प्रकार और उपयुक्तता के बारे में सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि हर व्यक्ति के लिए ये उपयुक्त नहीं होतीं।
अगर वैरिकोज वेन्स में उपचार की जरूरत हो तो विशेषज्ञ एंडोथर्मल एब्लेशन, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, लेजर उपचार या कुछ मामलों में फोम स्क्लेरोथेरेपी जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। उपचार का चुनाव नसों की स्थिति और मरीज की जरूरत के अनुसार किया जाता है।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर पैरों पर उभरी नसों के साथ इनमें से कोई समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है—
पैरों में लगातार दर्द या भारीपन
टखने या पैर में सूजन
नसों के आसपास खुजली या त्वचा में बदलाव
त्वचा का रंग गहरा होना
पैरों पर ऐसा घाव जो ठीक न हो
नस से खून आना
नस का लाल, गर्म और दर्दनाक हो जाना
वहीं अचानक एक पैर में सूजन और दर्द या इसके साथ सांस फूलना और सीने में दर्द जैसी स्थिति में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि DVT या पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर स्थितियों को तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन की जरूरत होती है।
सबसे जरूरी बात—नसों को देखकर खुद इलाज न करें
पैरों पर नीली नसें दिखाई देना अपने आप में किसी एक बीमारी का प्रमाण नहीं है। इसका कारण सामान्य स्पाइडर वेन्स से लेकर वैरिकोज वेन्स या अन्य शिरा संबंधी समस्या तक हो सकता है।
इसलिए इंटरनेट देखकर खुद से दवा लेना या किसी तरह का उपचार शुरू करना सही तरीका नहीं है। अगर नसें लगातार बढ़ रही हैं या उनके साथ दर्द, सूजन अथवा त्वचा में बदलाव हो रहा है, तो वैस्कुलर विशेषज्ञ या डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि पैरों पर दिखाई देने वाली हर नस खतरनाक नहीं होती, लेकिन अचानक बदलाव को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। सही समय पर जांच होने से समस्या का कारण पता लगाया जा सकता है और जरूरत के अनुसार उपचार चुना जा सकता है।

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