H1N1 ने फिर बढ़ाई टेंशन! दिल्ली-NCR में तेजी से फैल रहा स्वाइन फ्लू, एक मौत के बाद मचा हड़कंप… जानें बचने का तरीका
नई दिल्ली: देश में मानसून के बीच एक बार फिर H1N1 इन्फ्लूएंजा यानी स्वाइन फ्लू के मामले चर्चा में हैं। दिल्ली-NCR में H1N1 संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की खबरों के बीच डॉक्टरों ने लोगों से फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है। हालांकि, हर बुखार या खांसी H1N1 नहीं होती, लेकिन सांस से जुड़ी परेशानी, लगातार बिगड़ते लक्षण या ऑक्सीजन स्तर में गिरावट जैसी स्थिति को गंभीरता से लेना जरूरी है।
इससे पहले कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में 41 वर्षीय व्यक्ति की H1N1 संक्रमण के कारण मौत की खबर भी सामने आई थी। इस घटना के बाद एक बार फिर लोगों के बीच स्वाइन फ्लू को लेकर चिंता बढ़ी है।
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि H1N1 क्या है, इसके लक्षण कैसे पहचाने जा सकते हैं, यह कैसे फैलता है, इसका इलाज क्या है और किस स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
क्या है H1N1 वायरस?
H1N1, Influenza A वायरस का एक सबटाइप है। यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और नाक, गले तथा फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकता है। इसे आम भाषा में स्वाइन फ्लू भी कहा जाता है।
H1N1 नाम वायरस की सतह पर मौजूद दो प्रमुख प्रोटीन से जुड़ा है। यहां ‘H’ का मतलब हेमाग्लूटिनिन और ‘N’ का मतलब न्यूरामिनिडेस है। H1N1 में H1 और N1 इन प्रोटीन के प्रकार को दर्शाते हैं।
हालांकि इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है, लेकिन इंसानों में फैलने वाले H1N1 को केवल सूअरों से जुड़ी बीमारी समझना सही नहीं है। H1N1 इंसानों में मौसमी इन्फ्लूएंजा के रूप में भी पाया जाता है।
H1N1 और स्वाइन फ्लू में क्या अंतर है?
असल में दोनों नाम आमतौर पर एक ही संक्रमण के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। H1N1 इसका वैज्ञानिक नाम है, जबकि स्वाइन फ्लू इसका लोकप्रिय नाम है।
इसे H1N1 इन्फ्लूएंजा, H1N1 फ्लू, स्वाइन इन्फ्लूएंजा या स्वाइन फ्लू जैसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है।
बीमारी की गंभीरता हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। बहुत से लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर होकर फेफड़ों और सांस से जुड़ी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
H1N1 के सबसे आम लक्षण क्या हैं?
H1N1 संक्रमण के लक्षण कई बार सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं। यही वजह है कि शुरुआती दौर में इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है।
इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
अचानक बुखार आना
ठंड लगना या कंपकंपी
सूखी या लगातार खांसी
गले में खराश
नाक बहना या नाक बंद होना
सिरदर्द
शरीर और मांसपेशियों में दर्द
अत्यधिक थकान और कमजोरी
कुछ लोगों में उल्टी और दस्त
फ्लू के हर मरीज को बुखार हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ संक्रमित लोगों में लक्षण बेहद हल्के हो सकते हैं, जबकि कुछ लोगों में स्पष्ट लक्षण दिखाई भी नहीं देते।
अचानक तेज बुखार को न करें नजरअंदाज
H1N1 में बीमारी कई बार अचानक शुरू हो सकती है। व्यक्ति को एक दिन सामान्य महसूस हो सकता है और अगले ही दिन तेज बुखार, खांसी, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
अगर बुखार के साथ तेज खांसी, सांस लेने में परेशानी और अत्यधिक कमजोरी हो रही है तो इसे केवल मौसम बदलने का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खासकर ऐसे लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है, जिन्हें पहले से सांस, हृदय या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं।
H1N1 वायरस फैलता कैसे है?
H1N1 मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाली सांस की बूंदों के जरिए फैल सकता है। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है तो वायरस वाले कण आसपास के लोगों तक पहुंच सकते हैं।
नजदीकी संपर्क में संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के आसपास रहने, बंद कमरे में लंबे समय तक रहने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संपर्क बढ़ने से संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है।
इन्फ्लूएंजा संक्रमित सतहों को छूने और फिर आंख, नाक या मुंह को छूने के जरिए भी फैल सकता है। इसलिए हाथों की सफाई और आसपास की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।
लक्षण आने से पहले भी फैल सकता है संक्रमण
H1N1 की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि संक्रमित व्यक्ति को बीमारी का पता चलने से पहले भी संक्रमण फैल सकता है।
फ्लू से संक्रमित व्यक्ति लक्षण शुरू होने से करीब एक दिन पहले भी वायरस फैला सकता है। बीमारी शुरू होने के बाद भी कई दिनों तक संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। छोटे बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में यह अवधि और लंबी हो सकती है।
यही कारण है कि परिवार, स्कूल और ऑफिस जैसे स्थानों में संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
मानसून में क्यों बढ़ सकती है परेशानी?
मानसून के दौरान मौसम में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसके अलावा लोग बारिश से बचने के लिए कई बार बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में अधिक समय बिताते हैं।
ऐसे वातावरण में श्वसन संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, केवल मानसून को H1N1 के मामलों में वृद्धि का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।
इस मौसम में कई अन्य वायरल और श्वसन संक्रमण भी फैलते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से यह तय करना सही नहीं है कि किसी व्यक्ति को H1N1 ही है।
H1N1 का इलाज कैसे होता है?
H1N1 एक वायरल संक्रमण है, इसलिए हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर उपचार तय करते हैं।
कुछ मामलों में डॉक्टर ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवा लिख सकते हैं। यह दवा लक्षण शुरू होने के शुरुआती 48 घंटों के भीतर शुरू किए जाने पर सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 48 घंटे गुजरने के बाद यह दवा बिल्कुल काम नहीं करती। गंभीर रूप से बीमार मरीजों या गंभीर जटिलताओं के ज्यादा जोखिम वाले लोगों में डॉक्टर बाद में भी एंटीवायरल उपचार की सलाह दे सकते हैं।
इसलिए ओसेल्टामिविर या किसी अन्य एंटीवायरल दवा को खुद से खरीदकर लेना उचित नहीं है। डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
H1N1 संक्रमण किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा हो सकता है।
इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग शामिल हो सकते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
अगर फ्लू जैसे लक्षण हैं और हालत बेहतर होने के बजाय लगातार बिगड़ रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
खासकर इन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए:
सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या दबाव, लगातार चक्कर या भ्रम, अत्यधिक कमजोरी, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, लगातार बिगड़ता बुखार या ऑक्सीजन स्तर में गिरावट।
बच्चों में तेज सांस, असामान्य सुस्ती, शरीर में पानी की कमी या लगातार उल्टी जैसे लक्षण भी तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत का संकेत हो सकते हैं।
H1N1 से बचाव कैसे करें?
H1N1 से बचाव के लिए कुछ सामान्य सावधानियां काफी मददगार हो सकती हैं।
सबसे पहले हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना चाहिए। बीमारी के दौरान भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना और दूसरों के बहुत करीब आने से बचना बेहतर है।
अगर आप बीमार हैं तो घर पर आराम करना और दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण फैलने की संभावना कम कर सकता है।
साझा वस्तुओं और बार-बार छुई जाने वाली सतहों की सफाई भी महत्वपूर्ण है।
क्या H1N1 की वैक्सीन उपलब्ध है?
इन्फ्लूएंजा के खिलाफ वैक्सीन उपलब्ध हैं और मौसमी फ्लू वैक्सीन में संबंधित इन्फ्लूएंजा स्ट्रेन शामिल किए जाते हैं। वैक्सीन लेने का फैसला व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और स्थानीय चिकित्सकीय सलाह के आधार पर करना बेहतर है।
यह भी समझना जरूरी है कि फ्लू वैक्सीन हर प्रकार के वायरल संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। हालांकि, उपयुक्त परिस्थितियों में यह इन्फ्लूएंजा से गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
दिल्ली-NCR में मामलों को लेकर क्या सावधानी जरूरी?
दिल्ली-NCR में H1N1 के मामलों को लेकर सामने आ रही खबरों के बीच लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है।
सबसे जरूरी है कि फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए। अगर बुखार, खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हैं तो आराम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
यदि सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या ऑक्सीजन स्तर कम होने जैसी स्थिति दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
घर में किसी को H1N1 हो तो क्या करें?
अगर परिवार में किसी व्यक्ति को फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसके लिए अलग तौलिया, कप और अन्य निजी सामान रखना बेहतर है। कमरे में हवा का पर्याप्त आवागमन बनाए रखना चाहिए।
बीमार व्यक्ति को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ देना जरूरी है। हालांकि, दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
परिवार के दूसरे सदस्यों को भी हाथों की स्वच्छता और व्यक्तिगत सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों पर रखें खास नजर
बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण कई बार तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए उनमें लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या खाना-पीना कम करने जैसे संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
यदि बच्चा सामान्य व्यवहार नहीं कर रहा है या बुजुर्ग व्यक्ति की सांस संबंधी समस्या बढ़ रही है तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना बेहतर है।
H1N1 को लेकर सबसे जरूरी बात
H1N1 कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन यह कुछ लोगों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को समझना और समय पर उपचार लेना बेहद महत्वपूर्ण है।
अचानक तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो खुद से बीमारी का नाम तय करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
साथ ही, किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद लक्षण दिखाई दें तो दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण को आगे फैलने से रोकने में मदद कर सकता है।
फिलहाल H1N1 के मामलों को लेकर सबसे जरूरी संदेश यही है—घबराएं नहीं, लेकिन लक्षणों को हल्के में भी न लें। खासकर सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन कम होने जैसे संकेत सामने आएं तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। सही समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह, आवश्यक उपचार और सावधानी के जरिए संक्रमण से होने वाली गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं