चीनी के दाम पर सरकार का ‘हंटर’ चला! 68 से सीधे 53-55 रुपये किलो आया भाव, अब आम आदमी को कब मिलेगी राहत?
चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान आम लोगों के लिए अब राहत की खबर सामने आने लगी है। सरकार की सख्ती, स्टॉक की निगरानी और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कोशिशों के बीच चीनी के एक्स-मिल भाव में तेज गिरावट देखने को मिली है। करीब एक सप्ताह पहले जहां कुछ बाजारों में एक्स-मिल कीमतें 68 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं, वहीं अब कई प्रमुख बाजारों में भाव लगभग 53 से 55 रुपये प्रति किलो के आसपास आ गया है। महाराष्ट्र में कीमतें करीब 51-52 रुपये और कोलकाता में थोक भाव लगभग 53 रुपये प्रति किलो तक आने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि इस गिरावट का पूरा फायदा अभी आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। यही इस समय चीनी बाजार की सबसे बड़ी कहानी है। एक तरफ मिल और थोक स्तर पर कीमतें नीचे आ रही हैं, तो दूसरी तरफ खुदरा बाजार में चीनी अभी भी महंगी बनी हुई है। 26 अगस्त को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 65.05 रुपये प्रति किलो बताया गया, जबकि इससे एक दिन पहले यह 63.97 रुपये प्रति किलो था।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब चीनी का एक्स-मिल भाव तेजी से नीचे आ रहा है तो आखिर दुकानों पर ग्राहकों को सस्ती चीनी कब मिलेगी? क्या आने वाले दिनों में कीमत और गिर सकती है? और सरकार ने ऐसा क्या किया कि तेजी से बढ़ते बाजार पर अचानक दबाव बनने लगा?
68 रुपये से 53-55 रुपये तक कैसे पहुंचा चीनी का भाव?
पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया था। जुलाई में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 48 रुपये प्रति किलो के आसपास था, जो अगस्त में बढ़कर 55 रुपये से ऊपर पहुंच गया। इसके बाद कई बाजारों में थोक और एक्स-मिल भाव में भी तेजी देखने को मिली।
सरकार ने कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए। इनमें घरेलू चीनी उत्पादन का अनुमान से कम रहना, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और कुछ हिस्सों में जमाखोरी तथा सट्टेबाजी जैसी आशंकाएं शामिल थीं।
कीमत बढ़ने के साथ बाजार में यह धारणा मजबूत होने लगी कि आने वाले महीनों में चीनी की कमी हो सकती है। इसी आशंका के कारण कुछ कारोबारियों ने स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया। लेकिन सरकार ने इसी धारणा को तोड़ने के लिए लगातार कई कदम उठाए।
सरकार ने खोला 10 लाख टन आयात का रास्ता
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की तैयारी की। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाना और त्योहारों के दौरान संभावित कमी को रोकना है।
सरकार के इस फैसले का बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर भी पड़ा। कारोबारियों को संकेत मिल गया कि यदि घरेलू बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो सरकार बाहर से चीनी मंगाने के लिए तैयार है।
करीब 80 हजार टन की चार खेप निर्यातक देशों के बंदरगाहों से रवाना होने की जानकारी सामने आई है। इनके भारत पहुंचने के बाद कच्ची चीनी को रिफाइन करके घरेलू बाजार में उतारने की तैयारी है।
इसके अलावा भारतीय बंदरगाहों पर पहले से मौजूद करीब तीन से चार लाख टन चीनी को भी बाजार में लाने और रिफाइनिंग प्रक्रिया तेज करने की कोशिश की जा रही है।
इससे आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
सरकारी सख्ती ने जमाखोरों की चिंता बढ़ाई
चीनी के बाजार में सरकार ने केवल आयात का सहारा नहीं लिया, बल्कि स्टॉक रखने की सीमा को भी सख्त किया।
चीनी डीलरों के लिए 30 नवंबर तक अधिकतम 400 टन स्टॉक रखने की सीमा तय की गई है। वहीं एक सितंबर से बड़े थोक उपभोक्ता भी 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी नहीं रख सकेंगे।
इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ा जो कीमतों में आगे और तेजी की उम्मीद में बड़ी मात्रा में स्टॉक रखना चाहते थे।
सरकार ने स्टॉक की जांच के लिए केंद्र और राज्यों की संयुक्त टीमें भी बनाई हैं। इन टीमों की ओर से देशभर में एक हजार से ज्यादा स्थानों पर जांच और छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जैसे-जैसे सरकारी निगरानी बढ़ी, बाजार में पहले से जमा स्टॉक को लेकर कारोबारियों का जोखिम भी बढ़ गया। यदि कीमतें आगे गिरती हैं तो महंगे दाम पर खरीदा गया स्टॉक नुकसान दे सकता है। ऐसे में कई कारोबारी स्टॉक को बाजार में निकालना ज्यादा सुरक्षित समझ सकते हैं।
यही वजह है कि चीनी के थोक और एक्स-मिल भाव में अचानक गिरावट देखने को मिली।
21 से 26 अगस्त के बीच कई शहरों में बड़ी गिरावट
स्थानीय मंडियों से मिले आंकड़ों के अनुसार 21 अगस्त से 26 अगस्त के बीच कई प्रमुख बाजारों में चीनी के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
| शहर | 21 अगस्त | 26 अगस्त | गिरावट |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹6,600 | ₹6,000 | ₹600 |
| कानपुर | ₹6,650 | ₹6,050 | ₹600 |
| रायपुर | ₹6,600 | ₹5,800 | ₹800 |
| मुंबई | ₹6,700 | ₹5,800 | ₹900 |
| रांची | ₹6,700 | ₹6,100 | ₹600 |
| कोलकाता | ₹6,750 | ₹6,000 | ₹750 |
भाव रुपये प्रति क्विंटल में दिए गए हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि कई प्रमुख बाजारों में केवल पांच दिनों के भीतर ही 600 से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है।
सबसे ज्यादा गिरावट मुंबई में 900 रुपये प्रति क्विंटल की रही। इसके बाद रायपुर में 800 रुपये और कोलकाता में 750 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट देखने को मिली।
फिर भी खुदरा बाजार में चीनी क्यों महंगी है?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
एक्स-मिल और थोक भाव नीचे आ रहे हैं, लेकिन दुकानदारों तक इसका असर धीरे-धीरे पहुंच रहा है। इसके कई कारण हो सकते हैं। खुदरा कीमतों में पुराने स्टॉक की लागत, परिवहन, पैकिंग, स्थानीय मार्जिन और वितरण लागत शामिल होती है।
अगर किसी दुकानदार या थोक व्यापारी ने पहले महंगे भाव पर चीनी खरीदी है तो वह तुरंत कम कीमत पर बेचने से बच सकता है। इसी वजह से मिल स्तर पर आई गिरावट का असर खुदरा बाजार में पहुंचने में समय लग सकता है।
यही कारण है कि सरकार की नजर अब केवल मिल भाव पर नहीं बल्कि खुदरा कीमतों पर भी बनी हुई है।
नई फसल आने से पहले बढ़ेगी सप्लाई
चीनी बाजार में आगे की सबसे बड़ी उम्मीद नई पेराई शुरू होने को लेकर है। सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी है।
अगर अक्टूबर में मिलों की पेराई समय पर शुरू होती है और गन्ने की उपलब्धता पर्याप्त रहती है, तो बाजार में चीनी की नई सप्लाई आने लगेगी।
इससे कीमतों पर और दबाव बन सकता है। यानी अगले कुछ हफ्तों में चीनी बाजार में दो तरफ से सप्लाई बढ़ने की संभावना है—एक तरफ आयातित कच्ची चीनी और बंदरगाहों पर मौजूद स्टॉक, दूसरी तरफ घरेलू चीनी मिलों की नई पेराई।
अगर दोनों स्रोतों से पर्याप्त मात्रा में चीनी बाजार में आती है तो उपभोक्ताओं को आगे राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
क्या चीनी के भाव और गिरेंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 53-55 रुपये किलो के आसपास आ चुका एक्स-मिल भाव आगे और नीचे जाएगा?
मौजूदा हालात को देखें तो इसके संकेत जरूर दिखाई दे रहे हैं। सरकार लगातार बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रही है। आयातित चीनी की खेपें आने वाली हैं, बंदरगाहों पर मौजूद स्टॉक को बाजार में उतारने की तैयारी है और बिना बिके घरेलू कोटे की सप्लाई बढ़ाई जा रही है।
इसके अलावा स्टॉक सीमा और सरकारी जांच से जमाखोरी की संभावना पर भी दबाव बढ़ा है।
अगर त्योहारों की मांग के बावजूद बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनी रहती है तो कीमतों में आगे और नरमी आ सकती है।
हालांकि अगर त्योहारों के दौरान मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ती है तो कीमतों में गिरावट सीमित भी रह सकती है।
चीनी के बाद प्याज पर भी सरकार का एक्शन
चीनी के बाद अब सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भी सप्लाई बढ़ाने का कदम उठाया है।
प्याज की कीमतों में हालिया तेजी के बीच केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज निकालकर बड़े शहरों में भेज रही है। दिल्ली समेत कई शहरों में सरकार करीब 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है।
इसके लिए सरकारी एजेंसियों के जरिए बफर स्टॉक का प्याज बाजार में उतारा जा रहा है।
सरकार के पास करीब 1.20 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है, जिसमें से जरूरत के अनुसार प्याज बाजार में भेजा जा रहा है।
इसका उद्देश्य साफ है—जहां भी जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अचानक तेजी आए, वहां सरकारी स्टॉक बाजार में उतारकर सप्लाई बढ़ाई जाए।
नासिक में भी प्याज के भाव में गिरावट
प्याज की सबसे बड़ी मंडियों में शामिल नासिक में भी हालिया दिनों में कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।
बताया गया कि सोमवार को प्याज का भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो था, जो बुधवार तक घटकर लगभग 42 रुपये प्रति किलो रह गया। यानी कुछ ही दिनों में करीब 8 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया है कि देश में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
इस साल प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह लगभग 307.67 लाख टन था। यानी उत्पादन में बहुत बड़ा अंतर नहीं माना जा रहा है।
सरकार की रणनीति का असर बाजार पर दिखने लगा
चीनी और प्याज दोनों के मामले में सरकार की रणनीति लगभग एक जैसी दिखाई दे रही है।
पहला कदम है बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना। दूसरा कदम स्टॉक की निगरानी करना और तीसरा कदम जमाखोरी की आशंका पर कार्रवाई करना।
चीनी के मामले में 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की तैयारी, घरेलू कोटा जारी करना और स्टॉक सीमा लागू करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
प्याज के मामले में बफर स्टॉक को बाजार में उतारना इसी रणनीति का दूसरा उदाहरण है।
इससे बाजार में यह संदेश गया है कि सरकार कीमतों में अचानक और असामान्य उछाल को रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है।
अब आम आदमी की नजर खुदरा कीमत पर
चीनी के बाजार में फिलहाल सबसे बड़ी कहानी यह है कि थोक और एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट शुरू हो चुकी है, लेकिन खुदरा बाजार अभी पीछे चल रहा है।
अगर आने वाले दिनों में आयातित चीनी भारत पहुंचती है, बंदरगाहों पर पड़ा स्टॉक तेजी से बाजार में आता है और घरेलू कोटा पर्याप्त मात्रा में जारी होता है, तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
इसके साथ अक्टूबर में नई पेराई शुरू होने से भी बाजार में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है।
यानी आने वाले कुछ सप्ताह चीनी की कीमतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है...
सरकार की सख्ती के बाद चीनी का एक्स-मिल भाव 68 रुपये प्रति किलो से गिरकर करीब 53-55 रुपये प्रति किलो तक आ गया है। महाराष्ट्र में भाव 51-52 रुपये और कोलकाता में करीब 53 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
लेकिन आम आदमी के लिए असली राहत तभी मानी जाएगी, जब इस गिरावट का असर किराना दुकानों तक पहुंचे और खुदरा कीमतें भी नीचे आएं।
सरकार ने बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने का रास्ता खोल दिया है, स्टॉक पर शिकंजा कस दिया है और जमाखोरी पर नजर बढ़ा दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में चीनी की कीमत कितनी नीचे जाती है और इस पूरी गिरावट का फायदा आम उपभोक्ता की जेब तक कब पहुंचता है।

कोई टिप्पणी नहीं