सोना-चांदी में फिर मचा हड़कंप! कीमतों ने पकड़ी रफ्तार, क्या अब खरीदना पड़ेगा और महंगा?
सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सोमवार, 17 अगस्त 2026 को सर्राफा बाजार से बड़ी खबर सामने आई है। घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिली। सोने ने शुरुआती कारोबार में करीब ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छुआ, जबकि चांदी करीब ₹2.38 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। इसके बाद ऊपरी स्तरों से कुछ नरमी भी देखने को मिली।
इस तेजी के पीछे केवल घरेलू मांग नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलता माहौल भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और पश्चिम एशिया में तनाव ने सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग को सहारा दिया है। वहीं चांदी को निवेश मांग के साथ औद्योगिक उपयोग से भी समर्थन मिल रहा है।
सुबह बाजार खुलते ही सोने ने दिखाया दम
17 अगस्त के शुरुआती कारोबार में MCX गोल्ड ने ₹1,56,155 प्रति 10 ग्राम का इंट्राडे हाई छुआ। हालांकि बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली और भाव करीब ₹1.55 लाख के स्तर के आसपास कारोबार करते नजर आए।
यानी जिन लोगों ने सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद लगा रखी थी, उन्हें बाजार ने एक बार फिर चौंका दिया। हाल के सत्रों में उतार-चढ़ाव के बाद सोमवार को बुलियन मार्केट में खरीदारी का रुझान दिखाई दिया।
हालांकि निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सोने में तेजी सीधी रेखा में जारी रहना जरूरी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के कारण कीमतों में बहुत तेजी से दोनों दिशाओं में बदलाव हो सकता है।
चांदी ने भी लगाई बड़ी छलांग
सोने के साथ-साथ चांदी ने भी सोमवार को बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा। MCX पर चांदी ने शुरुआती कारोबार में करीब ₹2,38,500 प्रति किलो का इंट्राडे हाई छुआ और बाद में करीब ₹2,37,500 के आसपास कारोबार करती दिखाई दी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी मजबूत रही। सोमवार को स्पॉट सिल्वर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर $65 प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई।
चांदी की खास बात यह है कि इसका इस्तेमाल केवल आभूषण और निवेश में नहीं होता। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी मांग रहती है। यही कारण है कि चांदी की कीमत पर निवेश मांग के साथ वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों का असर भी पड़ता है।
आखिर अचानक क्यों महंगा हो रहा सोना?
सोने की तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार के कई संकेत काम कर रहे हैं। सोमवार को वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड लगभग $4,388 प्रति औंस के आसपास पहुंचा, जबकि अमेरिकी दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स करीब $4,444 प्रति औंस पर थे।
सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर में कमजोरी को माना जा रहा है। डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत तय होने वाला सोना तुलनात्मक रूप से आकर्षक हो सकता है।
इसके अलावा अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में भी बदलाव आया है। कमजोर रोजगार आंकड़ों और अपेक्षाकृत नरम महंगाई संकेतों के बाद सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर बढ़ाने की संभावना पहले के मुकाबले कम आंकी जा रही है।
आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कम होने से सोने को समर्थन मिल सकता है, क्योंकि सोना स्वयं ब्याज नहीं देता।
पश्चिम एशिया का तनाव बना बड़ा फैक्टर
कीमती धातुओं के बाजार में भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और ईरान से जुड़े तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसी परिस्थितियों में सोने को अक्सर सुरक्षित निवेश यानी 'सेफ हेवन' एसेट के तौर पर देखा जाता है।
अगर आने वाले दिनों में तनाव बढ़ता है, तो सोने और चांदी में सुरक्षित निवेश की मांग और मजबूत हो सकती है। वहीं तनाव कम होने की स्थिति में कीमती धातुओं में मुनाफावसूली का दबाव भी दिखाई दे सकता है।
यही वजह है कि बाजार में फिलहाल तेजी के बावजूद बड़ी अस्थिरता बनी रहने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चांदी की तेजी के पीछे एक और बड़ा कारण
सोने की तुलना में चांदी का बाजार अलग तरीके से भी प्रभावित होता है। यह एक कीमती धातु होने के साथ औद्योगिक धातु भी है।
17 अगस्त को MCX पर सोने और चांदी की शुरुआती बढ़त के पीछे अमेरिकी महंगाई के नरम संकेत, फेड की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, पश्चिम एशिया में तनाव और चांदी की औद्योगिक मांग जैसे कारण बताए गए।
यही कारण है कि चांदी में कई बार सोने की तुलना में ज्यादा तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
कुछ ही दिनों में बाजार ने बदली चाल
सबसे दिलचस्प बात यह है कि हाल के दिनों में सोने और चांदी में मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिला था। 14 अगस्त तक बाजार में तेज गिरावट और फिर भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों के सामने खरीदें, बेचें या होल्ड करें जैसी स्थिति बनी हुई थी।
अब 17 अगस्त को बाजार में फिर तेजी दिखाई देने से साफ है कि बुलियन मार्केट फिलहाल बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है।
एक अंतरराष्ट्रीय खबर, डॉलर की चाल, अमेरिकी फेड का कोई संकेत या पश्चिम एशिया से आने वाली बड़ी खबर सोने-चांदी की दिशा तेजी से बदल सकती है।
ज्वेलरी खरीदने वालों को लगेगा झटका?
MCX की कीमत और आपके शहर के ज्वेलर की अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। फिजिकल गोल्ड ज्वेलरी खरीदते समय शुद्धता, टैक्स, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर के अन्य शुल्क के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।
इसके अलावा 18 कैरेट, 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने की कीमत भी अलग-अलग होती है। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स में भी भाव में अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय स्तर पर उस समय का वास्तविक भाव जरूर जांचना चाहिए।
त्योहारी और शादी के सीजन को देखते हुए सोने की ऊंची कीमतें ग्राहकों के बजट पर असर डाल सकती हैं।
अब क्या और महंगा होगा सोना?
यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। मौजूदा संकेत सोने को कुछ समर्थन जरूर दे रहे हैं, लेकिन यह कहना संभव नहीं है कि कीमत लगातार ऊपर ही जाएगी।
इस सप्ताह निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेड से जुड़े संकेतों, डॉलर की चाल, तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहने वाली है। इन कारकों में बड़ा बदलाव सोने और चांदी की दिशा बदल सकता है।
अगर डॉलर कमजोर रहता है और भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है, तो सोने को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत डॉलर में मजबूती, तनाव में कमी या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कीमतों पर दबाव डाल सकती है।
खरीदार जल्दबाजी में न लें फैसला
सोने और चांदी में इस समय जिस तरह का उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहा है, उसमें केवल एक दिन की तेजी देखकर खरीदारी या निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।
ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहक शुद्धता, हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज और अंतिम बिल की तुलना जरूर करें। वहीं निवेश के उद्देश्य से सोना या चांदी खरीदने वालों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के आधार पर फैसला करना चाहिए।
कीमती धातुओं में तेज तेजी के बाद अचानक मुनाफावसूली आ सकती है, इसलिए बाजार की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।
आगे इन 4 चीजों पर रहेगी बाजार की नजर
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों के लिए अमेरिकी डॉलर की दिशा बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, पश्चिम एशिया का तनाव और वैश्विक महंगाई से जुड़े आंकड़े बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
चांदी के मामले में औद्योगिक मांग भी बड़ा फैक्टर बनी रहेगी। अगर औद्योगिक खपत मजबूत रहती है और साथ ही निवेश मांग भी बढ़ती है, तो चांदी में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।
17 अगस्त 2026 को सोने और चांदी ने एक बार फिर खरीदारों और निवेशकों को चौंका दिया। MCX गोल्ड शुरुआती कारोबार में ₹1,56,155 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा, जबकि चांदी ने करीब ₹2,38,500 प्रति किलो का इंट्राडे हाई छुआ।
कमजोर डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव फिलहाल सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। चांदी को इन कारणों के साथ औद्योगिक मांग से भी सहारा मिल रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सोना-चांदी नई ऊंचाई की तरफ बढ़ेंगे या ऊंचे भाव पर अचानक बड़ी मुनाफावसूली आएगी? आने वाले कारोबारी सत्र इसका जवाब दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। सोने-चांदी की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। इसे निवेश की सलाह न मानें और निवेश से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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