Gold Price Alert: सरकार का बड़ा फैसला! इंपोर्ट ड्यूटी घटी तो सोने-चांदी की कीमतों में आएगी जोरदार गिरावट?
भारत में सोने और चांदी की कीमतों को लेकर इस समय बाजार में हलचल तेज है। एक तरफ कीमती धातुओं के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ आयात शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर सरकार के स्तर पर संभावित बदलाव की चर्चा ने ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों और ग्राहकों दोनों का ध्यान खींच लिया है। अगर सरकार आने वाले समय में सोने और चांदी पर लगने वाली आयात ड्यूटी में कटौती करती है, तो इसका असर केवल आयात कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घरेलू ज्वेलरी बाजार, कीमतों, ग्राहकों की खरीदारी और ग्रे मार्केट तक दिखाई दे सकता है।
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक, केंद्र सरकार सोने और चांदी पर आयात शुल्क कम करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया है कि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यानी फिलहाल शुल्क घटाने की खबर को सरकारी आदेश नहीं माना जा सकता। सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
आखिर क्यों उठी इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की मांग?
सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के पीछे सरकार की अपनी आर्थिक रणनीति थी। इसका प्रमुख उद्देश्य कीमती धातुओं के अनियंत्रित आयात को नियंत्रित करना और देश के बाहरी खाते तथा विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना था। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने के साथ भारत का आयात बिल भी तेजी से बढ़ सकता है।
सरकार को उम्मीद थी कि ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी के कारण सोने और चांदी की आधिकारिक मांग तथा आयात में कमी आएगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश के आयात बिल को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
लेकिन ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि ऊंची ड्यूटी का असर उम्मीद के मुताबिक नहीं आया। आधिकारिक कारोबार पूरी तरह कम होने के बजाय बाजार में समानांतर कारोबार यानी ग्रे मार्केट का विस्तार होने लगा। यही कारण है कि अब आयात शुल्क की मौजूदा दरों पर दोबारा विचार करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
बढ़ता ग्रे मार्केट सरकार के लिए बड़ी चिंता
सोने की कीमत में टैक्स और ड्यूटी का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। जब आधिकारिक चैनल से सोना खरीदना महंगा होता है, तो कुछ कारोबारी और खरीदार सस्ते विकल्प तलाशने लगते हैं। यही स्थिति अवैध या अनौपचारिक बाजार के विस्तार का कारण बन सकती है।
ज्वेलरी उद्योग का दावा है कि सरकार को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि अत्यधिक आयात शुल्क से ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिल सकता है। अब बाजार में इसी तरह के संकेत दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
GJC चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक, सरकार इस मुद्दे पर पिछले कुछ समय से विचार कर रही है और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। हालांकि, शुल्क में कितनी कटौती होगी और कब होगी, इस बारे में अभी कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है।
यही अनिश्चितता फिलहाल बाजार में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। कारोबारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है, जबकि ग्राहक यह जानना चाहते हैं कि यदि ड्यूटी घटती है तो क्या उन्हें सोना और चांदी पहले की तुलना में सस्ता मिल सकता है।
मई में 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हुई थी ड्यूटी
सोने और चांदी पर आयात शुल्क में बड़ा बदलाव मई महीने में किया गया था। सरकार ने कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ रहा था।
सोने को दुनिया भर में सुरक्षित निवेश यानी सेफ हेवन एसेट माना जाता है। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर सोने की ओर रुख करते हैं। इससे सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ सकती हैं।
भारत में सोने की खपत पहले से ही बहुत ज्यादा है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश माना जाता है। देश में हर साल बड़ी मात्रा में सोने की खपत होती है और घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से भारत का सोना आयात लगभग 24 प्रतिशत बढ़कर 71.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, इसी दौरान मात्रा के लिहाज से आयात घटकर करीब 721 टन रह गया। इसका मतलब यह है कि कम मात्रा में सोना आने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण कुल आयात बिल काफी बढ़ गया।
अगर ड्यूटी घटी तो क्या सोना सस्ता होगा?
यह सवाल सबसे ज्यादा ग्राहकों के मन में है। इसका जवाब पूरी तरह सीधा नहीं है। अगर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी कम करती है, तो सोने की आयात लागत में कमी आ सकती है। इसका फायदा घरेलू बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है। लेकिन सोने का अंतिम भाव केवल इंपोर्ट ड्यूटी से तय नहीं होता।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, घरेलू टैक्स, स्थानीय मांग, ज्वेलरी मेकिंग चार्ज और बाजार की परिस्थितियां भी अंतिम कीमत को प्रभावित करती हैं।
इसलिए ड्यूटी घटने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि सोना उसी अनुपात में सस्ता हो जाएगा। हालांकि, बाकी परिस्थितियां समान रहने पर आयात शुल्क में कमी से कीमतों पर नीचे की ओर दबाव जरूर बन सकता है।
ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए क्या बदलेगा?
अगर सरकार आयात शुल्क कम करती है और उसका असर बाजार कीमतों पर पड़ता है, तो शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को राहत मिल सकती है। सोने की कीमत में थोड़ी भी बड़ी कमी होने पर भारी मात्रा में खरीदारी करने वाले परिवारों के बजट पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
इसके अलावा, आधिकारिक चैनल से सोने की उपलब्धता बढ़ने पर बाजार में पारदर्शिता भी बढ़ सकती है। कारोबारियों को उम्मीद है कि यदि लीगल चैनल से सोना अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध होगा, तो ग्रे मार्केट की ओर जाने का प्रोत्साहन कम हो सकता है।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है। अगर आयात शुल्क कम होने से आधिकारिक आयात बढ़ता है, तो देश के आयात बिल और विदेशी मुद्रा की मांग पर दोबारा दबाव आ सकता है। सरकार को इसी संतुलन को साधना होगा।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सोने के आयात को नियंत्रित भी रखा जाए और अत्यधिक ड्यूटी के कारण अवैध बाजार को बढ़ावा भी न मिले।
एक तरफ ऊंची ड्यूटी विदेशी मुद्रा की बचत में मदद कर सकती है, लेकिन दूसरी तरफ इससे घरेलू बाजार में आधिकारिक सोना महंगा हो सकता है। यदि कीमतों का अंतर बहुत ज्यादा हो जाता है, तो अनधिकृत कारोबार बढ़ने की आशंका रहती है।
वहीं, ड्यूटी घटाने पर आधिकारिक आयात बढ़ सकता है। इससे सरकार को विदेशी मुद्रा और चालू खाते के संतुलन पर नजर रखनी होगी। इसलिए किसी भी फैसले से पहले वैश्विक सोने की कीमत, रुपये की स्थिति, आयात बिल, घरेलू मांग और ग्रे मार्केट जैसे कई पहलुओं का आकलन किया जाएगा।
सोने की कीमत में गिरावट ने बढ़ाई उम्मीद
इसी बीच घरेलू वायदा बाजार में सोमवार को सोने की कीमत में गिरावट भी देखने को मिली। कमजोर मांग के बीच सोने का भाव ₹2,045 गिरकर ₹1,54,236 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
ऐसे समय में इंपोर्ट ड्यूटी घटने की संभावित खबर बाजार के लिए महत्वपूर्ण बन जाती है। यदि सरकार वास्तव में शुल्क कम करने का फैसला करती है, तो इसका असर सोने और चांदी के घरेलू कारोबार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
लेकिन फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का कोई अंतिम सरकारी फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए ग्राहकों और निवेशकों को केवल चर्चाओं के आधार पर खरीद-बिक्री का निर्णय लेने के बजाय आधिकारिक घोषणा और बाजार के अगले संकेतों का इंतजार करना चाहिए।
कुल मिलाकर, सोने और चांदी पर आयात शुल्क में संभावित कटौती ने बाजार में नई उम्मीद जरूर पैदा कर दी है। अगर सरकार यह कदम उठाती है, तो एक ओर ग्राहकों और ज्वेलरी कारोबार को राहत मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर सरकार को बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को संभालने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। आने वाले दिनों में सरकार का फैसला यह तय कर सकता है कि भारत के कीमती धातु बाजार का अगला रुख किस दिशा में जाता है।

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