नाइजीरिया में रहस्यमयी बीमारी का खौफ! 922 मरीज और 221 मौतों के बाद मचा हड़कंप, अब किसकी बारी?
नई दिल्ली। अफ्रीकी देश नाइजीरिया में एक गंभीर संक्रामक बीमारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। लासा फीवर के मामलों में इस साल लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नाइजीरिया सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी NCDC की 2026 की महामारी विज्ञान रिपोर्ट के अनुसार, जून के अंत तक देश में 922 पुष्ट लासा फीवर मामले और 221 मौतें दर्ज की जा चुकी थीं। इस दौरान बीमारी की केस फेटैलिटी रेट करीब 24 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अब तक 23 राज्यों के 111 स्थानीय सरकारी क्षेत्रों में कम से कम एक पुष्ट मामला सामने आ चुका है। कुल पुष्ट मामलों में करीब 85 प्रतिशत मामले पांच राज्यों—बाउची, ओंडो, ताराबा, बेन्यू और ईदो—से सामने आए हैं। इससे साफ है कि बीमारी का असर कई क्षेत्रों तक पहुंच चुका है और स्वास्थ्य विभागों के सामने संक्रमण की निगरानी तथा नियंत्रण की बड़ी चुनौती है।
आखिर क्या है लासा फीवर?
लासा फीवर एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से Lassa virus के कारण होती है। यह बीमारी पश्चिम अफ्रीका के कुछ हिस्सों में अधिक पाई जाती है और नाइजीरिया उन देशों में शामिल है जहां इसके मामले नियमित रूप से सामने आते हैं।
इस बीमारी का प्राकृतिक स्रोत आम तौर पर संक्रमित मल्टीमैमेट चूहा माना जाता है। संक्रमित चूहों के मूत्र या मल से दूषित भोजन अथवा घरेलू वस्तुओं के संपर्क में आने पर इंसानों में संक्रमण फैल सकता है।
कुछ परिस्थितियों में संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से भी संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। इसी वजह से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
922 मामले और 221 मौतें क्यों हैं चिंता की बात?
NCDC के जून 2026 के सप्ताह 26 तक के आंकड़ों के अनुसार, नाइजीरिया में इस साल 922 पुष्ट मामले दर्ज किए गए और इनमें से 221 मरीजों की मौत हो चुकी थी। इस अवधि में केस फेटैलिटी रेट करीब 24 प्रतिशत रही, जो इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाती है।
हालांकि किसी बीमारी की केस फेटैलिटी रेट पूरे संक्रमित लोगों की वास्तविक मृत्यु दर के समान नहीं होती, क्योंकि हल्के या बिना लक्षण वाले कई संक्रमण स्वास्थ्य व्यवस्था तक पहुंच नहीं पाते। फिर भी अस्पतालों में पुष्टि किए गए मामलों में इतनी अधिक मृत्यु दर चिंता का विषय है।
पांच राज्यों में सबसे ज्यादा मामले
लासा फीवर के कुल पुष्ट मामलों का बड़ा हिस्सा पांच राज्यों से सामने आया है। इनमें बाउची, ओंडो, ताराबा, बेन्यू और ईदो प्रमुख हैं।
इन राज्यों में बीमारी की निगरानी, संदिग्ध मरीजों की पहचान और संपर्क में आए लोगों की निगरानी को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो गया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए चुनौती केवल मरीजों का इलाज करना नहीं है। बीमारी के स्रोत की पहचान, संक्रमण की कड़ियों को तोड़ना और लोगों को बीमारी से बचाव के तरीके बताना भी उतना ही जरूरी है।
स्वास्थ्यकर्मी भी आए संक्रमण की चपेट में
लासा फीवर के प्रकोप में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन जाती है। NCDC ने 2026 के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण के मामले भी दर्ज किए हैं।
सप्ताह 26 की रिपोर्ट में एक नए स्वास्थ्यकर्मी के संक्रमित होने की जानकारी सामने आई थी। इससे पता चलता है कि अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने वाले कर्मचारियों को भी संक्रमण से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
यदि अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था कमजोर हो, तो बीमारी मरीज से स्वास्थ्यकर्मी और फिर दूसरे लोगों तक पहुंच सकती है। इसलिए संदिग्ध मामलों को समय पर अलग करना, उचित सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल और अस्पतालों में स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
कैसे फैलता है लासा फीवर?
लासा फीवर का सबसे प्रमुख स्रोत संक्रमित चूहे माने जाते हैं। जहां घरों या खाद्य सामग्री के आसपास चूहों का प्रकोप अधिक होता है, वहां संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
चूहे के मल-मूत्र से दूषित भोजन या घरेलू सामान के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है। खराब स्वच्छता व्यवस्था, भोजन को खुले में रखना और चूहों की संख्या बढ़ना बीमारी के प्रसार को बढ़ावा दे सकता है।
इंसान से इंसान में संक्रमण भी संभव है, खासकर संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने पर। अस्पतालों में इसलिए संक्रमण नियंत्रण के नियमों को बेहद गंभीरता से लागू किया जाता है।
शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लग सकते हैं
लासा फीवर के शुरुआती लक्षण कई सामान्य वायरल बीमारियों जैसे दिखाई दे सकते हैं। मरीज को बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द और बेचैनी जैसी समस्या हो सकती है।
कुछ मरीजों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं। गंभीर मामलों में शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं।
यही कारण है कि बीमारी की शुरुआती पहचान चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां मलेरिया और अन्य बुखार वाली बीमारियां भी आम हैं, वहां केवल लक्षणों के आधार पर लासा फीवर की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
21 से 30 साल की उम्र में ज्यादा मामले
NCDC की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में लासा फीवर से प्रभावित पुष्ट मरीजों में 21 से 30 वर्ष की आयु का समूह प्रमुख रहा है। हालांकि बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल युवा ही खतरे में हैं। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य आयु समूहों में भी संक्रमण हो सकता है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में सभी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
बीमारी के दौरान क्या होता है?
कई मरीजों में संक्रमण हल्के लक्षणों के साथ भी हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार और लगातार निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मरीज की स्थिति को नियंत्रित करने की संभावना बेहतर हो सकती है। इसलिए प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों को लंबे समय तक रहने वाले बुखार या अन्य असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नाइजीरिया ने बढ़ाई निगरानी
नाइजीरिया का स्वास्थ्य विभाग लासा फीवर को लेकर लंबे समय से निगरानी और प्रतिक्रिया व्यवस्था चला रहा है। 2026 के शुरुआती महीनों में ही NCDC ने राज्यों से निगरानी मजबूत करने और संक्रमण की रोकथाम के उपाय बढ़ाने की अपील की थी।
फरवरी के अंत तक 18 राज्यों और 67 स्थानीय सरकारी क्षेत्रों में पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके थे। उस समय पांच राज्यों में देश के 80 प्रतिशत से अधिक पुष्ट मामलों की जानकारी सामने आई थी। स्वास्थ्यकर्मियों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
इसके बाद मामलों का दायरा और बढ़ा और जून के अंत तक 23 राज्यों के 111 स्थानीय सरकारी क्षेत्रों तक बीमारी के पुष्ट मामले पहुंच गए।
बीमारी से बचने के लिए स्वच्छता जरूरी
लासा फीवर के जोखिम को कम करने के लिए घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। भोजन को खुले में रखने से बचना चाहिए और ऐसी जगहों पर चूहों की पहुंच रोकने की कोशिश करनी चाहिए जहां खाना या पानी रखा जाता है।
कचरे का सही निपटान, घर में दरारों और संभावित चूहे के प्रवेश वाले स्थानों को बंद करना तथा खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से रखना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
प्रभावित व्यक्ति की देखभाल करने वालों को भी डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह का पालन करना चाहिए।
क्या लासा फीवर भारत के लिए खतरा है?
नाइजीरिया में बीमारी के बढ़ते मामले यह सवाल जरूर पैदा करते हैं कि क्या यह संक्रमण दूसरे देशों तक पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण संक्रामक बीमारियों का एक देश से दूसरे देश तक पहुंचना संभव होता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नाइजीरिया में प्रकोप होने से भारत में भी बीमारी फैलना तय है।
किसी देश के लिए जोखिम का आकलन यात्रा पैटर्न, संक्रमित क्षेत्रों से आने वाले लोगों, सीमा निगरानी और बीमारी की मौजूदा स्थिति सहित कई कारकों के आधार पर किया जाता है।
भारत में किसी व्यक्ति को यदि प्रभावित क्षेत्र की यात्रा के बाद तेज बुखार या अन्य गंभीर लक्षण होते हैं, तो डॉक्टर को अपनी यात्रा की जानकारी देना उपयोगी हो सकता है।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
लासा फीवर के मामले जून के अंत तक 922 पुष्ट मामलों और 221 मौतों तक पहुंच चुके थे। बीमारी के 23 राज्यों और 111 स्थानीय सरकारी क्षेत्रों तक फैलने से स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए निगरानी का दायरा भी बढ़ गया है।
अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नए मामलों की जल्द पहचान की जाए, संक्रमित लोगों को उचित उपचार मिले और संक्रमण की कड़ियों को समय रहते रोका जाए।
लासा फीवर की स्थिति यह भी दिखाती है कि किसी संक्रामक बीमारी से निपटने के लिए केवल अस्पतालों में इलाज पर्याप्त नहीं है। स्वच्छता, चूहों की रोकथाम, सुरक्षित भोजन, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, समय पर जांच और जागरूकता—इन सभी उपायों की एक साथ जरूरत होती है।
फिलहाल नाइजीरिया में स्वास्थ्य एजेंसियों की नजर उन इलाकों पर बनी हुई है जहां बीमारी के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में नए आंकड़े यह बताएंगे कि संक्रमण की रफ्तार कम हो रही है या बीमारी का असर और क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।

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