टिकट के पैसे नहीं थे तो खुद को ही बना लिया पार्सल! बॉक्स में बंद होकर 17,020 KM का सफर… लेकिन सामने आई ऐसी सच्चाई, जिसने सबको चौंका दिया
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर एक बेहद हैरान करने वाली तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर में एक युवक लकड़ी के बड़े बॉक्स के अंदर बैठा दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरी तस्वीर में उसी तरह का एक पैक किया हुआ बॉक्स एयरपोर्ट के कार्गो एरिया में नजर आ रहा है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि विमान का टिकट महंगा होने के कारण एक शख्स ने खुद को ही पार्सल बना लिया और बैंकॉक से बॉक्स के अंदर बंद होकर करीब 17,020 किलोमीटर का सफर तय कर अपने घर पहुंच गया।
वायरल तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि युवक ने कार्गो के जरिए खुद को पैक कराया और बॉक्स को विमान से भेज दिया गया। लंबी दूरी की यात्रा के बाद वह कथित तौर पर सुरक्षित अपने घर पहुंच गया। सोशल मीडिया पर इस कहानी को बेहद रोमांचक अंदाज में शेयर किया जा रहा है और लोग इसे टिकट के पैसे बचाने का अनोखा तरीका बता रहे हैं।
लेकिन जब इस दावे की पड़ताल की गई तो कहानी में कई सवाल सामने आए। 17,020 किलोमीटर वाली इस कथित घटना की स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि नहीं मिलती। इसके अलावा तस्वीर में दिखाई देने वाला फ्लाइट नंबर भी वायरल दावे से पूरी तरह मेल नहीं खाता।
तस्वीर में दिखाई दे रहा है THY2189 नंबर
वायरल तस्वीर में बॉक्स पर एक लेबल दिखाई देता है, जिस पर THY2189 और उसके नीचे BANGKOK लिखा नजर आता है। पहली नजर में इससे ऐसा लग सकता है कि बॉक्स बैंकॉक से इसी उड़ान के जरिए भेजा गया था।
लेकिन उपलब्ध विमानन जानकारी के मुताबिक THY2189 या TK2189 फ्लाइट नंबर अंकारा से इस्तांबुल के रूट से जुड़ा हुआ है। ऐसे में तस्वीर में दिखाई दे रहे लेबल और वायरल कहानी के बीच सवाल खड़ा होता है।
यह भी संभव है कि तस्वीर को किसी दूसरे संदर्भ से लेकर बाद में नई कहानी के साथ सोशल मीडिया पर वायरल किया गया हो। इसलिए केवल तस्वीर देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि उसमें दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में बैंकॉक से 17,020 किलोमीटर की यात्रा करके घर पहुंचा था।
क्या इंसान सच में बॉक्स में छिपकर सफर कर चुका है?
इस वायरल कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ऐसी घटनाएं इतिहास में वास्तव में हो चुकी हैं।
कई दशक पहले कुछ लोगों ने विमान का टिकट खरीदने में असमर्थ होने या किसी अन्य वजह से खुद को एयर कार्गो के बॉक्स में छिपाकर दूसरे देश तक पहुंचने की कोशिश की थी। इन घटनाओं में लोगों ने अपनी जान तक जोखिम में डाल दी थी।
सबसे चर्चित मामलों में ब्रिटेन के ब्रायन रॉबसन का नाम आता है। साल 1965 में ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले रॉबसन के पास ब्रिटेन वापस लौटने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसके बाद उन्होंने खुद को एक लकड़ी के बॉक्स में बंद करवाकर एयर कार्गो के जरिए ब्रिटेन भेजे जाने की कोशिश की।
लेकिन उनकी यात्रा बिल्कुल वैसी नहीं रही जैसी उन्होंने सोची थी। बॉक्स को लंदन पहुंचने के बजाय अमेरिका के लॉस एंजिलिस भेज दिया गया। रॉबसन को कई दिनों तक बॉक्स के अंदर ही रहना पड़ा।
लंबे समय तक बंद रहने के कारण उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी। बॉक्स के अंदर न तो आराम की पर्याप्त जगह थी और न ही सामान्य इंसानी यात्रा जैसी सुविधाएं।
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि खुद को कार्गो के रूप में विमान से भेजना कितना खतरनाक हो सकता है।
ऐसा करने वाला एक और शख्स भी पकड़ा गया था
साल 2003 में अमेरिका में चार्ल्स मैकिन्ले नाम के एक व्यक्ति ने भी इसी तरह का बेहद खतरनाक तरीका अपनाया था।
रिपोर्टों के मुताबिक उसने खुद को एक बड़े बॉक्स में छिपाया और उसे एयर कार्गो के तौर पर भेज दिया गया। बॉक्स न्यूयॉर्क से टेक्सास तक पहुंचा। बाद में जब बॉक्स उसके परिवार के घर पहुंचा और उसे खोला गया तो उसमें से व्यक्ति बाहर निकला।
इस घटना के बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।
मैकिन्ले के मामले में उसकी जान इसलिए बच गई क्योंकि जिस विमान में बॉक्स गया था, वहां कार्गो की परिस्थितियां अपेक्षाकृत नियंत्रित थीं। अगर बॉक्स किसी ऐसे हिस्से में चला जाता जहां तापमान और दबाव इंसान के लिए सुरक्षित नहीं होता, तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी।
1964 में भी हुआ था ऐसा कारनामा
ऐसी घटनाओं की सूची में ऑस्ट्रेलियाई एथलीट रेग स्पीयर्स का नाम भी मिलता है। साल 1964 में उन्होंने ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया लौटने के लिए खुद को एक बड़े लकड़ी के बॉक्स में पैक करवाया था।
उनका उद्देश्य विमान का सामान्य टिकट खरीदने के बजाय एयरफ्रेट का सहारा लेकर घर पहुंचना था। लेकिन इतनी लंबी यात्रा में उन्हें बेहद मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
बॉक्स में बंद रहना अपने आप में कठिन था और विमान से यात्रा के दौरान तापमान तथा अन्य परिस्थितियां भी इंसान के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
इन पुराने मामलों से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल कहानी की मूल अवधारणा पूरी तरह काल्पनिक नहीं है। लोग अतीत में वास्तव में खुद को कार्गो बॉक्स में भेजने की कोशिश कर चुके हैं।
लेकिन 17,020 किलोमीटर वाली कहानी का क्या?
यही सवाल इस वायरल पोस्ट को संदिग्ध बनाता है।
तस्वीर के साथ 17,020 किलोमीटर की दूरी का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस दूरी और बैंकॉक से बॉक्स में बंद होकर यात्रा करने वाले व्यक्ति की विश्वसनीय पुष्टि सामने नहीं आती।
वायरल पोस्ट में न तो यात्रा की स्पष्ट तारीख दी गई है, न एयरलाइन का आधिकारिक रिकॉर्ड, न कार्गो बुकिंग की जानकारी और न ही किसी एयरपोर्ट या पुलिस अधिकारी का बयान।
इसके अलावा तस्वीर में दिखाई देने वाला फ्लाइट नंबर भी दावे के साथ पूरी तरह मेल नहीं खाता।
इसलिए इस तस्वीर को देखकर यह कहना कि कोई व्यक्ति हाल ही में बैंकॉक से बॉक्स में बंद होकर 17,020 किलोमीटर दूर अपने घर पहुंच गया, फिलहाल सही नहीं माना जा सकता।
तस्वीर असली हो सकती है, कहानी जरूरी नहीं
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसा होता है कि किसी वास्तविक घटना की पुरानी तस्वीर को किसी नई घटना के साथ जोड़कर वायरल कर दिया जाता है।
तस्वीर में मौजूद व्यक्ति वास्तव में किसी पुराने मामले से जुड़ा हो सकता है। बॉक्स और एयरपोर्ट की तस्वीर भी किसी वास्तविक कार्गो शिपमेंट की हो सकती है। लेकिन इसके आधार पर उसके साथ जुड़ी पूरी कहानी भी सही है, यह जरूरी नहीं।
यही वजह है कि वायरल तस्वीरों के साथ लिखे गए दावों की अलग से जांच करना जरूरी होता है।
इस मामले में भी तस्वीर और उसके साथ किए गए दावे के बीच अंतर दिखाई देता है।
बॉक्स में छिपकर विमान से यात्रा करना क्यों है खतरनाक?
अगर कोई व्यक्ति वास्तव में खुद को कार्गो बॉक्स में बंद करके विमान से भेजने की कोशिश करता है, तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
विमान के सभी कार्गो हिस्से इंसानों के लिए रहने योग्य नहीं होते। कुछ हिस्सों में तापमान बहुत कम हो सकता है। ऑक्सीजन और दबाव की स्थिति भी सामान्य यात्री केबिन जैसी नहीं होती।
इसके अलावा सबसे बड़ा खतरा यह है कि बॉक्स को किस तरह रखा जाएगा, इसका व्यक्ति के पास कोई नियंत्रण नहीं होता। बॉक्स उलट सकता है, उस पर दूसरे भारी सामान रखे जा सकते हैं या वह कई घंटों तक ऐसी स्थिति में रह सकता है जहां बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं हो।
लंबी दूरी की यात्रा में पानी, भोजन और हवा की कमी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
इसलिए इसे किसी भी हालत में टिकट बचाने का सुरक्षित तरीका नहीं माना जा सकता।
वायरल कहानी में क्या सच और क्या संदिग्ध?
इस पूरे मामले को अगर अलग-अलग हिस्सों में देखें तो तस्वीर में दिखने वाली घटना और वायरल दावा दो अलग चीजें नजर आती हैं।
सच यह है कि:
लोगों द्वारा खुद को बॉक्स में छिपाकर एयर कार्गो के जरिए यात्रा करने के वास्तविक मामले इतिहास में सामने आ चुके हैं।
संदिग्ध यह है कि:
वायरल तस्वीर में दिखाई देने वाला व्यक्ति बैंकॉक से 17,020 किलोमीटर की यात्रा करके घर पहुंचा था।
इस दावे की विश्वसनीय और स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। तस्वीर पर दिखाई देने वाला THY2189 नंबर भी वायरल कहानी को लेकर सवाल पैदा करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल यह तस्वीर निश्चित रूप से चौंकाने वाली है। एक युवक का बॉक्स के अंदर बैठना और उसी तरह के बॉक्स का एयरपोर्ट पर दिखाई देना लोगों को कहानी पर विश्वास करने के लिए मजबूर करता है। लेकिन तस्वीर के आधार पर किए गए 17,020 किलोमीटर की यात्रा वाले दावे की पुष्टि नहीं होती।
इतिहास में ब्रायन रॉबसन, रेग स्पीयर्स और चार्ल्स मैकिन्ले जैसे मामलों में लोग सचमुच खुद को कार्गो बॉक्स में छिपाकर लंबी दूरी तय करने की कोशिश कर चुके हैं। इन घटनाओं में उन्हें बेहद खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ा था।
इसलिए वायरल पोस्ट को पुष्ट खबर के बजाय अपुष्ट दावा मानना ज्यादा उचित है। और सबसे जरूरी बात—किसी भी व्यक्ति को इस तरह खुद को बॉक्स में बंद करके विमान से भेजने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। टिकट बचाने की कोशिश जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।

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