जिस तरीके से लेते हैं कैनाबिस, वही बन सकता है लत की वजह? वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा
नई दिल्ली। कैनाबिस यानी भांग/मारिजुआना के सेवन को लेकर दुनिया भर में लंबे समय से बहस होती रही है। कुछ लोग इसे मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुछ जगहों पर इसके कुछ चिकित्सकीय उपयोग भी किए जाते हैं। लेकिन अब सामने आई नई रिसर्च ने कैनाबिस के सेवन के तरीके और उसके प्रभावों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कोई व्यक्ति कैनाबिस का सेवन करता है या नहीं, बल्कि वह किस तरीके से, कितनी बार और कितनी मात्रा में इसका सेवन करता है, यह भी उसके अनुभव और संभावित जोखिम को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैनाबिस के अलग-अलग सेवन तरीकों की तुलना की। अध्ययन में 215 युवा वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्होंने 21 दिनों तक अपने कैनाबिस सेवन और उससे जुड़े अनुभवों की जानकारी दी। शोधकर्ताओं ने बोन्ग, बाउल, वेपोराइजर और एडिबल जैसे अलग-अलग तरीकों से जुड़े अनुभवों का विश्लेषण किया।
सेवन का तरीका क्यों महत्वपूर्ण है?
कैनाबिस के प्रभाव केवल उसमें मौजूद THC की मात्रा पर निर्भर नहीं करते। शरीर में THC किस तरह पहुंचता है, कितनी तेजी से पहुंचता है और व्यक्ति कितनी मात्रा लेता है—ये सभी चीजें अनुभव को प्रभावित कर सकती हैं।
नई रिसर्च में पाया गया कि बोन्ग के इस्तेमाल के दौरान प्रतिभागियों ने बाउल के मुकाबले ज्यादा “अच्छे प्रभाव”, ज्यादा पसंद आने और दोबारा इस्तेमाल करने की इच्छा की रिपोर्ट की। वहीं वेपोराइजर के इस्तेमाल से बाउल की तुलना में महसूस होने वाला नशा कुछ कम बताया गया। एडिबल के इस्तेमाल में दोबारा लेने की इच्छा बाउल की तुलना में कम पाई गई।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ये निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भविष्य में कैनाबिस से जुड़े स्वास्थ्य संदेशों और नशे की रोकथाम की रणनीतियों में सेवन के तरीके को भी ध्यान में रखना चाहिए।
क्या ज्यादा अच्छा महसूस होना खतरे का संकेत है?
यहां रिसर्च का सबसे दिलचस्प पहलू सामने आता है। जिस तरीके से किसी व्यक्ति को अधिक सुखद या मजबूत अनुभव मिलता है, वह कुछ परिस्थितियों में दोबारा इस्तेमाल की इच्छा को भी प्रभावित कर सकता है।
अध्ययन में बोन्ग इस्तेमाल करने वाले प्रतिभागियों में बाउल की तुलना में अधिक “गुड इफेक्ट” और दोबारा कैनाबिस लेने की इच्छा दर्ज हुई। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह साबित नहीं किया कि बोन्ग का इस्तेमाल सीधे तौर पर लत पैदा करता है। यह अध्ययन तत्काल अनुभवों और सेवन के तरीकों के बीच संबंध देखता है, इसलिए इससे सीधे कारण और परिणाम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
यानी किसी खास तरीके से सेवन करने वाले हर व्यक्ति को लत लग जाएगी, ऐसा कहना गलत होगा। लेकिन सेवन का तरीका व्यक्ति के अनुभव और इस्तेमाल के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
असली खतरा बार-बार सेवन से
कैनाबिस को लेकर एक और महत्वपूर्ण 2026 की स्टडी ने उच्च आवृत्ति वाले सेवन और Cannabis Use Disorder (CUD) के बीच संबंध पर रोशनी डाली है।
इस अध्ययन में 40 से 60 वर्ष की उम्र के 5,454 अमेरिकी वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें वे लोग शामिल थे जिन्होंने पिछले 12 महीनों में कैनाबिस इस्तेमाल किया था। अध्ययन में पाया गया कि सभी कैनाबिस उपयोगकर्ताओं में करीब 23.9 प्रतिशत लोगों में किसी न किसी प्रकार के CUD लक्षण पाए गए, जबकि 9.4 प्रतिशत में मध्यम या गंभीर लक्षण थे।
सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर सामने आई जो लगभग रोजाना कैनाबिस का इस्तेमाल करते थे। अध्ययन के अनुसार, पिछले 30 दिनों में 20 या उससे अधिक बार कैनाबिस इस्तेमाल करने वालों में करीब 49.7 प्रतिशत लोगों में CUD के लक्षण पाए गए।
यह आंकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि केवल सेवन का तरीका ही नहीं, बल्कि सेवन की आवृत्ति भी जोखिम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मेडिकल इस्तेमाल भी पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं
नई रिसर्च में मेडिकल और गैर-मेडिकल कैनाबिस इस्तेमाल करने वालों के बीच भी अंतर देखा गया। अध्ययन में मेडिकल कैनाबिस उपयोगकर्ताओं में किसी भी CUD लक्षण की दर 33.8 प्रतिशत थी, जबकि गैर-मेडिकल उपयोगकर्ताओं में यह 22.5 प्रतिशत थी। हालांकि शोधकर्ताओं ने पाया कि जब सेवन की आवृत्ति को ध्यान में रखा गया तो मेडिकल और गैर-मेडिकल इस्तेमाल के बीच अधिकांश अंतर काफी हद तक समझ में आ गया।
इसका मतलब यह नहीं है कि मेडिकल इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति लत का शिकार होगा। बल्कि अध्ययन यह संकेत देता है कि बार-बार या बहुत अधिक सेवन जोखिम को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कारक है।
उम्र बढ़ने के साथ भी खतरे पर नजर जरूरी
मिडिल-एज यानी 40 से 60 वर्ष के लोगों पर हुई इस रिसर्च में उम्र से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आए। 55 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में मेडिकल कैनाबिस इस्तेमाल कुछ CUD परिणामों, खासकर टॉलरेंस और मध्यम से गंभीर लक्षणों के साथ जुड़ा पाया गया।
टॉलरेंस का मतलब है कि व्यक्ति को पहले जैसा प्रभाव महसूस करने के लिए समय के साथ अधिक मात्रा की जरूरत महसूस होने लगे। यह नशे से जुड़ी समस्याओं का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
रोजाना सेवन करने वालों में बढ़ता जोखिम
कैनाबिस की मात्रा और CUD को लेकर एक अन्य बड़े अध्ययन में रोजाना इस्तेमाल करने वाले 4,134 वयस्कों का विश्लेषण किया गया था। इसमें रोजाना THC की अधिक मात्रा लेने वालों में CUD के ज्यादा लक्षण और अधिक गंभीर CUD की संभावना देखी गई। अध्ययन में शामिल दैनिक उपयोगकर्ताओं में 65 प्रतिशत लोग CUD के मानदंडों पर खरे उतरे थे।
हालांकि यह आंकड़ा सामान्य आबादी के सभी कैनाबिस उपयोगकर्ताओं पर लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि अध्ययन में पहले से रोजाना सेवन करने वाले लोग शामिल थे। फिर भी यह शोध इस बात को मजबूत करता है कि जितना अधिक और नियमित सेवन, उतना अधिक जोखिम हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता
कैनाबिस के लगातार और भारी सेवन को लेकर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी सामने आती रही हैं। 2026 में Penn State के विशेषज्ञों ने भी बताया कि नियमित या भारी कैनाबिस सेवन स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा कर सकता है।
विशेष रूप से कम उम्र में शुरू होने वाला लगातार सेवन चिंता का विषय माना जाता है। हालांकि मानसिक स्वास्थ्य पर कैनाबिस के प्रभावों को समझने के लिए व्यक्ति की उम्र, THC की ताकत, सेवन की मात्रा, आनुवंशिक जोखिम और पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य स्थिति जैसे कई कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है।
इसलिए किसी एक अध्ययन के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि कैनाबिस हर व्यक्ति में एक जैसा मानसिक या शारीरिक प्रभाव पैदा करेगा।
क्या एडिबल ज्यादा सुरक्षित हैं?
कैनाबिस के अलग-अलग सेवन तरीकों को लेकर अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या धूम्रपान की तुलना में एडिबल पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसका जवाब इतना सरल नहीं है।
एडिबल में धुआं शरीर में नहीं जाता, लेकिन इसका असर देर से शुरू हो सकता है। इससे कुछ लोग जल्दी प्रभाव महसूस न होने के कारण अतिरिक्त मात्रा ले सकते हैं। वहीं नई रिसर्च में एडिबल के इस्तेमाल के दौरान दोबारा लेने की इच्छा बाउल की तुलना में कम पाई गई।
इसका अर्थ यह नहीं है कि एडिबल को पूरी तरह जोखिम-मुक्त माना जा सकता है। अलग-अलग उत्पादों में THC की मात्रा अलग हो सकती है और व्यक्ति की प्रतिक्रिया भी अलग हो सकती है।
विशेषज्ञों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिसर्च?
नई रिसर्च का महत्व इसलिए भी है क्योंकि कैनाबिस के इस्तेमाल को अक्सर केवल “इस्तेमाल करता है या नहीं करता” के रूप में देखा जाता है। लेकिन वास्तविकता में सेवन के कई तरीके और पैटर्न मौजूद हैं।
किसी व्यक्ति का सप्ताह में कभी-कभार सेवन और किसी दूसरे व्यक्ति का लगभग रोजाना सेवन एक जैसा नहीं माना जा सकता। इसी तरह अलग-अलग उत्पादों में THC की ताकत भी काफी अलग हो सकती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, भविष्य की रोकथाम और उपचार रणनीतियों में सेवन के तरीके और उससे मिलने वाले तत्काल अनुभवों को भी शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि कैनाबिस के बिना वह सामान्य महसूस नहीं कर पाता, बार-बार सेवन करने की इच्छा होती है, पहले की तुलना में ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है, सेवन कम करने की कोशिश असफल रहती है या इसकी वजह से काम, पढ़ाई, परिवार और सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगा है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को योग्य स्वास्थ्य पेशेवर या नशा-मुक्ति विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
नई रिसर्च ने कैनाबिस को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने रखा है—क्या सिर्फ यह जानना पर्याप्त है कि कोई व्यक्ति कैनाबिस लेता है, या यह भी देखना जरूरी है कि वह इसे कैसे और कितनी बार लेता है?
अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि सेवन का तरीका व्यक्ति के तत्काल अनुभव और दोबारा इस्तेमाल की इच्छा को प्रभावित कर सकता है। वहीं दूसरी 2026 की रिसर्च ने दिखाया कि बार-बार और उच्च आवृत्ति वाला सेवन Cannabis Use Disorder के जोखिम से मजबूत रूप से जुड़ा है।
हालांकि इन अध्ययनों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी एक खास तरीके से कैनाबिस लेने से निश्चित रूप से लत लगती है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि बार-बार सेवन, बढ़ती मात्रा और नियंत्रण खोने जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए संदेश यही है कि कैनाबिस के जोखिम का आकलन करते समय व्यक्ति की उम्र, सेवन की आवृत्ति, THC की मात्रा, इस्तेमाल का तरीका और स्वास्थ्य स्थिति—सभी पहलुओं को साथ में देखना जरूरी है।

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