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शेयर बाजार में फिर मचा हड़कंप! तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई टेंशन, अब आगे क्या होगा?



नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत बेहद सतर्क माहौल में हुई। एक दिन पहले बाजार में जोरदार रिकवरी देखने के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि शुक्रवार को भी तेजी जारी रह सकती है, लेकिन महंगे कच्चे तेल और वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ते दबाव ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty लगभग फ्लैट नजर आए। निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर टिकी हुई है।

शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे Sensex लगभग 46 अंक की बढ़त के साथ 77,584.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि Nifty करीब 12 अंक चढ़कर 24,243.65 पर पहुंचा था। बाजार में मामूली बढ़त के बावजूद निवेशकों का रुख काफी सावधान रहा। इससे पहले गुरुवार को बाजार में तेजी आई थी और Nifty ने लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था।

आखिर बाजार पर क्यों छाया दबाव?

शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। Reuters के मुताबिक Brent crude शुक्रवार को करीब 93.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था और लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त की ओर बढ़ रहा था।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ सकता है। तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, महंगाई की चिंता पैदा हो सकती है और कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है।

यही कारण है कि निवेशक तेल की कीमतों में हर बड़े बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं। अगर कच्चा तेल और महंगा होता है तो बाजार में जोखिम बढ़ सकता है, जबकि तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिल सकती है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाई टेंशन

भारतीय शेयर बाजार के लिए दूसरी बड़ी चिंता वैश्विक बॉन्ड बाजार से जुड़ी है। अमेरिका में लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई है। Reuters के अनुसार अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 4.71 फीसदी, जबकि 30-वर्षीय यील्ड करीब 5.25 फीसदी तक पहुंच गई।

जब अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड बढ़ती है तो दुनिया भर के निवेशकों के लिए सुरक्षित अमेरिकी संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर पड़ सकता है, क्योंकि निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर सकते हैं।

भारत जैसे उभरते बाजार के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियां शेयर बाजार की दिशा पर बड़ा प्रभाव डालती हैं। यदि वैश्विक ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशकों की खरीदारी कमजोर पड़ सकती है।

एक दिन पहले मिली थी बाजार को राहत

शुक्रवार के कारोबार से पहले गुरुवार को भारतीय बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली थी। Nifty ने लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद राहत की सांस ली थी। बाजार में यह तेजी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी और कुछ सेक्टरों में खरीदारी के कारण आई थी।

लेकिन शुक्रवार को निवेशकों ने तेजी के बजाय सावधानी बरतना पसंद किया। इसकी वजह यह है कि वैश्विक जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं। तेल की कीमतें ऊंची हैं, बॉन्ड यील्ड में दबाव है और पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

यानी एक दिन की तेजी के बावजूद निवेशक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि बाजार में अब लगातार तेजी का दौर शुरू हो गया है।

पूरे सप्ताह दबाव में रहे Sensex और Nifty

शुक्रवार की मामूली बढ़त के बावजूद इस सप्ताह बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा। Reuters के मुताबिक शुक्रवार तक Nifty 50 और Sensex दोनों ही सप्ताह के दौरान करीब 0.6 फीसदी नीचे थे।

इससे पहले 19 अगस्त को Nifty ने लगातार सात सत्रों की गिरावट दर्ज की थी। उस दौरान इंडेक्स करीब 2.1 फीसदी नीचे आ गया था। Sensex भी पिछले सात में से छह कारोबारी सत्रों में गिरा था और लगभग 2.1 फीसदी कमजोर हुआ था।

लगातार गिरावट के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का बढ़ना रहा। इससे निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी।

IT शेयरों में भी दबाव

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सभी सेक्टर एक दिशा में नहीं चले। Reuters के अनुसार 16 प्रमुख सेक्टरों में से करीब आठ में गिरावट दर्ज की गई। IT सेक्टर लगभग 0.5 फीसदी नीचे रहा, जबकि छोटे शेयरों में करीब 0.7 फीसदी की बढ़त और मिडकैप शेयरों में लगभग 0.2 फीसदी की कमजोरी देखी गई।

IT कंपनियों पर वैश्विक बाजारों की स्थिति का असर पड़ता है। अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर टेक कंपनियों के कारोबार और भविष्य की कमाई को लेकर निवेशक सतर्क हो सकते हैं।

इसके अलावा ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी टेक शेयरों के वैल्यूएशन पर दबाव डाल सकती है। यही कारण है कि बाजार में IT शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।

कुछ शेयरों ने बाजार की सुस्ती को किया नजरअंदाज

जहां व्यापक बाजार में सावधानी थी, वहीं कुछ कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। इनमें Welspun Corp सबसे प्रमुख रहा। कंपनी का शेयर शुक्रवार को करीब 11.8 फीसदी तक उछल गया। कंपनी को अमेरिका स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधा से करीब 1.8 अरब डॉलर का ऑर्डर मिलने की खबर के बाद शेयर में तेजी आई।

इसी तरह Urban Company के शेयर में भी करीब 4.4 फीसदी की तेजी देखी गई। कंपनी को लेकर UBS की सकारात्मक राय के बाद निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।

गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। IIFL Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसे शेयरों में करीब 2 से 8 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई।

इससे पता चलता है कि बाजार पूरी तरह बिकवाली के मूड में नहीं है। निवेशक चुनिंदा कंपनियों में मजबूत कारोबारी संभावनाएं देखकर खरीदारी कर रहे हैं।

रुपये पर भी बना हुआ है दबाव

शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये की चाल पर भी निवेशकों की नजर है। शुक्रवार को भारतीय रुपया करीब 95.70 रुपये प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहा। हालांकि बढ़ते कच्चे तेल के दाम और आयातकों की डॉलर मांग रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप ने रुपये को ज्यादा कमजोर होने से रोकने में मदद की है। Reuters के अनुसार RBI पिछले करीब दो सप्ताह से लगातार हस्तक्षेप कर रहा है।

लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो रुपये के लिए चुनौती बढ़ सकती है। तेल महंगा होने से भारत का डॉलर में आयात बिल बढ़ता है और इससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ सकती है।

निवेशकों के लिए आगे की राह आसान नहीं

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए शेयर बाजार में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। निवेशकों के लिए केवल घरेलू कंपनियों के नतीजे ही महत्वपूर्ण नहीं होंगे, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करेंगे।

सबसे पहले नजर पश्चिम एशिया के तनाव पर रहेगी। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई को लेकर चिंता घटती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है। इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है।

दूसरी ओर अगर तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें 90-95 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण रहेगी। अगर यील्ड में लगातार तेजी जारी रहती है तो वैश्विक निवेशकों के लिए उभरते बाजारों में निवेश कम आकर्षक हो सकता है।

बाजार में अब किस बात का इंतजार?

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गुरुवार की रिकवरी सिर्फ एक अस्थायी राहत थी या बाजार अब फिर से मजबूती हासिल कर सकता है।

शुक्रवार की शुरुआत से यह साफ है कि निवेशक जल्दबाजी में बड़ा दांव लगाने से बच रहे हैं। Nifty और Sensex की मामूली बढ़त के बावजूद बाजार की धारणा पूरी तरह सकारात्मक नहीं हुई है। ऊंचा कच्चा तेल, बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया का तनाव निवेशकों को लगातार सावधान रहने के लिए मजबूर कर रहा है।

हालांकि, चुनिंदा कंपनियों के मजबूत ऑर्डर, घरेलू मांग और कुछ सेक्टरों में खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है। इसलिए आने वाले कारोबारी सत्रों में स्टॉक-विशिष्ट गतिविधियां ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, 21 अगस्त 2026 का भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर बड़े फैसले के मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है। एक तरफ गुरुवार की रिकवरी ने उम्मीद जगाई है, तो दूसरी तरफ महंगा तेल और वैश्विक बॉन्ड बाजार की चिंता तेजी के रास्ते में बड़ी बाधा बनी हुई है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं, वैश्विक यील्ड में क्या बदलाव आता है और पश्चिम एशिया से आने वाली अगली बड़ी खबर बाजार की दिशा को किस तरफ मोड़ती है।

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