बगीचे में मिला 7 महीने की गर्भवती युवती का शव… दो प्रेमी गिरफ्तार, अब DNA खोलेगा सबसे बड़ा राज!
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के पतारा क्षेत्र से सामने आया एक मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां 25 वर्षीय गर्भवती युवती रेनू सोनकर का शव एक बगीचे में मिलने के बाद पुलिस जांच में उसके दो पुरुषों से संबंध होने की बात सामने आई। पुलिस ने मामले में दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें एक की उम्र 28 वर्ष है, जबकि दूसरा आरोपित 56 वर्षीय गोले पांडेय बताया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि युवती कई महीने की गर्भवती थी और उसकी मौत से पहले दोनों आरोपितों से उसकी बातचीत हुई थी।
पुलिस ने दोनों आरोपितों के डीएनए सैंपल भी लिए हैं। पोस्टमार्टम के दौरान गर्भस्थ शिशु से संबंधित नमूने भी सुरक्षित किए गए थे। अब डीएनए जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि युवती के गर्भ में पल रहे बच्चे का जैविक पिता कौन था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामले की कई अहम कड़ियां साफ होने की उम्मीद है।
घटना के बाद पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल बातचीत और आरोपितों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पूछताछ के दौरान 56 वर्षीय गोले पांडेय ने पुलिस को जो जानकारी दी, उसने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया।
बगीचे में मिला था गर्भवती युवती का शव
मामला पतारा क्षेत्र का है। राजेंद्र सोनकर की 25 वर्षीय बेटी रेनू सोनकर का शव तिलसड़ा रोड पर शराब ठेके से करीब 500 मीटर दूर स्थित एक बगीचे में मिला था। गुरुवार सुबह शव मिलने की जानकारी इलाके में फैली तो मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
पुलिस को सूचना दी गई और टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया। शुरुआती जांच में युवती की पहचान रेनू के रूप में हुई। शव मिलने की परिस्थितियों ने पुलिस को कई सवालों के जवाब तलाशने पर मजबूर कर दिया।
परिवार की ओर से बताया गया कि रेनू अविवाहित थी और वह गर्भवती थी। पोस्टमार्टम के बाद उसकी गर्भावस्था की पुष्टि हुई। पुलिस ने इसके बाद उसके मोबाइल फोन और संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।
शव की एक और बात ने लोगों का ध्यान खींचा। रेनू की मांग में सिंदूर था, माथे पर बिंदी लगी थी और पैरों में बिछिया थीं। परिवार के मुताबिक उसकी शादी नहीं हुई थी। ऐसे में पुलिस ने यह भी जानने की कोशिश की कि मौत से पहले उसके साथ कौन था और उसे इस तरह तैयार क्यों किया गया था।
सीडीआर से सामने आए दो नाम
जांच के दौरान पुलिस ने रेनू के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाली। इसी दौरान दो ऐसे नाम सामने आए, जिनसे उसकी लगातार बातचीत होती थी।
इनमें पहला नाम फतेहपुर के जहानाबाद थाना क्षेत्र के नरैनी गांव निवासी 28 वर्षीय प्रांजुल पाल का था। दूसरा नाम पतारा निवासी 56 वर्षीय गोले पांडेय का सामने आया।
पुलिस के मुताबिक, घटना से एक रात पहले बुधवार को भी रेनू की दोनों से फोन पर बातचीत हुई थी। यही बात जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। पुलिस ने पहले प्रांजुल को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया।
प्रांजुल ने पुलिस को बताया कि वह रेनू के संपर्क में करीब दो वर्षों से था। उसके अनुसार, उसकी पहचान रेनू से एक परिचित के माध्यम से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच फोन पर बातचीत शुरू हुई और कई बार मुलाकात भी हुई।
अस्पताल जाने के लिए मांगे थे रुपये
पूछताछ में प्रांजुल ने पुलिस को बताया कि बुधवार रात रेनू ने उसे फोन किया था। उसने अस्पताल जाने की बात कही और रुपये की जरूरत बताई थी।
इसी बीच पुलिस की जांच गोले पांडेय तक पहुंची। गोले ने पूछताछ में बताया कि रेनू उसे लगातार फोन कर रही थी। उसने दवा खाने की जानकारी दी थी। इसके बाद वह रेनू के पास पहुंचा।
पुलिस के अनुसार, गोले के बयान में सामने आया कि रेनू की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे पहले एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच के दौरान कथित तौर पर बताया गया कि गर्भस्थ शिशु की स्थिति सामान्य नहीं थी और बच्चा उल्टा था। इसके बाद रेनू को कानपुर के एलएलआर अस्पताल ले जाया गया।
गोले के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने के बाद रेनू की मौत हो गई।
मौत के बाद रात में शव बगीचे में ले जाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, गोले ने पूछताछ में बताया कि रेनू की मौत के बाद वह शव लेकर पतारा आया। कथित तौर पर उसने एंबुलेंस से शव को बगीचे तक पहुंचाया और वहां उतार दिया। इसके बाद एंबुलेंस वापस चली गई और वह डर के कारण मौके से निकल गया।
अगली सुबह उसी बगीचे में रेनू का शव मिला।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि रेनू की मौत वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई। क्या उसकी मौत किसी दवा के सेवन से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था, यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
अस्पताल ले जाने से पहले किया गया था श्रृंगार
पुलिस पूछताछ में गोले ने कथित तौर पर बताया कि रेनू को अस्पताल ले जाने से पहले उसके माथे पर बिंदी लगाई गई, मांग में सिंदूर भरा गया और पैरों में बिछिया पहनाई गई।
बताया गया कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि अस्पताल में उसकी गर्भावस्था को लेकर किसी तरह का संदेह न हो और उसे विवाहित महिला के रूप में पेश किया जा सके। पुलिस के अनुसार, गोले ने अस्पताल में रेनू को अपनी बेटी बताने की कोशिश की थी।
यह तथ्य सामने आने के बाद जांचकर्ताओं के सामने कई नए सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर रेनू को अस्पताल ले जाते समय उसकी पहचान और वैवाहिक स्थिति छिपाने की जरूरत क्यों महसूस हुई।
गोले से लंबे समय से संबंध होने की बात
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गोले पांडेय का रेनू से काफी पुराना संपर्क था। जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच करीब छह वर्षों से संबंध होने की बात सामने आई है।
गोले की पत्नी का निधन हो चुका है और उसकी बेटियों की शादी हो चुकी है। बताया गया कि गोले एक हाथ से दिव्यांग है। रेनू के पिता राजेंद्र उसके यहां बटाईदार के रूप में काम करते थे। इसी परिचय के जरिए गोले और रेनू के बीच संपर्क बढ़ा।
पुलिस के मुताबिक, गोले ने रेनू और उसके परिवार पर काफी रुपये खर्च किए थे। उसने कथित तौर पर रेनू को एक प्लाट और स्कूटी भी दिलाई थी। इसके अलावा नौकरी लगवाने और रहने के लिए कमरा उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई है।
रेनू प्रांजुल से शादी करना चाहती थी?
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, उम्र में बड़ा होने के कारण रेनू गोले के बजाय 28 वर्षीय प्रांजुल से शादी करना चाहती थी। इसी दौरान उसकी प्रांजुल से बातचीत और मुलाकातें बढ़ती गईं।
हालांकि, यह भी आरोप सामने आया है कि दोनों पुरुषों के साथ उसके संबंधों के बावजूद जब वह गर्भवती हुई तो उसे अपेक्षित मदद नहीं मिली। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गर्भावस्था के दौरान रेनू किन परिस्थितियों में रह रही थी और उसे किन लोगों से सहायता मिली या नहीं मिली।
करीब एक महीने तक भटकने की बात
जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, रेनू गर्भावस्था के दौरान बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रही थी। बताया गया कि परिवार से अलग होने के बाद वह करीब एक महीने तक इधर-उधर रहने को मजबूर थी।
उसके पास पर्याप्त रुपये भी नहीं थे। कथित तौर पर वह दोनों पुरुषों को फोन करके आर्थिक मदद मांग रही थी। बताया गया कि उसने कभी झकरकटी बस स्टैंड तो कभी कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर रात बिताई।
यदि जांच में ये बातें सही साबित होती हैं तो यह मामला केवल एक युवती की संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी सवाल उठेगा कि गर्भावस्था के दौरान उसे समय पर सहायता क्यों नहीं मिली।
किससे हुई थी गर्भावस्था? डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल अभी भी अनसुलझा है कि रेनू के गर्भ में पल रहे बच्चे का पिता कौन था।
पुलिस ने इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए दोनों आरोपितों के डीएनए सैंपल लिए हैं। पोस्टमार्टम के दौरान गर्भस्थ शिशु से संबंधित डीएनए नमूने भी लिए गए थे। अब फोरेंसिक जांच के बाद दोनों नमूनों का मिलान किया जाएगा।
डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि गर्भावस्था के पीछे कौन जिम्मेदार था। हालांकि, बच्चे के जैविक पिता की पहचान से अपने आप रेनू की मौत का कारण साबित नहीं होगा। मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस को अलग से सभी साक्ष्यों की जांच करनी होगी।
दोनों आरोपित जेल भेजे गए
पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ हत्या से संबंधित मामला दर्ज किया है। प्रांजुल पाल की गिरफ्तारी पहले की गई थी, जबकि जांच आगे बढ़ने के बाद गोले पांडेय को भी गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की कानूनी और फोरेंसिक जांच में जुटी है। मोबाइल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डीएनए जांच और आरोपितों के बयानों को मिलाकर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर तैयार की जा रही है।
रेनू की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर उसकी तबीयत कब बिगड़ी, उसने कौन-सी दवा ली थी, अस्पताल पहुंचने के बाद उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके शव को बगीचे तक क्यों ले जाया गया? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
सबसे अहम कड़ी अब डीएनए रिपोर्ट मानी जा रही है। इसके साथ ही पुलिस के सामने यह भी चुनौती है कि आरोपितों के बयानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जाए और यह पता लगाया जाए कि 25 वर्षीय गर्भवती युवती की मौत के पीछे आखिर पूरा सच क्या था।

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