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रात में खर्राटे लेकर सोते हैं तो सावधान! नींद में चुपचाप रुक सकती है सांस, सुबह तक शरीर पर पड़ सकता है बड़ा असर



रात में सोते समय खर्राटे लेना बहुत से लोगों के लिए सामान्य बात मानी जाती है। कई घरों में किसी सदस्य के खर्राटों को लेकर मजाक भी किया जाता है और इसे गहरी नींद का संकेत समझ लिया जाता है। लेकिन हर बार खर्राटे सामान्य नहीं होते। कुछ लोगों में तेज और लगातार खर्राटे लेना ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी नींद से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

स्लीप एपनिया में सोते समय ऊपरी सांस की नली बार-बार संकरी या बंद हो सकती है, जिससे कुछ समय के लिए सांस रुक जाती है। इसके बाद शरीर नींद से हल्का-सा जागकर सांस लेने की प्रक्रिया फिर शुरू करता है। यह प्रक्रिया रात में कई बार दोहराई जा सकती है। कई बार व्यक्ति को खुद इसकी जानकारी नहीं होती और उसके परिवार का कोई सदस्य सबसे पहले इस समस्या को नोटिस करता है।

अगर इसका समय पर पता न चले और उपचार न हो, तो नींद की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ दिनभर थकान और एकाग्रता की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक बिना इलाज के रहने पर यह हृदय और रक्तचाप से जुड़ी समस्याओं के जोखिम से भी संबंधित हो सकता है।

आखिर क्या होता है स्लीप एपनिया?

स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती और फिर शुरू होती है। सबसे आम प्रकार ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया है। इसमें गले और ऊपरी सांस की नली के आसपास के ऊतक सोते समय ज्यादा ढीले पड़ जाते हैं और सांस के रास्ते में रुकावट पैदा हो सकती है।

इस दौरान शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है। मस्तिष्क सांस लेने के लिए व्यक्ति को बहुत थोड़ी देर के लिए जगाता है। ज्यादातर मामलों में व्यक्ति को इन छोटे-छोटे जागने की घटनाओं का पता नहीं चलता, लेकिन इससे नींद बार-बार टूटती रहती है।

नतीजा यह होता है कि व्यक्ति पूरी रात बिस्तर पर रहने के बावजूद सुबह उठकर तरोताजा महसूस नहीं करता।

खर्राटे कब बन जाते हैं चेतावनी का संकेत?

हर खर्राटा स्लीप एपनिया नहीं होता। कई लोग बिना किसी गंभीर बीमारी के भी खर्राटे लेते हैं। नाक बंद होना, सोने की स्थिति, वजन बढ़ना, शराब का सेवन या गले की संरचना जैसी कई वजहों से खर्राटे आ सकते हैं।

लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज हों और उनके बीच कुछ सेकंड के लिए सांस रुकती हुई दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

परिवार का कोई सदस्य यह नोटिस कर सकता है कि सोते समय व्यक्ति पहले जोर से खर्राटे लेता है, फिर अचानक कुछ समय के लिए शांत हो जाता है और उसके बाद जोर से सांस लेने या हांफने की आवाज आती है। यह पैटर्न स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है।

नींद में सांस रुकने का पता खुद क्यों नहीं चलता?

स्लीप एपनिया की एक बड़ी समस्या यह है कि मरीज को अक्सर इसकी जानकारी नहीं होती। नींद में सांस रुकने की घटना कुछ सेकंड के लिए होती है और मस्तिष्क व्यक्ति को बहुत हल्के स्तर पर जगा देता है।

इस प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति को यह महसूस भी नहीं होता कि उसकी नींद टूट रही है। लेकिन अगर ऐसा पूरी रात बार-बार होता रहे, तो नींद की प्राकृतिक गुणवत्ता खराब हो जाती है।

इसी वजह से कई लोग सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस करते हैं और उन्हें लगता है कि शायद उन्होंने पर्याप्त नींद नहीं ली।

सुबह उठते ही सिरदर्द भी हो सकता है संकेत

स्लीप एपनिया से जूझ रहे कुछ लोगों को सुबह उठने के बाद सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। रात में सांस लेने में बार-बार रुकावट होने से शरीर में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में बदलाव हो सकता है, जो कुछ लोगों में सुबह के सिरदर्द से जुड़ा हो सकता है।

हालांकि सुबह का सिरदर्द कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसलिए केवल सिरदर्द को देखकर स्लीप एपनिया का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

अगर इसके साथ तेज खर्राटे, नींद में सांस रुकना और दिनभर अत्यधिक नींद जैसे अन्य लक्षण भी मौजूद हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित हो सकता है।

दिनभर नींद और थकान को न समझें सामान्य

स्लीप एपनिया का असर केवल रात तक सीमित नहीं रहता। रात में नींद बार-बार बाधित होने के कारण दिन में अत्यधिक नींद आ सकती है।

व्यक्ति काम करते समय, टीवी देखते हुए, पढ़ते समय या यात्रा के दौरान भी झपकी लेने लग सकता है। कुछ मामलों में गाड़ी चलाते समय नींद आना बेहद खतरनाक हो सकता है।

अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त समय सोने के बावजूद लगातार दिनभर थका हुआ और नींद में महसूस करता है, तो इसके पीछे नींद से जुड़ी समस्या हो सकती है।

चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी

नींद पूरी और गुणवत्तापूर्ण न होने का असर दिमाग के कामकाज पर भी पड़ सकता है। स्लीप एपनिया वाले कुछ लोगों में ध्यान केंद्रित करने, याददाश्त और मूड से जुड़ी परेशानियां देखी जा सकती हैं।

व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो सकता है या काम में ध्यान लगाने में परेशानी महसूस कर सकता है। बच्चों और किशोरों में नींद से जुड़ी समस्या का असर व्यवहार और पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

इसलिए किसी व्यक्ति के व्यवहार में लंबे समय से बदलाव हो और साथ में रात की नींद भी खराब हो, तो इसे केवल तनाव या व्यस्तता मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।

किन लोगों में जोखिम ज्यादा हो सकता है?

स्लीप एपनिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है। अधिक वजन या मोटापा इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है।

इसके अलावा गर्दन की संरचना, उम्र बढ़ना, परिवार में स्लीप एपनिया का इतिहास और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

बच्चों में बढ़े हुए टॉन्सिल या एडेनॉइड भी सांस की नली में रुकावट का कारण बन सकते हैं।

हालांकि दुबले या सामान्य वजन वाले लोगों को भी स्लीप एपनिया हो सकता है। इसलिए केवल वजन के आधार पर इस बीमारी को खारिज नहीं किया जा सकता।

क्या शराब और धूम्रपान से समस्या बढ़ सकती है?

शराब गले की मांसपेशियों को अधिक ढीला कर सकती है और कुछ लोगों में नींद के दौरान सांस की रुकावट बढ़ा सकती है। इसलिए स्लीप एपनिया वाले लोगों में शराब का सेवन समस्या को प्रभावित कर सकता है।

धूम्रपान भी श्वसन तंत्र के लिए नुकसानदायक है और ऊपरी सांस की नली में सूजन जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।

इसलिए अगर किसी व्यक्ति को तेज खर्राटे और स्लीप एपनिया के लक्षण हैं, तो धूम्रपान से दूरी और शराब का सेवन सीमित करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद कदम हो सकता है।

स्लीप एपनिया का शरीर पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया लंबे समय तक बिना इलाज के रहता है, तो यह स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। बार-बार सांस रुकने और नींद में बाधा आने से शरीर पर लगातार दबाव पड़ सकता है।

यह स्थिति उच्च रक्तचाप के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी है। कुछ लोगों में हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं के जोखिम के साथ भी इसका संबंध पाया गया है।

इसके अलावा दिन में अत्यधिक नींद के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है, खासकर अगर व्यक्ति नींद में गाड़ी चलाता है।

इसलिए तेज खर्राटों को हमेशा मजाक के रूप में लेना सही नहीं है।

डॉक्टर किस तरह जांच करते हैं?

अगर डॉक्टर को स्लीप एपनिया का संदेह होता है, तो वह मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी यानी नींद की जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।

कुछ मामलों में यह जांच घर पर इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से की जा सकती है, जबकि अन्य मामलों में विशेष स्लीप सेंटर में रातभर निगरानी की जरूरत हो सकती है।

जांच के दौरान सांस लेने का पैटर्न, ऑक्सीजन स्तर और नींद से संबंधित कई अन्य संकेतों को रिकॉर्ड किया जा सकता है। इसके आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि स्लीप एपनिया मौजूद है या नहीं और उसकी गंभीरता कितनी है।

इलाज संभव है, लेकिन सही निदान जरूरी

स्लीप एपनिया का इलाज व्यक्ति की स्थिति और बीमारी की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। वजन अधिक होने पर वजन कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि, सोने की स्थिति में बदलाव और शराब से बचने जैसे उपाय कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकते हैं।

मध्यम या गंभीर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में डॉक्टर CPAP जैसी मशीन की सलाह दे सकते हैं। यह उपकरण नींद के दौरान सांस की नली को खुला रखने के लिए लगातार हवा का दबाव देता है।

कुछ लोगों में ओरल उपकरण या अन्य उपचार विकल्प भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर अन्य चिकित्सा विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

खर्राटे आएं तो तुरंत घबराएं नहीं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर खर्राटा बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज और लगातार हैं, सोते समय सांस रुकने की घटना दिखाई देती है, व्यक्ति रात में हांफकर उठता है या दिन में अत्यधिक नींद आती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

स्लीप एपनिया का समय पर पता लगने से उचित उपचार शुरू किया जा सकता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है

रात में आने वाले खर्राटों को हमेशा सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कुछ मामलों में यह शरीर का ऐसा संकेत हो सकता है कि नींद के दौरान सांस लेने की प्रक्रिया बार-बार बाधित हो रही है।

तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकना, हांफना, सुबह सिरदर्द, दिनभर नींद और लगातार थकान जैसे संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। हालांकि इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए खुद से बीमारी का निदान करने के बजाय डॉक्टर से सलाह और जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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