जिम में पसीना बहाने से पहले सावधान! एक गलती पड़ सकती है भारी, एक्सरसाइज करते समय इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
नई दिल्ली: एक्सरसाइज शरीर को फिट और सक्रिय रखने के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इसे सही तरीके और अपनी क्षमता के अनुसार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। खासकर जो लोग लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं, अगर वे अचानक बहुत तेज दौड़ना, भारी वजन उठाना या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट शुरू कर देते हैं तो शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ सकता है।
आजकल तेजी से वजन घटाने और फिट दिखने की चाह में लोग कई बार अपनी क्षमता से ज्यादा मेहनत करने लगते हैं। सोशल मीडिया पर कठिन वर्कआउट देखकर उसे बिना तैयारी के अपनाना भी जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए फिटनेस की शुरुआत धीरे-धीरे करना और शरीर को पर्याप्त समय देना जरूरी है।
अचानक ज्यादा मेहनत करने से बचें
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से शारीरिक गतिविधि से दूर है और अचानक बहुत तेज दौड़ना या भारी वजन उठाना शुरू कर देता है तो उसके शरीर को इस अतिरिक्त दबाव के अनुकूल होने में समय लग सकता है। कठिन एक्सरसाइज के दौरान दिल की धड़कन और सांस लेने की गति बढ़ती है।
इसी तरह अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाने या गलत तकनीक अपनाने से मांसपेशियों और जोड़ों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसलिए शुरुआत हल्की एक्सरसाइज और वार्म-अप से करनी चाहिए। जब शरीर गतिविधि का आदी होने लगे, तभी धीरे-धीरे वर्कआउट की तीव्रता बढ़ानी चाहिए।
पहली बार जिम जाने वाले व्यक्ति को पहले दिन ही भारी वजन उठाने की जरूरत नहीं है। तेज चाल से चलना, हल्की साइकिलिंग और आसान एरोबिक गतिविधियां शुरुआत के लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं।
फिटनेस में जल्दबाजी क्यों पड़ सकती है भारी?
किसी भी व्यक्ति की फिटनेस क्षमता एक जैसी नहीं होती। जो व्यक्ति लंबे समय से रोजाना व्यायाम करता है, उसका शरीर कठिन गतिविधियों के लिए ज्यादा तैयार हो सकता है। इसके विपरीत लंबे समय से निष्क्रिय व्यक्ति के लिए वही गतिविधि काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
यही वजह है कि किसी दूसरे व्यक्ति का वर्कआउट देखकर उसे तुरंत कॉपी करना सही तरीका नहीं है।
फिटनेस का लक्ष्य धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाना होना चाहिए। पहले नियमितता पर ध्यान दें और बाद में वर्कआउट का समय तथा तीव्रता बढ़ाएं।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें नया और कठिन वर्कआउट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
इसके अलावा लंबे समय से बिल्कुल एक्सरसाइज न करने वाले लोगों और अधिक उम्र के व्यक्तियों को भी अपनी क्षमता के अनुसार शुरुआत करनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है तो डॉक्टर उसकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह बता सकते हैं कि किस तरह की एक्सरसाइज और कितनी तीव्रता उसके लिए उपयुक्त हो सकती है।
वार्म-अप को न करें नजरअंदाज
वर्कआउट शुरू करने से पहले कुछ मिनट वार्म-अप करना जरूरी है। इससे शरीर को धीरे-धीरे गतिविधि के लिए तैयार करने में मदद मिलती है।
वार्म-अप में हल्की चाल से चलना, हाथ-पैरों की आसान गतिविधियां और कम तीव्रता वाला व्यायाम शामिल किया जा सकता है।
इसके बाद धीरे-धीरे मुख्य एक्सरसाइज शुरू की जा सकती है।
अगर कोई व्यक्ति सीधे तेज दौड़ना या भारी वजन उठाना शुरू कर देता है तो शरीर को अचानक ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए वर्कआउट की शुरुआत हमेशा धीरे करनी चाहिए।
कूल-डाउन भी है जरूरी
जिस तरह एक्सरसाइज से पहले वार्म-अप जरूरी है, उसी तरह वर्कआउट खत्म करने के बाद अचानक पूरी तरह रुकने के बजाय कुछ देर हल्की गतिविधि करना बेहतर होता है।
उदाहरण के लिए, अगर आप दौड़ रहे हैं तो दौड़ खत्म करने के बाद कुछ मिनट धीमी गति से चल सकते हैं। इसके बाद अपनी सुविधा के अनुसार हल्की स्ट्रेचिंग की जा सकती है।
इससे शरीर को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने का समय मिलता है।
भारी वजन उठाते समय रखें खास ध्यान
वेट ट्रेनिंग करते समय केवल वजन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए। सही तकनीक सबसे महत्वपूर्ण है।
बहुत भारी वजन उठाने के चक्कर में अगर शरीर की मुद्रा गलत हो जाए तो चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर शुरुआती लोगों को हल्के वजन से शुरुआत करनी चाहिए।
वजन बढ़ाने में भी धीरे-धीरे प्रगति करना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित फिटनेस ट्रेनर से सही तकनीक सीखना उपयोगी हो सकता है।
व्यायाम करते समय सांस को लंबे समय तक रोककर रखने से भी बचना चाहिए, खासकर भारी वजन उठाते समय।
सीने में दर्द हो तो तुरंत रुकें
वर्कआउट के दौरान थकान महसूस होना सामान्य हो सकता है, लेकिन कुछ लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर एक्सरसाइज करते समय सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में असामान्य परेशानी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना, अचानक कमजोरी या असामान्य धड़कन महसूस हो तो तुरंत व्यायाम रोक देना चाहिए।
इन लक्षणों को केवल सामान्य थकान समझकर वर्कआउट जारी रखना ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी हो सकता है।
खासकर सीने में दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, चक्कर या मतली जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
क्या एक्सरसाइज से हार्ट अटैक का खतरा होता है?
यह कहना सही नहीं होगा कि किसी एक एक्सरसाइज की वजह से हर व्यक्ति को हार्ट अटैक का खतरा होता है। नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य तौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है।
लेकिन लंबे समय से निष्क्रिय व्यक्ति द्वारा अचानक बहुत ज्यादा और अत्यधिक तीव्र व्यायाम करने पर जोखिम बढ़ सकता है, खासकर अगर पहले से कोई हृदय संबंधी समस्या या अन्य जोखिम मौजूद हो।
इसलिए व्यायाम से डरने की जरूरत नहीं है। जरूरत है इसे सही तरीके और अपनी क्षमता के अनुसार करने की।
शरीर की क्षमता को समझना जरूरी
हर व्यक्ति की उम्र, फिटनेस, स्वास्थ्य और व्यायाम का अनुभव अलग होता है। इसलिए हर किसी के लिए एक जैसा वर्कआउट सही नहीं हो सकता।
अगर कोई व्यक्ति रोज कई किलोमीटर दौड़ता है तो इसका मतलब यह नहीं कि लंबे समय से निष्क्रिय व्यक्ति भी पहले दिन उतनी ही दूरी दौड़ना शुरू कर दे।
पहले कुछ समय पैदल चलें। फिर गति बढ़ाएं। इसके बाद जरूरत के अनुसार हल्की दौड़ या दूसरी गतिविधि जोड़ सकते हैं।
फिटनेस कोई प्रतियोगिता नहीं है। धीरे-धीरे आगे बढ़ना ही लंबे समय तक स्वस्थ रहने का बेहतर तरीका है।
गर्मी में एक्सरसाइज करते समय भी सावधान रहें
गर्म और उमस वाले मौसम में एक्सरसाइज करते समय शरीर से ज्यादा पसीना निकल सकता है। ऐसे मौसम में बहुत कठिन वर्कआउट करने से अत्यधिक थकान, कमजोरी या चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है।
अगर गर्मी में एक्सरसाइज करते समय असहज महसूस हो तो तुरंत आराम करें और शरीर को ठंडा होने का समय दें।
गर्मी के मौसम में वर्कआउट का समय और स्थान भी सोच-समझकर चुनना चाहिए। बहुत ज्यादा गर्मी में खुले मैदान में कठिन एक्सरसाइज करने से बचना बेहतर है।
कितनी एक्सरसाइज करनी चाहिए?
स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां भी सप्ताह में कम से कम दो दिन शामिल की जा सकती हैं।
लेकिन अगर कोई व्यक्ति अभी बिल्कुल सक्रिय नहीं है तो उसे पहले दिन से इस लक्ष्य को हासिल करने की जरूरत नहीं है।
कुछ मिनटों से शुरुआत करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। छोटी शुरुआत भी लंबे समय में बड़ा फायदा दे सकती है।
रोज थोड़ा व्यायाम करना ज्यादा बेहतर
सप्ताह में एक दिन बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने के बजाय नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना ज्यादा व्यावहारिक है।
पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैरना, दौड़ना, योग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी गतिविधियों को अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार चुना जा सकता है।
अगर आपको कोई गतिविधि पसंद है तो उसे नियमित रूप से करने की संभावना भी ज्यादा रहती है।
नींद और खान-पान भी जरूरी
सिर्फ एक्सरसाइज करने से ही फिटनेस पूरी नहीं होती। पर्याप्त नींद, संतुलित खान-पान और तनाव को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।
अगर कोई व्यक्ति रोज बहुत कठिन वर्कआउट करता है लेकिन पर्याप्त आराम नहीं करता, तो शरीर को रिकवरी का समय नहीं मिल पाता।
इसलिए एक्सरसाइज के साथ आराम के दिनों और पर्याप्त नींद को भी महत्व दें।
एक्सरसाइज शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखने का शानदार तरीका है, लेकिन फिटनेस के चक्कर में जरूरत से ज्यादा मेहनत करना सही नहीं है। लंबे समय से एक्सरसाइज न करने वाले लोगों को अचानक कठिन वर्कआउट शुरू करने के बजाय हल्की गतिविधियों से शुरुआत करनी चाहिए।
वार्म-अप और कूल-डाउन को रूटीन का हिस्सा बनाएं। भारी वजन उठाते समय सही तकनीक अपनाएं और धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाएं।
अगर आपको पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो नया वर्कआउट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
और सबसे जरूरी बात—वर्कआउट के दौरान सीने में दर्द, असामान्य सांस फूलना, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना या दिल की धड़कन असामान्य लगना शुरू हो तो तुरंत एक्सरसाइज रोकें और चिकित्सकीय मदद लें।
फिट रहने का सबसे सुरक्षित तरीका है—धीरे शुरू करें, नियमित रहें और शरीर के संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें।

कोई टिप्पणी नहीं