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पैरों में पहले हुई हल्की झुनझुनी… फिर आया ऐसा बदलाव जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जानें डायबिटीज का ये संकेत!



नई दिल्ली: अगर आपके पैरों में अक्सर झुनझुनी, सुन्नपन, जलन या ऐसा महसूस होता है जैसे सैकड़ों छोटी-छोटी सुइयां चुभ रही हों, तो इसे हमेशा सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। खासकर अगर आपको डायबिटीज है या ब्लड शुगर लंबे समय से सामान्य सीमा से ज्यादा रहता है, तो पैरों में होने वाली ऐसी परेशानी डायबिटिक पेरीफेरल न्यूरोपैथी से जुड़ी हो सकती है।

लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड ग्लूकोज नसों और उन्हें ऑक्सीजन व पोषक तत्व पहुंचाने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसका असर अक्सर पैरों और टांगों से शुरू होता है।

हालांकि पैरों में झुनझुनी का मतलब हर बार डायबिटीज नहीं होता। विटामिन B12 की कमी, थायरॉयड की समस्या, किडनी संबंधी बीमारी, कुछ दवाएं और अन्य कारण भी नसों से जुड़ी परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसलिए लगातार लक्षण होने पर खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

पैरों में झुनझुनी आखिर क्यों होती है?

हमारे शरीर में नसें दिमाग और शरीर के अलग-अलग हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करती हैं। जब इन नसों को नुकसान पहुंचता है तो संवेदना प्रभावित हो सकती है।

डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड शुगर ज्यादा रहने पर नसों और उनकी छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसी वजह से पैरों में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन, दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

कई लोगों में यह परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इतनी हल्की होती है कि व्यक्ति इसे गंभीरता से नहीं लेता। कुछ लोगों में लक्षण रात के समय ज्यादा परेशान कर सकते हैं।

यही कारण है कि लंबे समय से डायबिटीज वाले लोगों को पैरों में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

सिर्फ झुनझुनी नहीं, ये संकेत भी दिख सकते हैं

डायबिटिक न्यूरोपैथी में हर व्यक्ति के लक्षण एक जैसे नहीं होते। किसी को पैरों में जलन महसूस हो सकती है, तो किसी को सुन्नपन या तेज दर्द।

कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे पैर में "सुइयां चुभ रही हों"। किसी-किसी व्यक्ति में हल्का स्पर्श भी दर्दनाक लग सकता है।

इसके अलावा पैरों में कमजोरी, चलने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना या दर्द के कारण चलने में दिक्कत जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

अगर ऐसे लक्षण लगातार बने हुए हैं, बढ़ रहे हैं या रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर रहे हैं, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब संवेदना कम हो जाए

डायबिटीज से जुड़ी नसों की क्षति का एक गंभीर पहलू यह है कि पैरों में संवेदना कम हो सकती है।

मान लीजिए पैर में छोटा सा कट लग गया, जूते से छाला बन गया या मोजे के अंदर कोई छोटी वस्तु चुभ रही है। अगर पैर की संवेदना कम हो चुकी है तो व्यक्ति को चोट का पता ही नहीं चल सकता।

धीरे-धीरे वही छोटा घाव बड़ा हो सकता है और उसमें संक्रमण हो सकता है। डायबिटीज में घाव भरने में भी परेशानी हो सकती है, खासकर जब पैरों में रक्त प्रवाह कम हो।

इसी वजह से डायबिटीज के मरीजों के लिए पैरों की देखभाल केवल सामान्य सफाई का मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पैर का घाव छोटा दिखे तो भी सावधान

डायबिटीज वाले व्यक्ति के पैर में अगर कट, छाला, लालिमा, सूजन या त्वचा में कोई असामान्य बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नसों की क्षति के कारण दर्द कम महसूस हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चोट गंभीर नहीं है।

डायबिटीज में नसों की क्षति और कम रक्त प्रवाह मिलकर घाव तथा संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं। गंभीर संक्रमण की स्थिति में समस्या काफी बढ़ सकती है।

इसलिए पैर में किसी भी नए घाव या असामान्य बदलाव को समय रहते डॉक्टर को दिखाना बेहतर है।

रात में ज्यादा झुनझुनी हो तो क्या करें?

कई लोगों में पेरीफेरल न्यूरोपैथी के लक्षण रात में ज्यादा महसूस हो सकते हैं। झुनझुनी, जलन या दर्द के कारण नींद प्रभावित हो सकती है।

अगर आपको कई दिनों या हफ्तों से रात में लगातार पैरों में जलन या झुनझुनी हो रही है, तो इसे केवल थकान या ज्यादा चलने का नतीजा मानकर न छोड़ें।

खासकर डायबिटीज वाले लोगों को अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करनी चाहिए।

क्या हर झुनझुनी डायबिटीज का संकेत है?

नहीं।

यह समझना बेहद जरूरी है कि पैरों में झुनझुनी कई कारणों से हो सकती है। इसलिए इस लक्षण को देखकर सीधे यह निष्कर्ष निकालना कि व्यक्ति को डायबिटिक न्यूरोपैथी है, सही नहीं होगा।

डॉक्टर जांच के दौरान अन्य कारणों को भी देखते हैं। इनमें थायरॉयड की समस्या, किडनी की बीमारी और विटामिन B12 की कमी जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। कुछ मामलों में दवाओं से जुड़ी B12 की कमी भी समस्या पैदा कर सकती है।

इसलिए सही कारण पता करने के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जांच जरूरी है।

डायबिटीज है तो पैरों की रोज जांच करें

डायबिटीज वाले लोगों के लिए रोजाना पैरों को देखना एक अच्छी आदत हो सकती है।

पैरों के तलवों, उंगलियों के बीच और एड़ी पर नजर डालें। कहीं कट, छाला, लाल निशान, सूजन, फफोला या त्वचा में बदलाव तो नहीं है, यह जांचें।

अगर पैर में संवेदना कम है तो केवल दर्द पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। कई बार चोट दर्द के बिना भी हो सकती है।

नियमित फुट एग्जाम भी महत्वपूर्ण है। डॉक्टर जांच के दौरान पैरों की संवेदना, कंपन महसूस करने की क्षमता, रक्त प्रवाह और संतुलन आदि का आकलन कर सकते हैं।

नंगे पैर चलने से बचें

अगर पैरों की संवेदना कम हो गई है तो नंगे पैर चलने में चोट का पता देर से चल सकता है।

गर्म फर्श, छोटी कंकड़-पत्थर, नुकीली चीज या मामूली कट भी समस्या पैदा कर सकता है। डायबिटीज वाले लोगों को पैरों की सुरक्षा और उचित जूते पहनने पर ध्यान देना चाहिए।

घर में भी ऐसी जगहों पर सावधानी रखना जरूरी है जहां पैर में चोट लग सकती है।

बहुत गर्म पानी या हीटिंग पैड का इस्तेमाल भी सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि संवेदना कम होने पर जलने का पता तुरंत नहीं चल सकता।

ब्लड शुगर कंट्रोल क्यों जरूरी?

डायबिटिक न्यूरोपैथी को रोकने या उसकी प्रगति को धीमा करने के लिए डायबिटीज का बेहतर प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

ब्लड ग्लूकोज के साथ-साथ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का सही तरीके से सेवन और धूम्रपान से दूरी जैसी आदतें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्यक्ति का डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान अलग हो सकता है। इसलिए दवा की मात्रा खुद से बदलना या बंद करना सही नहीं है।

डॉक्टर कब दिखाना चाहिए?

अगर पैरों में झुनझुनी कभी-कभार थोड़े समय के लिए होती है तो इसके कई सामान्य कारण हो सकते हैं। लेकिन अगर यह बार-बार हो रही है, लगातार बनी हुई है या इसके साथ सुन्नपन, जलन, दर्द, कमजोरी या संतुलन की समस्या भी है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

विशेष रूप से डायबिटीज वाले व्यक्ति को ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर पैर में घाव, लालिमा, गर्माहट, सूजन, पस या संक्रमण के संकेत दिखाई दें तो जल्द चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। डायबिटीज में पैरों की चोट जल्दी गंभीर हो सकती है।

क्या दवा से झुनझुनी ठीक हो सकती है?

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि झुनझुनी का कारण क्या है। अगर समस्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से जुड़ी है तो डॉक्टर ब्लड शुगर प्रबंधन के साथ लक्षणों के लिए उचित उपचार की सलाह दे सकते हैं।

कुछ मामलों में दर्द और जलन को नियंत्रित करने के लिए विशेष दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इन्हें खुद से लेना शुरू नहीं करना चाहिए।

अगर झुनझुनी का कारण B12 की कमी, थायरॉयड या कोई अन्य बीमारी है तो उसका इलाज अलग होगा।

इसलिए पहले कारण की पहचान करना जरूरी है।

वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर भी ध्यान दें

डायबिटिक न्यूरोपैथी का जोखिम केवल ब्लड शुगर से नहीं जुड़ा है। अधिक वजन, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, किडनी की बीमारी, धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए डायबिटीज मैनेजमेंट का मतलब केवल शुगर की एक रिपोर्ट को नियंत्रित करना नहीं है। पूरे स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।

सबसे जरूरी बात

पैरों में होने वाली झुनझुनी, जलन, सुन्नपन या दर्द को हमेशा सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर तब जब व्यक्ति को डायबिटीज है।

लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है और इससे डायबिटिक पेरीफेरल न्यूरोपैथी हो सकती है। यह समस्या पैरों में संवेदना कम कर सकती है, जिससे छोटी चोट या छाले का पता देर से चलता है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

लेकिन यह भी याद रखें कि हर झुनझुनी डायबिटीज के कारण नहीं होती। इसलिए इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर खुद से बीमारी तय करने के बजाय डॉक्टर से उचित जांच कराना सबसे सुरक्षित रास्ता है।

अगर आपको डायबिटीज है, तो रोज अपने पैरों की जांच करें, आरामदायक और सुरक्षित जूते पहनें, चोट को नजरअंदाज न करें और ब्लड शुगर के साथ ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखने की कोशिश करें।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यह किसी व्यक्ति की बीमारी का निदान या व्यक्तिगत उपचार की सलाह नहीं है। लगातार झुनझुनी, सुन्नपन, दर्द या पैर में घाव होने पर योग्य चिकित्सक से सलाह लें।

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