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तड़के 3 बजे अचानक खिसकी पहाड़ी, घरों पर बरसा मौत का मलबा… 7 की मौत से मचा हड़कंप



मुंबई। मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बुधवार तड़के एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया। कुर्ला-घाटकोपर इलाके के चिराग नगर स्थित अशोक नगर में तेज बारिश के कारण भूस्खलन हुआ और पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा मलबे के साथ नीचे बने घरों पर जा गिरा। हादसा इतना अचानक हुआ कि कई परिवारों को संभलने और बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 7 लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान अभी जारी है और आशंका है कि मलबे के नीचे कोई और व्यक्ति फंसा हो सकता है।

हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस, बीएमसी, एनडीआरएफ और अन्य आपदा राहत टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। संकरी गलियों और भारी मलबे के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद मशीनों और मैनुअल रेस्क्यू की मदद से मलबा हटाने का काम लगातार जारी है।

तड़के करीब 3 बजे अचानक खिसका पहाड़

जानकारी के मुताबिक, हादसा बुधवार तड़के करीब 3 बजे से 3:48 बजे के बीच हुआ। लगातार कई घंटों से हो रही बारिश ने पहाड़ी की मिट्टी को कमजोर कर दिया था। इसी दौरान अचानक ढलान का एक हिस्सा खिसक गया और भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा नीचे बने घरों पर आ गिरा।

जिस वक्त यह घटना हुई, ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे थे। रात का समय होने की वजह से लोगों को खतरे का अंदाजा नहीं था। अचानक तेज आवाज के साथ मलबा गिरने से इलाके में चीख-पुकार मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही पलों में कई घर मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों ने सबसे पहले अपने स्तर पर बचाव की कोशिश शुरू की और पुलिस तथा आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी।

मलबे में दब गए कई घर

भूस्खलन की चपेट में आने वाले इलाके में घनी आबादी है। यहां छोटे-छोटे घर और चॉल जैसी बस्तियां पहाड़ी ढलान के पास स्थित हैं। लगातार बारिश के बीच अचानक मिट्टी और पत्थरों का बड़ा हिस्सा नीचे आने से कई कमरों को नुकसान पहुंचा।

मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दल ने बेहद सावधानी से ऑपरेशन शुरू किया। भारी मशीनों के इस्तेमाल के साथ-साथ जवान हाथों से भी मलबा हटाते रहे ताकि अगर कोई व्यक्ति जिंदा दबा हो तो उसे नुकसान न पहुंचे।

मुंबई में मानसून के दौरान भूस्खलन का खतरा पहले भी सामने आता रहा है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी ढलानों और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

7 लोगों की मौत से पसरा मातम

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक 7 शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में बच्चों और युवाओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है, जिससे हादसे की भयावहता और बढ़ जाती है।

रिपोर्टों के मुताबिक मृतकों में 14 वर्षीय मोहम्मद समीर अंसारी, 19 वर्षीय साहिल हुसैन अब्दुल काजी, करीब 45 वर्षीय एक अज्ञात व्यक्ति, 2 वर्षीय अबान आरिफ शेख, 4 वर्षीय मनात आरिफ शेख, 27 वर्षीय मरजिना आरिफ शेख और 27 वर्षीय विकेट रमेश यादव शामिल हैं।

दो छोटे बच्चों की मौत ने स्थानीय लोगों को बेहद दुखी कर दिया है। राहत एवं बचाव दल अब भी मलबे के उन हिस्सों की जांच कर रहा है जहां किसी और व्यक्ति के दबे होने की संभावना हो सकती है।

मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या सात होने की पुष्टि की गई है और बचाव अभियान जारी रहने की जानकारी दी गई है।

7 लोग घायल, अस्पतालों में इलाज जारी

हादसे में घायल हुए सात लोगों को मुंबई के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें कुछ लोगों को कुर्ला स्थित भाभा अस्पताल ले जाया गया, जबकि अन्य घायलों का इलाज राजावाड़ी अस्पताल में किया जा रहा है।

घायलों में कई लोगों को सिर, शरीर और अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

रेस्क्यू के दौरान घायल लोगों को मलबे से बाहर निकालने के बाद तुरंत एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। मौके पर 108 एंबुलेंस की टीमें भी मौजूद रहीं।

NDRF और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा

हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। इसके बाद बीएमसी और एनडीआरएफ की टीमों ने भी राहत अभियान में हिस्सा लिया।

बचाव दल का सबसे बड़ा लक्ष्य मलबे में फंसे लोगों का पता लगाना है। इसके लिए भारी मशीनों से मलबा हटाने के साथ जवानों द्वारा मैनुअल सर्च भी किया जा रहा है।

संकरी गलियों की वजह से राहत सामग्री और बड़ी मशीनों को घटनास्थल तक पहुंचाने में चुनौती सामने आई। फिर भी बचावकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। एपी की रिपोर्ट के अनुसार संकरे रास्तों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ, जबकि एनडीआरएफ, दमकल और पुलिस की टीमें मौके पर जुटी रहीं।

लगातार बारिश बनी हादसे की बड़ी वजह

मुंबई में इस समय मानसून सक्रिय है और शहर के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। लगातार बारिश के कारण जमीन में पानी की मात्रा बढ़ जाती है और पहाड़ी ढलानों की मिट्टी कमजोर होने लगती है।

ऐसी परिस्थितियों में पहले से अस्थिर ढलानों पर भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ जाता है। बुधवार तड़के हुआ हादसा इसी खतरे की गंभीर तस्वीर सामने लेकर आया है।

विशेषज्ञ लंबे समय से मुंबई के संवेदनशील इलाकों में जल निकासी, ढलानों की स्थिरता और अनियोजित निर्माण को लेकर चिंता जताते रहे हैं। भारी बारिश और कमजोर भूभाग का संयोजन कई बार बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

रात में सो रहे थे लोग, तभी आ गया मौत का मलबा

इस हादसे की सबसे भयावह बात इसका समय है। घटना तड़के हुई, जब ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे थे।

अगर यही घटना दिन में होती तो शायद कुछ लोगों को खतरे का अंदाजा लग जाता और वे समय रहते बाहर निकल सकते थे। लेकिन रात के अंधेरे में अचानक पहाड़ी का हिस्सा खिसकने के कारण लोगों को प्रतिक्रिया देने का बहुत कम समय मिला।

मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि कई परिवारों को घर से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इसी वजह से शुरुआती बचाव अभियान में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई।

मुंबई में फिर उठे सुरक्षा पर सवाल

मुंबई की पहचान देश की आर्थिक राजधानी के रूप में है, लेकिन मानसून आते ही शहर के कई इलाकों में बाढ़, जलभराव, पेड़ गिरने और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।

पहाड़ी ढलानों और संवेदनशील क्षेत्रों में बने घरों को हर साल बारिश के दौरान जोखिम का सामना करना पड़ता है। कुर्ला-घाटकोपर क्षेत्र की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और संभावित भूस्खलन की पहले से चेतावनी देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों ने कमजोर जल निकासी, तेजी से बढ़ते शहरी निर्माण और अस्थिर भूभाग को जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में शामिल किया है।

अभी खत्म नहीं हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में किसी और व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को खत्म करना है। बचाव दल घटनास्थल के हर हिस्से की जांच कर रहे हैं।

इलाके में मौजूद लोगों को भी सावधानी बरतने और अस्थिर ढलानों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। लगातार बारिश को देखते हुए आसपास के संवेदनशील इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई जा सकती है।

इस हादसे ने कई परिवारों से उनके अपनों को छीन लिया है। सात लोगों की मौत के बाद इलाके में मातम पसरा है, जबकि घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

मुंबई की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि बारिश सिर्फ पानी लेकर नहीं आती, बल्कि कमजोर ढलानों और असुरक्षित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए कभी-कभी जानलेवा खतरा भी बन जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मलबे के नीचे कहीं कोई और जिंदगी तो नहीं फंसी है—और इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहा है।

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