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सिरदर्द समझकर कहीं ये 5 चीजें तो नहीं खा रहे? माइग्रेन का दर्द अचानक बढ़ा सकती हैं ये आम चीजें!



नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिरदर्द की शिकायत आम हो गई है, लेकिन हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें सिर में तेज या धड़कता हुआ दर्द होने के साथ मतली, उल्टी और रोशनी या तेज आवाज के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों में सिरदर्द शुरू होने से पहले आंखों के सामने चमकती रोशनी, जिगजैग लाइन, धब्बे या झनझनाहट जैसे ऑरा के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

माइग्रेन के ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को तनाव या नींद की कमी से अटैक हो सकता है, तो किसी दूसरे व्यक्ति में कोई खास भोजन, कैफीन में अचानक बदलाव या शरीर में पानी की कमी समस्या बढ़ा सकती है। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को सभी माइग्रेन मरीजों के लिए खतरनाक मानना सही नहीं है।

फिर भी कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिन्हें माइग्रेन से पीड़ित लोगों ने बार-बार संभावित ट्रिगर के रूप में रिपोर्ट किया है। अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन की जानकारी में कैफीन, पुराने चीज, प्रोसेस्ड मीट, कुछ नट्स, चॉकलेट, खट्टे फल और कुछ प्रिजर्वेटिव्स वाले खाद्य पदार्थों का उल्लेख संभावित ट्रिगर के रूप में किया गया है।

माइग्रेन में कैसा होता है सिरदर्द?

माइग्रेन का दर्द सामान्य सिरदर्द से अलग और कई बार काफी परेशान करने वाला हो सकता है। कुछ लोगों में यह सिर के एक हिस्से में ज्यादा महसूस होता है, जबकि कुछ में दोनों तरफ भी दर्द हो सकता है।

इसके साथ मतली, उल्टी, रोशनी और आवाज से परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में ऑरा के दौरान चमकती रोशनी, जिगजैग पैटर्न, धब्बे, झनझनाहट या बोलने में परेशानी जैसे अस्थायी लक्षण हो सकते हैं।

माइग्रेन का अटैक कुछ घंटों से लेकर कई घंटों या उससे अधिक समय तक चल सकता है। इसकी तीव्रता व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग होती है।

1. कॉफी और ज्यादा कैफीन से रहें सावधान

माइग्रेन और कैफीन का संबंध थोड़ा जटिल है। कुछ लोगों को थोड़ी मात्रा में कैफीन लेने से सिरदर्द में राहत महसूस हो सकती है। दूसरी तरफ बहुत ज्यादा कैफीन या रोजाना ली जाने वाली मात्रा में अचानक बदलाव कुछ लोगों में माइग्रेन अटैक को ट्रिगर कर सकता है।

विशेष रूप से अगर कोई व्यक्ति रोजाना काफी मात्रा में चाय या कॉफी पीता है और अचानक उसे पूरी तरह बंद कर देता है, तो कैफीन विदड्रॉल की वजह से सिरदर्द हो सकता है।

अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन भी कैफीन के सेवन में उतार-चढ़ाव से बचने और अपने व्यक्तिगत ट्रिगर को पहचानने की सलाह देता है।

इसलिए माइग्रेन वाले व्यक्ति को यह देखना चाहिए कि कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक या अन्य कैफीन वाले पेय लेने के बाद उसकी समस्या बढ़ती है या नहीं। केवल माइग्रेन होने के कारण हर तरह की कैफीन को हमेशा के लिए बंद करना जरूरी नहीं है।

2. पुराने और ज्यादा पके हुए चीज से समस्या

कुछ लोगों में एज्ड या मैच्योर चीज माइग्रेन का संभावित ट्रिगर हो सकता है। चेडर, ब्लू चीज और अन्य पुराने चीज को लेकर संवेदनशील लोगों में सिरदर्द की शिकायत रिपोर्ट की गई है।

अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन की संभावित फूड ट्रिगर सूची में matured cheeses और yogurts शामिल हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर माइग्रेन मरीज को चीज छोड़ देना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को चीज खाने के बाद बार-बार एक जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो वह अपने डॉक्टर या डायटीशियन की मदद से इसकी पुष्टि कर सकता है।

बिना जरूरत किसी पूरे खाद्य समूह को डाइट से हटाने से पोषण असंतुलन भी हो सकता है।

3. बहुत ठंडी चीजें और ‘ब्रेन फ्रीज’

गर्म मौसम में आइसक्रीम या बहुत ठंडा पेय राहत दे सकता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके तुरंत बाद माथे या सिर में अचानक तेज दर्द महसूस होता है। इसे आम बोलचाल में ब्रेन फ्रीज कहा जाता है।

हर ब्रेन फ्रीज माइग्रेन नहीं होता, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को पहले से माइग्रेन की समस्या है और वह बार-बार बहुत ठंडी चीजों के बाद अटैक महसूस करता है, तो उसे इस पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए।

खासकर गर्मी, व्यायाम या लंबे समय तक बाहर रहने के बाद बहुत तेजी से बेहद ठंडी चीज खाने या पीने से अगर पहले भी समस्या हुई है, तो उसे धीरे-धीरे लेना बेहतर हो सकता है।

यहां भी मुख्य बात व्यक्ति का अपना अनुभव है, न कि यह मान लेना कि हर माइग्रेन मरीज को आइसक्रीम या ठंडे पेय से परेशानी होगी।

4. प्रोसेस्ड मीट और प्रिजर्वेटिव वाले खाद्य पदार्थ

सलामी, हैम, सॉसेज और कुछ अन्य प्रोसेस्ड मीट में अलग-अलग प्रकार के प्रिजर्वेटिव और एडिटिव्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कुछ संवेदनशील लोगों में ऐसे खाद्य पदार्थ माइग्रेन के संभावित ट्रिगर हो सकते हैं।

अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन की सूची में smoked meat products और sulfites वाले processed meats का उल्लेख किया गया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को प्रोसेस्ड मीट खाने के बाद माइग्रेन होगा। अगर किसी व्यक्ति को किसी खास उत्पाद के सेवन के बाद बार-बार सिरदर्द होता है, तो उसे अपनी माइग्रेन डायरी में उस भोजन को दर्ज करना चाहिए।

5. सूखे मेवे, नट्स और कुछ दूसरे खाद्य पदार्थ

कुछ माइग्रेन मरीजों में नट्स और कुछ सूखे मेवों को संभावित ट्रिगर के रूप में देखा गया है। अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन की जानकारी में अखरोट और काजू सहित कुछ नट्स का उल्लेख किया गया है।

इसी तरह कुछ लोगों में चॉकलेट, खट्टे फल, MSG वाले खाद्य पदार्थ या कुछ अन्य प्रिजर्वेटिव्स से परेशानी हो सकती है।

लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि संभावित ट्रिगर की सूची को व्यक्तिगत एलर्जी या निश्चित कारण न समझें। किसी खाद्य पदार्थ का सूची में होना यह साबित नहीं करता कि वह हर व्यक्ति में माइग्रेन पैदा करेगा।

क्या पनीर और डेयरी पूरी तरह छोड़ दें?

सोशल मीडिया पर माइग्रेन को लेकर अक्सर अलग-अलग खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ने की सलाह दी जाती है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह तरीका हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं है।

डेयरी उत्पाद प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों का स्रोत हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को किसी खास डेयरी उत्पाद के सेवन के बाद लगातार माइग्रेन अटैक दिखाई देता है, तभी उसे संभावित ट्रिगर के रूप में देखना अधिक उचित है।

किसी भी बड़े डाइट बदलाव से पहले डॉक्टर या योग्य डायटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।

सिर्फ खाना ही माइग्रेन का कारण नहीं

माइग्रेन को केवल खाने से जोड़ना भी सही नहीं होगा। तनाव, नींद में बदलाव, भूखे रहना, पानी की कमी, कैफीन में अचानक बदलाव और दूसरे पर्यावरणीय कारण भी कुछ लोगों में अटैक को प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन माइग्रेन मैनेजमेंट में नियमित नींद, पर्याप्त पानी, नियमित भोजन, व्यायाम, तनाव प्रबंधन और व्यक्तिगत ट्रिगर पहचानने पर जोर देता है।

यानी अगर कोई व्यक्ति केवल अपनी डाइट बदलता है लेकिन पूरी रात जागता रहता है, भोजन छोड़ता है या पर्याप्त पानी नहीं पीता, तो सिर्फ भोजन से समस्या को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

खाली पेट रहने से भी बढ़ सकती है परेशानी

लंबे समय तक खाना न खाना या भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर कुछ माइग्रेन मरीजों में अटैक को बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित समय पर भोजन करना उपयोगी हो सकता है।

अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन भी भोजन न छोड़ने और नियमित डाइट बनाए रखने की सलाह देता है।

इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को दिन में एक निश्चित संख्या में भोजन करना ही चाहिए। जरूरी यह है कि व्यक्ति ऐसी नियमित दिनचर्या बनाए जिसमें लंबे समय तक भूखे रहने की स्थिति बार-बार न बने।

पानी की कमी भी बन सकती है ट्रिगर

डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी भी कुछ लोगों में माइग्रेन को बढ़ा सकती है। खासकर गर्मी, अधिक पसीना आने, व्यायाम या लंबे समय तक बाहर रहने के दौरान पर्याप्त तरल लेना जरूरी है।

अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन माइग्रेन से बचाव के लिए पर्याप्त हाइड्रेशन को महत्वपूर्ण जीवनशैली कारकों में शामिल करता है।

इसलिए दिनभर पानी पीने की आदत बनाना और प्यास लगने तक इंतजार न करना फायदेमंद हो सकता है।

माइग्रेन डायरी से पहचानें अपना असली ट्रिगर

हर माइग्रेन मरीज के लिए एक ही फूड ट्रिगर नहीं होता। इसलिए सबसे उपयोगी तरीका है माइग्रेन डायरी बनाना।

इसमें आप लिख सकते हैं कि किस दिन क्या खाया, कितनी नींद ली, कितना पानी पिया, तनाव कितना था, कैफीन कितना लिया और सिरदर्द कब शुरू हुआ।

कुछ सप्ताह या महीनों के रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि क्या कोई खास पैटर्न बार-बार सामने आ रहा है।

उदाहरण के लिए यदि हर बार किसी खास भोजन के कुछ घंटों बाद सिरदर्द होता है, तो डॉक्टर के साथ इस पैटर्न पर चर्चा की जा सकती है। लेकिन एक ही घटना के आधार पर किसी भोजन को स्थायी रूप से दोषी मान लेना सही नहीं होगा।

माइग्रेन में ऑरा हो तो इन संकेतों को समझें

कुछ लोगों को सिरदर्द से पहले ऑरा होता है। इसमें आंखों के सामने चमकती रोशनी, जिगजैग लाइन, धब्बे, झनझनाहट या बोलने में कठिनाई जैसे अस्थायी लक्षण हो सकते हैं। आमतौर पर ऑरा एक घंटे से कम समय तक रहता है।

लेकिन अगर पहली बार ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं या लक्षण सामान्य पैटर्न से अलग हैं, तो इसे केवल माइग्रेन मानकर घर पर इलाज करना उचित नहीं है।

विशेष रूप से एक आंख में अचानक दृष्टि संबंधी बदलाव, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या बोलने में नई परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।

अचानक आया सबसे तेज सिरदर्द हो तो सावधान

हर तेज सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता। यदि सिरदर्द अचानक बहुत तेजी से शुरू हो और व्यक्ति उसे जीवन का सबसे गंभीर सिरदर्द बताए, तो यह मेडिकल इमरजेंसी का संकेत हो सकता है।

इसके अलावा सिरदर्द के साथ कमजोरी, सुन्नपन, बोलने या समझने में परेशानी, बेहोशी, दौरा, तेज बुखार, गर्दन अकड़ना या गंभीर दृष्टि समस्या हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

इसी तरह सिर पर चोट लगने के बाद नया या बढ़ता हुआ सिरदर्द भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्या माइग्रेन से हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है?

माइग्रेन, खासकर माइग्रेन विद ऑरा, और कुछ हृदय तथा रक्त वाहिका संबंधी जोखिमों के बीच संबंध पर वैज्ञानिक शोध हुआ है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि माइग्रेन होने वाले हर व्यक्ति को हार्ट अटैक या स्ट्रोक होने वाला है।

इसलिए अनावश्यक डरने के बजाय अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम कारकों पर चर्चा करना अधिक महत्वपूर्ण है।

अगर सिरदर्द के साथ अचानक सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य माइग्रेन समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए।

माइग्रेन को कंट्रोल करने के आसान तरीके

माइग्रेन को नियंत्रित करने के लिए कुछ लोगों को नियमित जीवनशैली से फायदा हो सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • समय पर और नियमित भोजन करना।

  • पर्याप्त पानी पीना।

  • नींद का एक नियमित शेड्यूल बनाना।

  • कैफीन की मात्रा में अचानक बदलाव से बचना।

  • तनाव कम करने के लिए रिलैक्सेशन या मेडिटेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करना।

  • नियमित और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना।

  • तेज रोशनी या आवाज जैसे व्यक्तिगत ट्रिगर से बचना।

  • माइग्रेन डायरी बनाना।

  • बार-बार अटैक होने पर डॉक्टर से उपचार की योजना बनवाना।

अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन भी नियमित नींद, व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त हाइड्रेशन और व्यक्तिगत ट्रिगर की पहचान को माइग्रेन मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।

हर चीज छोड़ना नहीं, अपना ट्रिगर पहचानना जरूरी

माइग्रेन के मामले में सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि सोशल मीडिया पर पढ़ी गई किसी सूची के आधार पर व्यक्ति कई खाद्य पदार्थों को एक साथ अपनी डाइट से निकाल दे।

कॉफी, चीज, नट्स, चॉकलेट, खट्टे फल या प्रोसेस्ड फूड हर माइग्रेन मरीज के लिए ट्रिगर नहीं होते। संभावित ट्रिगर व्यक्ति-दर-व्यक्ति बदल सकते हैं।

इसलिए बेहतर तरीका है कि व्यक्ति अपनी दिनचर्या और भोजन का रिकॉर्ड रखे, संभावित पैटर्न को पहचाने और डॉक्टर या योग्य डायटीशियन की मदद से बदलाव करे।

माइग्रेन का इलाज केवल भोजन छोड़ने तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अटैक के समय की दवाएं और बार-बार होने वाले माइग्रेन के लिए प्रिवेंटिव उपचार भी सुझा सकते हैं।

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