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चलती बस में नाबालिग से गैंगरेप का दावा... 25 दिन तक छिपी रही बात, अब दिल्ली-नोएडा पुलिस के बीच क्यों छिड़ा घमासान?



दिल्ली-एनसीआर में चलती बस में 17 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस और नोएडा पुलिस के बीच घटनास्थल और जांच को लेकर विवाद गहरा गया है। नोएडा पुलिस का कहना है कि जिस स्थान पर घटना होने का दावा किया जा रहा है और जहां पीड़िता को जाना था, दोनों ही गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट के क्षेत्र में आते हैं। इसके बावजूद दिल्ली पुलिस ने कथित घटना के करीब 25 दिनों तक नोएडा पुलिस को न तो मामले की जानकारी दी और न ही जांच को नोएडा पुलिस को स्थानांतरित किया।

मामले का खुलासा होने के बाद अब दोनों पुलिस कमिश्नरेट के दावों में अंतर सामने आ रहा है। नोएडा पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़ित पक्ष की ओर से बताए गए घटनाक्रम में कुछ विरोधाभास हैं। पुलिस यह भी सवाल उठा रही है कि यदि घटना नोएडा क्षेत्र में हुई थी तो दिल्ली पुलिस ने इतने लंबे समय तक स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी।

चार अगस्त की रात सामने आई थी शिकायत

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, चार अगस्त की रात करीब 17 साल की एक लड़की कश्मीरी गेट थाने पहुंची थी। उसने पुलिस को बताया कि उसके साथ नोएडा में एक बस के अंदर कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ है। पीड़िता मैनपुरी से नोएडा सेक्टर-63 स्थित अपने रिश्तेदार के घर जाने के लिए निकली थी।

पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, वह ग्रेटर नोएडा के परी चौक से सेक्टर-63 की ओर जाने वाली बस में सवार हुई थी। आरोप है कि रास्ते में बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद कथित तौर पर उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र में बस से उतार दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की और आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की बात कही। हालांकि, घटना के सार्वजनिक होने के बाद अब घटनास्थल और जांच की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

नोएडा पुलिस ने उठाया 25 दिन तक जानकारी न देने का सवाल

नोएडा पुलिस का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दिल्ली पुलिस के पास चार अगस्त की घटना की जानकारी थी और पांच अगस्त से ही आरोपी उसके कब्जे में थे, तो फिर नोएडा पुलिस को इतने दिनों तक इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।

नोएडा पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस अवधि में न तो मामले से संबंधित कोई औपचारिक सूचना साझा की गई और न ही पीड़िता के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई। यहां तक कि घटना सामने आने के बाद सोमवार शाम तक नोएडा पुलिस को एफआईआर की प्रति उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात भी सामने आई।

मामला मीडिया में आने के बाद नोएडा पुलिस के अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस से संपर्क कर घटना से जुड़े साक्ष्यों और जानकारी के बारे में पूछताछ की। नोएडा पुलिस का दावा है कि उसके अधिकारियों ने संबंधित जानकारी और सबूत उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन तत्काल उन्हें अपेक्षित दस्तावेज या जानकारी नहीं मिली।

इसी वजह से अब यह सवाल भी उठ रहा है कि दोनों पुलिस एजेंसियों के बीच मामले की जानकारी साझा करने में इतनी देरी क्यों हुई।

11 अगस्त को नोएडा पुलिस कंट्रोल रूम पहुंची थी दिल्ली पुलिस

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की एक टीम 11 अगस्त को नोएडा पुलिस के कंट्रोल रूम पहुंची थी। वहां पुलिसकर्मियों ने चार अगस्त की एक्सप्रेसवे से संबंधित सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की थी।

बताया जा रहा है कि उस समय दिल्ली पुलिस ने किसी अन्य मुकदमे के संबंध में फुटेज देखने की बात कही थी। टीम ने रात करीब 9 बजकर 47 मिनट से 10 बजकर 23 मिनट तक की फुटेज देखी। इस दौरान कथित तौर पर संबंधित बस दो स्थानों पर दिखाई दी थी।

अब मामले के सार्वजनिक होने के बाद यही फुटेज और बस की आवाजाही जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि बस किस रास्ते से गई, किन स्थानों पर रुकी और उस दौरान उसमें कौन-कौन लोग मौजूद थे।

मयूर विहार तक यात्रियों के होने का दावा

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल बस में मौजूद यात्रियों को लेकर भी उठ रहा है। नोएडा पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, घटना सामने आने के बाद बस संचालक से बातचीत की गई थी। संचालक ने कथित तौर पर बताया कि बस के स्टाफ ने उसे जानकारी दी थी कि नोएडा से दिल्ली जाते समय मयूर विहार तक बस में यात्री मौजूद थे और वहां तक यात्रियों को उतारा गया।

यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है तो पुलिस के सामने घटनाक्रम की टाइमलाइन और बस में मौजूद लोगों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े होंगे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और इसकी कानूनी अहमियत जांच के दौरान उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, यात्रियों के बयान और अन्य साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगी।

ऐसे में पुलिस के लिए बस के पूरे रूट की जांच करना बेहद अहम हो गया है। बस कब चली, किन स्थानों से गुजरी, कहां-कहां रुकी और किस समय किन यात्रियों ने बस छोड़ी—इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।

नोएडा पुलिस बोली- बयानों और साक्ष्यों में विरोधाभास

ग्रेटर नोएडा के पुलिस उपायुक्त रवि शंकर निम ने मामले को लेकर कहा कि कथित घटनास्थल गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट के परी चौक से सेक्टर-63 के बीच बताया जा रहा है। लेकिन दिल्ली पुलिस की ओर से इससे पहले नोएडा पुलिस को घटना के संबंध में कोई सूचना या जानकारी नहीं दी गई।

उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और दिए गए बयानों के बीच कुछ विरोधाभास सामने आए हैं। इसके अलावा पीड़ित पक्ष की तरफ से भी गौतमबुद्धनगर पुलिस को घटना के संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई थी।

नोएडा पुलिस के इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि अब जांच केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि घटना वास्तव में किस क्षेत्र में हुई, किस पुलिस थाने का क्षेत्राधिकार बनता है और दोनों पुलिस एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में देरी क्यों हुई।

अब सीसीटीवी और बस रूट से खुलेंगे कई राज

पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि चार अगस्त की रात संबंधित बस किन-किन रास्तों से गुजरी थी। इसके अलावा बस में मौजूद यात्रियों, ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी जांच की दिशा तय कर सकते हैं।

यदि बस में मयूर विहार तक यात्री मौजूद थे, तो पुलिस को उन यात्रियों की पहचान कर उनके बयान लेने होंगे। इसी तरह एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख स्थानों पर लगे कैमरों की फुटेज से बस की वास्तविक आवाजाही का मिलान किया जा सकता है।

इस मामले में पीड़िता की पहचान और उसकी निजता की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में कानून पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करने पर रोक लगाता है। इसलिए जांच से जुड़े तथ्यों को सामने रखते समय पुलिस और मीडिया दोनों के लिए पीड़िता की पहचान और गरिमा की रक्षा करना जरूरी है।

पुलिस के दावों की जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल इस मामले में दिल्ली पुलिस और नोएडा पुलिस के बीच घटनास्थल और जांच को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे शिकायत कश्मीरी गेट थाने में मिली और शिकायत में घटना नोएडा में होने की बात कही गई थी। दूसरी तरफ नोएडा पुलिस का सवाल है कि अगर कथित घटनास्थल उसके क्षेत्र में था तो उसे इतने दिनों तक सूचना क्यों नहीं दी गई।

अब जांच का केंद्र बस का रूट, सीसीटीवी फुटेज, यात्रियों की मौजूदगी, आरोपियों के बयान और पीड़िता द्वारा बताए गए घटनाक्रम के बीच सामंजस्य स्थापित करना होगा। उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित घटना किस स्थान पर हुई और मामले की जांच किस पुलिस एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में आती है।

फिलहाल नाबालिग से जुड़े इस गंभीर मामले में पुलिस जांच जारी है। दोनों एजेंसियों के बीच सामने आया विवाद भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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