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सोने की कीमत में अचानक बड़ा उलटफेर! 7 हफ्ते के हाई के बाद अब क्या होने वाला है?



नई दिल्ली: कई हफ्तों की सुस्ती के बाद पिछले सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर घरेलू सर्राफा बाजार तक दोनों कीमती धातुओं ने निवेशकों को राहत दी। तेजी के चलते सोना करीब 7 हफ्ते के ऊंचे स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत होते ही बाजार का रुख एक बार फिर बदलता नजर आ रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में हलचल और वैश्विक बाजार में बदले सेंटीमेंट के बीच सोमवार को सोने और चांदी पर दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में करीब 25 डॉलर प्रति औंस तक की गिरावट दर्ज की गई। चांदी भी लाल निशान में कारोबार करती नजर आई।

ऐसे में सोने में निवेश करने वालों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पिछले सप्ताह की तेजी के बाद अब फिर से सोने के दाम गिरने वाले हैं? या यह गिरावट केवल थोड़े समय के लिए है?

पिछले सप्ताह सोने ने दिखाया दम

पिछला सप्ताह सोने के लिए काफी मजबूत रहा। कई दिनों की कमजोरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में तेजी लौटी और इसने करीब सात सप्ताह का उच्च स्तर छू लिया।

बाजार में सोने की तेजी के पीछे कई कारण रहे। सबसे अहम वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने वाली बातचीत की खबरें और मध्य पूर्व में संभावित शांति की उम्मीद रही। इसके अलावा अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदली उम्मीदों ने भी सोने को सपोर्ट दिया।

कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों को ऊंचा रखने का दबाव कम हो सकता है। ब्याज दरों को लेकर नरम रुख आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्प के रूप में सोने की आकर्षकता बढ़ सकती है।

हालिया बाजार रिपोर्टों में भी कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सोने और चांदी में तेजी दर्ज होने की बात सामने आई है।

लेकिन सोमवार को अचानक बदला बाजार का मूड

नए सप्ताह की शुरुआत में सोने की तेजी पर ब्रेक लगता दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार सुबह स्पॉट गोल्ड करीब 25 डॉलर प्रति औंस से ज्यादा की गिरावट के साथ लगभग 4,374 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता बताया गया।

चांदी में भी कमजोरी देखने को मिली और इसकी कीमत लगभग 63.30 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही।

हालांकि, कीमती धातुओं की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं और शुरुआती कारोबार तथा दिन के अंत की कीमत में अंतर हो सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल एक समय की कीमत देखकर बड़ा फैसला लेना उचित नहीं माना जाता।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों बना सबसे बड़ा कारण?

सोने की कीमतों में ताजा उतार-चढ़ाव के पीछे होर्मुज स्ट्रेट का घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने या इस मार्ग से तेल की आपूर्ति को लेकर किसी तरह की आशंका पैदा होने पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।

जब कच्चा तेल महंगा होता है तो वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की चिंता पैदा होती है। इसका असर केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर संबंधी नीतियों और निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ सकता है।

यही वजह है कि इस समय निवेशक मध्य पूर्व की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी हर खबर पर नजर बनाए हुए हैं।

सोना कभी तेजी तो कभी गिरावट क्यों दिखा रहा है?

सोने को आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब दुनिया में युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता या बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो कई निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले विकल्पों से पैसा निकालकर सोने की ओर रुख करते हैं।

लेकिन स्थिति थोड़ी बदलते ही सोने में मुनाफावसूली शुरू हो सकती है।

यही तस्वीर हाल के दिनों में देखने को मिल रही है। एक तरफ मध्य पूर्व का तनाव सोने को सपोर्ट देता है, तो दूसरी तरफ शांति की उम्मीद निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स की ओर वापस ले जा सकती है।

इसी वजह से सोने की कीमत में अचानक तेज उछाल और उसके बाद गिरावट दोनों देखने को मिल रही हैं।

पहले युद्ध के बीच 3,900 डॉलर तक गिरा था सोना

दिलचस्प बात यह है कि हाल के संघर्ष और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमत एक समय करीब 3,900 डॉलर प्रति औंस तक भी टूट गई थी।

इसके बाद धीरे-धीरे बाजार का सेंटीमेंट बदला और सोने ने रिकवरी शुरू की। पिछले सप्ताह की तेजी इसी रिकवरी का हिस्सा रही।

अब सोमवार की गिरावट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोना फिर से नीचे की ओर जाएगा या मौजूदा स्तरों के आसपास स्थिर होने के बाद एक नई तेजी की शुरुआत करेगा।

फेड की ब्याज दरों पर भी बाजार की नजर

सोने की कीमतों के लिए अमेरिका का फेडरल रिजर्व बेहद महत्वपूर्ण है। फेड की ब्याज दरों में बदलाव का असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने की मांग पर पड़ सकता है।

हालिया कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद बाजार में फेड की ओर से आक्रामक दर बढ़ोतरी की संभावना कम होने की धारणा मजबूत हुई है। इससे सोने को सपोर्ट मिला।

फेड की जून बैठक के मिनट्स में भी बाजार की ब्याज दर संबंधी उम्मीदों और मध्य पूर्व के घटनाक्रम के प्रभाव का उल्लेख किया गया था। उस समय बाजार प्रतिभागियों की उम्मीदों में भी बदलाव देखने को मिला था।

अब निवेशक आगे आने वाले अमेरिकी महंगाई, रोजगार और आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखेंगे। इन आंकड़ों से फेड की अगली नीति को लेकर बाजार को संकेत मिल सकते हैं।

घरेलू बाजार में पिछले सप्ताह जबरदस्त तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार में भी देखने को मिला था।

पिछले सप्ताह के पांच कारोबारी सत्रों में 24 कैरेट सोने की कीमत 7,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा बढ़ी, जबकि चांदी में करीब 13,000 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी दर्ज की गई।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के शुक्रवार शाम के बंद भाव के मुताबिक 24 कैरेट सोना करीब 1,49,621 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

इसी तरह 22 कैरेट सोने का भाव करीब 1,37,053 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना लगभग 1,12,216 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

चांदी की कीमत भी तेजी के साथ करीब 2,31,381 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई थी।

ये भाव सामान्यतः बेस रेट होते हैं और इनमें GST तथा स्थानीय ज्वेलरी मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते। इसलिए ग्राहक को दुकान पर मिलने वाला अंतिम भाव इससे अलग हो सकता है।

क्या अब सोना खरीदना चाहिए?

सोने की कीमतों में इतनी तेज हलचल के बीच निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभी खरीदारी की जाए या इंतजार किया जाए।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमत इस समय कई वैश्विक घटनाओं से प्रभावित हो रही है। इसलिए छोटी अवधि में कीमतों का अनुमान लगाना मुश्किल है।

अगर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है या अमेरिकी ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है तो सोने को फिर से सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में ठोस प्रगति होती है, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और निवेशक जोखिम वाले बाजारों की तरफ लौटते हैं तो सोने में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ सकता है।

चांदी में भी जारी रह सकती है उठापटक

सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमत भी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों की धारणा से प्रभावित हो रही है।

चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसकी कीमत पर आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक मांग, डॉलर और वैश्विक बाजार की धारणा का असर पड़ता है।

पिछले सप्ताह चांदी में घरेलू बाजार में करीब 13 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को बाजार की सामान्य उठापटक के तौर पर भी देखा जा सकता है।

आगे क्या होगा?

आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और मध्य पूर्व की स्थिति सोने-चांदी की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

अगर मध्य पूर्व में शांति को लेकर कोई ठोस समझौता सामने आता है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग कुछ कम हो सकती है। दूसरी तरफ तनाव बढ़ने पर निवेशक फिर से सोने की ओर भाग सकते हैं।

यानी फिलहाल सोने के बाजार में एक तरफ तेजी की वजहें मौजूद हैं तो दूसरी तरफ गिरावट का जोखिम भी बना हुआ है।

पिछले सप्ताह सोने ने शानदार वापसी करते हुए करीब सात सप्ताह का उच्च स्तर छुआ, लेकिन नए सप्ताह की शुरुआत में इसमें करीब 25 डॉलर प्रति औंस की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और मध्य पूर्व में शांति को लेकर अनिश्चितता फिलहाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है।

घरेलू बाजार में भी पिछले सप्ताह सोने और चांदी में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। लेकिन सोमवार की अंतरराष्ट्रीय कमजोरी के बाद भारतीय बाजार में भी दबाव देखने को मिल सकता है।

ऐसे में सोना खरीदने वाले ग्राहकों और निवेशकों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। क्या सोना फिर नई ऊंचाई की तरफ जाएगा या 7 हफ्ते के हाई के बाद अब बड़ी गिरावट का दौर शुरू होगा—इसका जवाब होर्मुज और वैश्विक बाजार की अगली चाल से मिलेगा।

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