Breaking News

रक्षाबंधन के दिन आसमान में होने वाला है बड़ा खेल! चंद्र ग्रहण से इन राशियों पर पड़ेगा असर, जानें किसकी बदलेगी किस्मत



नई दिल्ली: इस साल का रक्षाबंधन कई मायनों में बेहद खास रहने वाला है। 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को देशभर में भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इसी तारीख को साल का दूसरा और आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण के एक ही दिन पड़ने की खबर के बाद लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। क्या ग्रहण के कारण राखी बांधने का समय बदल जाएगा? क्या सूतक काल लगेगा? क्या पूजा-पाठ पर रोक रहेगी? और किन राशियों पर इसका असर पड़ सकता है?

इन सवालों को लेकर ज्योतिष और पंचांग में काफी चर्चा हो रही है। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में इस ग्रहण को लेकर सामान्य सूतक नियम लागू नहीं माने जा रहे हैं। इसका मतलब है कि रक्षाबंधन के दिन बहनें शुभ समय में अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है और इसकी स्थिति के आधार पर अलग-अलग राशियों के लिए कुछ प्रभाव बताए जाते हैं। आइए जानते हैं 28 अगस्त को होने वाले इस खास संयोग से जुड़ी पूरी जानकारी।

28 अगस्त को ही क्यों खास है रक्षाबंधन?

हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह तक रहने वाली है। इसी दिन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उसके सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य तथा लंबी उम्र की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।

लेकिन इस बार इसी दिन चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण त्योहार को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। सोशल मीडिया और धार्मिक चर्चाओं में ग्रहण तथा राखी के संयोग को लेकर तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं।

क्या भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

28 अगस्त 2026 को होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के दौरान भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। इसलिए देश में लोग इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे।

खगोलीय गणना के अनुसार ग्रहण भारतीय समय के मुताबिक सुबह के समय शुरू होगा और कुछ घंटों तक इसकी प्रक्रिया चलेगी। ग्रहण का प्रमुख चरण उस समय होगा जब भारत के कई हिस्सों में दिन का उजाला रहेगा।

यही वजह है कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस ग्रहण का प्रत्यक्ष दृश्य संभव नहीं होगा।

सबसे बड़ा सवाल—क्या लगेगा सूतक काल?

चंद्र ग्रहण का नाम सामने आते ही सबसे पहला सवाल सूतक काल को लेकर उठता है। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण से पहले सूतक काल का उल्लेख मिलता है। इस अवधि में कई धार्मिक कार्यों को लेकर नियम बताए गए हैं।

लेकिन यहां महत्वपूर्ण बात ग्रहण की दृश्यता है। जिन स्थानों से ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सामान्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाता।

इसलिए भारत में 28 अगस्त के इस चंद्र ग्रहण का सूतक मान्य नहीं माना जा रहा है। इसका मतलब यह है कि रक्षाबंधन के पारंपरिक कार्यक्रमों पर ग्रहण के कारण कोई सीधी रोक नहीं है।

यानी बहनें शुभ समय में भाई को राखी बांध सकती हैं और पूजा-पाठ भी कर सकती हैं।

राखी बांधने का शुभ समय

पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय महत्वपूर्ण बताया गया है। नई दिल्ली के आधार पर राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 9 बजकर 48 मिनट तक बताया जा रहा है।

हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखना बेहतर रहेगा।

रक्षाबंधन के दिन बहन पहले भाई को तिलक लगाती है। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती की जाती है और फिर भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है। अंत में भाई को मिठाई खिलाई जाती है।

ग्रहण के समय चंद्रमा किस राशि में रहेगा?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुंभ राशि में रहने की बात कही जा रही है। इस दौरान शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव भी बताया जा रहा है।

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक स्थिति और पारिवारिक संबंधों से जोड़कर देखा जाता है। वहीं ग्रहण के दौरान चंद्रमा की स्थिति को लेकर ज्योतिषीय विश्लेषणों में कुछ राशियों के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

हालांकि यह पूरी तरह ज्योतिषीय मान्यता है। वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कारण होने वाली सामान्य खगोलीय घटना है और इसका किसी व्यक्ति की राशि या भविष्य पर प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

किन राशियों पर पड़ सकता है असर?

ज्योतिषीय आकलन में चंद्र ग्रहण का असर अलग-अलग राशियों पर अलग-अलग बताया जाता है। कुछ राशियों के लिए यह समय आत्ममंथन और बदलाव का हो सकता है, जबकि कुछ को आर्थिक तथा पारिवारिक मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए यह ग्रहण करियर और कामकाज के क्षेत्र में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। नौकरी या कारोबार में किसी पुराने मुद्दे को दोबारा देखने की जरूरत पड़ सकती है। जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

आर्थिक मामलों में भी सोच-समझकर कदम उठाना बेहतर माना जा रहा है। किसी बड़ी खरीदारी या निवेश से पहले सभी पहलुओं की जांच करना जरूरी हो सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों में सावधानी की सलाह दी जा रही है। यदि किसी व्यक्ति के साथ लंबे समय से कोई गलतफहमी चल रही है तो उसे बातचीत के जरिए दूर करने की कोशिश की जा सकती है।

कारोबार करने वालों को साझेदारी से जुड़े फैसलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए संपत्ति, परिवार और आर्थिक मामलों को लेकर ग्रहण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी पुराने पारिवारिक विवाद या संपत्ति से जुड़े मामले में बदलाव की स्थिति बन सकती है।

इस दौरान भावनाओं में बहकर निर्णय लेने के बजाय शांत रहकर परिस्थितियों को समझना बेहतर माना जाता है।

क्या रक्षाबंधन पर ग्रहण का असर पड़ेगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है और इसका सीधा जवाब है—भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण रक्षाबंधन के धार्मिक अनुष्ठानों पर इसका सीधा असर नहीं माना जा रहा है।

बहनें अपने भाई को निर्धारित शुभ समय में राखी बांध सकती हैं। पूजा, आरती और अन्य पारंपरिक कार्यक्रम भी किए जा सकते हैं।

ग्रहण के कारण राखी बांधने को लेकर किसी तरह के डर या भ्रम में रहने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि धार्मिक परंपराओं का पालन करने वाले लोग अपने परिवार की मान्यताओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार नियमों का पालन कर सकते हैं।

रक्षाबंधन के दिन क्या करें?

रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पूजा करने की परंपरा है। राखी की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और रक्षा सूत्र रखा जाता है।

बहन भाई को तिलक लगाकर उसकी आरती करती है और फिर राखी बांधती है। भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसके सुख-दुख में साथ देने का संकल्प करता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अपनी क्षमता के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है।

क्या ग्रहण को लेकर डरने की जरूरत है?

चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है।

इसमें डरने जैसी कोई वैज्ञानिक वजह नहीं है। भारत में इस बार ग्रहण दिखाई भी नहीं देगा। इसलिए लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय विश्वसनीय जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।

ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को धार्मिक मान्यता के रूप में देखना चाहिए। किसी महत्वपूर्ण आर्थिक, स्वास्थ्य या व्यक्तिगत निर्णय को केवल राशिफल के आधार पर लेना उचित नहीं है।

रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का अनोखा संयोग

इस बार 28 अगस्त का दिन इसलिए चर्चा में है क्योंकि एक ही तारीख को रक्षाबंधन और साल का आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। यह संयोग लोगों के लिए खगोलीय और धार्मिक दोनों दृष्टि से दिलचस्प है।

भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक को लेकर भी राहत है। ऐसे में बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण के कारण कुछ राशियों के लिए सावधानी और कुछ के लिए बदलाव के संकेत बताए जा रहे हैं। लेकिन इन भविष्यवाणियों को सामान्य ज्योतिषीय आकलन के तौर पर ही देखना चाहिए।

आखिरकार रक्षाबंधन का सबसे बड़ा महत्व ग्रहों और नक्षत्रों से कहीं ज्यादा भाई-बहन के रिश्ते, प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी में है। इस दिन की सबसे बड़ी शुभता यही है कि परिवार साथ आए, रिश्तों में मिठास बढ़े और भाई-बहन एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ रहने का संकल्प लें।

कोई टिप्पणी नहीं